Dr Ankit Joshi

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Dr Ankit Joshi Dr. Ankit Joshi
Lecturer in School Education | Political Science
शिक्षा • शिक्षक • समाज • समसामयिक विमर्श
📍Uttarakhand

मेरे मन-मस्तिष्क को स्पर्श करने वाले उन प्रत्येक व्यक्तित्व को, जिन्होंने न केवल मुझे गढ़ा, बल्कि जीवन के प्रति सकारात्म...
05/09/2026

मेरे मन-मस्तिष्क को स्पर्श करने वाले उन प्रत्येक व्यक्तित्व को, जिन्होंने न केवल मुझे गढ़ा, बल्कि जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण, ज्ञान और साहस दिया—कृतज्ञता के साथ शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐🙏

04/09/2026
स्थानांतरण : संघर्षों के बीच उम्मीद की एक सुखद किरणराजकीय शिक्षक आज अनेक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। न्यायालयी वाद,...
31/08/2026

स्थानांतरण : संघर्षों के बीच उम्मीद की एक सुखद किरण

राजकीय शिक्षक आज अनेक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। न्यायालयी वाद, प्रशासनिक गतिरोध और लंबे समय से चली आ रही अनिश्चितताओं ने शिक्षक साथियों के मनोबल को प्रभावित किया है। ऐसे कठिन समय में स्थानांतरण की प्रक्रिया का निष्पक्ष रूप से संपन्न होना निश्चित रूप से एक सुखद और सकारात्मक घटनाक्रम है।

स्थानांतरण के विषय में माननीय शिक्षा मंत्री महोदय, आदरणीय सचिव विद्यालयी शिक्षा महोदया, आदरणीय महानिदेशक महोदया तथा आदरणीय निदेशक माध्यमिक शिक्षा महोदय से चर्चा के दौरान हमारे मन में एक स्वाभाविक संशय था कि यदि स्थानांतरण काउंसलिंग के माध्यम से हों तो प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और संतोषजनक हो सकती है।

किन्तु आज अत्यंत हर्ष के साथ यह कहना चाहता हूँ कि विभाग के शीर्ष स्तर से हमें जो निष्पक्ष एवं पारदर्शी स्थानांतरण का आश्वासन प्राप्त हुआ था, वह धरातल पर भी सही साबित हुआ है।

यह तथ्य भी समझना आवश्यक है कि वर्तमान स्थानांतरण प्रक्रिया अनुरोध-आधारित थी और संबंधित अधिनियम में काउंसलिंग का स्पष्ट प्रावधान नहीं था। इसलिए विभागीय स्तर पर काउंसलिंग का निर्णय लिया जाना संभव नहीं था। इस विषय में माननीय शिक्षा मंत्री जी से वार्ता प्रस्तावित थी, लेकिन प्रांतीय कार्यकारिणी पर स्थगनादेश के कारण यह बैठक नहीं हो सकी और काउंसलिंग के संबंध में आगे कोई प्रगति नहीं हो पाई।

वर्तमान अनुरोध-आधारित स्थानांतरण प्रक्रिया ऑफलाइन माध्यम से संपादित हुई है। ऐसे में मानवीय भूल अथवा किसी त्रुटि की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता। इसी दृष्टि से अधिनियम में तीन दिवस के भीतर प्रत्यावेदन प्रस्तुत करने का प्रावधान रखा गया है। उम्मीद है कि प्राप्त प्रत्यावेदनों का समयबद्ध एवं न्यायसंगत निस्तारण करते हुए शेष विसंगतियों को भी दूर कर दिया जाएगा।

हालाँकि इस पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया का एक पक्ष अभी भी पीड़ादायक है—वर्षों से दुर्गम क्षेत्रों में सेवाएँ दे रहे शिक्षक साथियों को अपेक्षित अवसर न मिल पाना। इस विषय को लेकर हमने विभागीय स्तर पर लगातार चिंता व्यक्त की है और इस समस्या के शीघ्र समाधान का आग्रह भी किया है। यदि विभागीय स्तर से शीघ्र कोई प्रभावी समाधान नहीं निकलता है तो शिक्षक हित में माननीय उच्च न्यायालय में पैरवी करने अथवा आवश्यकतानुसार पक्षकार बनने के विकल्प पर भी विचार किया गया है।

