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21/05/2022

कुण्डली के बारह भावों की महादशा ।

कुण्डली के प्रत्येक भाव की महादशा भिन्न भिन्न फल प्रदान करने वाली होती है. बारह भावों में स्थित शुभ और अशुभ प्रभाव जातक के जीवन को पूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं. प्रत्येक भाव अनुसार महादशा के प्रभावों का वर्णन इस प्रकार से जातक को प्रभावित कर सकता है.

(1) भाव, लग्नेश की दशा

शारीरिक सुख, स्वास्थ्य, धन, बल की वृद्धि करने वाली होती है. यदि लग्नेश अष्टमस्थ हो तो शारीरिक पीडा़ हो सकती है. यदि लग्नेश में शनि की अन्तर्दशा से धन की हानि एवं कुंटुंब से विरोध हो सकता है.

(2) भाव, द्वितीयेश की दशा

शारीरिक कष्ट एवं पीडा़ मिल सकती हैं पर यह धन संपदा में वृद्धि करने वाली भी होती है. द्वितीयेश पाप ग्रह से युक्त हो तो मानहानि, धनहानि, स्वजनों से विरोध को भी सहना पड़ सकता है. द्वितीयेश की महादशा में शनि, मंगल, सूर्य, राहु जैसे ग्रहों की अन्तर्दशा में धन की हानि हो सकती है. पाप ग्रह द्वितीयेश होकर द्वितीयेश होने पर अपनी दशा में धन के साथ समस्या भी देता है.

यदि द्वितीय भाव में शुभ ग्रह हों तथा धनेश भी शुभ ग्रह से युक्त हो तो द्वितीयेश की दशा में जातक अच्छी उन्नती प्राप्त करता है.

(3) भाव, तृतीयेश की महादशा

तृतीयेश शुभ ग्रहों से युक्त हो अथवा शुभ ग्रह के साथ स्थित हो तो तृतीयेश की दशा एवं अन्तर्दशा में अत्साह, साहस एवं पराक्रम की वृद्धि होती है. भाई बहनों का प्रेम प्राप्त होता है.

तृतीयेश यदि पाप ग्रहों से युक्त हो तो पाप ग्रह की अन्तर्दशा में भाई बंधुओं से मतभेद उत्पन्न हो सकता है. पापी तृतीयेश होने पर अशुभ प्रभाव अधिक देखने को मिलते हैं. यह शत्रुओं की वृद्धि करती है धन नाश, कामकाज में असफलताएं भी मिलती है.

(4) भाव, चतुर्थेश की महादशा

चतुर्थेश यदि पाप ग्रहों से युक्त हो तो पाप ग्रहों की अन्तर्दशा आने पर भू-संपदा की हानि, मानसिक कलेश, वाद विवाद एवं माता के सुख में कमी आती है.
चतुर्थेश यदि शुभ ग्रहों से युक्त हो तो इसकी दशा में भूमि, भवन का सुख प्राप्त होता है, वाहन का सुख एवं माता का सुख मिलता है.

(5) भाव, पंचमेश की महादशा

पंचमेश में शुभ ग्रह हों तो इसकी दशा में धन का लाभ होता हे संतान का सुख एवं उससे सम्मान की प्राप्ति होती है. राजसम्मान तथा लोगों से स्नेह प्राप्त होता है. पंचमेश की दशा धन धान्य, विद्या सुबुद्धि प्रदान करती है. व्यक्ति के मान सम्मान में वृद्धि होती है. परंतु पंचमेश माता के लिए मारकेश होने से माता को कष्ट, पीडा़ भी प्राप्त हो सकती है.
पंचमेश की महादशा में पाप ग्रह की अन्तर्दशा होने पर भय, दुख, संतान पर कष्ट जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं.

(6) भाव, षष्ठेश की महादशा

षष्ठेश की महादशा में रोग, शत्रु का भय लग सकता हे. संतान को कष्ट हो सकता है. षष्ठेश की दशा में पाप ग्रहों की अन्तर्दशा नौकर में कष्ट हेल्थ सम्बन्धी समस्याएँ कारावास, मुकदमा भी झेलना पड़ सकता है
अगर षष्ठेश शुभ ग्रहों की द्रष्टि में हो तो समस्याएँ कम हो जायेंगी .

