25/08/2026
सम्मानित शिक्षक साथियों,
सादर अभिवादन🙏
शिक्षक समस्याओं का सिलसिला बदस्तूर जारी है और उनके समाधान की प्रतीक्षा भी लगातार लंबी होती जा रही है। नवीन कार्यकारिणी के गठन के साथ शिक्षक समाज में यह उम्मीद जगी थी कि अब लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी और निर्णायक पहल होगी। किंतु शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए कार्य प्रारंभ करने से पहले ही नवीन कार्यकारिणी को अपने अस्तित्व और अधिकारों के लिए संघर्ष की स्थिति का सामना करना पड़ा। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा राजकीय शिक्षक संघ के निर्वाचन परिणाम पर स्थगनादेश के कारण संगठन की कार्यवाही प्रभावित हुई है। इस संबंध में हमारी ओर से अर्जेंसी दाखिल की गई है और आगामी माह की 16 तारीख को मामले की सुनवाई संभावित है।
इन दिनों सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर शिक्षक समस्याओं और संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर अनेक चर्चाएँ हो रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में यह स्पष्ट करना आवश्यक हो गया है कि नवीन कार्यकारिणी ने अब तक किन विषयों पर और किस दिशा में कार्य प्रारंभ किया था।
नवनिर्वाचित सम्मानित अध्यक्ष महोदय श्री रवींद्र राणा जी एवं समस्त कार्यकारिणी के मध्य प्रारंभ में ही यह स्पष्ट सहमति बनी थी कि पहले कार्य किया जाएगा और उसके बाद ही उसके संबंध में वक्तव्य दिया जाएगा। इसका प्रमुख कारण यह था कि आम शिक्षक केवल आश्वासनों से थक चुका है, वह अब परिणाम चाहता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए संगठन ने सार्वजनिक घोषणाओं के स्थान पर वास्तविक कार्यवाही को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया था।
इसी क्रम में सभी जनपद कार्यकारिणियों के साथ लगभग दस घंटे की विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपस्थित सभी जनपदों से शिक्षक समस्याओं को विस्तारपूर्वक रखने का आग्रह किया गया। प्रत्येक समस्या को गंभीरता से सुना गया, उसका संज्ञान लिया गया और यह विचार किया गया कि उसके समाधान के लिए किस स्तर पर, किस माध्यम से और किस रणनीति के अंतर्गत कार्य किया जा सकता है।
संगठन ने यह निर्णय लिया कि केवल निदेशालय स्तर तक सीमित रहने के बजाय समस्याओं को सीधे शासन के उच्चतम स्तर तक ले जाया जाए। इसी रणनीति के अंतर्गत माननीय मुख्यमंत्री महोदय के स्तर पर वार्ता एवं संपर्क का क्रम प्रारंभ किया गया। साथ ही माननीय शिक्षा मंत्री महोदय के साथ शिक्षक समस्याओं पर विस्तृत बैठक प्रस्तावित की गई थी, ताकि विभिन्न लंबित विषयों पर ठोस एवं परिणामपरक चर्चा हो सके।
वर्तमान में शिक्षक समाज के सामने पदोन्नति और स्थानांतरण दो अत्यंत गंभीर एवं महत्वपूर्ण विषय हैं। पदोन्नति के मामले में विभागीय स्तर पर चल रही तैयारियों एवं प्रक्रिया को लेकर जो भी असंतोष अथवा व्यावहारिक कठिनाइयाँ सामने आईं, उनका समाधान विभागीय स्तर पर टकराव के बजाय शासन एवं सरकार के स्तर पर संवाद और वार्ता के माध्यम से निकालना संगठन ने अधिक उचित समझा। सरकार के स्तर से भी इस दिशा में सकारात्मक सहयोग की संभावनाएँ बनी थीं, किंतु संगठन के निर्वाचन परिणाम पर लगे स्थगनादेश के कारण आगे की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
