Shree Jayantri Prasad Smarak Shikshan Sansthan & Inter College

Shree Jayantri Prasad Smarak Shikshan Sansthan & Inter College

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Photos from Shree Jayantri Prasad Smarak Shikshan Sansthan & Inter College's post 30/03/2026

श्री जयंत्री प्रसाद स्मारक इण्टर कालेज
रामपुर , बलरामपुर

Photos from Shree Jayantri Prasad Smarak Shikshan Sansthan & Inter College's post 31/10/2024


आप सभी का आशीर्वाद
श्री जयंत्री प्रसाद स्मारक इण्टर कालेज
(रामपुर,बलरामपुर)

20/10/2024

#अतीत_का_दर्द
कभी नेनुँआ टाटी पे चढ़ के रसोई के दो महीने का इंतज़ाम कर देता था। कभी खपरैल की छत पे चढ़ी लौकी महीना भर निकाल देती थी, कभी बैसाख में दाल और भतुआ से बनाई सूखी कोहड़ौरी, सावन भादो की सब्जी का खर्चा निकाल देती थी‌!

वो दिन थे, जब सब्जी पे खर्चा पता तक नहीं चलता था। देशी टमाटर और मूली जाड़े के सीजन में भौकाल के साथ आते थे,लेकिन खिचड़ी आते-आते उनकी इज्जत घर जमाई जैसी हो जाती थी!

तब जीडीपी का अंकगणितीय करिश्मा नहीं था।
ये सब्जियाँ सर्वसुलभ और हर रसोई का हिस्सा थीं। लोहे की कढ़ाई में, किसी के घर रसेदार सब्जी पके तो, गाँव के डीह बाबा तक गमक जाती थी। धुंआ एक घर से निकला की नहीं, तो आग के लिए लोग चिपरि लेके दौड़ पड़ते थे संझा को रेडियो पे चौपाल और आकाशवाणी के सुलझे हुए समाचारों से दिन रुखसत लेता था!

रातें बड़ी होती थीं, दुआर पे कोई पुरनिया आल्हा छेड़ देता था तो मानों कोई सिनेमा चल गया हो।
किसान लोगो में कर्ज का फैशन नहीं था, फिर बच्चे बड़े होने लगे, बच्चियाँ भी बड़ी होने लगीं!

बच्चे सरकारी नौकरी पाते ही,अंग्रेजी इत्र लगाने लगे। बच्चियों के पापा सरकारी दामाद में नारायण का रूप देखने लगे, किसान क्रेडिट कार्ड डिमांड और ईगो का प्रसाद बन गया,इसी बीच मूँछ बेरोजगारी का सबब बनी!

बीच में मूछमुंडे इंजीनियरों का दौर आया। अब दीवाने किसान,अपनी बेटियों के लिए खेत बेचने के लिए तैयार थे, बेटी गाँव से रुखसत हुई,पापा का कान पेरने वाला रेडियो, साजन की टाटा स्काई वाली एलईडी के सामने फीका पड़ चुका था!

अब आँगन में नेनुँआ का बिया छीटकर,मड़ई पे उसकी लताएँ चढ़ाने वाली बिटिया, पिया के ढाई बीएचके की बालकनी के गमले में क्रोटॉन लगाने लगी और सब्जियाँ मंहँगी हो गईं!

बहुत पुरानी यादें ताज़ा हो गई, सच में उस समय सब्जी पर कुछ भी खर्च नहीं हो पाता था, जिसके पास नहीं होता उसका भी काम चल जाता था!

दही मट्ठा का भरमार था, सबका काम चलता था। मटर,गन्ना,गुड़ सबके लिए इफरात रहता था। सबसे बड़ी बात तो यह थी कि, आपसी मनमुटाव रहते हुए भी अगाध प्रेम रहता था!

आज की छुद्र मानसिकता, दूर-दूर तक नहीं दिखाई देती थी, हाय रे ऊँची शिक्षा, कहाँ तक ले आई। आज हर आदमी, एक दूसरे को शंका की निगाह से देख रहा है!

