17/07/2023
Baccho me char molik gun
दोस्तो मेरा नाम राजीव है। Hum इस पेज के प?
17/07/2023
Baccho me char molik gun
एक वरिष्ठ सदस्य द्वारा उठाए गए सवाल का अनिता शाह जी द्वारा दिया गया उत्तर
सवाल ..... मध्यस्थ दर्शन /जीवन विद्या में कहुं की कोई गलती मुझे आज तक नहीं दिखी है पर एक भी आदमी उस अनुरुप कार्य व्यवहार करता हुआ मुझे अभी तक नहीं दिखा है। मैने कई बार ये बात उठाई है कि इस पर चिंतन /शोध होनी चाहिए पर उसके ठेकेदारों को भ्रम हो गया है कि वे ही केवल सही समझते हैं।
उत्तर ......मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्व वाद एक सत्य है जो श्रद्धेय बाबाजी द्वारा देखा गया और हमारे सामने प्रस्तुत किया गया।
चूंकि अस्तित्व सहज सत्य है इसलिए मानव जाति को सहज स्वीकार भी हो रहा है पर यदि जीने में आने की बात करें तो अभी निश्चित ही दिल्ली दूर है 🙏
हजारों वर्षों से जीवन मान्यताओं को वहन करके आया है इस शरीर यात्रा में सौभाग्य वश ये सूचना मिली है उसे अध्ययन करने की विधिवत व्यवस्था 10 वर्ष पहले ही बाबाजी के मार्गदर्शन में शुरू हुई है 🙏
बाबाजी से एक बार पूछे थे कि बाबाजी लोग मूल्यांकन करने लगते है जबकि अभी हमारे जीने में बहुत सी मिलावट है तब बाबाजी ने कहां था की जीने में आने में रीढ़ की हड्डी से पसीना निकलेगा । ये एक विकल्प है जो विगत की किसी विधा से जुड़ेगा नही ।
खुद को यदि देखू तो सूचना को पूरी होने में 10 वर्ष लगे उसके प्रति निष्ठा होने के बावजूद पूर्वाग्रह , जीव चेतना की व्यक्तिवादी प्रवृतियां ,लोभ ,मोह ,अहंकार ये सम्मोहनात्मत प्रवृतियां है ये समझने में लंबा समय लगा । वो कब किस स्थिति परिस्थिति में सिर उठा लेती है इसका आंकलन करने में समय लगा प्रसन्नता की बात ये रही कि जीव चेतना की प्रवृति के बावजूद सही की सूचना का पलड़ा भरी रहा और शनै शनै प्रवृति विलय होती दिखी तो ये दृढ़ विश्वास बैठ गया कि सूचना में इतनी ताकत है तो स्वत्व बनने में क्या सुखद अनुभूति होगी 🙏
खुद का मूल्यांकन करते रहने से ये सच्चाई का भास हो गया कि न्याय पूर्वक जीने का पहला स्टेप अपने पराए से मुक्त मानसिकता है अर्थात प्रत्येक मानव समझ सकता है जी सकता है इस सत्य के प्रति निष्ठा होना है और वो हुई है इसलिए सभी मानव के प्रति ,संबंधियों के प्रति , सहपाठीयों के प्रति *स्नेह है* *सम्मान है* *विश्वास है* 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
आप सभी वरिष्ठ जनों का प्रोत्साहन ,शंका , कही गई बातें भी प्रेरणा देती है गति देती है खुद को प्रमाणित करने की इच्छा को तीव्र करती है 🙏🙏🙏🙏🙏
मध्यस्थ दर्शन सह अस्तित्व वाद के अनुसार मानव मानव में भाव की अपेक्षा निश्चित है उसे नकारा नहीं जा सकता जबकि परंपरा में उसे नकारा गया है ,दबाया गया है ,अपेक्षाएं नही करनी चाहिए ऐसा बोला गया पर खुद में जांच कर देखे की बोलने से अपेक्षा खतम हो रही है क्या?
