Dr Pramod Kumar Sharma

Dr Pramod Kumar Sharma Associate professor of Sanskrit
Jawaharlal Nehru University, New Delhi

16/11/2023

असमाख्येय अपरिमित भगवन्! नारायण देवेश तुम्हारी
अद्भुत स्निग्धप्रेम महिमा को नहीं समझपायी मति हारी।
शय्यासन क्रीडा विहार में जो उपहास किया अति भारी
उसे क्षमा कर दो मेरे प्रभु जगन्निवास ! मैं शरण तुम्हारी ।।३५।।

16/11/2023

प्रश्नों के उत्तर-प्रत्युत्तर प्रति-प्रश्नों के घन - चक्कर से ,
सोचविचार निगूहन-ऊहन चिन्तन-मनन निपट टक्कर से।
सर्व-भूत-हृदय - योगेश्वर के मन ने तब ही कट डाला,
वसुदेवपुत्र उन सर्वेश्वर का विना विलम्ब हृदय मथ डाला।।८।।

अति आश्चर्यमयी स्थिति में मूर्तिमान् स्वरूप उन दौनोंभक्ति और ज्ञान को केशव हृदय पटल में स्वयं देखकर ।जगन्नियन्त्रक जगदीश...
01/07/2023

अति आश्चर्यमयी स्थिति में मूर्तिमान् स्वरूप उन दौनों
भक्ति और ज्ञान को केशव हृदय पटल में स्वयं देखकर ।
जगन्नियन्त्रक जगदीश्वर उस योगेश्वर भगवान कृष्ण का
द्विधा विभक्त हुआ अतिकोमलहृदय उससमय जानबूझकर ।।

उद्धव और गोपियों का शास्त्रार्थ  महाभीषण  होने से,युक्तिपूर्ण  दौनों  के  पक्षों  और  विपक्षों को सुनने से।भक्ति और ज्ञा...
30/06/2023

उद्धव और गोपियों का शास्त्रार्थ महाभीषण होने से,
युक्तिपूर्ण दौनों के पक्षों और विपक्षों को सुनने से।
भक्ति और ज्ञान का तब सब अद्भुत रूप प्रकट होने से,
कृष्ण हृदय में हुआ समागम एक जगह स्थित होने से।।६।।

माधव  के प्रति  उन  गोपिन  के नेह  भरे  सौष्ठव  को अति विशुद्ध अमृत समान उस भक्ति भाव वैभव को।वेदाङ्गो  से  जनित  ज्ञान ...
30/06/2023

माधव के प्रति उन गोपिन के नेह भरे सौष्ठव को
अति विशुद्ध अमृत समान उस भक्ति भाव वैभव को।
वेदाङ्गो से जनित ज्ञान के सागर रूप स्वजन को
अपनी रुचि से सुना कृष्ण ने देकर अपने मन को।।५।।

मथुरा से प्रेषित  कुछ  कहते  हुए  वहां  गौरव को ,उस  निकुञ्ज  के  बाहर  बैठे  मित्रवर्य उद्धव को।राधा एवं सखियों को  अवल...
29/06/2023

मथुरा से प्रेषित कुछ कहते हुए वहां गौरव को ,
उस निकुञ्ज के बाहर बैठे मित्रवर्य उद्धव को।
राधा एवं सखियों को अवलोकित कर माधव वो
चकित हुए मन ही मन में सब दृश्य वहां देखा जो।।४।।

कमल  तुल्य  दौनौं  आंखों  के  पलक  छुुपाकर,आत्मस्थ उसी  वृन्दावन को निज मन में लाकर ।रमणीय कुञ्ज उस रासस्थल तक पहुंच बना...
28/06/2023

कमल तुल्य दौनौं आंखों के पलक छुुपाकर,
आत्मस्थ उसी वृन्दावन को निज मन में लाकर ।
रमणीय कुञ्ज उस रासस्थल तक पहुंच बनाकर,
देखा माधव ने दिव्य दृष्टि से ध्यान लगा कर ।।३।।

इसी  दिव्य  मथुरा  नगरी  में  रम्य  हर्म्य  एकान्त  कक्ष  में ,करते हुए स्मरण निज व्रज के गोकुल का सुविशाल वक्ष में।राधा...
28/06/2023

इसी दिव्य मथुरा नगरी में रम्य हर्म्य एकान्त कक्ष में ,
करते हुए स्मरण निज व्रज के गोकुल का सुविशाल वक्ष में।
राधा प्रिय श्रीकृृष्णचन्द्र गोपाल सखा व्रज के परमेश्वर ,
मन्त्रमुग्ध हो सिंहासन पर शोह रहे हैं प्रिय मथुरेश्वर।।२।।

भारत की आत्मा व्रज प्रदेश उत्तर दिग भू पर राजमान,इसकी राजधानी ही मथुरा कालिन्दी तट पर विद्यमान।यह जन्मभूमि  है  केशव  की...
27/06/2023

भारत की आत्मा व्रज प्रदेश उत्तर दिग भू पर राजमान,
इसकी राजधानी ही मथुरा कालिन्दी तट पर विद्यमान।
यह जन्मभूमि है केशव की इसमें हैं माधव वतर्मान,
सुन्दर प्रासादों भवनों से निर्मित नगरी शोभायमान।।१।।

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