टीईटी के विषय में भी वरिष्ठ एलटी शिक्षक साथियों से संबंधित संभावित कठिनाइयों को गंभीरता से लिया गया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं से भी संपर्क किया गया । इस विषय के समाधान के लिए सम्मानित अध्यक्ष महोदय द्वारा माननीय शिक्षा मंत्री महोदय से एक अलग बैठक का समय मांगा गया था, ताकि विषय को केवल चर्चा का मुद्दा न बनाकर उसके समाधान की दिशा में ठोस पहल की जा सके। पदोन्नति हेतु निदेशालय स्तर पर अध्यक्ष, महामंत्री मंत्री को सम्मिलित करते हुए एक समिति का गठन करने पर भी सहमति बनी ।
स्थानांतरण के विषय में संगठन की स्पष्ट सोच रही है कि सुगम-दुर्गम की व्यवस्था के साथ-साथ सभी पात्र शिक्षकों को स्थानांतरण का समान अवसर मिलना चाहिए और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने आवश्यक हैं। यदि विभागीय स्तर पर इस विषय की प्रभावी पैरवी में अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं, तो संगठन आवश्यकता पड़ने पर माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेने से भी पीछे नहीं हटेगा।
इसी प्रकार, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा के समक्ष विभाग द्वारा कार्ययोजित करने के विषय पर संगठन द्वारा अपनी आपत्ति एवं चिंताएँ स्पष्ट रूप से रखी गईं। इस पर महानिदेशक महोदया द्वारा अवगत कराया गया कि संबंधित निर्णय शासनादेशों के अनुरूप ही लिए जा रहे हैं।
17-18 जुलाई 2026 - शैक्षिक उन्नयन गोष्ठी
19 जुलाई - चुनाव परिणाम
29 जुलाई - शपथ ग्रहण
12 अगस्त - संगठन पर रोक
अपने लगभग 14 दिनों के सूक्ष्म कार्यकाल में संगठन का प्रयास रहा कि शिक्षक हित से जुड़े प्रत्येक ऐसे विषय पर तथ्यात्मक एवं प्रभावी ढंग से अपनी बात संबंधित स्तर तक पहुँचाई जाए। इस दौरान माननीय मुख्यमंत्री जी से वार्ता, माननीय शिक्षा मंत्री जी से वार्ता, सचिव विद्यालयी शिक्षा से वार्ता, महानिदेशक विद्यालय शिक्षा से वार्ता और निदेशक माध्यमिक शिक्षक से वार्ता ।
आज संगठन के समक्ष तत्काल प्राथमिकता राजकीय शिक्षक संघ के निर्वाचन परिणाम पर लगे स्थगनादेश का विषय है। संगठन के अस्तित्व एवं कार्यप्रणाली से जुड़ा यह महत्वपूर्ण विषय न्यायालय में विचाराधीन है। शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यक्तिगत रूप से संवाद और प्रभावी पैरवी का क्रम पूरी तरह बंद नहीं हुआ।
यह भी समझना आवश्यक है कि संगठनात्मक कार्यों में अनेक ऐसे विषय और परिस्थितियाँ होती हैं जिन्हें तत्काल सार्वजनिक करना न तो रणनीतिक रूप से उचित होता है और न ही संगठन के हित में। प्रत्येक प्रयास की जानकारी उसी समय सार्वजनिक कर देना ही कार्य की सफलता का प्रमाण नहीं होता। कई बार परिणाम के लिए शांत रहकर, निरंतर और सही स्तर पर प्रयास करना अधिक आवश्यक होता है।
इसलिए सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं के आधार पर संगठन की कार्यप्रणाली अथवा उसके प्रयासों के संबंध में निष्कर्ष निकालने से पहले वास्तविक परिस्थितियों को समझना आवश्यक है। हमने आश्वासन देने के बजाय काम करने को प्राथमिकता दी है और आगे भी यही हमारा प्रयास रहेगा।
परिस्थितियाँ चाहे जितनी चुनौतीपूर्ण हों, शिक्षक हित सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है। संगठन को अपनी पूरी क्षमता, गंभीरता और ईमानदारी के साथ शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करना है। जो प्रयास अब तक किए गए हैं, वे पूरी निष्ठा के साथ किए गए हैं और आगे भी शिक्षक हित में हर संभव संवैधानिक, लोकतांत्रिक एवं विधिसम्मत प्रयास जारी रहेगा।
सादर💐🙏