16/11/2025
Kuch puni yaden
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16/11/2025
Kuch puni yaden
19/04/2025
सर्वदर्शन विभाग श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय एवं वैश्विक संस्कृत मञ्च के संयुक्त तत्त्वावधान में दिनांक 22.04.22025 को आन लाइन माध्यम से ई राष्ट्रिय पाक्षिक संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है जिसका विषय है जगद्गुरुरामानन्दाचार्य और उनका दार्शनिक प्रस्थान। इस संगोष्ठी में आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय है आपके उपस्थिति से हमारा उत्साह वर्धन होगा। यथा समय लिंक भेज दिया जायेगा।
03/04/2025
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृ विश्वविद्यालय नई दिल्ली के दर्शनशास्त्र पीठान्तर्गत सर्वदर्शन विभाग ignc वाराणसी श्रीकाशी विद्वतपरिषद केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली एवं वैश्विक संस्कृत मंच के संयुक्त तत्वावधान से
वेदवेदान्तादिविद्याविशारदः परम्परायाः संवर्धनमेवमाधुनिकदृष्ट्या अनुप्रयोगः विषय पर एक अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी का वाराणसी में दिनांक 12/एवं 13 अप्रैल 2025 को आयोजित हो रहा है।भारतीय संस्कृति के मेरुदण्ड रूप दिव्य वेदान्तादिविद्या प्राचीन ज्ञानविज्ञान परम्परा का मूल आधार है। वेदवदाङ्ग के साथ सूक्ष्मातिसूक्ष्म तर्कयुक्त न्यायशास्त्र गूढतत्त्व प्रधान मीमांसाशास्त्र धर्मशास्त्र परमपुरुषार्थ के साधनभूत वेदान्तशास्त्र व्यवहार के आधारभूत अर्थशास्त्र जीवनआयुसंवर्धक आयुर्वेदादि विद्याओं का महत्त्व न केवल प्राचीन जीवन पद्धति में अपितु आधुनिक युग में भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं। इस द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से इन शास्त्रों के व्यापक स्वरूप एवं लोकोपयोगिता व्यावहारिक प्रयोजन एवं आधुनिक सन्दर्भ में इनका पुनरुत्थान आदि विषयों पर विस्तार पूर्वक विचार किया जायेगा। इस द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वेदवेदान्तादि विद्याओं के स्वरूप महत्त्व आदि पर विस्तार से चर्चा किया जायेगा। वेद वस्तुतः केवल धार्मिक ग्रन्थ ही नही है वे ज्ञान विज्ञान के अनन्त स्रोत हैं। जिनमें विज्ञान तत्त्वचिन्तन नैतिकता व्यवहारशास्त्र शासनव्यवस्था अर्थशास्त्र आदि विषयों का समावेश है। वेदों से ही न्याय-वैशेषिक, सांख्य-योग, मीमांसा वेदान्तादि भारतीयदर्शन के विविध शाखाओं का विकास हुआ है। इन शास्त्रों का न केवल सिद्धान्त रूप से अपितु व्यावहारिक जीवन में भी विशेष योगदान एवं महत्त्व है। जैसे मीमांसा शास्त्र यज्ञ कर्मों के तत्त्वविचार एवं धर्मस्वरूप निरूपण के द्वारा कर्मके गूठार्थ का प्रतिपादन करता है। न्याय शास्त्र प्रमाण तर्क द्वारा निर्णय शक्ति की अभिवृद्धि करता है। महर्षि पतञ्जलि प्रणीत योग शास्त्र स्वास्थ्यलाभ के साथ चित्तवृत्ति निरोध द्वारा प्रकृतिपुरुषविवेक ज्ञान पूर्वक मोक्ष का उपदेश करता है। आयुर्वेद शास्त्र स्वास्थ्यसंरक्षण रोगनिदानादि का प्रतिपादन करता है
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन विद्या की नगरी काशी वाराणसी में हो रहा हैं। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में प्राचीन भारतीय ज्ञानविज्ञान के प्रचार प्रसार के उद्देश्य से शैक्षणिक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का काशी में आयोजित किया जा रहा है
