31 वर्षीय ट्विशा शर्मा की मौत ने एक बार फिर समाज को झकझोर कर रख दिया है। CCTV फुटेज में ट्विशा मौत से कुछ देर पहले अपने घर की सीढ़ियां चढ़ती दिखाई दे रही हैं। इसके बाद पति समर्थ सिंह और अन्य लोग उन्हें CPR देते नजर आते हैं। वीडियो में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की मौजूदगी ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर उस रात कमरे के अंदर क्या हुआ था? क्या ये सिर्फ एक हादसा था या फिर इसके पीछे कोई बड़ा सच छिपा है? पूरा मामला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन चुका है और लोग इंसाफ की मांग कर रहे हैं। ViralVideo IndiaNews CrimeNews TruthExposed Justice HindiNews TrendingNow ViralPost ShockingNews SocialAwareness DowrySystem WomenSafety RealStory InstaNews ViralReels
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End Game to yehi hoga 🤞
"एक आत्मजा के न्याय की वेदी पर आज संपूर्ण राष्ट्र क्रांति का समिध बनने को आतुर है। यह किसी निरंकुश सत्ता का मात्र पतन नहीं, अपितु एक जननी के अदम्य साहस और उसके ममतामयी संकल्प की प्रचंड विजय है।"
Character is what you do when the world isn't watching.".
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20/04/2026
" 𝟵𝗔𝗦𝗖𝗛𝗡𝟮𝟲 𝗶𝘀 𝘁𝗵𝗲 𝗼𝗻𝗹𝘆 𝗺𝗼𝘁𝗶𝘃𝗲 𝗻𝗼𝘄. ♟️
𝗢𝗯𝘀𝗲𝘀𝘀𝗲𝗱 𝘄𝗶𝘁𝗵 𝘁𝗵𝗲 𝘃𝗶𝘀𝗶𝗼𝗻, 𝗰𝗼𝗺𝗺𝗶𝘁𝘁𝗲𝗱 𝘁𝗼 𝘁𝗵𝗲 𝗴𝗿𝗶𝗻𝗱. "
"Blood type: Red & Gold."
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Kya Laya tha sath me???
17/09/2021
एक ऐसा क्रान्तिकारि जिनकी अंतिम संस्कार यात्रा में #नेताजी_सुभाषचन्द्र_बोस समेत पुरा देश शामिल हुआ था। जतिन दास जी ने कहा था की मेरे अनशन का अर्थ है, 'विजय या मृत्यु'। 🙏।
जतिन दास जी का मनोबल बहुत ऊंचा था। जतिन दास जी का मत था कि संघर्ष करते हुए गोली खाकर या फांसी पर झूलकर मरना आसान है। क्योंकि उसमें अधिक समय नहीं लगता, पर अनशन में व्यक्ति क्रमशः मृत्यु की ओर आगे बढ़ता है। ऐसे में यदि उसका मनोबल कम हो, तो संगठन के व्यापक उदेश्य की हानि होती है।
जतिन दास जी को अनशन के दौरान काफी यातनाएं दी गई। जब अनशन का 60 वा दिन था तब अंग्रेजो ने नकली द्वारा खाना अन्दर डालने की कोशिश की गई उसके बाद ब्रिटिशों के इस करतूतों के बाद दास की हालत नाजुक हो गई और अनशन के 63 वें दिन 13 सितंबर 1929 को जतीन्द्रनाथ दास ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। इनकी मृत्यू के बाद उनके भाई किरण चंद्र दास को कोलकाता बुलाया गया था।
आगे लाहौर से उनकी शव को ट्रेन से ले जाने की तैयारी की गई थी।
लाहौर शहर थम सा गया था। इनकी अंतिम यात्रा देखने के लिए लोगों का एक बड़ा हुजूम उमड़ पड़ा था, जिसे देखकर ब्रिटिशों की नींव हिल गई थी। दास को गुलाब बहुत पसंद था, इसीलिए उनका शव गुलाब के फूलों से पूरा ढक गया था।
हालांकि, उनके शव को ट्रेन से ले जाया गया। उनकी अंतिम यात्रा में कई महान क्रांतिकारियों ने भाग लिया।
इसमें सुभाष चंद्र बोस भी शामिल थे। जिस जगह पर ट्रेन रूकती वहां पर लोग इस शहीद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और जब इनका शव कल पहुंच जाता है तो लाखों की संख्या में लोग उनकी अंतिम यात्रा में शामिल होते हैं।
फिर इस क्रांतिकारी को अग्नि दे दी गई।
हे महान योद्धा मैं सत्यवान मोर नतमस्तक होकर आपको बारम्बार प्रणाम करता हूं। देश आप के बलिदान का सदैव हरिणी रहेगा। आप हमारे हिरो हैं। आप हमारे आदर्श हैं।स्वदेशी अपनाओ देश बचाओ 🙏🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🙏।
कॉपी पेस्ट
डॉ.संतोष छापर,
अध्यक्ष,
जोधपुर, राजस्थान, भारत.
27/09/2020
25/09/2020
पानी का बहाव चलती हैं
जिस मछली में जान होती है
वह अपना रास्ता
खुद बनती हैं।
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