10/11/2023
Eyes that lower mine,
A laugh which is lost on his lips.
That’s the untouched portrait.
Of the man to whom I belong.
When he holds me in his arms
When he speaks to me softly
I see life in pink
He speaks words of love to me
Everyday words
And that does something to me
He has entered into my heart
A piece of happiness
The cause of which I know
It’s him for me, me for him in life
He said that to me, swore it for life
And as soon as I see him
I feel in me
My heart that pounds
Neverending nights of love
A great happiness which takes its place
The troubles, the heartaches all fade
Happy, happy, to die of it
When he holds me in his arms
When he speaks to me softly
I see life in pink
He speaks words of love to me
Everyday words
And that does something to me
He has entered into my heart
A piece of happiness
The cause of which I know
It’s you for me, me for you in life
You said that to me, swore it for life
And as soon as I see you
I feel in me
My heart that pounds
03/11/2023
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26/10/2023
सफ़र में धूप तो होगी जो चल सको तो चलो
सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो
किसी के वास्ते राहें कहाँ बदलती हैं
तुम अपने आप को ख़ुद ही बदल सको तो चलो
यहाँ किसी को कोई रास्ता नहीं देता
मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो
कहीं नहीं कोई सूरज धुआँ धुआँ है फ़ज़ा
ख़ुद अपने आप से बाहर निकल सको तो चलो
यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
20/09/2023
हँसा ज़ोर से जब,
तब दुनिया बोली
इसका पेट भरा है l
और
फूट कर रोया जब
तब बोली नाटक है, नखरा है l
जब गुमसुम रह गया,
लगाई
तब उसने तोहमत घमंड की
कभी नहीं वह समझी इसके
भीतर कितना दर्द भरा है l
दोस्त !
कठिन है यहाँ किसी को भी
अपनी पीड़ा समझाना
दर्द उठे तो, सूने पथ पर
पाँव बढ़ाना, चलते जाना
--सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
22/07/2023
स्वीकारोक्ति_________
मैंने खेत इतने करीब से देखे हैं ,
कि फ़सलों के नाम बता दूँ l
रबी, खरीफ़, जायद
स्कूल में पढ़ा और वहीं तक सीमित न रहा।
ये भी बता सकता हूँ कि
पलाश, गुलमोहर, रातरानी
एक दूजे से कितने भिन्न हैं।
देवदार, चीड़, अशोक, पीपल
वृक्षों की शृंखला में हैं ,
इनकी पत्तियों का भान भी है ।
मैं बखूबी जानता हूँ लोक भाषा,
गाँव की बातें, उनके किस्से
महुआ, महाउर, धान, रोपाई , मानस ,चौपाई
ये मेरी मन के हिस्से सदा रहे l
प्रेम से प्रारंभ हो ,
प्रेम पर तमाम हुआ हूँ मैं l
क्या कुछ कम जाना मैंने?
क्या कुछ कम देखा मैंने?
05/07/2021
3) अपठित गदयांश अभ्यास पत्र
नाम ________________कक्षा – III
दिए गए गदयांश को पढ़कर उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर लिखो –
अमित की राशन की दुकान थी। उसकी दुकान पर दालें, चावल और आटे से लेकर नमकीन, बिस्कुट आदि सब कुछ मिलता था। ऐसी कोई चीज़ न होगी जो उसकी दुकान पर न मिलती हो। एक बार दुकान पर रखी शहद की बोतल गिर कर टूट गई। चारो और से कई मक्खियाँ उस बिखरे शहद पर टूट पढ़ीं। सब कुछ भूलकर वे शहद चाटने लगी। वे शहद चाटने मे इतनी मगन हो गईं कि उन्हें पता ही नहीं चला कि कब उनके पैर शहद में चिपक गए। अब उनके लिए उड़ना मुश्किल हो गया। उन्हें अपने लालच पर पछ्तावा होने लगा।
अभ्यास के लिए नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर दीजिए :–
अमित की किस चीज़ की दुकान थी?
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अमित की दूकान पर मिलने वाली कोई दो चीजो के नाम लिखे?
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अमित की दूकान में किस चीज की बोतल टूट गई थी?
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किस को लालच का पछ्तावा होने लगा?
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शहद में मक्खियो का क्या चिपक गया था?
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ऊपर दिए गद्यांश में से दो संज्ञा शब्द और दो सर्वनाम शब्द छाँटकर लिखिए |
संज्ञा – _________ ________ सर्वनाम – _________ ________
सही (√ ) या गलत (×) का निशान लगाओ |
क) अमित की राशन की दुकान थी | _______
ख) मक्खियो के पैर शहद में चिपक गए | _________
ग) अमित ने शहद चाटा | _______
घ) लालच पर पछ्तावा अमित को हुआ | ________