Sanskarशाला
Kids overall development
02/11/2022
01/11/2022
आज से कोई 6 साल पुरानी बात है, 2016 की
रेलवे के एक बड़े अधिकारी थे, बहुत बड़े वाले
पेशे से इंजीनियर थे
उनके रिटायरमेंट में सिर्फ दो साल बचे थे
आमतौर पे रिटायरमेंट के नज़दीक जब अंतिम पोस्टिंग का समय आता है तो कर्मचारी से उसकी पसंद पूछ ली जाती है
पसंद की जगह अंतिम पोस्टिंग इसलिये दी जाती है ताकि कर्मचारी अपने अंतिम दो साल में पसंद की जगह घर मकान इत्यादि बनवा ले और रिटायर हो के सेटल हो जाये व आराम से रह सके पर उस अधिकारी ने अपनी अंतिम पोस्टिंग मांग ली ICF चेन्नई में
ICF बोले तो Integral Coach Factory मने रेल के डिब्बे बनाने वाला कारखाना
चेयरमैन रेलवे बोर्ड ने उनसे पूछा कि क्या इरादा है ?
वो इंजीनियर बोला अपने देश की अपनी खुद की सेमी हाई स्पीड ट्रेन बनाने का इरादा है
ये वो दौर था जब देश मे 180Km प्रति घंटा दौड़ने वाले Spanish Talgo कंपनी के रेल डिब्बों का ट्रायल चल रहा था
ट्रायल सफल था पर वो कंपनी 10 डिब्बों के लगभग 250 करोड़ रु मांग रही थी और तकनीक स्थानांतरण का करार भी नही कर रही थी
ऐसे में उस इंजीनियर ने ये संकल्प लिया कि वो अपने ही देश मे स्वदेशी तकनीक से Talgo से बेहतर ट्रेन बना लेगा उसके आधे से भी कम दाम में
चेयरमैन रेलवे बोर्ड ने पूछा Are You Sure, We Can Do It ?
Yes Sir
कितना पैसा चाहिये R&D के लिये ?
सिर्फ 100 करोड़ रु सर
रेलवे ने उनको ICF में पोस्टिंग और 100 करोड़ रु दे दिया
उस अधिकारी ने आनन फानन में रेलवे इंजीनियर्स की एक टीम खड़ी की औऱ सभी काम मे जुट गए
दो साल के अथक परिश्रम से जो नायाब प्रॉडक्ट तैयार हुआ उसे हम ट्रेन 18 बोले तो वन्दे भारत रेक के नाम से जानते हैं
और जानते हैं 16 डब्बे की इस ट्रेन 18 की लागत कितनी आई ?
सिर्फ 97 करोड़ जबकि Talgo सिर्फ 10 डिब्बों के 250 करोड़ माँग रही थी
ट्रेन 18 भारतीय रेल के गौरवशाली इतिहास का सबसे नायाब हीरा है
इसकी विशेषता ये है कि इसे खींचने के लिए किसी इंजन की ज़रूरत नही पड़ती क्योंकि इसका हर डिब्बा खुद ही सेल्फ प्रोपेल्ड है, बोले तो हर डिब्बे में मोटर लगी है
दो साल में तैयार हुए पहले रैक को वन्दे भारत ट्रेन के नाम से वाराणसी नई दिल्ली के बीच चलाया गया
उस होनहार इंजीनियर का नाम था सुधांशु मनी साहब
2018 में ही Retire हो गये
इस देश में ट्रेन 18 जैसी विलक्षण उपलब्धि के लिये उनकी टीम की किसी ने पीठ तक न थपथपाई
पिछले दिनों जब वन्दे भारत भैंस से टकरा गई और उसका अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया तो सारे वामपंथी और देशद्रोही ट्रेन के डिज़ाइन की अनर्गल आलोचना करने लगे तब सुधांशु सर का दर्द छलक आया और उन्होंने एक लेख लिख उसके डिजाइन की खूबियां बताईं...
मनी साहब सेवानिवृत्त होकर आजकल लखनऊ में रहते हैं
27/03/2022
पुष्य नक्षत्र में मंत्रोषधि सुवर्णप्राशन संस्कार - एक भारतीय परंपरा SUVARNA PRASHAN - HERBAL IMMUNIZATION
10 अप्रैल 2022 रविवार
प्रात: 10:00 बजे से अपराह्न 12:30 बजे तक
10:00 AM - 12:30 PM
Block A 1/5, DLF Ankur Vihar
WhatsApp your query @ 8826293431
सुवर्णप्राशन संस्कार - एक भारतीय परंपरा
SUVARNA PRASHAN - HERBAL IMMUNIZATION
आधुनिक विज्ञान ने कई रोगो के लिये Vaccine निकाली, और भी सँशोधन जारी है; यह एक नित्य चलनेवाला कार्य है। हमारे आचार्योने यही सिद्धांत से हजारो साल पहले सोच रखा था, और उन्होने सभी प्रकार के रोग के सामने शरीर रक्षण कर सके उसके लिये रोगप्रतिकार क्षमता ही बढनी चाहिये, यह बात को लेकर एक ही शस्त्र ढूँढ निकाला, वह यानि सुवर्ण - सोना; और ईसके लिये सुवर्णप्राशन संस्कार की हमें भेंट की । सुवर्ण यानि सोना (Gold) और प्राशन यानि चटाना ।
सुवर्ण ही क्यूँ??