द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी हेतु रजिस्ट्रेशन लिंक
https://forms.gle/6w6Dp1XXAuxViqyJ7
31/03/2025
30/03/2025
श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृ विश्वविद्यालय नई दिल्ली के दर्शनशास्त्र पीठान्तर्गत सर्वदर्शन विभाग ignc वाराणसी श्रीकाशी विद्वतपरिषद केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली एवं वैश्विक संस्कृत मंच के संयुक्त तत्वावधान से
वेदवेदान्तादिविद्याविशारदः परम्परायाः संवर्धनमेवमाधुनिकदृष्ट्या अनुप्रयोगः विषय पर एक अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठी का वाराणसी में दिनांक 12/एवं 13 अप्रैल 2025 को आयोजित हो रहा है।भारतीय संस्कृति के मेरुदण्ड रूप दिव्य वेदान्तादिविद्या प्राचीन ज्ञानविज्ञान परम्परा का मूल आधार है। वेदवदाङ्ग के साथ सूक्ष्मातिसूक्ष्म तर्कयुक्त न्यायशास्त्र गूढतत्त्व प्रधान मीमांसाशास्त्र धर्मशास्त्र परमपुरुषार्थ के साधनभूत वेदान्तशास्त्र व्यवहार के आधारभूत अर्थशास्त्र जीवनआयुसंवर्धक आयुर्वेदादि विद्याओं का महत्त्व न केवल प्राचीन जीवन पद्धति में अपितु आधुनिक युग में भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं। इस द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के माध्यम से इन शास्त्रों के व्यापक स्वरूप एवं लोकोपयोगिता व्यावहारिक प्रयोजन एवं आधुनिक सन्दर्भ में इनका पुनरुत्थान आदि विषयों पर विस्तार पूर्वक विचार किया जायेगा। इस द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में वेदवेदान्तादि विद्याओं के स्वरूप महत्त्व आदि पर विस्तार से चर्चा किया जायेगा। वेद वस्तुतः केवल धार्मिक ग्रन्थ ही नही है वे ज्ञान विज्ञान के अनन्त स्रोत हैं। जिनमें विज्ञान तत्त्वचिन्तन नैतिकता व्यवहारशास्त्र शासनव्यवस्था अर्थशास्त्र आदि विषयों का समावेश है। वेदों से ही न्याय-वैशेषिक, सांख्य-योग, मीमांसा वेदान्तादि भारतीयदर्शन के विविध शाखाओं का विकास हुआ है। इन शास्त्रों का न केवल सिद्धान्त रूप से अपितु व्यावहारिक जीवन में भी विशेष योगदान एवं महत्त्व है। जैसे मीमांसा शास्त्र यज्ञ कर्मों के तत्त्वविचार एवं धर्मस्वरूप निरूपण के द्वारा कर्मके गूठार्थ का प्रतिपादन करता है। न्याय शास्त्र प्रमाण तर्क द्वारा निर्णय शक्ति की अभिवृद्धि करता है। महर्षि पतञ्जलि प्रणीत योग शास्त्र स्वास्थ्यलाभ के साथ चित्तवृत्ति निरोध द्वारा प्रकृतिपुरुषविवेक ज्ञान पूर्वक मोक्ष का उपदेश करता है। आयुर्वेद शास्त्र स्वास्थ्यसंरक्षण रोगनिदानादि का प्रतिपादन करता है
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन विद्या की नगरी काशी वाराणसी में हो रहा हैं। इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में प्राचीन भारतीय ज्ञानविज्ञान के प्रचार प्रसार के उद्देश्य से शैक्षणिक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का काशी में आयोजित किया जा रहा है
द्विदिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी हेतु रजिस्ट्रेशन लिंक
https://forms.gle/6w6Dp1XXAuxViqyJ7
29/09/2023
Sarvdarshan sangrah workshop ke kuch smarniya chayachitra
Jawahar lal
29/09/2023
Sarvdarshan sangrah workshop me Jagadguru shankaracharya sardasarvagyapeethadhishwar ka swagat karte huye prof jawahar lal