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21/07/2021
लॉकडाउन में आमदनी का जरिया हो गया हो बंद तो घबराएं नहीं, इन 5 तरीकों से मिल सकती है मानसिक राहतकोरोना वायरस महामारी और ल...
10/05/2021

लॉकडाउन में आमदनी का जरिया हो गया हो बंद तो घबराएं नहीं, इन 5 तरीकों से मिल सकती है मानसिक राहत

कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन ने कई तरह से लोगों पर असर डाला है। ज्यादातर कारोबारियों को इस दौरान काफी नुकसान झेलना पड़ा है, वहीं प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों की नौकरियां भी जा रही हैं। इससे लोग भारी चिंता और तनाव में रह रहे हैं। इसका असर फैमिली लाइफ पर बहुत खराब पड़ रहा है। चिंतित और परेशान लोग चिड़चिड़े हो जाते हैं। छोटी-छोटी बातों पर भी उन्हें तेज गुस्सा आता है। इससे घरेलू लड़ाई-झगड़े बढ़ रहे हैं। तनावपूर्ण माहौल का बच्चों पर भी बहुत बुरा असर पड़ता है। कुछ लोग तो रोजगार बंद होने या नौकरी जाने की आशंका के चलते हताशा में चले जाते हैं। इससे नुकसान ज्यादा होता है। जानें ऐसी स्थिति से बचने के कुछ टिप्स।

1. ज्यादा चिंता नहीं करें
जैसी स्थितियां बन रही हैं, उनमें चिंता होना स्वाभाविक है। जब रोजगार बंद हो जाता है और आमदनी नहीं के बराबर रह जाती है, तो कोई भी चिंतित होगा। इसी तरह, नौकरी जाने का खतरा हो तो चिंता और घबराहट होगी ही, लेकिन यह सोचना चाहिए कि ज्यादा चिंता करने से किसी तरह का कोई फायदा होने वाला नहीं है। इससे आत्मविश्वास कम होता है। इसलिए चिंता करने के साथ ही समस्या के समाधान के बारे में सोचना ज्यादा ठीक होगा।

2. तनाव का माहौल नहीं बनने दें
जब आर्थिक परेशानियां बढ़ती हैं तो घर में तनाव का माहौल बनने लगता है। ऐसी हालत में परिवार में पति-पत्नी के बीच लड़ाई-झगड़े होने की संभावना बढ़ जाती है। रुपए-पैसे की कमी की समस्या का समाधान कैसे किया जाए, इस पर मिल-बैठ कर सोचें। तनाव में रहने और एक-दूसरे को जली-कटी बातें सुनाने से परेशानी बढ़ेगी ही, कोई समाधान नहीं निकलेगा। इसलिए कोशिश यह करें कि परिवार में तनाव का माहौल नहीं बनने पाए।

गुड फ्राइडे के अवसर पर प्रभु यीशु मसीह को नमन।प्रभु यीशु मसीह ने अपने जीवन और बलिदान के माध्यम से सम्पूर्ण मानवता को प्र...
02/04/2021

गुड फ्राइडे के अवसर पर प्रभु यीशु मसीह को नमन।
प्रभु यीशु मसीह ने अपने जीवन और बलिदान के माध्यम से सम्पूर्ण मानवता को प्रेम, दया और करूणा का संदेश दिया था।
कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुये सभी लोग यथासंभव घर के अंदर ही प्रार्थना करें।

होली के पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। होली का पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होली के विविध रंग अने...
29/03/2021

होली के पर्व पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं। होली का पावन पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। होली के विविध रंग अनेकता में एकता की हमारी संस्कृति के परिचायक हैं।
प्रदेशवासी समरसता, सदभाव और भाईचारे के साथ आगे बढ़ते हुए प्रदेश की उन्नति में भागीदार बनें। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए मेरी अपील है कि सभी भीड़-भाड़ से बचें और राज्य सरकार द्वारा जारी कोविड गाइडलाइन की पालना करते हुए होली का त्यौहार मनाएं।

शब-ए-बारात मुबारक
28/03/2021

शब-ए-बारात मुबारक

आज शहीद दिवस है। दरअसल, 90 साल पहले यानी 23 मार्च 1931 को आज ही के दिन भगत सिंह और उनके साथी राजगुरु और सुखदेव को फांसी ...
23/03/2021

आज शहीद दिवस है। दरअसल, 90 साल पहले यानी 23 मार्च 1931 को आज ही के दिन भगत सिंह और उनके साथी राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी। उनकी शहादत को देश हमेशा नमन करता है।

23 मार्च 1931 को क्रांतिकारी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी। भारतवर्ष को आजाद कराने के लिए इन वीर सपूतों में हंसते-हंसते फांसी का फंदा चूम लिया था, इसलिए इस दिन को शहीद दिवस कहा जाता है। भगत सिंह और उनके साथी राजगुरु और सुखदेव को फांसी दिया जाना हमारे देश इतिहास की बड़ी एवं महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है।

भारत के इन महान सपूतों को ब्रिटिश हुकूमत ने लाहौर जेल में फांसी पर लटकाया था। इन स्वंतत्रता सेनानियों के बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। अंग्रेजों ने इन तीनों को तय तारीख से पहले ही फांसी दे दी थी। तीनों को 24 मार्च को फांसी दी जानी था। मगर देश में जनाक्रोश को देखते हुए गुप-चुप तरीके से एक दिन पहले ही फांसी पर लटका दिया गया। पूरी फांसी की प्रक्रिया को गुप्त रखा गया था।

लाला लाजपत राय की मौत का बदला लिया

27 सितंबर 1907 को अविभाजित पंजाब के लायलपुर (अब पाकिस्तान) में जन्मे भगत सिंह बहुत छोटी उम्र से ही आजादी की लड़ाई में शामिल हो गए और उनकी लोकप्रियता से भयभीत ब्रिटिश हुक्मरान ने 23 मार्च 1931 को 23 बरस के भगत को फांसी पर लटका दिया। उनका अंतिम संस्कार सतलज नदी के तट पर किया गया था। 1928 में ब्रिटिश पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या करने के लिए उन्हें फांसी की सजा दी गई थी। उन्होंने गलती से उसे ब्रिटिश पुलिस अधीक्षक जेम्स स्कॉट समझ लिया था। स्कॉट ने उस लाठीचार्ज का आदेश दिया था, जिसमें लाला लाजपत राय की मृत्यु हो गई थी।

जेल में लिखे क्रान्तिकारी विचार

भगत सिंग अपने साहसी कारनामों के कारण युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए। उन्होंने 8 अप्रैल 1929 को अपने साथियों के साथ इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते हुए केंद्रीय विधानसभा में बम फेंके। सेंट्रल असेंबली में बम विस्फोट करके उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ खुले विद्रोह को बुलंदी प्रदान की। इन्होंने असेंबली में बम फेंककर भी भागने से मना कर दिया। भगत सिंह करीब 2 साल जेल में रहे। इस दौरान वे लेख लिखकर अपने क्रान्तिकारी विचार व्यक्त करते रहते थे। जेल में रहते हुए भी उनका अध्ययन लगातार जारी रहा। फांसी पर जाने से पहले वे लेनिन की जीवनी पढ़ र

आज  डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट मधुबनी के साथ DICT के डायरेक्टर डॉ एम.के. गौतम
21/03/2021

आज डिस्ट्रिक्ट कमांडेंट मधुबनी के साथ DICT के डायरेक्टर डॉ एम.के. गौतम

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