तटस्थ होना भी स्वाभाविक स्थिति नही है पत्थर होने जैसा है संवेदनहीन होने जैसा है जबकि मानव में चैतन्यता है वो अभिव्यक्त होना चाहता है तटस्थ नही रह सकता इसे भी खुद में जांचे ।
सही को समझने की क्षमता प्रत्येक मानव में है अपनी पात्रता और योग्यता को विकसित करके सही जीना ( विश्वास,सम्मान,स्नेह पूर्वक) संभव है । राग द्वेष को दूर करने के लिए मेहनत करने की जरूरत ही नही है बस सही को समझना है गलत अपने आप विलय हो जाएगा।
राग द्वेष भाव का अभाव है भाव पूरा होते ही अभाव अपने आप खत्म हो जाएगा।
जैसे जैसे अस्तित्व का डिजाइन समझ में आ रहा है वैसे वैसे कई मान्यताओं की समीक्षा हो रही है।
आप भी स्वयं में जरूर जांचे प्रस्ताव है🙏
By Anita shah didi
सह अस्तित्व में एक नियम सहज काम करता है कि जिसके पास जो है वह उसे बांटता ही है । जैसे जिसके पास भ्रम है , गलती है , क्रोध है , भय है नासमझी है ,वह उसे ही बांटता है ।
इस पर एक शिविर में किसी ने प्रश्न किया कि अमुक ( जैसे अंबानी ) के पास इतना धन है , वह तो अपने धन को बांटता नहीं फिरता ।
प्रबोधक से उत्तर आया कि वह धन अमुक का जैसे , ( अंबानी) का है ही नहीं , अगर वह यह जानता कि धन उसका है तो सदुपयोग ( बांटता ) करता । वह तो अपने को उसका चौकीदार मानता है , उसकी सुरक्षा के उपक्रम करते रहता है ।अपनी मुख्य जिम्मेदारी उसको बढ़ाने की मानता है । किसी भी तरीके से उसे बढ़ाने में लगा हुआ है ।
प्राय
लोगों को शिकायत होती है कि मैं बेटे को , फलाने को समझाने की खूब कोशिश करता हूं वह समझता ही नहीं , समझना ही नहीं चाहता । ऐसा वह जानबूझकर करता है , मुझे दुखी करने के लिए करता है ।।।
यहां यह नियम काम क्यों नहीं करता ?
सरल उत्तर है कि वे अपने को समझदार मानते हैं , (हैं या नहीं ये जानना नहीं चाहते ) ।
और समझदारी ऐसी चीज है जिसको प्रसाद की तरह बांटा नहीं जा सकता है ।। समझदारी को केवल जीया जा सकता है ।
जीने में प्रमाणित कर दिया है तभी दूसरा अनुकरण , अनुसरण से समझता ( समझ सकता ) है । समझदार प्रमाणित मानव समझाने में सफल ही होता है ।
नहीं तो
वृद्धावस्था में लोग अधिक शिकायत करते पाए जाते हैं कि सारी जिंदगी समझाता रहा हूं कोई समझने को तैयार नहीं हैं । सब अपने मतलब की दुनिया है । बस आखिरी दिनों में जोड़ा हुआ पैसा ही अपना है ।
इससे भी अधिक
जीवन एक संघर्ष है ,
सुख दुख साथ हैं ,
संसार माया है
कुछ समझ नहीं आया है ।
ये ही अंतिम ज्ञान है ।
01/04/2021
"जीवन कहो या आत्मा" स्वयं को समझने के लिए देखिए जीवन क्रिया Part 1 || Shrawan Kumar Shukla
Video link
https://youtu.be/BGCazexxCtQ
नागराज जी ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा में समझा कि हम सब शरीर और जीवन के रूप मेे दो अलग अलग इकाइयां है और इसमें भी जीवन को समझ के पाया की
जीवन में कल्पनाशीलता और कर्मस्वतंत्रता होती है और यह अक्षय है यानी एक मानव असीमित कल्पना और कर्म कर सकता है।
मानव जीवन में कुल 10 क्रियाएं होती है जिसमें कल्पना के रूप में इच्छा , विचार , आशा और आस्वादन और फिर तुलन की प्रिय , हित , लाभ के रूप में तीन दृष्टियां के साथ मानव जीवन में साढ़े चार जीवन क्रियाएं पूरी होती है।
आइए मानव जीवन में होने वाली इन साढ़े चार क्रियाओं को समझे.....
