Basics of Astrology : learn and predict

Basics of Astrology : learn and predict Learn to read your birth chart in simple way. You would be able to get basic idea about your BIRTH chart. This page is only for education purposes.

गजकेसरी योगगुरु से चन्द्र का केन्द्र में स्थित होना, व्यक्ति की कुण्डली में गजकेसरी योग बनाता हैगजकेसरी योग प्रसिद्ध धन ...
21/07/2022

गजकेसरी योग

गुरु से चन्द्र का केन्द्र में स्थित होना, व्यक्ति की कुण्डली में गजकेसरी योग बनाता है
गजकेसरी योग प्रसिद्ध धन योगों में से एक योग है. गजकेसरी योग जिस व्यक्ति की कुण्डली में होता है. उस व्यक्ति के धन, सुख, यश व योग्यता में वृ्द्धि होती है.

इसकी शुभता से व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को बल प्राप्त होता है. तथा ऎसा व्यक्ति अपने शत्रुओं पर अपना प्रभाव बनाये रखने में सफल होता है. विद्वता, शक्ति, अधिकार व बुद्धि इन सभी गुणों की प्राप्ति की संभावनाएं भी यह योग बनाता है.

यह योग बड़े बड़े राजनेता ,मंत्री, विधायक बड़े बड़े व्यापारी अभिनेता , उच्च पद पर आसीन जातक की कुन्डली मे ज्यादा देखा जाता है

गुरु की चंद्रमा पर पांचवी या नोवी दृस्टि भी इस योग का निर्माण करती है ऐसा मैंने उच्च पद पर आसीन जातक की कुन्डली को देख कर अनुभव लिया है

सबसे अच्छा गजकेसरी योग गुरु + चन्द्रमा की युति एक ही भाव मे हो यह योग शुभा – शुभ माना जाता है

गुरु कर्क राशि मे उच्च का होता है पर चन्द्रमा कर्क राशि का स्वामी जब एक दोनों की युति कर्क राशि पर
हो तो बहुत अच्छा और शुभ माना जाता है

शुभ भाव केंद्र मे प्रथम , चतुर्थ . सप्तम दशम। या फिर त्रिकोण मे पंचम या नवम भाव मे बने तो गजकेसरी योग अत्यंत
शुभा – शुभ हो जाता है

यह योग मीन राशि धनु राशि।वृष राशि पर भी बहुत लाभ प्रद रहता है मगर यह योग 6 8 12 भाव मे ना हो अगर यह 6 8 12 भाव मे हुये तो जातक को इतना लाभ नहीं दे पाते दूसरी बात यह की अगर गुरु वक्री हुआ तो भी उत्तम फल नहीं मिलेगा यह योग चन्द्रमा की नीच राशि पर या गुरु की नीच राशि पर हुआ तो भी निष्फल हो जायेगा अगर ग्रह का नीच दोष भंग ना हो रहा हो तो लगन कमजोर हुआ तो भी योग मे कमी आ जायेगी यह जानकारी देना इस लिये जरुरी समझ रहा हूँ की मित्र गण पूछ लेते है हमारी कुन्डली मे यह योग है मगर हम तो एक नार्मल जीवन जी रहे है मगर इस योग के आलावा भी ग्रह की दृस्टि और कुन्डली के किस भाव मे योग बन रहा है देख लेना चाहिए

पहले भाव मे – यह योग बने तो जातक कोई नेता या अभिनेता होता है ऐसे जातक को देखने के लिये जनता उतावली हो जाती है
उसका रहन सहन राजाओ जेसा होता है
यह योग जातक को गलत रास्ते पर भी जाने से रोकता है

जातक ईस्वर को मानने वाला होता है

दूसरे भाव मे बने तो उच्च घराने मे जन्म लेता है
वाणी का धनी होता है
धन सम्पदा की कमी नहीं रहती
ऐसे जातक की बात को गौर से सुना जाता है

