11/07/2020
https://youtu.be/mcg7ctWWUPw
Aristotle Classification of Constitution || अरस्तू संविधान का वर्गीकरण
In this video aristotle's classification of constitution/government has been discussed link of Aristotle theory of justice and theory of slavery https://yout...
11/07/2020
https://youtu.be/jExqU9Yk2_Q
Aristotle || Theory of Origin of State || अरस्तू || राज्य की उत्पत्ति का सिद्धांत
In this video, Aristotle Theory of origin of state has been discussed link for Aristotle theory of Justice ane theory of slavery https://youtu.be/ua7trYTwVWQ...
11/07/2020
https://youtu.be/23RwQNUVOZI
Plato Theory of Communism Ideal State and Philosopher King
In this video, Plato theory of communism, ideal state, philosopher king and regim system has been discussed Link for plato theory of justice and education ht...
28/06/2020
https://youtu.be/Onr1SHduaw8
Aristotle Theory of Justice and slavery
Aristotle Theory of Justice and Theory of Slavery has been discussed in this video of slavery
19/06/2020
https://youtu.be/w8KuuRR-Hs4
Plato Important Question Answer for DSSSB NET
In this video, important question and its answer from topic Plato has been discussed link for 1st video of plato(Theory of Justice & Theory of Education) lin...
05/06/2020
https://youtu.be/VIK1BjQ27DE
Plato Theory of Justice and Theory of Education
In this video, Interoduction of life of Plato and his Theory of Justice and Theory of Education has been discussed
29/05/2020
पहली बार कुछ लिखने का मन हुआ है। पर लिखूँ क्या? दर्द-ए- दासतान उन लोगो का, जो सक्षम नहीं है-पर किस चीज में? रोटी कमाने में या रोटी बनाने में या फिर उस रोटी को अपने परिवार की पेट तक पहुचाने में। लेकिन ये तो इन सबमे सक्षम है। ये लोग रोटी कमाते भी है, बनाते भी है और अपने परिवार की पेट तक पहुचाते भी है। फिर समस्या क्या है? सड़क पर नंगे पैर चलते, ट्रॉली पर लेटकर घिसटते, माता-पिता के कन्धे पर लटकते ये लोग ही समस्या है। समस्या हैं ये लोग उन राजदारों के लिये, जिनके लिये सत्ता ही सब कुछ है। सरकारी पक्ष परेशान है इन भूखे नंगे फ़कीरो से। ये रुकते क्यो नहीं। सरकारी आदेश है-कोई घर से बाहर ना निकले, पुलिस भी उन्हे घर के अंदर घुसे रहने के लिये अथक प्रयास कर रही है। पर ये मानते क्यो नही है। सरकार ने यह भी घोषणा की है कि घर मे ही रहिये। सभी सुविधाये मिलेगी। परंतु ये रुक क्यो नही रहे? दो-चार-दस दिन भूखे नही रह सकते क्या? ये विपक्ष वाले भी कम नही है। दो चार मरे नही कि लगे हो हल्ला मचाने। मिडिया को तो किसी तरह मैनेज कर लेते, पर ये सोसल मिडिया का क्या करें? आज कल तो सोसल मीडिया पर ही सरकार की धज्जिया उड़ा देते है। उधर विपक्ष भी मौके की तलाश मे बैठे है। कोई बस उप्लब्ध करा रहा है तो कोई सड़क पर चलते इन समस्याओ को सरकारी समस्या बनाने मे जुटे हुए है। ये भी गिद्ध की तरह नज़र लगाये बैठे है कि कब दो चार मरे कि इसे सरकारी समस्या बनाये।
इधर मिडिया वाले का भी दुकान खुब चल रहा है। आजकल यही सरकार है, यही न्यायालय है। बस वही नही है जो इन्हे होना चाहिये। इसने भी सड़क पर चलती, नहीं नहीं , रेंगती घिसटती इन समस्याओ को राष्ट्रिय अपराधी घोषित कर दिया है, नहीं नहीं देशद्रोही घोषित कर दिया है। सरकार की बात नही सुनने/मानने वाला राष्ट्र द्रोही ही तो होता है। टीवी पर रोज बहस हो रही है, चिल्लम पो हो रही है, टीवी का स्पीकर फटने को है, पर इन बहस करने वालो का गला है कि दुखता ही नहीं।
पर इतना सब होने के बाद भी ये समस्या, नहीं नहीं, राष्ट्रिय अपराधी, नही नही, देश द्रोही अभी भी सड़क पर है। उन्हे पता भी नही है कि वे समस्या बन चुके है। वे तो अभी अपनी समस्या से ही जुझ रहे है। उनके पास अब काम नही है। जब काम नही है तो फिर रोटी कमाने की समस्या, रोटी बनाने की समस्या और रोटी को अपने और अपनो की पेट तक पहुचाने की समस्या। भूखे मरने की नौबत। यहाँ परदेश मे मरे तो नगर निगम वाले लावारिस की तरह जला देंगे या गाड़ देंगे। अपने घर पर अपनो के बीच मरेंगे तो कम से कम क्रिया कर्म तो ठीक से हो जायेगा। बस इतनी सी इच्छा लिये वो सड़को पर चले जा रहे है, रेंग रहे है, घिसट रहे है।
न्यायालय ने इस समस्या का संज्ञान लिया। कहा, इस समस्या का जल्दी समाधान होना चाहिये। अब संज्ञान लेने वाले न्यायाधीश भी समस्या बन गये। एक समस्या कम थी क्या, जो दुसरा आ गया। जल्दी जल्दी उन न्यायाधीशों का स्थानांतरण कर इस समस्या का समाधान किया गया। लेकिन सड़को की समस्या अभी ज्यों का त्यों है।
अब ये अपने राज्य के सत्तासीनो की समस्या बनने वाले है। इतने लोगो के खाने-पीने और रोजगार की व्यवस्था कैसे होगा? विपक्ष पहले से ही टिकाये बैठा है। उपर से जल्दी ही चुनाव आने वाले है। कुछ भी इधर-उधर हुआ तो सत्तविहीन न हो जाये? विपक्ष भी दांव खेल रहा है। कभी बस उप्लब्ध करा रहा है तो कभी भोजनालय चलवा रहा है। ताक मे है कि किसी तरह सत्तानसिन हो जाये। वो भी इसे एक बड़ी समस्या के रूप मे प्रस्तूत करने मे लगा हुआ है।
अब इन सड़को की समस्या का क्या होगा? रेल भी इनका रेलम पेल करने मे लगा हुआ है। जाना होता है गोरखपुर, लेकिन रास्ता भटक जाती है और ओड़िसा पहुंच जाती है। कहती है इतनी बड़ी समस्या को लादे जाने पर रास्ते का ख्याल किसको रहता है। बात भी सही है। यहाँ तो एक समस्या से ही आदमी का दिमाग खराब हो जाता है उसने तो पूरी रेल समस्या बैठा रखा था। अब ये सड़क की समस्या रेल की समस्या बन गयी है।
26/05/2020
https://youtu.be/qSYcp-7FlDE
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