01/10/2024
ello, Namaste! 🙏
We are excited to invite you to the Conscious Life Design Workshop led by the esteemed Rajesh Bahuguna Ji. This workshop offers a unique opportunity to explore the purpose of life, nurture meaningful relationships, and design an stress-free life aligned with your dreams. Together, let’s uncover the freedom from internal and external conflicts and live consciously, with clarity and joy.
The workshop is based on the Co-Existence philosophy propounded by A. Nagaraj Ji.
🗓️ Dates: 11-13 October, 2024
📍 Location: Bodhigram Empowerment Centre, Thano Village, Dehradun (Uttarakhand)
📑 Get the program brochure here: https://tinyurl.com/consciouslifedesignbodhigram
If you have any questions or concerns, feel free to reach out to us at +91-9405712845 (Vineet).
Regards,
Bodhigram Empowerment Centre x Rajesh Bahuguna
31/08/2024
हमारी चाहना और हमारा मानना
🔹 हम चाहते हैं हमेशा खुश रहना 🔻और मानते हैं कि सुख-दुख साथ-साथ है
🔹 हम चाहते हैं कि हमारी हर आवश्यकता पूरी हो 🔻और मानते हैं कि आवश्यकता अनंत हैं
🔹 हम चाहते हैं कि सब मिलजुल कर रहे 🔻और मानते हैं कि आदमी जाति से अछूत हो सकता है
🔹 हम चाहते हैं प्रकृति में संतुलन बना रहे 🔻और मानते हैं कि एयरपोर्ट विकास है
🔹 हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे आधुनिक शिक्षा पाएं 🔻और मानते हैं कि आज की शिक्षा बच्चों में संस्कार नहीं दे रही
ये चाहने और मानने की दूरी ही हमारा दु:ख है । आइए संवाद करें कि
हमारी चाहना में गड़बड़ है या मानने में गड़बड़ है ।
07/07/2024
16 - 23 अक्टूबर 2024 उत्तरकाशी (उत्तराखंड) में आप सादर आमंत्रित हैं ।
04/07/2024
सरस्वती विद्या निकेतन, अंबाला हरियाणा में एक दिवसीय मानवीय शिक्षा पर संवाद
07/05/2024
#व्यवस्था_निर्माण_या_व्यवस्था_पहचान
इस धरती पर अपनी हजारों वर्ष की यात्रा में मानव ने बहुत सी व्यवस्थाओं को निर्मित किया किया है । जैसे- परिवार-व्यवस्था, शिक्षा-व्यवस्था, राज-व्यवस्था, न्याय-व्यवस्था आदि-आदि । सभी समुदायों ने अपने-अपने दृष्टिकोण के अनुसार इन व्यवस्थाओं को सजाया है ।
लेकिन कोई भी मानव-निर्मित व्यवस्था सभी मानवों को एक समान रूप से स्वीकार हो जाए ऐसा नहीं हुआ ।
एक समुदाय के सभी मानवों को कोई व्यवस्था एक समान ढंग से संतुष्ट कर पाए ऐसा नहीं दिखता ।
जबकि जिन शुभ कामनाओं की वजह से व्यवस्थाएं निर्मित हुईं वे एक समान ही हैं - परिवार में संबंध शिकायत मुक्त हो जाँए
- मानव की भौतिक आवश्यकता पूरी हो जाए
- शिक्षा से मानव विवेकवान हो जाए
- धरती पर प्राकृतिक संतुलन हो जाए आदि ।
ये शुभकामनाएं सभी मानवों में प्राकृतिक विधि से एक समान हैं ।
जाहिर है प्राकृतिक शुभकामनाओं की पूर्ति के लिए कोई प्राकृतिक व्यवस्था भी होगी । जिसकी स्पष्ट पहचान के बिना मानव अपनी-अपनी व्यवस्थाएं बनाकर संघर्ष में लगा है ।
जैसी मानव की सांस लेने, पानी की आवश्यकता प्राकृतिक है तो उसकी पूर्ति की व्यवस्था भी प्राकृतिक है ।
ऐसे ही मानव की सभी शुभकामना प्राकृतिक है जिसकी पूर्ति की कोई प्राकृतिक व्यवस्था है ।
श्रद्धेय ए. नागराज जी इसी व्यवस्था को पहचानने की विधि को मानव जाति के सम्मुख मध्यस्थ दर्शन के रूप में रखे । इसी पर एक पाँच दिवसीय शिविर में आप सभी आमंत्रित हैं ।
05/05/2024
शिक्षा संस्कार : 28 अप्रैल से 05 मई
18/01/2024
अभी तक की जीवन यात्रा में कुछ (अच्छे )बड़े लोगों से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है । उन्हीं में से एक आदरणीय सामदोंग रिमपोचे जी भी हैं ।
उनके सानिध्य में रहना जैसे किसी कल-कल बहती पहाड़ी नदी के पास रहने जैसा है, जो लगातार बहती भी रहती है जिसके बहने में एक संगीत है, एक व्यवस्था है । जो निरंतर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर भी है और साथ ही साथ अपने मार्ग में आने वाले सभी वनस्पति और सजीवों के लिए जीवन दायी भी है ।
एक बार उनसे पूछा गया (मेरी उपस्थति भी थी ) कि आपका देश तिब्बत चीन का गुलाम है और निकट भविष्य में आजादी की कोई संभावना नहीं दिखाई देती । आप लोग लगातार आजादी का प्रयास कर ही रहे हैं । इन सब हलचलों में आप इतने शांत और सहज कैसे रह पाते हैं । आपकी संतुष्टि का आधार क्या है ?
उनक उत्तर था -
बौद्ध दर्शन के अनुसार सृष्टि में दो शक्तियां हैं जो लगातार क्रियाशील हैं -
कुशल शक्ति - जो सृजन का कार्य कर रही है
अकुशल शक्ति - जो विनाश का कार्य कर रही है ।
सृष्टि की करोड़ों वर्ष की यात्रा में ये दोनों शक्तियां लगातार क्रियाशील हैं । किसी समय कोई शक्ति हावी होती है तो किसी समय कोई शक्ति । एक मानव के रूप में हमारा जीवन अधिक से अधिक 100 वर्षों का होता है, जो सृष्टि की करोड़ों वर्ष की यात्रा के अनुपात में नगण्य है ।
आपकी जीवन यात्रा किस शक्ति के उत्थान के समय शुरू हुई यह संयोग मात्र है। ऐसे में संयोग से मिले इस छोटी सी जीवन-यात्रा को हमने किस शक्ति के समर्थन में बिताया यही हमारी संतुष्टि का आधार है ।
हम कितना कर पाते हैं वह तो बहुत कुछ तात्कालिक परिस्थितियों पर निर्भर है लेकिन हमारा विचार तो हमारे नियंत्रण में हैं तो विचार से हम किस शक्ति का समर्थन करते हैं यह महत्वपूर्ण है ।
इसको मैं इस ढंग से समझा कि - धरती पर मानव जाती कि यात्रा को भी लाखों वर्ष हो गए हैं । इन्हीं मानवों में से कुछ ने धरती पर 'समस्याएं (संग्रह, प्रकृति का विनाश, धार्मिक-आर्थिक-जातिगत भेदभाव) पैदा की हैं तो कुछ ने समाधान भी दिए हैं ।
तो एक मानव के रूप में आपकी सार्थकता क्या है सिवाय इसके -
कि आप समस्या के साथ हैं या समाधान के साथ ।