ऐसे जातक कथा वाचक और बड़े बड़े साधू संत भी देखे गए है

तीसरे भाव मे यह योग बने तो भाई बहन को भी उच्च पद पर ले जाता है
जातक बहुत पराक्रमी और मान-सममान वाला होता है

चौथे भाव मे यह योग बने तो माँ से अत्यंत प्यार और लाभ मिलता है
भूमि और वाहन क उच्च सुख प्रदान होता है
रहने के लिये अच्छा निवास स्थान होता है

पंचम भाव मे यह योग बने तो बुद्धि के बल पर धन कमाने का संकेत होता है
जातक बुद्धिशाली
ऐसा जातक अच्छा स्कूल टीचर , वैज्ञानिक ,
नए नए अविष्कार करने वाला होता है !
उच्च कोटि का लेखक
ऐसे जातक को पूर्ण संतान का सुख मिलता है
संतान के उच्च पद पर आसीन होने के योग भी बनते है

छटे भाव मे यह योग कुछ कमजोर पड जाता है
छटे भाव मे गुरु शत्रुहंता होता है शत्रु दब कर रहते है
साथ मे चंद्रमा मन और माँ के लिये ठीक नहीं होता

सप्तम भाव जीवन साथी का होता है जीवन साथी उच्च पद पर आसिन होता है
उच्च घराने मे शादी करवाता है
जीवन साथी उच्च विचारो वाला होता है

अष्टम का गजकेसरी योग भी कमजोर पड़ जाता है
यह योग जातक को गुप्त विद्या मे ले जाता है
इस योग मे बड़े बड़े तांत्रिक और साधू सन्त देखे जाते है
यह योग कई बार अचानक धन भी दिलवा देता है
यह योग गुप्त धन की प्राप्ति जरूर देता है
जातक कल्पना भी नहीं कर सकता वहाँ से धन की प्राप्ति हो जाती है

नवम भाव मे गजकेसरी योग – जातक को कर्म से जायदा भाग्य के दुआरा मिल जाता है
नवम भाव धर्म और भाग्य का माना गया है
जातक बहुत भाग्य शाली होता है
और भगवान् के प्रति सच्ची श्रद्धा रखता है

दसमं भाव मे गजकेसरी योग – पिता को उच्च पद पर ले जाता है जातक को भी उच्च पद प्राप्त होता है
जातक भाग्य से ज्यादा कर्म को महत्व देता है
समाज मे मान – सम्मान दिलवाता है

ग्यारवाँ भाव मे गजकेसरी योग – जातक की इनकम के एक से ज्यादा स्रोत होते है
जातक को कई प्रकार से इनकम आती है
कम मेहनत मे जायदा पैसा का संकेत होता है
ऐसा जातक घर बेठे पैसा कमाता है

भाव मे गजकेसरी योग

गजकेसरी योग से मिलने वाले फल भी राशियों के गुणतत्वों से प्रभावित होते है. अलग-अलग राशियों के व्यक्तियों के लिये गजकेसरी योग अलग अलग फल होता है. विभिन्न राशियों में गजकेसरी योग से किस प्रकार के फल प्राप्त हो सकते है.

1. “गजकेसरी’ योग मेष राशि में

मेष राशि में गजकेसरी योग बनने पर व्यक्ति को तर्क करने में कुशलता प्राप्त होती है. वह वाद-विवाद में निपुण होता है. ऎसे व्यक्ति का ध्यान सदैव अपने लक्ष्य पर होता है. इसलिये जीवन में उच्च सफलता प्राप्ति की संभावनाएं बनती है. इस योग वाला व्यक्ति अपने शत्रुओं पर अपना प्रभाव बनाये रखता है.

गजकेसरी योग धन योग है. इसलिये व्यक्ति के धन में स्वभाविक रुप से वृ्द्धि होती है. योग की शुभता व्यक्ति को संतान संपन्न बनाने में सहयोग करती है. उसे यश व नाम की प्राप्ति होती है.

