03/02/2026
अरविंद पनगढ़िया के नेतृत्व वाले 16वें वित्त आयोग (16th Finance Commission) के पाँच साल (2026-31) के कार्य/सिफारिशों का समग्र और विस्तार से विश्लेषण प्रस्तुत है
16वां वित्त आयोग भारत के संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत गठित किया गया और इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों का विभाजन और सहायता-निर्धारण करना है।
डॉ. अरविंद पनगढ़िया, नीति आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष, को वित्त आयोग का चेयरमैन नियुक्त किया गया।
आयोग की रिपोर्ट 31 अक्टूबर 2025 को राष्ट्रपति को प्रस्तुत की गई और यह सिफारिशें 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के पाँच साल के लिए लागू होंगी।
प्रमुख सिफारिशें और कार्य
1. करों के विभाजन (Vertical Devolution)
आयोग ने केंद्र और राज्यों के बीच साझा करों के विभाजन में राज्यों का शेयर 41% पर अपरिवर्तित रखा है — जैसा पिछले आयोग में था।
कई राज्यों (जैसे कर्नाटक, केरल) ने 50% की माँग की थी, लेकिन यह पूरा नहीं हो सका।
2. राजस्व घाटा अनुदान (Revenue Deficit Grants) समाप्ति
पूर्व वित्त आयोगों की तरह रिवेन्यू डेफिसिट ग्रांट्स रद्द कर दी गईं। यह निर्णय स्थायी राजकोषीय अनुशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया।
3. स्थानीय निकायों के लिए अनुदान (Grants to Local Bodies)
लगभग ₹9.47 लाख करोड़ के अनुदान की सिफारिश की गई। इसमें ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को बुनियादी + प्रदर्शन-आधारित अनुदान शामिल है।
अनुदान प्राप्त करने के लिए प्रवेश-स्तर शर्तें (जैसे लेखा-जोखा, राज्य वित्त आयोग की समय पर स्थापना) निर्धारित की गयीं।
यह स्थानीय शासन में वित्तीय स्वायत्तता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
4. आपदा प्रबंधन कोष (Disaster Management Funds)
आयोग ने कुल ₹2,04,000 करोड़ के आपदा प्रबंधन कोष की सिफारिश की है, जिसमें केंद्र और राज्यों के बीच विभाजन पर क्षेत्रीय तरीके से सुझाव दिए।
यह आपदा तैयारी/प्रतिक्रिया क्षमताओं को सुदृढ़ करने में सहायक होगा।
5. आर्थिक स्थिरता और अनुशासन
आयोग ने राज्यों के लिए राजकोषीय घाटा सीमा 3% GSDP पर रखने की सलाह दी है, और केंद्र के लिए 3.5% GDP तक घटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
Off-budget borrowings के समाप्ति, एवं FRL (Fiscal Responsibility Laws) को हर राज्य में संशोधित/मानकीकृत करने के सुझाव भी दिए गए हैं।
संक्षेप में
16वां वित्त आयोग (2026-31) — अरविंद पनगढ़िया की अध्यक्षता में प्रमुख बिंदु
🔹 राज्यों का कर-हिस्सा 41% बरकरार — कोई बदलाव नहीं।
🔹 Revenue Deficit Grants खत्म — राज्यों को वित्तीय अनुशासन अपनाने पर जोर।
🔹 स्थानीय निकायों के लिए बड़ा पैकेज — लगभग ₹9 लाख करोड़; प्रदर्शन-आधारित अनुदान।
🔹 आपदा प्रबंधन कोष — 5 साल के लिए व्यापक फंडिंग व्यवस्था।
🔹 Fiscal Discipline —
• राज्यों के लिए 3% GSDP घाटा सीमा
• कर्ज में पारदर्शिता और off-budget borrowing पर रोक
🔹 डेटा-आधारित, प्रदर्शन-आधारित अनुदान पर विशेष फोकस।
🔹 संघीय वित्तीय संतुलन और स्थानीय शासन को मजबूत करना—दो मुख्य लक्ष्य।