08/07/2023
https://youtu.be/Dnx2-1OO1Lg
Mobile ke addiction se bachiye #mentorship for #UPSC exam (मोबाइल की लत से बचिए)
Mobile ke addiction se bachiye for exam (मोबाइल की लत से बचिए)This video is for general mentoring purposes/awareness for civil services asp...
02/07/2023
If any student, want this, message us, we will send the pdf of the magazine freely.
11/06/2023
https://youtube.com/watch?v=SNd42s43jTw&feature=share7
How to make short notes | Short notes kaise banaye? | UPSC | IAS: Short notes for prelims and mains.
How to make short notes | Short notes kaise banaye? | UPSC | IAS: Short notes for prelims and mains.Short notes making is an art and it can be learned throug...
09/06/2023
https://youtu.be/YLMCljyrdKI
UPSC | CSE 2022 | IAS: Toppers Talk with UPSC IAS Topper Shashi Shekhar Rank 240 हिन्दी मीडियम
We are delighted to have a good aspirant like Shashi Shekhar, who have secured the 240 Rank in Civil Services examination 2022. He will get an IAS post. Shas...
24/03/2023
https://youtu.be/XKZMFk3VTXo
UPSC | CSE | IAS | How to read an Economic Survey (आर्थिक सर्वेक्षण 2023)? 6 must things to know.
The Economic Survey is a comprehensive document that reviews the developments in the Indian economy over the previous 12 months. Economic Survey 2022-23 was ...
04/03/2023
समय मूल्यवान है और बलवान भी है:
यदि ज़िंदगी में कुछ बनना चाहते हैं तो तीन बातों की गांठ बांध लीजिए:
👉बीता हुआ समय वापस नहीं आता
👉हर किसी के पास एकसमान समय होता है ( दिन में 24 घंटे)
👉 समय बलवान होता है
जो बीत गया सो बीत गया, भूत (Past) को पकड़ना नहीं है, भविष्य के लिए सिर्फ लक्ष्य रखना है उसे भी पकड़ना नहीं है कि सारे दिन बैठकर इसी चिंता में लगे रहें कि पता नहीं रिजल्ट का क्या होगा, सिलेबस पूरा हो पाएगा कि नहीं blah blah blah.
भविष्य और भूत को नहीं पकड़ा जा सकता, यदि इंसान के बस में ये दोनों होते तो आज इंसान अमर होता। वर्तमान में जीना सीखिए, जो इसी पल, इसी क्षण आपके सामने है उस पर ध्यान दीजिए, यदि वर्तमान के कर्म सही दिशा और दशा में रहेंगे तो रिजल्ट अच्छा ही आएगा।
और रिजल्ट अच्छा नहीं भी आएगा तो भी आपको संतुष्टि होगी कि मैंने कुछ हासिल किया है। जिंदगी सिर्फ रिजल्ट से तय नहीं होती, पास और फेल होना इसका हिस्सा है, परंतु जो व्यक्ति टाइम को महत्व नहीं देते वे एग्जाम तो अलग बात है कभी भी जिंदगी के किसी भी पड़ाव में सफल नहीं होते।
सारे दिन टीवी देखने या सोशल मीडिया में डूबे रहने वाला बच्चा, सारी जिंदगी दिन भर tv और सोशल मीडिया ही देखेगा। उसे जिंदगी tv और social media देखने का जिंदगी भर भरपूर मौका देती है।
आपकी जिंदगी इसी से तय होती है कि आप अब, इसी क्षण क्या कर रहे हैं, क्या सारा वक्त यूं ही खराब कर रहे हैं, या फिर खुद को हमेशा और प्रोडक्टिव बनाने में प्रयासरत हैं।
यदि खुद को और प्रोडक्टिव बनाने में प्रयासरत हैं तो जिंदगी आपको भरपूर मौका देगी कि आप ऊंची जिम्मेदारी के काम में लगे रहें, जैसे नौकरशाहों को कहां इतना टाइम मिलता है कि वे सारे दिन सोशल मीडिया चलाएं या फिर अपनी जिम्मेदारियां किन्हीं दूसरे व्यक्तियों पर डाल दें। खुद के काम खुद ही करते हैं वे भी एक समय सीमा और शेड्यूल से बंधकर।
तो यदि आप इसी क्षण वर्तमान को नहीं समझेंगे तो आपको कहां इतनी बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है। कर्म अवश्य लौट कर आते हैं, भले ही उनके आने में कुछ वर्ष का इंतजार करना पड़े।
यदि आप कल को बेहतर बनाना चाहते हैं तो आज को बेहतर बनाइए।
याद रखिए सभी के पास 24 घंटे ही होते हैं, भगवान बुद्ध श्रीराम, जीसस, अल्लाह इत्यादि से लेकर महान व्यक्तियों जैसे गांधी जी, विवेकानंद इत्यादि के पास भी वही 24 घंटे थे। एक मजदूर के पास भी 24 घंटे ही होते हैं, एक चायवाले के पास भी वही 24 घंटे।
