Hariom Verma

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Education

28/04/2026
28/04/2026

गेंदबाजों की कब्र खोदता आधुनिक टी20 क्रिकेट: आखिर गेंदबाज जाए तो जाए कहाँ?
आज के दौर में जब हम क्रिकेट देखते हैं, तो एक बड़ा सवाल मन में कौंधता है कि क्या यह वही खेल है जिसे 'जेंटलमैन गेम' कहा जाता था?
आज का टी20 और आईपीएल जैसा क्रिकेट अब कौशल की परीक्षा नहीं, बल्कि गेंदबाजों की बेबसी का तमाशा बन चुका है। मैदान पर सफेद कपड़े पहनकर या रंगीन जर्सी में पसीना बहाता वह गेंदबाज आज किसी बलि के बकरे से कम नजर नहीं आता। खेल के नियम, मैदान की बनावट और दर्शकों की मांग, सब कुछ सिर्फ एक ही दिशा में झुक चुके हैं—चौके और छक्के।

एक समय था जब गेंदबाज अपनी लाइन और लेंथ से बल्लेबाजों को खौफ में रखते थे, लेकिन आज का मंजर कुछ और ही है। स्टेडियम की बाउंड्री जो कभी 85-90 मीटर की हुआ करती थी, उसे सिकोड़कर अब 65-75 मीटर तक सीमित कर दिया गया है।
ऐसा लगता है मानो मैदान नहीं, बल्कि किसी गली-मोहल्ले के पार्क में मैच हो रहा हो। आज के दौर में एक टॉप-एज भी बाउंड्री के पार जाकर गिरता है और गेंदबाज बस अपना सिर पकड़कर खड़ा रह जाता है।
उसे समझ ही नहीं आता कि अच्छी गेंद फेंकने के बावजूद उसे सजा क्यों मिल रही है।

पिचें अब बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग और गेंदबाजों के लिए कब्रिस्तान बनती जा रही हैं। सपाट पिचें, भारी-भरकम बल्ले और छोटी बाउंड्री ने गेंदबाजों की वैल्यू को शून्य के करीब पहुंचा दिया है।
आईपीएल जैसे टूर्नामेंट्स में तो हालत और भी बदतर है, जहाँ करोड़ों की भीड़ सिर्फ यह देखने आती है कि गेंद कितनी दूर और कितनी बार दर्शक दीर्घा में गिरेगी। क्या गेंदबाज केवल दर्शकों का मन बहलाने के लिए रह गया है?
क्या उसकी भूमिका सिर्फ इतनी है कि वह आए, बल्लेबाज को गेंद परोसें और दुनिया उसकी कुटाई का आनंद ले?

गेंदबाज जब तपती धूप में, फटी हुई पिचों पर पसीना बहाता है, तो उसके चेहरे पर जो हताशा और निराशा दिखती है, वह किसी का भी दिल तोड़ सकती है। टूटे हुए स्टंप्स और उखड़ी हुई मिट्टी के बीच खड़ा वह खिलाड़ी यह सोचता है कि आखिर उसकी गलती क्या है?
क्या क्रिकेट सिर्फ बल्लेबाजों का खेल रह गया है?
जब दर्शक स्टेडियम में खुशी से झूम रहे होते हैं, तब उस गेंदबाज की आत्मा रो रही होती है जिसे पता है कि वह चाहे कितनी भी जान लगा ले, तकनीक और नियम उसके खिलाफ खड़े हैं।

हमें यह समझना होगा कि क्रिकेट की खूबसूरती बल्ले और गेंद के बीच के कड़े संघर्ष में है, न कि एकतरफा मार-पिटाई में। अगर यही हाल रहा, तो आने वाले समय में कोई बच्चा गेंदबाज बनने का सपना नहीं देखेगा।
हर कोई हाथ में बल्ला थामकर बस छक्के मारने की कोशिश करेगा। गेंदबाजों को भी बराबर का सम्मान और अवसर मिलना चाहिए। खेल को इतना क्रूर मत बनाइए कि गेंदबाज मैदान पर आने से डरने लगे।

आज का टी20 क्रिकेट वास्तव में गेंदबाजों की कब्र खोद रहा है। यह समय है कि हम इस असंतुलन पर विचार करें, वरना यह खेल अपनी रूह खो देगा। गेंदबाज कोई खिलौना नहीं है, वह इस खेल का आधा हिस्सा है। उसकी बेबसी पर तालियां बजाना बंद कीजिए और उसके संघर्ष को भी उतनी ही तवज्जो दीजिए जितनी एक शतक बनाने वाले बल्लेबाज को मिलती है। आखिर गेंदबाज क्या करें?
यह सवाल आज हर क्रिकेट प्रेमी को खुद से पूछना चाहिए।

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21/04/2026

लॉस वेगास के एलीगेंट स्टेडियम में आयोजित रेसलमेनिया 42 एक ऐतिहासिक और भावुक पल का गवाह बना। रविवार की रात द बीस्ट ब्रॉक लेसनर ने उभरते हुए सितारे ओबा फेमी से मिली करारी हार के बाद पेशेवर रेसलिंग की दुनिया को अलविदा कह दिया है। वेगास की चकाचौंध के बीच ब्रॉक लेसनर और ओबा फेमी का मुकाबला किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं था। हालांकि, 48 साल के लेसनर पर फेमी की ताकत भारी पड़ी।

ओबा फेमी ने अपने फिनिशिंग मूव फॉल फ्रॉम ग्रेस का इस्तेमाल कर लेसनर को चित कर दिया और एक ऐसी जीत दर्ज की जिसने उन्हें WWE के नए भविष्य के रूप में स्थापित कर दिया। लेसनर की यह हार सिर्फ एक मैच का अंत नहीं, बल्कि उनके दो दशक से भी लंबे सुनहरे करियर का अंत लग रहा थी।

भावुक विदाई और पॉल हेमैन के साथ आखिरी पल
मैच खत्म होने के बाद पूरा स्टेडियम थैंक यू ब्रॉक के नारों से गूंज उठा। लेसनर काफी भावुक नजर आए। उन्होंने रेसलिंग की पुरानी परंपरा का पालन करते हुए अपने ग्लव्स और जूते रिंग के बीचों-बीच उतार दिए, जो इस बात का स्पष्ट संकेत था कि अब वे दोबारा रिंग में नहीं उतरेंगे। इसके बाद उन्होंने अपने लंबे समय के मैनेजर और दोस्त पॉल हेमैन को गले लगाया। रिंग से बाहर निकलने से पहले लेसनर ने घुटनों के बल बैठकर रिंग के कैनवास को चूमा, जिसे देखकर वहां मौजूद हजारों फैंस की आंखें नम हो गईं।

15/04/2026

Salute for Him

15/04/2026

Answer

13/04/2026

🌟 **Happy Ambedkar Jayanti!** 🌟

Today, we celebrate the birth anniversary of **Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar** — the chief architect of the Indian Constitution, a visionary leader, social reformer, and champion of equality and justice.

His life and teachings continue to inspire millions to fight against discrimination, uphold human rights, and build an inclusive society where every individual has dignity and opportunity.

Let us remember his powerful words:
**“Be educated, be organised, and be agitated.”**

Jai Bhim! 🙏
Jai Bharat!

12/04/2026

Seeing Vaibhav's 78 runs off 26 balls, I'm amazed! 🏏 It makes me wonder just how explosive Suresh Raina's 87 runs off 25 balls must have been. 🔥 Pure power hitting! 🤩 What do you guys think? 🤔

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