विचारणीय है कि क्या सचमुच हम विकसित हुए हैं या यह केवल एक छलावा है?
#चन्द्र #प्रकाश #पाण्डेय #

Photos from Shree Jayantri Prasad Smarak Shikshan Sansthan & Inter College's post 26/01/2024

26 जनवरी गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए
#श्री जयंत्री प्रसाद स्मारक इंटर कालेज #

Photos from Shree Jayantri Prasad Smarak Shikshan Sansthan & Inter College's post 26/01/2024

26 जनवरी गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाए
#श्री जयंत्री प्रसाद स्मारक इंटर कालेज #

Photos from Shree Jayantri Prasad Smarak Shikshan Sansthan & Inter College's post 31/12/2023

# #2023 # # Tour Trip

01/10/2023

*पितरों को नमन*

वो कल थे तो आज हम हैं
उनके ही तो अंश हम हैं।

जीवन मिला उन्हीं से
उनके कृतज्ञ हम हैं,

सदियों से चलती आयी
श्रंखला की कड़ी हम हैं।

गुण धर्म उनके ही दिये
उनके प्रतीक हम हैं,

रीत रिवाज़ उनके हैं दिये
संस्कारों में उनके हम हैं।

देखा नहीं सब पुरखों को
पर उनके ऋणी तो हम हैं,

पाया बहुत उन्हीं से पर
न जान पाते हम हैं।

दिखते नहीं वो हमको
पर उनकी नज़र में हम हैं,

देते सदा आशीष हमको
धन्य उनसे हम हैं।

खुश होते उन्नति से
दुखी होते अवनति से,
देते हमें सहारा
उनकी संतान जो हम हैं।

इतने जो दिवस मनाते
मित्रता प्रेम आदि के,
पितरों को भी याद कर लें
जिनकी वजह से हम हैं।

आओ नमन कर लें, कृतज्ञ हो लें,
क्षमा माँग लें, आशीष ले लें
पितरों से जो चाहते हमारा भला
उनके जो अंश हम हैं...!

सर्व पितृ पितरों का शत शत नमन
🙏

30/07/2023

समय होत बलवान
चवन्नी अट्ठनी भी नही चलते अब, हम उस जमाने के हैं जब एक पैसा भी चलता था औऱ सबसे बड़ा नोट सौ रुपया ही होता था ।
लोग कुर्ता पहनते कम ही थे कंधे पर ही रखकर काम चला लिया करते थे।
एक ही कुर्ता और एक जोड़ी जूता पर कभी पूरा टोला रिश्तेदारी में शान से घूम आता था।
#सर्फ़ और #शैंपू तो था ही नही सोडा और चिकनी मिट्टी से ही काम चल जाता था
जब सनलाइट ,लाइफबॉय आया तो खास घरों में ही दिखता था।
बड़ी इज्जत थी लक्स की बस महिलाएं ही लगाती थी औऱ ग्लैक्सो का बिस्कुट तो बुखार लगने पर ही मिलती थी खाने के लिए
कभी बैल गाड़ी ही बरात की गाड़ी, बहु बेटियो को लाने ले जाने और बाजार से सामान ढूलाई का साधन थी और एंबुलेंस भी थी और वो भी नही तो चारपाई पर लोग अस्पताल ले जाए जाते थे।
सायकिल रेडियो और घड़ी भी इक्का दुक्का घरों होते थे
आज एक एक घर में कई कई बाइक और एक एक गांव टोलों में कई कई गाड़ियां हैं।
टीवी भी हर घर में एक अधिक मिल जायेंगे।
दौर बहुत बदला है और बदलते दौर में बहुत कुछ बदल गया
सिर्फ ये पैसे ही अप्रासंगिक नही हुए हैं
बल्कि बहुत सारे नए नए रहन सहन रिवाज व्यवहार विचार भी समाज में स्थापित हुए हैं।
पहले हर किसी के घर में रुपए भी हमेशा नही होते थे आज तो सबके पॉकेट में और वॉलेट और मोबाइल में रहते हैं।
चंद दशकों में जहां रुपए की कीमतें गिरी हैं वैसे ही आदमी और रिश्तों की कीमत गिरी है।
ये पैसे ही अप्रासंगिक नही हुए हैं मानवीय मूल्य भी अप्रासंगिक हुए हैं।

Photos from Shree Jayantri Prasad Smarak Shikshan Sansthan & Inter College's post 24/06/2023

Vatican City,(Rome),Italy # #

Photos from Shree Jayantri Prasad Smarak Shikshan Sansthan & Inter College's post 01/04/2023
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