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सौ प्रतिशत सफलता पाने के कुछ आसान तरीके - Suvichar 02/11/2017

सौ प्रतिशत सफलता पाने के कुछ आसान तरीके
1. सौ प्रतिशत सफल होने के लिए खुद को दौ सौ प्रतिशत सक्रिय बनाइए।
2. बहादुरी वह शक्ति हैं जिससे आप हिमालय को पार कर सकते हें।
3. यदि तुम कमजोर हो तो घबराओ तम, दिमाग को केन्द्रित करो, फिर से कोशिश करो और अपना लक्ष्य साधो।
4. कर्तव्य से कर्तव्य का जन्म होता हैं। माता-पिता ने पहले अपना कर्तव्य निभाया, अब हम अपना कर्तव्य निभाएँ।
5. जीवन का हर दिन होली और दिवाली की तरह हैं। इसके हर पल का आनन्द लीजिए।
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सौ प्रतिशत सफलता पाने के कुछ आसान तरीके - Suvichar 1. सौ प्रतिशत सफल होने के लिए खुद को दौ सौ प्रतिशत सक्रिय बनाइए। 2. बहादुरी वह शक्ति हैं जिससे आप हिमालय को पार कर सकते हें। 3. यदि तुम कमजोर हो तो घबराओ तम, दिमाग को केन्द्रित करो, फिर से कोशिश करो और अपना लक्ष्य साधो। 4. कर्तव्य से कर्तव्य का जन्म होता हैं। …

सत्य बचन :- दुःख के कारण - Suvichar 26/10/2017

सत्य बचन :- दुःख के कारण

सत्य बचन :- दुःख के कारण - Suvichar 1) सुख चाहने वाले को वर्तमान में पाप करना पडेगा और भविष्य में भयंकर दु:ख भोगना पडेगा। 2) सुखदायी परिस्थिति में पुण्य कटते हैं और दु:खदायी परिस्थिति में पाप कटते है। 3) सुखदायी परिस्थिति सेवा करने के लिये हैं और दु:खदायी परिस्थिति सुख की इच्छा का त्याग करने के लिये है। 4) सन्त-महात्मा, बडे-बुढे और …

उपदेश की योग्यता - Suvichar 03/10/2017

साधु आत्मानंद की कुटिया गाँव के पास ही थी। प्राय: प्रतिदिन सायंकाल ग्रामीण लोग उनके पास जाते और धर्म-चर्चा का लाभ प्राप्त करते। जब संध्या भजन का समय आता, गाँव के दो नटखट लड़के जा धमकते और कहते, महात्मन् ! आपसे ज्ञान प्राप्त करने आये है, फिर शुरु करते गप्पें। बीच-बीच में साधु को चिढ़ाने, गुस्सा दिलाने वाली बातें भी करते जाते। उनका तो मनोरंजन होता, पर आत्मानंद का भजन-पूजन का समय निकल जाता। यह कर्म महीनों चलता रहा, पर साधु एक दिन भी गुस्सा नहीं हुए। बालकों के साथ बात करते हुए आप भी हँसते रहते।
बहुत दिन बाद भी जब वे नटखट लड़के उन्हें क्रुद्ध न कर सके, तो उन्हें अपने आप पर क्षोभ हुआ, उन्होंने क्षमा मांगते हुए पूछा, ‘‘महात्मन् ! हमने जान-बूझकर आपको चिढ़ाने का प्रयत्न किया, फिर भी आप न कभी खीझे, न क्रुद्ध हुए।’’ आत्मानंद ने हँसते हुए कहा, वत्स ! यदि मैं ही क्रुद्ध हो जाता, तो आप सबको सिखा क्या पाता ?

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उपदेश की योग्यता - Suvichar साधु आत्मानंद की कुटिया गाँव के पास ही थी। प्राय: प्रतिदिन सायंकाल ग्रामीण लोग उनके पास जाते और धर्म-चर्चा का लाभ प्राप्त करते। जब संध्या भजन का समय आता, गाँव के दो नटखट लड़के जा धमकते और कहते, महात्मन् ! आपसे ज्ञान प्राप्त करने आये है, फिर शुरु करते गप्पें। बीच-बीच में साधु को चिढ़ाने, …

संगति - Suvichar 29/09/2017

#संगति

अजामिल अपनी दुष्टता एवं दुराचार के लिए विख्यात हुआ, पर आरंभ में वह एक सदाचारी ब्राह्मण था। किसी कारणवश विदेश गया तो वह कुलटा स्त्रियों और दुरात्मा लोगों की संगति में पड़ गया। कुसंग बड़े बड़ो का पतन कर देता हैं। बुरों का सुधरना कठिन हैं, पर अच्छों का बिगड़ जाना सरल हैं।


संगति - Suvichar अजामिल अपनी दुष्टता एवं दुराचार के लिए विख्यात हुआ, पर आरंभ में वह एक सदाचारी ब्राह्मण था। किसी कारणवश विदेश गया तो वह कुलटा स्त्रियों और दुरात्मा लोगों की संगति में पड़ गया। कुसंग बड़े बड़ो का पतन कर देता हैं। बुरों का सुधरना कठिन हैं, पर अच्छों का बिगड़ जाना सरल हैं। कुसंग से अजामिल इतना …

अहम् - Suvichar 27/09/2017

#अहम्

राजा जनश्रुति को चिडिया की भाषा समझने की सामर्थ्य प्राप्त थी। हंसों की जोड़ी बात कर रही थी की जनश्रुति से तो बड़े मुनि रैक्य हैं, जो सदा परमार्थ में लगे रहते है। गाडीवान रैक्य के बड़ा होने की बात से उन्हें बड़ा कष्ट हुआ। दूसरे दिन उन्होंने उस गाडीवान की खोज कराई और बहुत-सा धन........

अहम् - Suvichar राजा जनश्रुति को चिडिया की भाषा समझने की सामर्थ्य प्राप्त थी। हंसों की जोड़ी बात कर रही थी की जनश्रुति से तो बड़े मुनि रैक्य हैं, जो सदा परमार्थ में लगे रहते है। गाडीवान रैक्य के बड़ा होने की बात से उन्हें बड़ा कष्ट हुआ। दूसरे दिन उन्होंने उस गाडीवान की खोज कराई और बहुत-सा …

कर्म की महानता - Suvichar 26/09/2017

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कर्म की महानता - Suvichar एक बार बुद्ध एक गांव में अपने किसान भक्त के यहां गए। शाम को किसान ने उनके प्रवचन का आयोजन किया। बुद्ध का प्रवचन सुनने के लिए गांव के सभी लोग उपस्थित थे, लेकिन वह भक्त ही कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। गांव के लोगों में कानाफूसी होने लगी कि कैसा भक्त है कि …

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