(7) भाव, सप्तमेश की महादशा

सप्तमेश की दशा में शोक, शारीरिक कष्ट मिल सकता है. सप्तमेश पाप ग्रह हो तो इसकी दशा में स्त्री को कष्ट प्राप्त हो सकता है. वैवाहिक जीवन में तनाव एवं अलगाव भी उत्पन्न हो सकता है. सप्तमेश में पाप ग्रह की अन्तर्दशा होने पर जातक को स्त्री सुख से वंचित रहना पड़ सकता है.

किंतु शुभ ग्रहों से युक्त होने पर यह दांपत्य सुख प्रदान करने में सहायक होता है तथा सांसारिक सुख प्रदान करने में सक्षम होता है.पार्टनरशिप ओर व्यापार में तरक्की होगी

(8) भाव, अष्टमेश की महादशा

अष्टमेश की दशा में पाप ग्रह की अन्तर्दशा शत्रु से भय, धन का नुकसान करा सकती है. इसकी पाप ग्रहों की दशा स्त्री, मित्रों, भाई बंधुओं के सुख में कमी आती है. अष्टमेश शुभ ग्रहों की द्रष्टि में हो तो इसकि अच्छी दशा दिर्घायु प्रदान करने में भी सहायक होती है.

(9) भाव, नवमेश की महादशा

नवमेश की दशा में धार्मिक प्रवृत्ति देखी जा सकती है. जातक दान., पुण्य, तीर्थ यात्राओं करने की इच्छा रखने वाला होता है. शुभ ग्रहों से युक्त होने पर बुद्धि, प्रतिष्ठा में उन्नती देने वाला होता है.
नवमेश की दशा में पाप ग्रह का अन्तर्दशा होने पर पिता को कष्ट हो सकता है, धार्मिकता का पतन हो सकता है तथा धन का नाश एवं भाग्य साथ नहीँ देता तरक्की रुक जाती है

(10) भाव, दशमेश की महादशा

दशमेश की दशा में धन और मान सम्मान की प्राप्ति होती है. राज सम्मान की प्राप्ति हो सकती है.
दशमेश पाप या नीच ग्रहों से युक्त होने पर प्रियजनों से मतभेद देता है, अपमान, कार्य में रूकावट देता है, अवनती और पदच्युति प्रदान करता है. यदि कोई ग्रह दशम में उच्च या शुभ का हो तो उक्त ग्रह की दशा में भाग्योदय, मान सम्मान की प्राप्ति होती है.

(11) भाव, एकादशेश की महादशा

एकादशेश भाव लाभ का स्थान कहलाता है अत: इसकी दशा में लाभ प्राप्ति की संभावना देखी जा सकती है. जातक व्यापार एवं व्यवसाय से अच्छा लाभ पाता है. उसे सम्मान एवं यश की प्राप्ति होती है.

यदि लाभेश पाप ग्रहों से युक्त हो तो इसकी दशा रोग प्रदान कर सकती है. इसमें पाप ग्रहों की अन्तर्दशा हानि, दुख प्रदान कर सकती है तथा व्यर्थ के खर्चों को बढा़ सकती है.

(12) भाव, द्वादशेश की महादशा

द्वादशेश भाव व्यय भाव कहलाता है. व्ययेश की दशा में आर्थिक कष्ट, रोग, चिंता प्रदान करने वाला हो सकता है. द्वादशेश की दशा में शनि, सूर्य अथवा मंगल की अन्तर्दशा स्त्री एवं संतान से मतभेद प्रदान कर सकती है.

द्वादशेश की महादशा में राहु की अन्तर्दशा व्यापार में हानि ,स्वास्थ सम्बंधी समस्या रोग का भय जेल कोर्ट केस आदि प्रदान कर सकती है.
पर इसपर शुभ ग्रहों की द्रष्टि राहत भी प्रदान करती है

विशेष
समस्याकारी दशा होने पर दशा मालिक सम्बन्धी चीजों का दान उनके पाठ करना मंत्र जाप लाभ देंगे साथ में सभी से अपना व्यवहार अच्छा रखे कोई भी काम सोच विचार कर बडो की सहमति से करें समस्या कम होगी

कोई भी रत्न कुण्डली विश्लेषण करवा कर ही पहने।

26/04/2022
12/04/2022

जिन्दगी जब कठिन समय में नाच नचाती हैं तो ढोलक बजाने वाले अपने ही जान पहचान वाले होते हैं

