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गीता श्ल

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13/10/2022

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24/12/2021

25 दिसंबर को तुलसी दिवस क्यों मनाया जाता है ?
-/ सम्पूर्ण विश्व-मानव तुलसी की महिमा को जाने और इसका शारीरिक, मानसिक, दैविक और आध्यात्मिक लाभ ले इस हेतु 'सबका मंगल सबका भला' चाहने वाले पूज्य बापू जी ने 25 दिसम्बर को तुलसी पूजन दिवस मनाने की सुंदर सौगात समाज को दी है। विश्वभर में अब यह दिवस व्यापक स्तर पर मनाया जाने लगा है ।।
इसलिए आप सभी को #तुलसी_पूजन_दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ और बधाई ।। आए इस तुलसी दिवस के दिन एक-एक तुलसी माँ की पेड़ लगाये । #बाबा_आर_बी 🙏🏻🦅🚩

14/12/2021

This year, the marks the 5158th anniversary of the , the holy text of Hindus. It falls on Moksha Ekadashi & is observed on December 14, 2021. Gita Jayanti is the birthday of Bhagvad Gita, the sacred text of the Hindus. It is believed the "Bhagavad Gita " was revealed to Arjuna by Krishna Himself in the battlefield of Kurukshetra
गीता जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं बधाई आप सभी को ! #राधे_राधे 🙏🏻🚩 ातन 🚩 #हिन्दू
🙏🏻🦅 🙏🏻🦅

27/11/2021

27 नवंबर यानी शनिवार आज भैरव अष्टमी पर्व है। यह दिन भगवान भैरव और उनके सभी रूपों के समर्पित होता है। भगवान भैरव को भगवान शिव का ही एक रूप माना जाता है, इनकी पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना जाता है। मान्‍यता है कि भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव की पूजा उपासन करने से भय और अवसाद का अंत होता है और किसी भी कार्य में आ रही बाधा समाप्‍त होती है। कहते हैं कि भगवान शिव के किसी भी मंदिर में पूजा करने के बाद भैरव मंदिर में जाना अनिवार्य होता है। वरना भगवान शिव का दर्शन अधूरा माना जाता है। मान्‍यता है कि मार्गशीर्ष मास के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को भगवान शिव ने काल भैरव का रौद्र अवतार लिया था। इसलिए इस दिन को काल भैरव अष्‍टमी के रूप में मनाया जाता है।

भगवान काल भैरव के बारे में ऐसा कहा जाता है मनुष्‍य के अच्‍छे बुरे कर्मों का हिसाब काल भैरव ही रखते हैं। जीवों का परोपकार करने वालों पर काल भैरव की विशेष कृपा रहती है तो वहीं बुरे कर्म करने वाले और अनैतिक आचरण करने वालों को वह दंड भी देते हैं। मान्‍यता है कि काल भैरव अष्‍टमी के दिन काले कुत्‍ते को भोजन जरूर कराना चाहिए। ऐसा करने से काल भैरव के साथ ही शनि देव की भी कृपा प्राप्‍त होती है और राहु भी अशुभ प्रभाव को दूर करते हैं। काल भैरव की पूजा करने से मन का भय समाप्‍त होता है और किसी भी प्रकार की बुरी नजर का असर समाप्‍त होता है।

ऐसे करें पूजा

काल भैरव अष्‍टमी के दिन सुबह जल्‍दी उठकर स्‍नान कर लें और सुबह स्‍वच्‍छ वस्‍त्र पहनकर भगवान के शिव के सामने तिल के तेल का दीपक जलाएं। मान्‍यताओं के अनुसार काल भैरव की पूजा रात में की जाती है। काल भैरव अष्‍टमी के दिन शाम के वक्‍त काल भैरव के मंदिर में जाकर पूजा करें और प्रसाद में जलेबी, इमरती, उड़द की दाल, पान और नारियल अर्पित करें और अपनी सभी गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें। प्रसाद का कुछ हिस्‍सा काले कुत्‍ते को जरूर डालें।


15/11/2021

कहते हैं तुलसी विवाह कराने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होने के साथ जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

हिंदू धर्म में तुलसी विवाह करना बेहद ही मंगलकारी माना जाता है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी को तुलसी का विवाह शामिग्राम से कराने की परंपरा है। कहते हैं तुलसी विवाह कराने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होने के साथ जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। इस बार तुलसी विवाह 15 नवंबर को है। जो लोग तुलसी विवाह कराते हैं उन्हें इस दिन ये व्रत कथा जरूर पढ़नी चाहिए।

वृंदा नाम की एक स्त्री थी, जिसका जन्म राक्षस कुल में हुआ था। वृंदा विष्णु जी की बहुत बड़ी भक्त थी। उसका विवाह राक्षस कुल में दानव राजा जलंधर से करा दिया गया। इस राक्षस ने चारों तरफ हाहाकार मचा कर रखा था। ये बेहद ही वीर और पराक्रमी था। राक्षस की वीरता का रहस्य उसकी पत्नी थी जो पतिव्रता धर्म का पालन करती थी। पत्नी के व्रत के प्रभाव से ही वो राक्षस इतना वीर बन पाया था। ऐसे में उसके अत्याचार से परेशान होकर देवता लोग भगवान विष्णु के पास गए। सभी देवताओं की प्रार्थना सुनकर भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता धर्म भंग करने का निश्चय कर लिया।

भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण किया और वे वृंदा के महल में पहुंच गए। जैसे ही वृंदा की नज़र अपने पति पर पड़ी वे पूजा में से तुरंत उठ गई और उसने जलंधर का रूप धारण किए भगवान विष्णु के चरण छू लिए। वृंदा का पति जालंधर युद्ध कर रहा था, लेकिन जैसे ही वृंदा का सतीत्व नष्ट हुआ उसके पति का कटा हुआ सिर उसके आंगन में आ गिरा। वृंदा सोचने लगीं कि यदि सामने कटा पड़ा सिर मेरे पति का है, तो जो व्यक्ति मेरे सामने खड़ा है, यह कौन है? वृंदा के पूछने पर भगवान विष्णु अपने वास्तविक रूप में आ गए। वृंदा अपने साथ हुए इस छल से बहुत आहत हुई और उसने भगवान विष्णु को श्राप दे दिया कि “आप पत्थर के बन जाओ”। वृंदा के श्राप से विष्णु तुरंत पत्थर के बन गए। ये देखकर लक्ष्मी जी ने वृंदा से यह प्रार्थना की वो विष्णु जी को अपने श्राप से मुक्त करे।

माता लक्ष्मी के अनुरोध पर वृंदा ने श्राप विमोचन किया और स्वयं अपने पति का कटा सिर लेकर सती हो गई। वृंदा की राख से एक पौधा निकला, जिसे भगवान विष्णु ने तुलसी के पौधे का नाम दिया और कहा कि “शालिग्राम” नाम से मेरा एक रूप इस पत्थर में रहेगा, जिसकी पूजा तुलसी के साथ ही की जाएगी। भगवान विष्णु ने कहा कि मेरी पूजा में तुलसी का उपयोग जरूरी होगा। कहा जाता है कि तब से कार्तिक मास में तुलसी का विवाह शालिग्राम जी के साथ किया जाने लगा।


10/11/2021

Chhath Puja is a Hindu Vedic festival celebrated in northern India, especially in Bihar, Uttar Pradesh and Jharkhand. The festival begins with the Nahaikai ritual and ends with Suryodaya Arag. Surya, the god of energy and vitality, is worshiped during Chatpuja to promote happiness, prosperity and progress.
The third day of the festival is also known as Sandhya Arghya. Sandhya means evening in Hindi. Therefore, believers provide arag for the setting sun.

CHHATH PUJA 2021: SANDHYA ARAG DATE

Chhath puja is celebrated at Shashti T**i in Shukla Paksha, six days after the auspicious festival of Diwali. This year, Chath Puja will be celebrated on November 10th.

CHHATH PUJA 2021: SANDHYA ARAG TIME

Sandhya Arag was observed on November 10th, with sunrise at 6:40 am and sunset at 5:30 pm.

CHHATH PUJA 2021: SANDHYA ARAG PUJA VIDHI

Believers observe a 36-hour fast during the festival, which begins in Karna, the second day after eating keel and roti.
Believers do not even drink water during fasting.
This vrat ends on the fourth day after the believer prays to the rising sun by performing a ritual called Usha Arag.
thekua is considered the most important Prasad on the occasion of Chhath Puja. It is made from jaggery and flour.

Believers prepare some dishes and fruits to be served to Surya Devta. The Tekua and fruits offered to Mata have a big reason behind them.

सूर्य उपासना और लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की हार्दिक बधाई।

आज डूबते सूर्य की आराधना की जायेगी। ये महान पर्व जहाँ हमें शुद्धता, स्वच्छता व प्रकृति पर हमारी निर्भरता को मज़बूत करता है, वहीं ये संदेश भी देता है कि संसार में उदय के साथ-साथ अस्त की महत्ता भी कम नहीं है।


Photos from Vedicgyan07's post 09/11/2021

#खरना_प्रसाद 🙏🏻



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08/11/2021

नहाए खाए के साथ आज से महापर्व छठ शुरू

छठ पर्व का आरंभ 8 नवंबर दिन सोमवार से हो गया है। 4 दिनों तक चलने वाले छठ पर्व का आरंभ परंपरा के अनुसार नहाय खाय के साथ होता है जो कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि को होता है। इस साल नहाय खाय तिथि अनुसार 8 नवंबर को मनाया जा रहा है। इस व्रत पर व्रती लोग नदियों और पवित्र जलाशयों में स्नान करके छठ पर्व के व्रत का संकल्प ले रहे हैं।