इस योग में गजकेसरी योग क्योकि मेष राशि में बन रहा है. इसलिये व्यक्ति के स्वभाव में क्रोध के गुण व्याप्त होने की भी संभावनाएं बनती है. इस योग का व्यक्ति न्याय करने में कठोर निर्णय लेने से भी नहीं चूकता है.

2. “गजकेसरी’ योग वृ्षभ राशि में

जब किसी व्यक्ति की कुण्डली में गजकेसरी योग बनने पर व्यक्ति स्वभाव से दयालु, समाजसेवी व दुसरों की सहायता के लिये तत्पर रहने वाला होता है. उसकी धार्मिक कार्यो में विशेष रुचि होने की संभावनाएं बनती है. योग की शुभता व्यक्ति को समृ्द्धिशाली बनाने में सहयोग करती है. तथा ऎसा व्यक्ति सोच-विचार के बोलने की प्रवृ्ति रखता है.

3. “गजकेसरी’ योग मिथुन राशि में

अगर गजकेसरी योग मिथुन राशि में बनने पर व्यक्ति के धन में वृ्द्धि होती है. यह योग व्यक्ति को वैज्ञानिक बुद्धि का बनाता है. तथा व्यक्ति दूसरों के विषय में अच्छे विचार रखता है.

4. “गजकेसरी’ योग कर्क राशि में

गजकेसरी योग का निर्माण जब कर्क राशि में हो रहा हों तो व्यक्ति विद्वान हो सकता है. ऎसा व्यक्ति जिस भी क्षेत्र में जाता है, अपना प्रभाव बनाये रखता है. वह धार्मिक आस्थावान होता है. तथा संस्कारों से युक्त भी होता है. उसे सत्य बोलने में रुचि होती है. तथा स्वभाव में दूसरों के प्रति किसी प्रकार की कोई कुटिलता नहीं होती है. इस योग के व्यक्ति को यश व प्रसिद्धि की प्राप्ति होती है.

5. “गजकेसरी’ योग सिंह राशि में

गजकेसरी योग क्योकि गज व सिंह के योग से बनता है. इसलिये सिंह राशि में सिंह की सभी विशेषताएं व्यक्ति के स्वभाव में आने की संभावनाएं बनती है. सिंह राशि में गजकेसरी योग व्यक्ति को शत्रुओं का सामना बहादुरी से करने की योग्यता देता है. ऎसा व्यक्ति अपने मित्रों कि सहायता के लिये तैयार रहता है. वह राजसिक वस्त्र पहनना पसन्द करता है. तथा उसे प्राकृ्तिक प्रदेशों में घूमने का शौक हो सकता है.

6. “गजकेसरी’ योग कन्या राशि में

कन्या राशि में गजकेसरी योग व्यक्ति को बुद्धिमान, धार्मिक, चतुर और यशस्वी बनाता है.

उपरोक्त सभी राशियों में गजकेसरी योग के पूर्ण फल पाने के लिये यह आवश्यक है कि चन्द्र व गुरु दोनों ही मित्रक्षेत्री, शुभ भावेशों से युक्त – द्र्ष्ट व शुभ भावस्थ हों, तभी योग के सभी फल प्राप्त होने की सम्भावनाएं बनती है.

7. ” गजकेसरी योग” तुला राशि में

गजकेसरी योग तुला राशि में बने तो व्यक्ति विद्वान होता है. वह धनी होता है. इस योग के व्यक्ति को विदेश में निवास करना पड सकता है. उसे कला विषयों से स्नेह होने की संभावना बनती है.

8. ” गजकेसरी योग” वृ्श्चिक राशि में

वृ्श्चिक राशि में गजकेसरी योग बने तो व्यक्ति ज्ञानी व अपने विषय क्षेत्र में कार्य कुशल होता है. यह योग व्यक्ति को दृढ आस्था वाला बनाता है. अपनी धार्मिक आस्था के रहते वह धर्म के क्षेत्र में विशेष कार्य करता है. उसके स्वभाव में कुछ जिद्द का भाव हो सकता है. यह योग मंगल की राशि में बन रहा है, इसलिये व्यक्ति में कुछ लालच का भाव हो सकता है.

