अभी बुख़ारों का मौसम चल रहा है।
कई बार बुख़ार आते ही लोग घबरा कर ख़ुद से तरह तरह के जाँच करा लेते हैं जिससे बेवजह पैसे की बर्बादी होती है।
ज़्यादातर मौसमी बुख़ार ख़ुद से ही 2-3 दिनों में ठीक हो जाते हैं।
क्या करें अगर बुख़ार आए
1) ज़्यादा से ज़्यादा आराम करें
2) बुख़ार आने पर पैरासिटमोल की गोली लें
3) ज़्यादा से ज़्यादा पेय पदार्थ लें
4) सुपाच्य भोजन लें।
ये एक ग़लत अवधारणा है की बुख़ार में चावल या अंडा नहीं ख़ाना चाहिये। आप बिलकुल ले सकते हैं।
5) पीने का पानी उबाल कर फिर ठंढा कर के पियें।
6) गरम पानी में नमक डाल कर gargle करें
7) ORS घोल का उपयोग करें
❌कब हो जायें सतर्क और तुरंत लें चिकित्सकीय परामर्श ?❌
1) अगर आप पहले से ही अन्य बीमारी से ग्रसित हैं
2) अगर दवाई से भी बुख़ार कम ना हो या 3 दिनों के बाद भी बुख़ार आये
3) बुख़ार के साथ साथ पेट दर्द, डायरिया जैसे लक्षण हों
4) शरीर पे लाल धब्बे जैसे निशान आ जाएँ।
ऐसी परिस्थिति में अपने नज़दीकी चिकित्सक से मिल कर दिखाएं।
The Hilltop
उत्तराखंडियत जिंदाबाद रहे बस यह ही मक?
19/02/2025
प्रिय कीर्तिनगर ब्लॉक उत्तराखंड के सम्मानित निवासियों,
आप सभी को सादर क्रान्तिकारी प्रणाम।
मैं यह पत्र आप सबसे एक गहरे भावनात्मक जुड़ाव के साथ लिख रहा हूँ। मैं कीर्तिनगर ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भाग लेने की इच्छा रखता हूँ, लेकिन मेरा यह निर्णय केवल मेरा नहीं, बल्कि आप सभी का होगा। मेरा कोई व्यक्तिगत स्वार्थ या पदलालसा नहीं है—मेरी एकमात्र इच्छा है कि हमारा कीर्तिनगर ब्लॉक विकास की नई ऊँचाइयों को छुए और पूरे भारत में एक मिसाल बने।
मैंने जीवन में जो भी अनुभव और ज्ञान अर्जित किया है, उसे अपने क्षेत्र की प्रगति में लगाना चाहता हूँ। मेरा सपना है कि—
✅ रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा हों।
✅ युवाओं के लिए स्टार्टअप और स्वरोजगार की योजनाएँ लागू हों।
✅ शिक्षा व्यवस्था को सशक्त किया जाए ताकि हर बच्चा आगे बढ़ सके।
✅ किसानों और महिलाओं को नए संसाधन और सहायता मिले।
✅ जल प्रबंधन और बुनियादी ढांचे में सुधार कर आधुनिक विकास किया जाए।
मेरा मानना है कि हमारा कीर्तिनगर केवल एक ब्लॉक नहीं, बल्कि एक मॉडल ब्लॉक बने—जहाँ बेरोजगारी न हो, हर घर में समृद्धि हो, और हर नागरिक को अपने भविष्य की चिंता न करनी पड़े।
लेकिन यह लड़ाई मैं अकेले नहीं लड़ सकता। यदि आप सभी का समर्थन और आशीर्वाद होगा, तो मैं पूरे समर्पण और निष्ठा के साथ इस चुनाव में भाग लूँगा और आपके विश्वास को कभी टूटने नहीं दूँगा। लेकिन यदि आपको लगता है कि मैं इस जिम्मेदारी के योग्य नहीं हूँ, तो मैं चुनाव में भाग लेने का कोई इरादा नहीं रखता।
इसलिए, मैं आप सभी से निवेदन करता हूँ कि अपनी राय दें, अपने विचार साझा करें, और मुझे बताएं कि क्या हम एक साथ मिलकर अपने कीर्तिनगर ब्लॉक को एक नई ऊँचाई तक ले जा सकते हैं। यह केवल एक चुनाव नहीं, बल्कि हमारे भविष्य, हमारे बच्चों, और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक आंदोलन होगा।
आपका भाई
धर्मेंद्र रावत
आगामी दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक उत्साही लोगों की जरूरत है! हमें 20 प्रतिभाशाली और उत्सुक युवा व्यक्तियों की तलाश है, जिन्हें राजनीति की बुनियादी समझ हो। स्थान: दिल्ली।
आपको मिलेगा:
आकर्षक मानदेय, जो आपके प्रयासों का सही मूल्यांकन करेगा।
प्रशस्ति पत्र (सर्टिफिकेट), जो आपके करियर को नई ऊंचाई देगा।
रहने और खाने की मुफ्त व्यवस्था (1 महीने तक), दिल्ली के दिल में।
अगर आप बाहर से आ रहे हैं, तो आने-जाने का पूरा खर्च हम उठाएंगे।
यह मौका किसके लिए है?