नहाय खाय का शाब्दिक मतलब होता है स्नान करके भोजन करना। वैसे तो धार्मिक दृष्टि से हर दिन स्नान करके ही भोजन करने के लिए कहा गया है। लेकिन छठ के नहाय खाय में व्रती नदियों और तालाब में स्नान करके स्वयं अपने हाथों से अरबा चाल यानी कच्चा चावल का भात बनाते हैं और फिर कद्दू जिसे लौकी और घीया भी कहा जाता है उसकी सब्जी बनाते हैं फिर सरसों के साग को भी पवित्रता पूर्वक पकाते हैं। और इन्हीं को भोजन रूप में मात्र एक बार ग्रहण करते हैं।

नहाय खाय का संबंध मूल रूप से शुद्धता से है। व्रती अपने आप को सात्विक और पवित्र करके छठ मैय्या के सम्मुख उपस्थित हों इसलिए पवित्रता और आत्मशुद्धि के लिए छठ पर्व के पहले दिन यानी नहाय खाय के दिन स्नान करके एक समय नमक वाला भोजन करते हैं। फिर अगले दिन खरना को नमक का त्याग करके एक समय मीठा भोजन करते हैं जो गुड़ में बना होता है। फिर तीसरे दिन निर्जल होकर व्रत करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। और चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ छठ का पर्व पूर्ण होता है।

किसी भी और पर्व में शुचिता यानी पवित्रता पर इतना जोर नहीं दिया गया है जितना की छठ पर्व में दिया गया है। इसलिए इस पर्व को बहुत ही कठिन माना जाता है।

4 दिनों तक चलने वाले आस्था के महापर्व 'छठ पूजा' की शुरुआत आज के नहाय-खाय से हो रही है।
समस्त छठ व्रतिय मां बहनों को नहाय-खाय की बहुत बहुत शुभकामनाएं..
छठी मईया की कृपा सदैव आप सभी पर बनी रहे।
जय छठी मईया। 🙏🏻🌞🚩
🌞
🌞 🙌🏻🦅


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04/11/2021

ॐ दिवाली का शुभ मुहूर्त

दिवाली के दिन लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त हर जगह अलग-अलग है। दिल्ली एनसीआर में पूजा का शाम 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 06 मिनट तक है।  लक्ष्मी जी के साथ-साथ भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है। माता लक्ष्मी को धन और संपत्ति की देवी माना जाता है। वहीं भगवान गणेश बुद्धि और कार्य को सफल करने वाले देवता माने जाते 

ॐ मां लक्ष्मी का हुआ था जन्म

धार्मिक ग्रंथो की मानें तो समुद्र मंथन के दौरान दिवाली के दिन धन की देवी मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन गणेश और लक्ष्मी जी की पूजा का विधान है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा अर्चना करने से सुख-समृद्धि, यश वैभव की प्राप्ति होती है और सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

ॐ पांडवों ने भी किया था वनवास पूरा

दीपावली मनाने की परंपरा रामायण के अलावा महाभारत काल से भी जुड़ी है। हिंदू महाग्रंथ महाभारत के अनुसार इसी कार्तिक मास की अमावस्या को पांडव तेरह वर्ष का वनवास पूर्ण कर वापस लौटे थे। 

ॐ भगवान राम १४ वर्ष के वनवास से वापस आये थे

दिवाली का इतिहास रामायण से भी जुड़ा हुआ है, ऐसा माना जाता है कि श्री राम चन्द्र जी ने माता सीता को रावण की कैद से छुटवाया था, तथा फिर माता सीता की अग्नि परीक्षा लेकर 14 वर्ष का वनवास व्यतीत कर अयोध्या वापस लोटे थे। जिसके उपलक्ष्य में अयोध्या वासियों ने दीप जलाए थे, तभी से दीपावली का त्यौहार मनाया जाता है।

ॐ दीपावली पूजा का महत्व

मां लक्ष्मी का आशीर्वाद पाने के लिए दीपावली का दिन बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से उनकी कृपा व्यक्ति पर सदैव बनी रहती है। व्यक्ति को धन का कभी अभाव नहीं होता है। शास्त्रों के अनुसार इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर विचरण करने आती है।

ॐ दिवाली पूजा के शुभ मंत्र

मां लक्ष्मी जी के मंत्र- ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद, ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥

ॐ दीपावली की आरती

महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं,
नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि ।
हरि प्रिये नमस्तुभ्यं,
नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥
पद्मालये नमस्तुभ्यं,
नमस्तुभ्यं च सर्वदे ।
सर्वभूत हितार्थाय,
वसु सृष्टिं सदा कुरुं ॥

ॐ दिवाली लक्ष्मी पूजा 2021 के शुभ चौघड़िया मुहूर्त

प्रातः मुहूर्त (शुभ) - 06:35 AM से 07:58 AM
प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - 10:42 AM से 02:49 PM
अपराह्न / दोपहर मुहूर्त (शुभ) - 04:11 PM से 05:34 PM
सायाह्न मुहूर्त (अमृत, चर) - 05:34 PM से 08:49 PM
रात्रि मुहूर्त (लाभ) - 12:05 AM से 01:43 AM, नवम्बर 05


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