18/04/2020
अगली सुबह रात की मुस्कराहट के साथ आयी | तुम रसोई में खाना बना रहे थे एक तरफ और दूसरी तरफ भाभी और बच्चे एक दुसरे से लिपटकर खटिया पे सो रहे थे | तुम्हे रसोई में गुनगुनाते हुए खाना बनाते देख मेरा भी मन किया कि मैं तुम्हारी मदद के लिए आ जाऊ | और फिर हम दोनों की ही पता है हमने जो उसके बाद हुआ | जब तक मैं यहाँ रहा तब तक हम दोनों ने अलग अलग पकवान खिलाकर पूरे परिवार को मोटा कर दिया |
खाना बनाने और खिलाने में एक नया आनंद महसूस किया था | ऐसा लगता था जैसे कोई मन के तारो को अपनी उँगलियों से मंत्रमुग्ध तराना में बुन रहा हो | और शायद उस बुनने बनाने के मधुर अनुभव में, मैं अपनी आत्म - खोज की यात्रा के गंतव्य के ओर समीप आता चला गया |