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​🏯 इतिहास, वास्तुकला और आस्था का सफर!
हमारे साथ जुड़िए और भारत के भव्य किलों, प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक स्मारकों की अनसुनी कहानियों और उनकी अद्भुत शिल्पकला को करीब से जानिए।📜
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कर्नाटक में कावेरी नदी के तट पर स्थित तलकाडू एक रहस्यमयी, रेत से ढका ऐतिहासिक कस्बा है। 4वीं से 10वीं शताब्दी तक यह पश्च...
23/08/2026

कर्नाटक में कावेरी नदी के तट पर स्थित तलकाडू एक रहस्यमयी, रेत से ढका ऐतिहासिक कस्बा है। 4वीं से 10वीं शताब्दी तक यह पश्चिमी गंगा राजवंश की राजधानी रहा और बाद में चोल, होयसल तथा विजयनगर साम्राज्यों द्वारा शासित हुआ। 17वीं सदी में मैसूर के वाडियार वंश के अधीन आने से पहले यह 30 से अधिक भव्य मंदिरों का समृद्ध केंद्र था।

लोककथा के अनुसार 1610 में रानी अलमेलम्मा ने राजा वाडियार से बचते हुए कावेरी में कूदने से पहले एक त्रिपक्षीय श्राप दिया - तलकाडू का रेत में तब्दील होना, मालंगी में भंवर बनना और मैसूर राजपरिवार का निःसंतान रहना। हालांकि, भूवैज्ञानिकों के अनुसार रेत का जमाव हवा और नदी के प्राकृतिक बहाव के कारण हुआ है।

यहाँ भगवान शिव के पांच चेहरों को समर्पित पांच पवित्र मंदिर हैं, जहां 9 से 12 वर्षों में एक बार खगोलीय संयोग पर प्रसिद्ध पंचलिंग दर्शन महोत्सव आयोजित होता है।

23/08/2026

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23/08/2026

लद्दाख: बर्फ़ीले रेगिस्तान और नीली झीलों का जन्नत!

जोधपुर का प्रसिद्ध मेहरानगढ़ किला 1459 में राव जोधा ने बनवाया था। सुरक्षा की दृष्टि से उन्होंने अपनी राजधानी मंडोर से बद...
23/08/2026

जोधपुर का प्रसिद्ध मेहरानगढ़ किला 1459 में राव जोधा ने बनवाया था। सुरक्षा की दृष्टि से उन्होंने अपनी राजधानी मंडोर से बदलकर 400 फीट ऊंची पहाड़ी पर यह किला बनाया, जो करीब 1,200 एकड़ में फैला है। इसकी दीवारें 120 फीट ऊंची और 70 फीट चौड़ी हैं। 500 वर्षों में कई राजाओं ने इसका विस्तार किया और अनेक हमलों के बावजूद दुश्मन इसे कभी जीत नहीं पाए।

इस किले से कुछ रोचक कहानियां भी जुड़ी हैं। कहा जाता है कि पहाड़ी पर रहने वाले एक साधु ने पानी की कमी का श्राप दिया था, जिसे दूर करने के लिए राजाराम मेघवाल ने किले की नींव में अपनी बलि दी थी।

किले में अंदर जाने के लिए 7 बड़े दरवाजे हैं, जिनमें जय पोल और तोपों के निशान वाला डेढ़ कांगड़ा पोल शामिल है। लोहा पोल के पास रानियों की सती हथेलियों के लाल निशान हैं। इसके अंदर मोती महल, फूल महल और शीश महल जैसे बेहद खूबसूरत महल बने हुए हैं।

महाराष्ट्र में नासिक से 28 किमी दूर ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित त्र्यंबकेश्वर मंदिर 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में...
22/08/2026

महाराष्ट्र में नासिक से 28 किमी दूर ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी में स्थित त्र्यंबकेश्वर मंदिर 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक है। एक पुराने मंदिर के स्थान पर वर्तमान भव्य काले बेसाल्ट पत्थर के ढांचे का निर्माण मराठा पेशवा बालाजी बाजीराव (नाना साहेब) द्वारा 1740 से 1760 ईस्वी के बीच करवाया गया था, जिसका उद्घाटन 16 फरवरी 1756 को महाशिवरात्रि पर हुआ।

नागर शैली में बने इस पावन मंदिर की सबसे अनूठी विशेषता इसका तीन मुखों वाला ज्योतिर्लिंग है, जो त्रिदेव - ब्रह्मा, विष्णु और रुद्र का प्रतीक है।

पवित्र गोदावरी नदी का उद्गम क्षेत्र भी यही है, जहां पास स्थित कुशावर्त कुंड इसका प्रतीकात्मक स्रोत माना जाता है। धार्मिक महत्व के अलावा, यह तीर्थ स्थल कालसर्प योग, नारायण नागबली और त्रिपिंडी श्राद्ध जैसे विशेष दोष-निवारण व पितृ-अनुष्ठानों के लिए पूरे भारत में प्रमुख केंद्र माना जाता है।

22/08/2026

मेहरानगढ़ किला के कुछ अनसुने और रहस्यमयी सच!

हम्पी स्थित 15वीं सदी का विट्ठल मंदिर विजयनगर साम्राज्य की द्रविड़ वास्तुकला का एक अनुपम यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। इ...
22/08/2026

हम्पी स्थित 15वीं सदी का विट्ठल मंदिर विजयनगर साम्राज्य की द्रविड़ वास्तुकला का एक अनुपम यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है। इस भव्य मंदिर का निर्माण राजा देवराय द्वितीय के शासनकाल में शुरू हुआ था, जिसे आगे चलकर 16वीं सदी में सम्राट कृष्णदेवराय ने मंडप और सभागार जोड़कर विस्तृत रूप दिया।

भगवान विष्णु के रूप विट्ठल को समर्पित यह मंदिर 1565 के तालिकोटा युद्ध में हुई लूटपाट के बाद आंशिक रूप से खंडहर हो गया, जिससे इसका गर्भगृह आज भी मूर्ति विहीन है।

इस मंदिर का सबसे बड़ा आकर्षण ठोस ग्रेनाइट से बना प्रसिद्ध पत्थर का रथ है, जो वास्तव में भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ का मंदिर है और जिसकी छवि भारतीय 50 रुपये के नोट पर भी अंकित है।

इसके अलावा, मुख्य मंडप में 56 ऐसे रहस्यमयी संगीतमय स्तंभ हैं, जिन्हें हल्के से थपथपाने पर मधुर स्वर निकलते हैं। पौराणिक मान्यता है कि भगवान विट्ठल को यह मंदिर अधिक भव्य लगा, इसलिए वे अपने साधारण धाम लौट गए थे।

22/08/2026

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21/08/2026

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21/08/2026

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