सुवर्ण हमारे शरीर के लिये श्रेष्ठत्तम धातु है। वह ना ही केवल व्बालको के लिये है, पर वह सभी उंमर के लिये उतनी ही असरकारक और रोगप्रतिकार क्षमता बढानेवाली है। ईसीलिये तो हमारे जीवन व्यवहार में सदीयों से सुवर्ण का महत्व रहा है। उसकी हमारे शारीरिक और मानसिक विकार में महत्वपूर्ण प्रभाव होने के कारण ही उसको शुभ मान जाता है, उसका दान श्रेष्ठ माना गया है । हमारे पूर्वजो की स्पष्ट समज थी कि, सोना हमारे शरीरमें कैसे भी जाना चाहिये ! ईसलिये ही हमारे यहाँ शुद्ध सोने के गहने पहनने का व्यवहार है; कभी नकली गहने पहनने पर बुजुर्गो की डाँट भी पडती है। यही कारण से ही हमारे राजा और नगरपति - धनवान लोग सोने की थाली में ही खाना खाते थे, जिससे सुवर्ण घिसाता हुआ हमारे शरीर के भीतर जाये। सोने के गह्ने पहनना, सोना खरीदना, सोने का दान करना, सोने का संग्रह करना, सोनेकी थाली में खान यह सभी बातों में हमारे आचार्यो का अति महत्वपूर्ण द्रष्टिकोण रहा था कि, सोना शरीरमें रोगप्रतिकार क्षमता तो बढाता ही है, और उसके साथ-साथ हमारी मानसिक और बौद्धिक क्षमता भी बढाता है। यह शरीर, मन एवं बुद्धि का रक्षण करनेवाली अति तेजपूर्ण धातु है। ईसलिये तो पूरी दुनिया की Economy सुवर्ण पर निर्भर है। यही उसकी हमारे जीवन में महता का द्योतक है!!
सुवर्णप्राशन संस्कार कब और किसको?
सुवर्णप्राशन यह हमारे 16 संस्कारो में से एक है । हमारे यहाँ जब बालक का जन्म होता है तब उसको सुना या चांदी की शलाका (सली) से उसके जीभ पर शहद चटाने की या जीभ पर ॐ लिखने की एक परँपरा रही है। यह परंपरा का मूल स्वरूप याने हमारा सुवर्णप्राशन संस्कार। सुवर्ण की मात्रा चटाना यानि सुवर्णप्राशन। हम यह करते ही है पर हमें उसकी समझ नही है। यह कैसे आया और क्यूँ आया? इसका हेतु और परिणाम क्या है यह हमें पता नही था। सदीयो के बाद भी यह कैसे भी स्वरूप में टीकना यह कुछ कम बात नहीं है। उसके लिये हमारे आचार्योने कितना परिश्रम उठाया होगा, तब जाकर यह हमारे तक पहूँचा है। पर यहाँ समझने की कभी हमनें कोशिश की, ना हि किसी ने समझाने का कष्ट लिया है।
यह सुवर्णप्राशन सुवर्ण के साथ साथ आयुर्वेद के कुछ औषध, गाय का घी और शहद के मिश्रण से बनाया जाता है। और यह जन्म के दिन से शुरु करके पूरी बाल्यावस्था या कम से कम छह महिने तक चटाना चाहिये। अगर यह हमसे छूट गया है तो बाल्यावस्था के भीतर यानि 16 साल की आयु तक कभी भी शुरु करके इसका लाभ ले सकते है। यही हमारी परंपरा को पुष्टि देने के लिये ही बालक के नजदीकी लोग सोने के गहने या सोने की चीज ही भेंट करते है; शायद उस समय पर वो यही सुवर्णप्राशन ही भेंट करते होंगे।
सुवर्णप्राशन से क्या फायदा??
आयुर्वेद के बालरोग के ग्रंथ काश्यप संहिता के पुरस्कर्ता महर्षि काशयप ने सुवर्णप्राशन के गुणों का निम्न रूप से निरूपण किया है..
