25/12/2025
वह आदमी नया गरम कोट पहिनकर चला गया विचार की तरह।
रबड़ की चप्पल पहनकर मैं पिछड़ गया।
जाड़े में उतरे हुए कपड़े का सुबह छ: बजे का वक़्त
सुबह छ: बजे का वक़्त, सुबह छ: बजे की तरह।
पेड़ के नीचे आदमी था।
कुहरे में आदमी के धब्बे के अंदर वह आदमी था।
पेड़ का धब्बा बिलकुल पेड़ की तरह था।
दाहिने रद्दी नस्ल के घोड़े का धब्बा,
रद्दी नस्ल के घोड़े की तरह था।
घोड़ा भूखा था तो
उसके लिए कुहरा हवा में घास की तरह उगा था।
और कई मकान, कई पेड़, कई सड़कें इत्यादि कोई घोड़ा नहीं था।
हिंदी साहित्य सभा,
श्री राम कॉलेज ऑफ़ कॉमर्स की ओर से
हिंदी की इस शांत, विनम्र और अद्भुत चेतना को
कोटि-कोटि नमन।
आप चले गए,
पर आपकी भाषा अब भी
हमारे आसपास खड़ी है
पेड़ों की तरह,
कुहरे की तरह,
और सुबह छः बजे की तरह।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि।
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