यह आप पर निर्भर करता है कि जब आपको जिंदगी ने इस मुकाम पर ला कर खड़ा किया कि आपको देश के सबसे बड़े नौकरशाह बनने का अवसर मिल रहा है, तो आप इन 24 घंटो को कैसे उपयोग में लाते हैं।
जो ये कहेंगे कि कल से सोशल मीडिया का त्याग करते हैं या कल से शेड्यूल बनाते हैं, या कल टेस्ट अटेम्प्ट करेंगे, वे भविष्य पर सब छोड़ रहे हैं, अभी इसी क्षण में क्या दिक्कत है शुरुआत करने की, कल को नहीं पता आपके साथ क्या होगा, next attempt का भी आपको नहीं पता क्या होगा।
इसी संदर्भ में एक aspirant की कहानी सुनाता हुं जो अगला अटेम्प्ट फुल तैयारी से देने वाले थे, एग्जाम से कुछ महीने पहले पूरा परिवार गाड़ी से यात्रा कर रहा था, सिर्फ उसे और उसकी बुड्ढी अम्मा को छोड़कर। सारा परिवार हादसे में दिवगंत हो गया।
अब इस बच्चे पर दुख का पहाड़ टूटा सो टूटा, ऊपर से बुड्ढी अम्मा को जिम्मेदारी अलग से आ गई। इसे दिल्ली छोड़कर जाना पड़ा, और घर से कमाई का जरिया भी खत्म हो गया तो खेत के काम में संलग्न होना पड़ा।
कहने का अर्थ इतना सा है भविष्य के भरोसे जीना छोड़ दीजिए, जिंदगी ने जब मौका दिया है तो अपने आसपास के लोग जो आपको पढ़ाई करने के लिए समर्थन दिए हैं चाहे मौद्रिक रूप से या इमोशनल रूप से उनका शुक्रगुजार करते हुए वर्तमान को सदुपयोग में लाने में लग जाइए, भविष्य किसी ने नहीं देखा कि अगले क्षण क्या हो जाए, भूकंप आए,मलबे तले दबकर टांग टूट जाए या लिखने वाला हाथ न रहे, या कोई भी हादसा हो जाए, आप बीमार पड़ जाएं इत्यादि इत्यादि।
इसलिए समय बलवान है वह क्या करवा ले आपसे कुछ नहीं जानते आप। जो जितना मिला है उसी में संसाधनों को जुटा कर वर्तमान को सदुपयोग में लाना सीखिए।
कल टेस्ट देना है तो देना है, इसमें टाल मटोल होनी ही नहीं चाहिए चाहे सिलेबस कंप्लीट हुआ ही न हो, डरना बिलकुल भी नहीं है, कल पर कायर लोग टालते हैं (कुछ अपवादों को छोड़कर, सामान्यतया नहीं) आपने 5 टेस्ट का माइलस्टोन पार करके जो शुरुआती बाधा आती है उसे पार कर लिया है, अब किसी भी हाल में रुकना नहीं है चाहे आंधी तूफान आए।
Best wishes बच्चों 💫💫
01/03/2023
Stay Away from Social Media during preparation phase:
Social media is a platform that is both time-consuming and addictive.
It also tends to be opinionated, biased, and polarized. While many civil service mentors recognize the first two points, the third is often overlooked.
The truth is that social media is filled with personal and social biases, prejudices, and stereotypes that span everything from gender and caste to religion and specific subjects.
The content on social media can be created in such a way that it influences perspectives by evoking emotions or certain actions or words.
Some UPSC aspirants also come to social media to influence the decisions of other aspirants, and some even exploit the monetary benefits from social media giants like YouTube and Instagram.
It's not easy to identify these biases, as they can be subtle and often hidden behind humor, criticism, motivation, or satire.
Unfortunately, rather than being funny or satirical, these biases only serve to strengthen prejudices against specific genders, castes, religions, or vulnerable sections of society, like SC/ST communities, women, the elderly, and children.
Social media has become a reflection of the society we live in today, where certain groups are often marginalized, while others harbor strong prejudices against them.
🙏🙏
26/02/2023
The Ultimate Strategy to Crack UPSC Prelims:Link to watch 👇👇
https://youtu.be/MgZ7lsEnQyw
23/02/2023
https://youtu.be/MgZ7lsEnQyw
strategy, how to prepare for prelims 2023?