23/03/2026
23 March New Delhi: The much awaited International conference has officially begun today at the centre under the leadership of Prof. Hemayun Akhtar Nazmi in the presence of Hon'ble Registrar and Dean Jamia Millia Islamia, New Delhi...
08/05/2025
Congratulations to our Director Prof. Hemayun Akhtar Nazmi Sir!
18/03/2025
A few glimpses from today’s post-Dawat-e-Iftar gathering!
29/01/2025
Successful conclusion of an invited talk...
Introduced by Prof. Anisur Rahman (Seminar Convener) and chaired as well as concluded by Prof. Hemayun Akhtar Nazmi (Director, CWAS).
25/01/2025
Our Director's (Prof. Hemayun Akhtar Nazmi) Opinion on Indo-Mauritania Relations.
العلاقات بين الهند وموريتانيا: حقبة جديدة في التنمية الثقافية والدبلوماسية والاقتصادية
تعمل الهند وموريتانيا على صياغة خطط جديدة للتعاون في القضايا السياسية، والتبادل الثقافي، والنمو الاقتصادي، مما يمثّل خطوة جديدة في علاقاتهما الثنائية. ويعكس هذا ا....
27/12/2024
पश्चिम एशियाई अध्ययन केंद्र, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के निदेशक Prof. Hemayun Akhtar Nazmi की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर भावभीनी श्रद्धांजलि!
29 जनवरी, 2005 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया में "पश्चिम एशियाई अध्ययन केंद्र" का उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा किया गया था। इस अवसर पर उनके नेतृत्व और विद्वता का परिचय हुआ। उन्होंने न केवल शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा दिया, बल्कि पश्चिम एशिया के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा दी।
इस दुखद अवसर पर, उनकी स्मृति में कार्यक्रम के महत्व को पुनः स्मरण करते हुए, इस अध्ययन केंद्र के साथ–साथ विश्वविद्यालय परिवार उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता है। उनका योगदान सदैव हमारे लिए #प्रेरणा_स्रोत बना रहेगा।
Jamia Millia Islamia, New Delhi
26/12/2024
जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के कुलपति, प्रो. मजहर आसिफ ने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी की मजार पर उनकी जयंती के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित की। अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ इस अवसर पर हमारे निदेशक प्रो. हेमायूं अख्तर नज़्मी (Prof. Hemayun Akhtar Nazmi) भी उनके साथ उपस्थित रहे।
डॉ. मुख्तार अहमद अंसारी (25 दिसंबर 1880 – 10 मई 1936) जामिया मिल्लिया इस्लामिया के संस्थापकों में से एक होने के साथ-साथ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में भी अपनी महत्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान कर चुके हैं! इससे पहले उनका स्वतंत्रता संग्राम में योगदान अमूल्य और प्रेरणादायक रहा।