जो राजनीति में रुचि रखते हैं।
जो अपने विचार और रणनीति से चुनावों में योगदान देना चाहते हैं।
तो देर किस बात की?
इच्छुक व्यक्ति तुरंत संपर्क करें और अपना संक्षिप्त विवरण साझा करें। आपके पास एक अनोखा अवसर है—दिल्ली की राजनीति का हिस्सा बनने का और अपने कौशल को पहचान दिलाने का!
27/10/2024
Dear Anil Baluni ji ,
I hope this message finds you well. I wanted to let you know that I've sent an email regarding the development of our village's sports stadium and the employment opportunities for youth at the tourist destination.
I believe these initiatives will greatly benefit our community, and I look forward to your insights and support on this matter.
Thank you for your dedication to our region.
Best regards,
Dharmendra Rawat
Anil Baluni Anil Baluni
21/10/2024
केदारनाथ में हुई महिला के साथ दुराचार की कोशिश को लेकर मेरी बात दर्जन भर राष्टीय मीडया चैनल के लोगो से हुई है लेकिन सभी ने उस खबर को प्रकाशित करने में असमर्थता जताई है सोचिये इनके लिए महिला सम्मान जरुरी है या विज्ञापन को लेकर सरकार के द्वारा दिए हुए विज्ञापन सभी लोगो का लगभग एक ही चीज़ कहना है की ऊपर से आदेश है की कि कोई भी नकारात्मक छवि नहीं जनि चाहिए सरकार के प्रति लोगो के बीच जिससे की चुनाव जितने में की कोई कठिनाई उठानी पड़े
08/10/2024
क्या हमारा लोकतंत्र खतरे में है? 🗳️
पहली बार, मैं इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की विश्वसनीयता पर सवाल उठा रहा हूं। इस हरियाणा चुनाव में हमने जिनसे भी मुलाकात की—किसान, सैनिक, दुकानदार, व्यापारी, खिलाड़ी—सबने सत्ताधारी बीजेपी के खिलाफ खुलकर बात की। फिर भी बीजेपी ने 49 सीटें कैसे जीती?
यह कैसे संभव है? हम इस नतीजे को उन लोगों की भारी नाराज़गी से कैसे जोड़ें जिन्हें हमने सुना? मैं किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं हूँ, लेकिन यह हमारे मतदान प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हमारे लोकतंत्र की नींव जो भरोसे पर टिकी है, अब हिलती नजर आ रही है, और हमें जवाब चाहिए। क्या हम सच में इन नतीजों पर विश्वास कर सकते हैं? क्या हम EVM पर भरोसा कर सकते हैं? यह सिर्फ एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं है—यह भारत में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की रक्षा करने का सवाल है।
अगर हमने इन चिंताओं को दूर नहीं किया, तो हम अपने लोकतंत्र के भविष्य को खतरे में डाल रहे हैं। अब वक्त आ गया है कि हम पारदर्शिता, जवाबदेही और जवाब मांगें। 💬
आज का दिन हमारे लोकतंत्र के लिए काला दिन जैसा महसूस हो रहा है। आइए, सच के लिए अपनी आवाज़ उठाएं और सुधार की मांग करें, इससे पहले कि बहुत देर हो जाए।
08/10/2024
कांग्रेस की जलेबी उल्टा लटक जाये कहीं
08/10/2024
कांग्रेस जलेबी बांटना शुरू है
क्या आपको मेरी पोस्ट देख रही है ?
मुझे विश्वस्त सूत्रों से पता चला है की मेरी पोस्ट को मास रिपोर्टिंग करवाई जा रही है , भाई ऐसा तो हमने कुछ लिख नहीं दिया फिर ऐसा क्यों ?
