08/07/2025
कर्बला में हजरत हुसैन की शहादत हो चुकी थी। ऑलमोस्ट सभी मर्द शहीद हो चुके थे लेकिन कुछ जिंदा बचे लोगों को शिमर , जो उबैदुल्ला का कमांडर था, ने पकड़ कर पहले कूफ़ा अपने मालिक उबैदुल्ला के पास भेजा ये ज़्यादातर औरतें और बच्चे थे:
हज़रत ज़ैनब (र.अ)
इमाम हुसैन की बहन, बहुत बहादुरी से कर्बला के बाद यज़ीद के दरबार तक पूरा क़ाफ़िला संभाला, यज़ीद के सामने दिल दहला देने वाला खुत्बा भी दिया
हज़रत सकीना (या रुकैया)
इमाम हुसैन की छोटी बेटी (4 साल की थीं),कर्बला और कैद के दुख से बहुत जल्दी इन्तेकाल कर गईं
हज़रत उम्मे कुलसूम
इमाम अली (र.अ) की बेटी, ज़ैनब की बहन, काफ़िले की देखभाल में साथ थीं
हज़रत अली इब्ने हुसैन (ज़ैनुल आबिदीन / इमाम साजिदीन)
इमाम हुसैन के बेटे, उस समय बहुत बीमार थे, इसलिए लड़ाई में हिस्सा नहीं लिया, उन्हें मारा नहीं, कैद किया, शिया मत अनुसार ये ही आगे चलकर चौथे इमाम माने गए
कुछ छोटे बच्चे जिन्हें माराआ नहीं गया
इन सबको यज़ीद के सिपाही पकड़कर पहले कूफ़ा और फिर दमिश्क (सीरिया) ले गए, वहां इन्हें जंजीरों में बांधकर यज़ीद के दरबार में पेश किया गया
मगर इन सबने हिम्मत नहीं हारी, खासकर हज़रत ज़ैनब (र.अ) ने बड़ी हिम्मत दिखाते हुए एक खुतबा दिया दमिश्क में यज़ीद के शाही दरबार में जहां उसके दरबारी भी थे और वज़ीर, अमीर, सैनिक अधिकारी शाम के कुछ आम नागरिक भी मौजूद थे, जिन्हें कर्बला की सच्चाई नहीं बताई गई थी
उस ऐतिहासिक खुत्बा की समरी
सारी तारीफ़ उस अल्लाह के लिए है जो तमाम जहानों का रब है, और दरूद हो मेरे नाना मुहम्मद (सल्ल.) पर और उनके पवित्र अहले-बैत पर।
ऐ यज़ीद क्या तू यह समझता है कि तूने आज हमें कैद करके ज़लील कर दिया? क्या तू यह सोचता है कि अल्लाह ने तुझ पर इनाम किया है और हमें अपमानित किया है? तू आज अपने ज़ुल्म और गुनाह पर खुश हो रहा है। तू समझता है कि इस दुनिया की दौलत और हुकूमत तेरे पास है और हमने सब कुछ खो दिया।
नहीं! बिल्कुल नहीं
यह अल्लाह की एक मोहलत है एक इम्तेहान है। तूने रसूलुल्लाह के नवासे को शहीद किया। तूने उनके घर वालों को कैद किया, और अब तू मिम्बर पर बैठ कर अपने गुनाहों पर खुश हो रहा है
तूने अल्लाह की किताब को झुठलाया, रसूल की सुन्नत को मिटाया और मासूम खून से अपने हाथ रंगे। तू सोचता है कि तूने हमें हरा दिया? नहीं यज़ीद! जीत तुम्हारी नहीं, हमारी है।
हमने अपने खून से इस्लाम को बचाया है। तू समझता है कि हमारा ज़िक्र मिट जाएगा? नहीं!
व-अल्लाह, तुम हमारा नाम मिटा नहीं सकते, ना हमारी याद दिलों से खत्म कर सकते हो, ना हमारा मक़ाम गिरा सकते हो।हमारा यह खून आने वाली नस्लों को आवाज़ देगा हर इंसाफपसंद इंसान तेरे खिलाफ उठ खड़ा होगा।"
ऐ यज़ीद यह न समझ कि हमने हार मान ली है।
तेरे दिन गिने जा चुके हैं। जल्द ही तू भी अल्लाह की अदालत में खड़ा होगा, जहाँ कोई वज़ीर, कोई फ़ौज, कोई ताज नहीं होगा सिर्फ़ तू और तेरा गुनाह और अल्लाह की कसम हमने जो कुर्बानी दी है वो राइगाँ नहीं जाएगी।
यह खून ज़मीन पर नहीं बहेगा यह हक़ और इंसाफ़ का बीज बनेगा।हम रसूलुल्लाह का घराना हैं हमें ज़लील करना तेरे बस में नहीं, तेरी तरह की फानी सल्तनतों से हमारा क्या वास्ता?
हमारी शुरुआत पाक थी,हमारा रास्ता कुरआन है, हमारा अंजाम अल्लाह के हाथ में है और यही हमारी ताक़त है।
अंतिम वाक्य जो दिलों में आग लगा गया:
ऐ यज़ीद! तेरा मक्र, तेरा फरेब, तेरा जश्न सब कुछ मिट जाएगा, लेकिन हमारा सच बाक़ी रहेगा।
तेरी सल्तनत नहीं बचेगी, लेकिन कर्बला याद रखी जाएगी
हर ज़ुल्म के खिलाफ़ एक मशाल की तरह!