30/03/2022



सारे जग में उसकी तूती बोले
#सूर्य उसका उच्च का होगा।
सत्ता के मद में वो चूर दिखे
सूर्य को देखो पीड़ित होगा।

शांत चितवन सौम्य सरल,
#चंद्र शीतलता देता होगा।
अधीर हो जाय पल में जो,
चंद्र को देखो पीड़ित होगा।

शक्ति, शौर्य, अदम्य साहस
#मंगल बड़ा ही हर्षित होगा।
बिगड़े काम सब क्रोध में,
शुभ मंगल से वंचित होगा।

तार्किक, प्रज्ञा, संवेदनशील, करो शोध
#बुध बेहतर होगा।
वाचाल,बातूनी जैसे सब जाने,
मामला बुध का गड़बड़ होगा।

धैर्य,विवेकशील,धर्मपरायण होगा। गौर करो
#गुरु उच्च का होगा।
कल की सोचे नियति पे टाले,
उसका गुरु नीच का होगा।

ऐश्वर्य, सुखी,संपन्न, दयालु
#शुक्र उसका शुभ होगा।
दौलत के पीछे बस भागे,
अशुभ शुक्र का मारा होगा।

धैर्य, धीर, न्यायप्रिय जब,
#शनि बड़ा हितकारी होगा।
टांग खिंचे ,व्यर्थ ही टाले,
शनि शायद अहितकारी होगा।

23/03/2022

🙏🏼😊 *छोड़ दीजिए* 😊🙏🏼

एक दो बार समझाने से यदि कोई नही समझ रहा है तो सामने वाले को समझाना,
🙏🏼*छोड़ दीजिए*🙏🏼
बच्चे बड़े होने पर वो ख़ुद के निर्णय लेने लगे तो उनके पीछे लगना,
🙏🏼*छोड़ दीजिए।*🙏🏼
गिने चुने लोगों से अपने विचार मिलते हैं, यदि एक दो से नहीं जुड़ते तो उन्हें,
🙏🏼*छोड़ दीजिए।*🙏🏼
एक उम्र के बाद कोई आपको न पूछे या कोई पीठ पीछे आपके बारे में गलत कह रहा है तो दिल पर लेना,
🙏🏼*छोड़ दीजिए।*🙏🏼
अपने हाथ कुछ नहीं, ये अनुभव आने पर भविष्य की चिंता करना,
🙏🏼*छोड़ दीजिए।*🙏🏼
यदि इच्छा और क्षमता में बहुत फर्क पड़ रहा है तो खुद से अपेक्षा करना,
🙏🏼*छोड़ दीजिए।*🙏🏼
हर किसी का पद, कद,
मद, सब अलग है इसलिए तुलना करना,
🙏🏼*छोड़ दीजिए।*🙏🏼
बढ़ती उम्र में जीवन का आनंद लीजिए, रोज जमा खर्च की चिंता करना,
🙏🏼*छोड़ दीजिए।*🙏🏼
उम्मीदें होंगी तो सदमे भी बहुत होंगे, यदि सुकून से रहना है तो उम्मीदें करना,
*🙏 छोड दीजिए। 🙏*
मैसेज अच्छा लगे तो ठीक, न लगे तो फारवर्ड करने का विचार,
*🙏*छोड़ दीजिये।*🙏

23/03/2022

कौन सा ग्रह किस रोग का कारक

1. सूर्य : पित्त, वर्ण, जलन, उदर, सम्बन्धी रोग, रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी, न्यूरोलॉजी से सम्बन्धी रोग, नेत्र रोग, ह्रदय रोग, अस्थियों से सम्बन्धी रोग, कुष्ठ रोग, सिर के रोग, ज्वर, मूर्च्छा, रक्तस्त्राव, मिर्गी इत्यादि.

2. चन्द्रमा : ह्रदय एवं फेफड़े सम्बन्धी रोग, बायें नेत्र में विकार, अनिद्रा, अस्थमा, डायरिया, रक्ताल्पता, रक्तविकार, जल की अधिकता या कमी से संबंधित रोग, उल्टी किडनी संबंधित रोग, मधुमेह, ड्रॉप्सी, अपेन्डिक्स, कफ रोग,मूत्रविकार, मुख सम्बन्धी रोग, नासिका संबंधी रोग, पीलिया, मानसिक रोग इत्यादि.