27/09/2024
Here’s the translation in Hindi:
"उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि वह अगले विधानसभा सत्र में भूमि कानून पर एक बिल लाएंगे, जो स्वागत योग्य है। लेकिन मुख्यमंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि भूमि कानून में किन शर्तों को शामिल किया जाना चाहिए और किन्हें नहीं, इस पर जनता से सुझाव क्यों नहीं लिए गए। सरकार को अपने अधिकारियों के बजाय जनता के सुझावों पर भी विचार करना चाहिए। लोकतंत्र में कानून जनता से चर्चा के बाद लाए जाने चाहिए।
इसके अलावा, हमारा मुख्य मुद्दा अब भी मूलनिवास 1950 का कार्यान्वयन है। आपने इस मुद्दे पर आज की प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्टता क्यों नहीं दी? क्या आपकी मंशा में कोई खोट है, जो आप इस मुद्दे को नजरअंदाज करना चाहते हैं? आपको सतर्क रहना चाहिए—उत्तराखंड की जनता इस चाल को कामयाब नहीं होने देगी। हमें एक ठोस भूमि कानून और डोमिसाइल 1950 लागू करना ही होगा, चाहे इसके लिए कितनी भी बड़ी लड़ाई क्यों न लड़नी पड़े।
उत्तराखंड में देशी पोल्ट्री फार्मिंग का बिजनेस स्वरोजगार के लिए एक बढ़िया साधन हो सकता है जिसमे की महीने के 1 लाख रूपए तक आसानी से कमाया जा सकता है
अगर कोई 500 से भी शुरुवात करे और एग प्रोडक्शन महीने का 12 हजार भी हुआ तो ग्रॉस प्रॉफिट 1 लाख से भी ज्यादा है इसमें अगर आपके खर्चे 40 से 50 हज़ार भी हो तब भी आप एक हैंडसम अमाउंट घर लेकर महीने का जा सकते हो
अगर कोई भी युवा इसको करने का इच्छुक हो खासकर के श्रीनगर के आस पास से तो संपर्क कर सकता है उसको सरकारी योजनाओं के बारे में भी बताया जाएगा और कांट्रेक्ट फार्मिंग करवाई जायेगी मतलब आपको सिर्फ प्रोडक्शन करना है और प्रोडक्ट तैयार होते ही हमे दे देना है
इस तरह बिजनेस में सरकारी योजनाओं से लगभग 30 प्रतिशत की सब्सिडी भी सरकार देती है और लोन भी बैंक देता है आपका अनुदान सिर्फ 10 प्रतिशत होता है
बाकी कोई सवाल हो तो कमेंट बाक्स में पुछिए.
Note : इनबाक्स में बेवजह मेसेज ना करे उन्हे मैं देखता नही हूं हां अगर कोई कमेंट के बाद इनबॉक्स में आता है तो जवाब दिया जाता है
एक बार पहले लिखा था की जब भी किसी रेस्तरां में जाना होता है तो जैसे ही मेन्यू आता है सामने वाले को पास आन कर लेता हूं और बोलता हुं आप कीजिए ।
कुछ समय पहले दिल्ली के एरोसिटी में गया तो कुछ समझ नहीं आया तो चुपके से अपने कलीग को बोला यार स्वेता तुम कुछ राइस चिकन वाले पर ले चलो उधर करेंगे डिनर, तो उसने इतने में उसी रेस्त्रां में यह आर्डर किया बोले यह ट्राइ कीजिए
Coq au Vin ; Bouillabaisse & RisottoAn
आधे घंटे बाद यह सर्व हुआ और मैंने भी खूब सपोड़ लिया और बिल देने के टाइम बोला की अभी तुम पे कर दो मैं रिमबर्स करवा दूंगा .
अब सोचिए हम जैसे गांव के ठेठ देहाती के समझ में भला क्या ही आएगा की ऊपर क्या लिखा है और क्या ही आर्डर देने के बाद आयेगा कहीं हमनें मंगाया ठर्रा और उसने दे दी स्कॉच तो उससे पैसे भी ज्यादा लगेंगे और होगा भी कुछ नही
ठर्रे से याद आया गांव के एक मित्र को मैं बढ़िया वाली स्कॉच ले गया उसे प्यार से बुलाया और सत्कार किया तो पूरी बोतल गड़कने के बाद बोल रहा भाई क्या वाहियात पिला दी कुछ हो ही नही रहा इससे तो बेहतर वैसे ही ठीक था
फिर मैंने एक अन्य मित्र को फोन किया जो तब मार्केट में था तो पूछा की बता क्या मंगाई जाय तो वो बोला उसे बोल दे काखड़ ले आ ? मैं बोला यह क्या हुआ तो बोला वो समझ जायेगा तो बोलने के बाद वो एक लाल रंग को बोटल ले आया और देखते ही वो नाचने लगा और बोला यह हुई न बात .
फिर वो 2 घूंट अंदर जाते ही लेट गया और बोलने लगा धामी सरकार जिंदाबाद त्रिवेंद्र रावत जिंदाबाद हरीश रावत जिंदाबाद .
आज तक पता नहीं चला की आखिर ऐसा क्यों बोल रहा था क्योंकि अगली सुबह मैं लौट आया था और वो लेटा हुआ था .
आपको पता हो तो बताओ ..
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