यहां यजीद एक न्यायपूर्ण शासक बनने की अदाकारी करते हुए खुद को साफ बताने के लिए सारा इल्जाम उबैदुल्ला इब्न ज़ियाद पर डालता है। (यह ठीक वैसा ही जैसे करबला के 1400 साल बाद एक देश का राजा जो अपनी जनता को मरवा देता है फिर कहता है कि धरती हिली है वह पेड़ के धम्म से गिरने के कारण से गिरी होगी)
ज़ैनब (र.अ) के इस खुत्बे का असर
यही वो खुत्बा था जिसने यज़ीद के दरबार की भीड़ को हिला दिया। कई लोगों ने वहीं रोना शुरू कर दिया।
लोगों को पहली बार हकीकत का पता चला कि हुसैन (र.अ) कौन थे, और किसके खिलाफ़ खड़े हुए थे।
इतिहास गवाह है यह भाषण यज़ीद की हुकूमत के अंत की शुरुआत बना।
इस खुतबे के शब्द अलग हो सकते है क्योंकि तब कोई रिकॉर्डिंग का आला नहीं था, वहां से लोगो ने जो सुना वो आगे बयान हुआ, लेखकों ने इसको लिखा और हजरत ज़ैनब को यजीद ने मदीना भेजा। ( यहां यजीद के चरण सहलाकर कहते है देखो, अगर इतना ही दुश्मन था तो महल से जिंदा क्यों भेजा। यह बेचारे जानते ही नहीं कि एक मुख्यमंत्री भी इतना मजबूर हो ही जाता है कि बहुत से धार्मिक स्थानों पर जाकर चादर चढ़ा आना उसके राजनीति का हिस्सा होता है)
मदीना जब वह गई तो उन्होंने वहां जाकर सबको इमाम हुसैन का रक्तरंजित कपड़ा, उनके भाई अब्बास का झंडा या रूमाल
अली अकबर या अली असगर का झूला या मिट्टी की तश्तरी इत्यादि दिखाई और बताई कि कैसे कैसे उनके साथ क्या क्या हुआ जिसके कारण मदीना वालो ने यजीद से बगावत कर दी।
हजरत जैनब के खुतबे में सीरिया से मदीना तक सबको हिला दिया था, कारण??
उन्होंने बंदी होकर बोलने की हिम्मत दिखाई
क़ैदी बनाकर यज़ीद के दरबार में लाई गई थीं
सामने वही यज़ीद बैठा था जिसने इमाम हुसैन (र.अ) और उनके परिवार को कर्बला में शहीद करवाया था
फिर भी ज़ैनब (र.अ) ने डरे बिना बोलने का साहस किया
यह बात ही पूरे सीरिया और फिर मदीना तक दिलों को झकझोर गई। इस तरह की तक़रीर ने यज़ीद की ताक़त को चुनौती दी। उसके दरबारियों को शर्मिंदा कर दिया
और उम्मत की सोई हुई रूह को झिंझोड़ दिया
उन्होंने कर्बला की सच्चाई बताई:
यज़ीद की मीडिया और सत्ता ने पूरे मुल्क में यह प्रचार किया था कि इमाम हुसैन बाग़ी थे, उनके खिलाफ जंग जायज़ थी मगर जब ज़ैनब (र.अ) ने लोगों के सामने हक़ीक़त बयान की, तब जाकर जनता को पता चला कि:
कर्बला में रसूलुल्लाह का नवासा शहीद हुआ था, प्यासा रखा गया था, और ज़ालिम कौन था, और मज़लूम कौन, यह पहली बार खुलेआम कहा गया
उन्होंने उम्मत को जगाया:
हज़रत ज़ैनब (र.अ) ने यज़ीद को कहा
"तेरे अपराध इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गए हैं और मैं गवाह हूँ कि यह खून कभी बर्बाद नहीं जाएगा। हम शहीद हो सकते हैं, मगर हम मिटाए नहीं जा सकते।"
इसने लोगों को ग़ज़ब का झटका दिया
यही से उम्मत में हिलचल मची
लोगों ने यज़ीद के खिलाफ बोलना शुरू किया
इस खुत्बे ने हुसैनी क्रांति की नींव रख दी
ज़ैनब (र.अ) के बाद मदीना में बगावत उठी लेकिन अफसोस वाक़िआ-ए-हर्रा हो गया जो इतिहास का एक काला पन्ना है। मक्का में भी यज़ीद के खिलाफ आवाज़ें उठीं और करोड़ों दिलों में इमाम हुसैन का नाम अमर हो गया
तो क्यों हिल गई उम्मत?
क्योंकि एक औरत, वो भी बंदी बनाकर लाई गई, जिसने अपने भाई, बेटों, भतीजों की लाशें देखीं, फिर भी हक़ बोलने से पीछे नहीं हटी ये हिम्मत, ये जज़्बा, और ये सच्चाई, पूरे इस्लामी इतिहास को एक नई रोशनी दे गई
Mission ahlebait
# Markaze Tasawwuf Madariya