3. मंगल : गर्मी के रोग, विषजनित रोग, व्रण, कुष्ठ, खुजली, रक्त सम्बन्धी रोग, गर्दन एवं कण्ठ से सम्बन्धित रोग, रक्तचाप, मूत्र सम्बन्धी रोग, ट्यूमर, कैंसर, पाइल्स, अल्सर, दस्त, दुर्घटना में रक्तस्त्राव, कटना, फोड़े-फुन्सी, ज्वर, अग्निदाह, चोट इत्यादि.

4. बुध : छाती से सम्बन्धित रोग, नसों से सम्बन्धित रोग, नाक से सम्बन्धित रोग, ज्वर, विषमय, खुजली, अस्थिभंग, टायफाइड, पागलपन, लकवा, मिर्गी, अल्सर, अजीर्ण, मुख के रोग, चर्मरोग, हिस्टीरिया, चक्कर आना, निमोनिया, विषम ज्वर, पीलिया, वाणी दोष, कण्ठ रोग, स्नायु रोग, इत्यादि.

5. गुरु : लीवर, किडनी, तिल्ली आदि से सम्बन्धित रोग, कर्ण सम्बन्धी रोग, मधुमेह, पीलिया, याददाश्त में कमी, जीभ एवं पिण्डलियों से सम्बन्धित रोग, मज्जा दोष, यकृत पीलिया, स्थूलता, दंत रोग, मस्तिष्क विकार इत्यादि.

6. शुक्र : दृष्टि सम्बन्धित रोग, जननेन्द्रिय सम्बन्धित रोग, मूत्र सम्बन्धित एवं गुप्त रोग, मिर्गी, अपच, गले के रोग, नपुंसकता, अन्त:स्त्रावी ग्रन्थियों से संबंधित रोग, मादक द्रव्यों के सेवन से उत्पन्न रोग, पीलिया रोग इत्यादि.

7. शनि : शारीरिक कमजोरी, दर्द, पेट दर्द, घुटनों या पैरों में होने वाला दर्द, दांतों अथवा त्वचा सम्बन्धित रोग, अस्थिभ्रंश, मांसपेशियों से सम्बन्धित रोग, लकवा, बहरापन, खांसी, दमा, अपच, स्नायुविकार इत्यादि.

8. राहु : मस्तिष्क सम्बन्धी विकार, यकृत सम्बन्धी विकार, निर्बलता, चेचक, पेट में कीड़े, ऊंचाई से गिरना, पागलपन, तेज दर्द, विषजनित परेशानियां, किसी प्रकार का रियेक्शन, पशुओं या जानवरों से शारीरिक कष्ट, कुष्ठ रोग, कैंसर इत्यादि.

9. केतु : वातजनित बीमारियां, रक्तदोष, चर्म रोग, श्रमशक्ति की कमी, सुस्ती, अर्कमण्यता, शरीर में चोट, घाव, एलर्जी, आकस्मिक रोग या परेशानी, कुत्ते का काटना इत्यादि.

कब होगी रोग मुक्ति

किसी भी रोग से मुक्ति रोगकारक ग्रह की दशा अर्न्तदशा की समाप्ति के पश्चात ही प्राप्त होती है. इसके अतिरिक्त यदि कुंडली में लग्नेश की दशा अर्न्तदशा प्रारम्भ हो जाए, योगकारक ग्रह की दशा अर्न्तदशा-प्रत्यर्न्तदशा प्रारम्भ हो जाए, तो रोग से छुटकारा प्राप्त होने की स्थिति बनती हैं. शनि यदि रोग का कारक बनता हो, तो इतनी आसानी से मुक्ति नही मिलती है,क्योंकि शनि किसी भी रोग से जातक को लम्बे समय तक पीड़ित रखता है और राहु जब किसी रोग का जनक होता है, तो बहुत समय तक उस रोग की जांच नही हो पाती है. डॉक्टर यह समझ ही नहीं पाता है कि जातक को बीमारी क्या है और ऐसे में रोग अपेक्षाकृत अधिक अवधि तक चलता है

22/03/2022

*नाव की तली में जामुन की लकड़ी क्यों लगाते हैं, जबकि वह तो बहुत कमजोर होती है* -.