9. ” गजकेसरी योग” धनु राशि में

जब किसी व्यक्ति की कुण्ड्ली में गजकेसरी योग में होने पर योग के फलस्वरुप व्यक्ति कि धार्मिक आस्था में वृ्द्धि होती है. यह योग व्यक्ति को आध्यात्मिक प्रवृ्ति का बना सकता है. यह योग क्योकि गुरु के संयोग से बन रहा है इसलिये योग कि शुभता से व्यक्ति विद्वान बनता है.

10. “गजकेसरी योग” मकर राशि में

शनि की मकर राशि में इस योग के बनने पर गजकेसरी योग उतम श्रेणी के फल नहीं देता है. फिर भी इस योग से व्यक्ति में चिन्तन प्रवृ्ति आती है. व गंभीर विषयों पर कार्य करना पसन्द करता है.

11. “गजकेसरी योग” कुम्भ राशि में

इस राशि में भी व्यक्ति की सेवा के कार्यो में कम रुचि लेता है. मित्रों पर कुछ अपव्यय कर सकता है. शनि व गुरु के संबन्ध मित्रवत न होने के कारण शनि की राशियों में गजकेसरी योग की शुभता में कमी होती है. इस स्थिति में गजकेसरी योग से मिलने वाले उपरोक्त फल कम शुभ होकर प्राप्त होते है.

12. “गजकेसरी योग” मीन राशि में

मीन राशि क्योकि गुरु की अपनी राशि है. मीन राशि में गजकेसरी योग बनने पर व्यक्ति को धार्मिक पुस्तकों के अध्ययन में रुचि होने कि संभावनाएं बनती है. उसे धन व सम्मान की प्राप्ति होती है. ऎसा व्यक्ति द्र्ढ निश्चय वाला होता है. तथा उसमें संयम का भाव पाया जाता है II

केमद्रुम योगपरिभाषा - ( क ) चन्द्र से द्वितीय तथा द्वादश स्थान में जब कोई - भी ग्रह न हो तो "केंमद्रुम" नाम का दरिद्रताद...
04/07/2022

केमद्रुम योग

परिभाषा -
( क ) चन्द्र से द्वितीय तथा द्वादश स्थान में जब कोई - भी ग्रह न हो तो "केंमद्रुम" नाम का दरिद्रतादायक योग बनता है।
( ख ) जब चन्द्र किसी ग्रह से युत न हो और न उससे अगले तथा पिछले केन्द्रो मे ही कोई ग्रह स्थित हो तो भी "केमद्रुम" नाम का दरिद्र योग बनता है ।

हेतु -
चन्द्र जहाँ स्थित होता है उसको चन्द्र लग्न कहते है । धनप्राप्ति मे अन्य लग्नो की भाँति "चन्द्रलग्न" का भी बड़ा महत्व है, ज्योतिष के आचार्यों का कहना है कि चन्द्र के विषय मे यह सिद्धात मौलिक रूप से समझ लेना चाहिये कि यदि चन्द्र किसी भी ग्रह के प्रभाव मे न हो तो वह निर्बल समझा जाना चाहिये और निर्बल चन्द्र का अर्थ हे लग्न का निर्बल होना अर्थात् मनुष्य का धन, स्वास्थ्य, यश, बल आदि से वर्जित होना । अब वे कौन-कौन सी स्थितियां है जिनमे यह समझा जावे कि चन्द्र पर कोई प्रभाव नही है । एक स्थिति तो यह है कि चन्द्रके द्वितीय द्वादश स्थान में कोई ग्रह न हो । दूसरी स्थिति यह है कि चन्द्र न तो किसी ग्रह से युक्त अथवा दृष्ट हो न ही इसके केन्द्र मे कोई ग्रह स्थित हो । योग का आशय यह है कि चन्द्र निर्बल तथा प्रभावहीन हो । यदि चन्द्र से छठे, अथवा आठवे स्थान मे ग्रह हो तो भी चन्द्र पर ग्रहो का प्रभाव समझना चाहिये और इसी लिये 'केंमद्रुम" का अभाव समझना चाहिये। इसी प्रकार चन्द्र यदि स्वय केन्द्र में स्थित हो तो भी बली हो जायेगा । इसी लिये 'केंमद्रुम' योग न रहेगा ।