इस विषय को आदरणीय श्री Shrawan Kumar Shukla जी द्वारा explain किया गया है।
स्रोत : आदरणीय A Nagraj जी द्वारा explore की गई जीवन विद्या एवम् उनसे ज्ञान पाए व्यक्तियों द्वारा कहे गए जीवन सूत्र
कृपया अपने अपने विचार रखे।
अगर आपको लगे कि यह विचार मेरे समझने के लायक है और दूसरो को भी समझाने के लायक है तो कृपया शेयर कीजिए क्योंकि जो जानकारी हमे अच्छी लगे वो शेयर होनी ही चाहिए। क्या पता जैसे मेरे एक मित्र की sharing से मेरा जीवन बदला वैसे ही आपकी एक sharing से आपके किसी मित्र का भला हो जाए।
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"जीवन कहो या आत्मा" स्वयं को समझने के लिए देखिए जीवन क्रिया Part 1 || Shrawan Kumar Shukla "जीवन कहो या आत्मा" स्वयं को समझने के लिए देखिए जीवन क्रिया Part 1 || Shrawan Kumar Shuklaनागराज जी ने अपनी आध्यात्मिक यात्र....
15/03/2021
कृतज्ञता.....मानव में निहित मूल्यों में एक और मूल्य " कृतज्ञता " || Shrawan Kumar Shukla
Video link
https://youtu.be/DMhTKEyv55o
वस्तु अथवा समझ प्रदान करने के प्रति स्वीकृति का भाव होना ही कृतज्ञता है अर्थात जिसने भी मेरी सुविधा के लिए अथवा मेरी समझ के लिए कुछ भी किया है उसको याद रखना ही कृतज्ञता है। कृतज्ञता सौम्यता के रूप में व्यक्त होती है।
जिसके प्रति भी हम कृतज्ञ होते है उसके सम्मुख स्व नियंत्रित हो जाना ही सौम्यता है।
आइए समझे कृतज्ञता और सौम्यता को...
इस विषय को आदरणीय श्री Shrawan Kumar Shukla जी द्वारा explain किया गया है।
स्रोत : आदरणीय A Nagraj जी द्वारा explore की गई जीवन विद्या एवम् उनसे ज्ञान पाए व्यक्तियों द्वारा कहे गए जीवन सूत्र
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कृतज्ञता.....मानव में निहित मूल्यों में एक और मूल्य " कृतज्ञता " || Shrawan Kumar Shukla ृतज्ञता.....मानव में निहित मूल्यों में एक और मूल्य " कृतज्ञता " || Shrawan Kumar Shuklaवस्तु अथवा समझ प्रदान करने के प्रति...
05/03/2021
परिवार का अर्थ और उसका प्रयोजन || Shrawan Kumar Shukla
Video Link
https://youtu.be/VGQj_aMqG7Y
परिवार का अर्थ जिसमें तीन पीढ़ी एक साथ रहती है और एक दूसरे की समझ को प्रमाणित करने में सहायक होती है।
इस विषय को आदरणीय श्री Shrawan Kumar Shukla जी द्वारा explain किया गया है।
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परिवार का अर्थ और उसका प्रयोजन || Shrawan Kumar Shukla िवार का अर्थ और उसका प्रयोजन || Shrawan Kumar Shuklaपरिवार का अर्थ जिसमें तीन पीढ़ी एक साथ रहती है और एक दूसरे ...