सुवर्णप्राशन हि एतत मेधाग्निबलवर्धनम् ।
आयुष्यं मंगलमं पुण्यं वृष्यं ग्रहापहम् ॥
मासात् परममेधावी क्याधिभिर्न च धृष्यते ।
षडभिर्मासै: श्रुतधर: सुवर्णप्राशनाद् भवेत् ॥
सूत्रस्थानम्, काश्यपसंहिता
अर्थात्,
सुवर्णप्राशन मेधा (बुद्धि), अग्नि ( पाचन अग्नि) और बल बढानेवाला है। यह आयुष्यप्रद, कल्याणकारक, पुण्यकारक, वृष्य, वर्ण्य (शरीर के वर्णको तेजस्वी बनाने वाला) और ग्रहपीडा को दूर करनेवाला है. सुवर्णप्राशन के नित्य सेवन से बालक एक मास मं मेधायुक्त बनता है और बालक की भिन्न भिन्न रोगो से रक्षा होती है। वह छह मास में श्रुतधर (सुना हुआ सब याद रखनेवाला) बनता है, अर्थात उसकी स्मरणशक्त्ति अतिशय बढती है।
यह सुवर्णप्राशन पुष्यनक्षत्र में ही उत्तम प्रकार की औषधो के चयन से ही बनता है। पुष्यनक्षत्रमें सुवर्ण और औषध पर नक्षत्र का एक विशेष प्रभाव रहता है। यह सुवर्णप्राशन से रोगप्रतिकार क्षमता बढने के कारण उसको वायरल और बेक्टेरियल इंफेक्शन से बचाया जा सकता है। यह स्मरण शक्ति बढाने के साथ साथ बालक की पाचन शक्ति भी बढाता है जिसके कारण बालक पुष्ट और बलवान बनता है। यह शरीर के वर्ण को निखारता भी है। ईसलिये अगर किसी बालक को जन्म से 16 साल की आयु तक सुवर्णप्राशन देते है तो वह उत्तम मेधायुक्त बनता है।
और कोई भी बिमारी उसे जल्दी छू नही सकती।
छह मास तक का प्रयोग :-
सही मात्रा और औषध से बना हुआ सुवर्णप्राशन अगर किसी भी बालक को छह मास तक नियमित रूप से दिया जाये तो वह "श्रुतधर" मतलब कि एक बार सुना हुआ उसको याद रह जाता है । अगर हम इसको आज के परिप्रेक्ष्य में तो उसकी याददास्त अवश्य ही बढती है। और स्वस्थ और तेजस्वी भारत के निर्माण में यह संस्कार हमारे लिये एक बहुत ही महतवपूर्ण बात है। इसके लिये 16 साल तक की उम्र के किसी बालक को कभी भी शुरु करवा सकते है। और कम से कम छह महिने तक इसका सेवन करवाना चाहिये। और इसके लिये पुष्यनक्षत्र में ही तैयार करना बहुत ही लाभप्रद रहता है।
सुवर्णप्राशन के होने वाले लाभ को हम निम्न रूप से विभाजीत कर सकते है....
· Strong immunity Enhancer : Suvarnaprashan builds best resistant power and prevents from infections and makes child stronger .
बालक की रोगप्रतिकार क्षमता बढती है, जिसके कारण अन्य बालको की तुलना वह कम से कम बिमार होता है। ईस प्रकार तंदुरस्त रहने के कारण उसको एन्टिबायोटिक्स या अन्य दवाईया देने की जरूरत न रहने से उसको बचपनसे ही उस दवाईयाँ के दुष्प्रभाव से बचा सकते है।
· Physical development : Suvarnaprashan helps in physical development of your child.
सुवर्णप्राशन बालक के शारिरीक विकास को बढाता है।
· Memory Booster : It contains such Herbs which helps your child for memory boosting and it improves Grasping Power also.
यह सुवर्णप्राशन स्मरणशक्ति और धारणशकित बढानेवाले कई महत्वपूर्ण औषध से बना है। मतलब यह की इसके कारण वह ज्यादा तेजस्वी बनता है।
· Active and Intellect : शारिरीक और मानसिक विकास के कारण वह ज्यादा चपल और ज्यादा बुद्धिशाली बनता है।
· Digestive Power : Suvarnaprashan is a best appetizer and have digestive properties also.
पाचनक्षमता बढाता है जिसके कारण उसको पेट और पाचन संबंधित कोई तकलीफ़ नही रहती ।
· Tone ups Skin color :
बालक के वर्ण में निखार आता है ।
पुष्य नक्षत्र में मंत्रोषधि सुवर्णप्राशन संस्कार - एक भारतीय परंपरा SUVARNA PRASHAN - HERBAL IMMUNIZATION
10 अप्रैल 2022 रविवार
प्रात: 10:00 बजे से अपराह्न 12:30 बजे तक
10:00 AM - 12:30 PM
Block A 1/5, DLF Ankur Vihar
WhatsApp your query @ 8826293431
14/03/2022
Pushya Nakshatra Suvarnaprashan Dates For 2022
Suvarnaprashan is a unique & best health tonic for children. In ancient time Maharshi Kashyap had described this unique combination for all over well being and development of children. And when Suvarnaprashan is given in pushya nakshatra, it become best.
In recent time, we all are battling with novel virus called SARS CoV – 2 and this pandemic time, so, the Immunity Boosting approach seems as current conclusive solution. And for our children Suvarnaprshan will be the choice for best immunity enhancer in current time. Hope this pandemic end soon, and we will be back to normal healthy life.
Suvarnaprshan effects better on Pushya Nakshatra time.
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Suvarnaprashan is made from Gold ash, ghee, honey and brain tonic medicines like brahmi, Shankhpushpi, Vacha etc.
Suvarnaprashan can be given to new born to till 12 years age.
Suvarnaprashan Dose is decided as per weight and age of the children.
made premium quality Suvarnaprashan absolutely free for children on Pushya Nakshatra as our social responsibility.
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