Women Team IBC

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20/05/2023

अगर हमारा लक्ष्य तय हो, तो हम किसी भी कठिनाई का सामना कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर ही लेते हैं। इसकी जीती जागती मिसाल हैं मुंबई के धारावी की झुग्गी झोपड़ियों की रहने वाली सिमरन शेख। सिमरन एक गरीब परिवार से आती हैं, जिनके पिता इलेक्ट्रीशियन थे, लेकिन बिमारी के कारण उन्हें अपना काम छोड़ना पड़ा।

सिमरन बचपन से ही क्रिकेट खेला करती थीं और उन्होंने शॉट मारकर कई लोगों की खिड़कियों के कांच भी तोड़े हैं। उस समय पड़ोसी सिमरन की शिकायत उनके माता पिता से करते थे। सिमरन ने 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी और बचे हुए पैसे क्रिकेट खेलने में खर्च कर दिए। आज वे वीमेन प्रीमीयर लीग में यूपी वारियर्स के लिए खेल रही हैं। उन्होंने ये मुकाम अपनी सभी परेशानियों का सामना करते हुए हासिल किया है।

14/05/2023

Today, we celebrate the heart of every home - the selfless and nurturing love of every mother. Wishing you all a Happy Mother's Day!

11/05/2023

मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। यह बात भारत की पहली महिला ब्लेड रनर किरण कनौजिया के जीवन पर सटीक बैठती है। किरण बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थीं। काफी संघर्ष के साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्हें इंफोसिस में जॉब मिल गई। जिसके कारण वे फरीदाबाद से हैदराबाद चली गई। साल 2011 में 24 दिसंबर को किरण ट्रेन से यात्रा कर रही थीं। वह फरीदाबाद पहुंचने से पहले ही ट्रेन के गेट के पास आकर बैठ गई। तभी 2 बदमाश आए और उनका बैग छीनकर भागने लगी। इसी हादसे में उनका पैर फिसल गया और वे नीचे गिर गई। इसके चलते किरण को अपना एक पैर गंवाना पड़ा। लेकिन उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया। खुद पर दया करने की बजाय उन्होंने अपनी कमजोरी को ताकत बनाया। परिवार की मदद से उन्होंने आर्टिफिशियल पैर लगवाया। प्रोस्थेटिक लेग लगाकर पहले उन्हेंने चलना शुरू किया, फिर हाथ पकड़कर भागना शुरू किया और देखते ही देखते उनकी मेहनत रंग लाई। आज वे प्रोस्थेटिक लेग के साथ 21 किमी दौड़ लगाकर भारत की पहली महिला ब्लेड रनर बन गई हैं। किरण कई सम्मान से सम्मानित भी हो चुकी हैं। उन्होंने अपनी मेहनत से दिखा दिया कि जीवन में कुछ भी नामुमकिन नहीं है। आज वह लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं

11/05/2023

आईआईएम (IIM) संबलपुर से PGDM कर रही अवनी मलहोत्रा ने अपने पुराने अनुभव और अपने टैलेंट के आधार संबलपुर कैंपस का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। जयपुर की रहने वाली अवनी ने जेपी यूनिवर्सिटी से बीटेक करने के बाद 3 सालों तक इनफ़ोसिस में काम किया।

उसके बाद अवनी ने आईआईएम संबलपुर में PGDM में एडमिशन लिया। माइक्रोसॉफ्ट ने आईआईएम में कैंपस इंटरव्यू में 6 राउंड के इंटरव्यू में अवनी को 64.61 लाख का पैकेज दिया है। आईआईएम संबलपुर के अनुसार यह किसी स्टूडेंट को दिया गया अब तक का सबसे बड़ा सैलरी पैकेज है।

11/05/2023

खेलने-कूदने की उम्र में क्या कोई मास्टर डिग्री हासिल कर सकता है? ऐसा कर दिखाया है 11 साल की अधारा पेरेज़ सांचेज़ ने। अभी तक दुनिया का सबसे तेज दिमाग वाला इंसान महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन को माना जाता रहा है, लेकिन आधार ने IQ के मामले में उन्हें भी पीछे छोड़ दिया। आइंस्टीन का IQ लेवल 160 था, लेकिन आधारा का IQ लेवल 162 है। उन्होंने महज 11 साल में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल कर ली है। उनके पास सीएनसीआई यूनिवर्सिटी से सिस्टम इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी ऑफ मैक्सिको से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग की डिग्री है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि अधारा ऑटिज्म से पीड़ित हैं। जब वे 3 साल की थी तब उनकी इस बीमारी के बारे में पता चला था। अधारा ने महज 6 साल में हाईस्कूल की परीक्षा पास कर ली थी। जब उनके माता-पिता ने उनका मेडिकल काउंसिल करवाया तो उन्हें उनके IQ लेवल का पता चला। इतनी कम उम्र में मास्टर डिग्री हासिल कर के अधारा आज दुनिया की जानी मानी चाइल्ड प्रोडिजी बन गयी हैं।

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