क्या आप जानते हैं भारत की विभिन्न नदियों में यात्रियों को एक किनारे से दूसरे किनारे पर ले जाने वाली नाव की तली में जामुन की लकड़ी लगाई जाती है। सवाल यह है कि जो जामुन पेट के रोगियों के लिए एक घरेलू आयुर्वेदिक औषधि है, जिसकी लकड़ी से दांतो को कीटाणु रहित और मजबूत बनाने वाली दातुन बनती है, उसी जामुन की लकड़ी को नाव की निचली सतह पर क्यों लगाया जाता है। वह भी तब जबकि जामुन की लकड़ी बहुत कमजोर होती है। मोटी से मोटी लकड़ी को हाथ से तोड़ा जा सकता है।

*नदियों का पानी पीने योग्य कैसे बना रहता है* -.

बहुत कम लोग जानते हैं कि जामुन की लकड़ी एक चमत्कारी लकड़ी है। यह पानी के अंदर रहते हुए सड़कर खराब नहीं होती बल्कि इसमें एक चमत्कारी गुण होता है। यदि इसे पानी में डूबा दिया जाए तो यह पानी का शुद्धिकरण करती है और पानी में कचरा जमा होने से रोकती है। कितना आश्चर्यजनक है कि हम जिन पूर्वजों को अनपढ़ मानते हैं उन्होंने नदियों को स्वच्छ बनाए रखने और नाव को मजबूत बनाए रखने का कितना असरकारी समाधान निकाला।

*बावड़ी की तलहटी में 700 साल बाद भी जामुन की लकड़ी खराब नहीं हुई* -.

जामुन की लकड़ी के चमत्कारी परिणामों का प्रमाण हाल ही में मिला है। देश की राजधानी दिल्ली में स्थित निजामुद्दीन की बावड़ी की जब सफाई की गई तो उसकी तलहटी में जामुन की लकड़ी का एक स्ट्रक्चर मिला है। भारतीय पुरातत्व विभाग के प्रमुख श्री केएन श्रीवास्तव ने बताया कि जामुन की लकड़ी के स्ट्रक्चर के ऊपर पूरी बावड़ी बनाई गई थी। शायद इसीलिए 700 साल बाद तक इस बावड़ी का पानी मीठा है और किसी भी प्रकार के कचरे और गंदगी के कारण बावड़ी के वाटर सोर्स बंद नहीं हुए। जबकि 700 साल तक इसकी किसी ने सफाई नहीं की थी।

*आपके घर में जामुन की लकड़ी का उपयोग* -.

यदि आप अपनी छत पर पानी की टंकी में जामुन की लकड़ी डाल देते हैं तो आप के पानी में कभी काई नहीं जमेगी। 700 साल तक पानी का शुद्धिकरण होता रहेगा। आपके पानी में एक्स्ट्रा मिनरल्स मिलेंगे और उसका टीडीएस बैलेंस रहेगा। यानी कि जामुन हमारे खून को साफ करने के साथ-साथ नदी के पानी को भी साफ करता है और प्रकृति को भी साफ रखता है।

कृपया हमेशा याद रखिए कि दुनियाभर के तमाम राजे रजवाड़े और वर्तमान में अरबपति रईस जो अपने स्वास्थ्य के प्रति चिंता करते हैं। जामुन की लकड़ी के बने गिलास में पानी पीते हैं।

19/03/2022

राहु के उपाय.....🐍🐍🐍🐍

1. पहले भाव में :
गले में चान्दी धारण करें।

2. दूसरे भाव में :
केसर का तिलक लगाए।

3. तीसरे भाव में :
हाथ में चान्दी का कड़ा पहने।

4. चौथे भाव में :
शनिवार के दिन थोडा सा दूध जल प्रवाह करें।

5. पांचवे भाव मे :
शनिवार के दिन शिक्षको में बेसन की मिठाई बान्टे।

6. छठे भाव में :
शनिवार के दिन किसी सूखे कुये में एक चमच दूध डाले।

7. सातवे भाव में :
घर की दहलीज़ में चान्दी का टुकडा दबाये।

8. आठवे भाव में :
शमशान के पास पीपल या केले का पेड लगाये।

9.
नवम भाव में :
शनिवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाए।

10.
दसम भाव में :
घर में चान्दी का हाथी रखे।

11.
ग्यारवे भाव में :
जेब में चान्दी का टुकडा रखे।

12.
बारवे भाव में :
घर की छत पर पक्षीयो के लिये जल और उनके भोजन की व्यवस्था करें।

16/03/2022

"GOOD PERFORMERS"

"Good RAHU" - Front liner smart performer, Have good ex*****on skills.

"Good KETU" – Backend performer, Have hard work skills.

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110077

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