शास्त्रोक्ति
(क) कान्तान्नपानगृहवस्त्र सुहृद् विहीनो, दारिद्रयदु खगददैन्यमलै रुपेत ।
प्रेष्यः खल. सकललोकविरुद्धवृत्ति,
केमद्रुमे भवति पार्थिववंशजोऽपि ||

( सारावली १३ ७ ) अर्थात् यदि केंमद्रुम योग हो तो मनुष्य, स्त्री, अन्न, पान, गृह, वस्त्र, व बन्धुजनों से विहीन होकर दरिद्रता, दुख, रोग, परतन्त्रता व मल से युक्त, दूसरो से द्वेष करने वाला, दुष्ट और लोगों का अनिष्ट करने वाला होता है, भले ही उसका जन्म किसी राजा के यहाँ ही क्यो न हुआ हो ।

(ख) रविवजं द्वादशगैरनफा चन्द्राद्वितीयगैः सुनफा | उभयस्थितः दुरुधरा केमद्रुमसंज्ञकोऽतोन्यः ॥
अर्थात् - यदि चन्द्र से द्वादश स्थान में रवि को छोड़ कर ( क्योकि रवि के चन्द्र से द्वादश होने से चन्द्र, सूर्य के सान्निध्य मे पक्ष बल में अतीव निर्बल हो जायेगा और इसीलिये फल देने में असमर्थ हो जायेगा ) कोई भी ग्रह स्थित हो तो "अनफा" नाम का योग बनता है और यदि इसी प्रकार सूर्य को छोड़ कर अन्य कोई ग्रह चन्द्र से द्वितीय मे स्थित हो तो सुनफा' नाम का योग बनता है और यदि दोनो स्थानों में सूर्य को छोड़ कर कोई ग्रह स्थित हो तो "दुरुधरा" नाम का योग बनता है। परन्तु उक्त स्थानो में अर्थात् चन्द्र से द्वितीय तथा द्वादश मे कोई भी ग्रह न हो तो "केमद्रुम" नाम का योग बनता है।

(ग) "केमद्रुम मे" भवति पुत्र कलत्रहीनो, देशान्तरे व्रजति दुखसमाभितप्त ।
ज्ञातिप्रमोदनिरतो मुखर. कुचैलो, नीच सदा भवति भीतियुतश्चिरायु ॥ (मानसागरी )
अर्थात् – “केंमद्रुम" योग में उत्पन्न हुआ मनुष्य पुत्र तथा - स्त्री से हीन, भ्रमणशील, दुखी, सबन्धियो से दूर, मोद से विरक्त, मनमानी करने वाला, गन्दा, नीच, भयभीत होकर आयु पाता है ।

( घ) केन्द्र शीतकरेऽथवा ग्रहयु ते केमद्र सो नेष्यते । केचित्केन्द्रनवांशकेषु इति वदन्ति उक्ति प्रसिद्धा न ते ॥

(मानसागरी) अर्थात् — यदि चन्द्र से केन्द्र मे ग्रह स्थित हो तो "केमद्रुम" योग - नही बनता । इसी प्रकार यदि चन्द्र के साथ किसी भी ग्रह की युति हो तो भी केमद्रुम नही होता । कई विद्वान् यह कहते हैं कि केन्द्रो से अनफा-सुनफा योगों की उत्पत्ति होती है अर्थात् चन्द्र से पिछले केन्द्र मे ग्रह हो तो 'अनफा' ; आगामी (चतुर्थ ) केन्द्र ग्रह हो तो मे सुनफा और दोनो मे हो तो दुरुधरा योग बनता है और यदि चन्द्र से चतुर्थ तथा दशम केन्द्र ग्रहो से खाली हो तो "केमद्रुम" नाम का योग बनता है। परन्तु यह उक्ति प्रसिद्ध अर्थात् सर्वमान्य नहीं है ।