22/02/2021
संबंध कितने प्रकार के...... आइए समझे मानव मानव में सात तरह के संबंध || Shrawan Kumar Shukla
Video link
https://youtu.be/rbBLPL0hoCU
संबंध में अपेक्षाएं निश्चित होती है। इस आधार पर धरती के सभी मानव मानव में केवल सात तरह के संबंध होते है।
1 माता पिता - संतान संबंध
2 गुरु - शिष्य संबंध
3 भाई - बहन संबंध
4 पति - पत्नी संबंध
5 मित्र - मित्र संबंध
6 साथी - सहयोगी संबंध
7 व्यवस्था संबंध
आइए समझे इन संबंधों को।
इस विषय को आदरणीय श्री Shrawan Kumar Shukla जी द्वारा explain किया गया है।
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संबंध कितने प्रकार के...... आइए समझे मानव मानव में सात तरह के संबंध || Shrawan Kumar Shukla ंबंध कितने प्रकार के...... आइए समझे मानव मानव में सात तरह के संबंध || Shrawan Kumar Shuklaसंबंध में अपेक्षाएं निश्चित होत....
05/02/2021
स्नेह, ममता, वात्सलय, श्रद्धा...….मानव में निहित मूल्यों में चार और मूल्य || Sharwan Kumar Shukla
Video link
https://youtu.be/HcfW9c_V7YY
स्नेह मतलब संबंध की स्वीकृति।
ममता मतलब पोषण की स्वीकृति।
वात्सल्य मतलब शिक्षा संस्कार की स्वीकृति।
श्रद्धा मतलब श्रेष्ठता की स्वीकृति।
यह चारो मूल्य मानव मेे स्थापित है ही और मानव में शिष्ट मूल्यों के रूप में व्यक्त होते है।
इस विषय को आदरणीय श्री Shrawan Kumar Shukla जी द्वारा explain किया गया है।
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स्नेह, ममता, वात्सलय, श्रद्धा...….मानव में निहित मूल्यों में चार और मूल्य || Sharwan Kumar Shukla ्नेह, ममता, वात्सलय, श्रद्धा...….मानव में निहित मूल्यों में चार और मूल्य || Sharwan Kumar Shuklaस्नेह मतलब संबंध की स्वी.....
23/01/2021
सम्मान...... मानव में निहित मूल्यों में दूसरा मूल्य " सम्मान "।। Shrawan Kumar Shukla
Video link
https://youtu.be/-7goaBKqB7E
सम्मान का अर्थ है जो जैसा है वैसा ही मूल्यांकन, जैसा है वैसे ही की स्वीकृति अर्थात जो जैसा है उसको वैसा ही स्वीकार करना। अगर हम ऐसा नहीं कर पाते तो फिर या तो हम उस वस्तु का अधिमूल्यन करेंगे या अवमूल्यन करेंगे।
इस विषय को आदरणीय श्री Shrawan Kumar Shukla जी द्वारा explain किया गया है।
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सम्मान...... मानव में निहित मूल्यों में दूसरा मूल्य " सम्मान "।। Shrawan Kumar Shukla ्मान...... मानव में निहित मूल्यों में दूसरा मूल्य " सम्मान "।। Shrawan Kumar Shuklaसम्मान का अर्थ है जो जैसा है वैसा ही म.....
18/01/2021
समृद्धि (Prosperity).... समृद्ध व्यक्ति कौन होता है || Som Tyagi
Video link
https://youtu.be/EAuc9drZ37g
समृद्धि का अर्थ अभाव का अभाव हो जाए। आवश्यकता से अधिक होने का भाव ही समृद्धि है।
समृद्धि मतलब न कमी हो और न ही कमी का अहसास हो।
इस विषय को आदरणीय श्री Som Tyagi जी द्वारा explain किया गया है।
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