सूचना – चन्द्र से केन्द्रो मे ग्रहो की स्थिति से केमद्रुम भंग होता है हम इस उक्ति से सहमत हैं। चाहे यह बात प्रसिद्ध न भी हो क्योकि केन्द्र मे ग्रहो की स्थिति से उन ग्रहो का चन्द्र पर प्रभाव पड़ेगा ( देखिये नियम पहला ) जिसके फलस्वरूप चन्द्र बली हो जावेगा और केंमद्रुम का भंग होगा।

(ड) " पूर्ण शशी यदि भवेत्छुभसंस्थितो वा, सौम्यामरेज्य मृगुनन्दनसयुतश्च ।
पुत्रार्थसौख्यजनक कथितो मुनीन्द्र, केमद्रुमे भवति मंगलसुप्रसिद्धि । ( मानसागरी )
अर्थात्- यदि चन्द्र पूर्ण हो अथवा शुभ स्थिति में हो अर्थात् बुध, गुरु, अथवा शुक्र से सयुक्त हो तो पुत्र धन तथा सुख को उत्पन्न , करने वाला कहा गया है और केमद्रुम होने पर भी अर्थात् चन्द्र से द्वितीय, द्वादश, ग्रहो के अभाव होने पर भी मनुष्य मङ्गल तथा यश को प्राप्त होता है ।

(च) जातकपारिजात में श्रुतकीर्ति का निम्नलिखित उद्धरण मिलता है :

"चन्द्रात् चतुर्थं सुनफा, दशमस्थितैः कीर्तितोऽनफा विहगै । उभयस्थित दुरुधरा केमद्रुमसज्ञितो ऽन्यथा ॥ (७-८३ अर्थात् चन्द्र से चतुर्थ भाव मे ग्रह रहने से सुनफा, चन्द्र से दशम

केन्द्र मे ग्रह रहने से अनफा, दोनों केन्द्रों में ग्रह रहने से दुरुधरा और दोनो केन्द्रों के ग्रहों से रहित होने पर "केमद्रुम" नाम का योग बनता है। (देखिये नियम पहला ) |

( छ ) एक अन्य प्रकार का 'केंमद्रुम' योग सर्वार्थ चिन्तामणिकार ने निम्न प्रकार कहा है

"भाग्येश्वरे रिफगते तदीशे वित्तस्थिते,

भ्रातृगतैश्च पापै केंमद्रुम मेऽस्मिन भवेत् ॥
कुभोगी दुष्कर्मयुक्तोऽन्यकलतगामी ।

अर्थात् जव नवम भाव का स्वामी द्वादश भाव में स्थित हो और द्वादश भाव का स्वामी द्वितीय भाव में स्थित हो और तृतीय स्थान मे पापी ग्रह स्थित हों तो भी "केमद्र म" नाम का दरिद्रतादायक योग समझना चाहिये । इस योग में उत्पन्न हुआ मनुष्य अभक्ष्य-भक्षी, दुष्ट कर्मों में लगा हुआ तथा परदारगामी होता है ।

"Pray not until Lord Krishna hears you,But until you listen to Sri Krishna"!!!हरि ऊं तत़ सत़।।।
20/06/2022

"Pray not until Lord Krishna hears you,But until you listen to Sri Krishna"!!!
हरि ऊं तत़ सत़।।।

10/06/2022
02/02/2022

Sagittarius Ascendant (धनु लग्न )

19/01/2022

SCORPIO ASCENDANT (वृश्चिक लग्न)

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