प्रयासों को श्रेय देना भी आवश्यक है

इस पूरी प्रक्रिया के संपादन में नव निर्वाचित प्रांतीय अध्यक्ष एवं उसके तत्काल बाद स्थगनादेश का सामना करने वाली कार्यकारिणी के मुखिया, आदरणीय रवीन्द्र सिंह राणा जी, के प्रयासों की प्रशंसा न करना मेरे लिए उचित नहीं होगा।

जब स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया पर संशय के बादल मंडरा रहे थे, तब उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर जिस सक्रियता और गंभीरता के साथ प्रयास किए, वे निश्चित रूप से अनुकरणीय हैं। किसी भी प्रक्रिया के सकारात्मक परिणाम में सामूहिक प्रयासों के साथ-साथ उन व्यक्तियों के योगदान को स्वीकार करना भी आवश्यक है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में निरंतर प्रयास जारी रखे।

आज का यह घटनाक्रम हमें यह विश्वास देता है कि संघर्ष कभी व्यर्थ नहीं जाता। आवश्यकता केवल इस बात की है कि शिक्षक हितों के प्रश्नों को निरंतर, संयमित और तथ्यपरक तरीके से उठाया जाता रहे।

स्थानांतरण की यह प्रक्रिया संघर्षों के बीच एक सुखद घटना अवश्य है, लेकिन इसे अंतिम पड़ाव नहीं माना जा सकता। शिक्षक के सामने अभी भी अनेक प्रश्न हैं—पदोन्नति, स्थानांतरण, दुर्गम सेवा, सेवा-शर्तें, विद्यालयों की स्थिति और शिक्षक सम्मान से जुड़े अनेक विषय समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

उम्मीद है कि शिक्षक हितों के लिए संघर्ष का यह दौर जारी रहेगा और आने वाले समय में उसके परिणाम इससे भी अधिक सुखद, न्यायपूर्ण और संतोषजनक होंगे।

संघर्ष जारी रहेगा….
परिस्थितियाँ बदलेंगी ….

सादर 💐🙏

25/08/2026

सम्मानित शिक्षक साथियों,
सादर अभिवादन🙏

शिक्षक समस्याओं का सिलसिला बदस्तूर जारी है और उनके समाधान की प्रतीक्षा भी लगातार लंबी होती जा रही है। नवीन कार्यकारिणी के गठन के साथ शिक्षक समाज में यह उम्मीद जगी थी कि अब लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में प्रभावी और निर्णायक पहल होगी। किंतु शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए कार्य प्रारंभ करने से पहले ही नवीन कार्यकारिणी को अपने अस्तित्व और अधिकारों के लिए संघर्ष की स्थिति का सामना करना पड़ा। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा राजकीय शिक्षक संघ के निर्वाचन परिणाम पर स्थगनादेश के कारण संगठन की कार्यवाही प्रभावित हुई है। इस संबंध में हमारी ओर से अर्जेंसी दाखिल की गई है और आगामी माह की 16 तारीख को मामले की सुनवाई संभावित है।

इन दिनों सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर शिक्षक समस्याओं और संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर अनेक चर्चाएँ हो रही हैं। ऐसी परिस्थितियों में यह स्पष्ट करना आवश्यक हो गया है कि नवीन कार्यकारिणी ने अब तक किन विषयों पर और किस दिशा में कार्य प्रारंभ किया था।

नवनिर्वाचित सम्मानित अध्यक्ष महोदय श्री रवींद्र राणा जी एवं समस्त कार्यकारिणी के मध्य प्रारंभ में ही यह स्पष्ट सहमति बनी थी कि पहले कार्य किया जाएगा और उसके बाद ही उसके संबंध में वक्तव्य दिया जाएगा। इसका प्रमुख कारण यह था कि आम शिक्षक केवल आश्वासनों से थक चुका है, वह अब परिणाम चाहता है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए संगठन ने सार्वजनिक घोषणाओं के स्थान पर वास्तविक कार्यवाही को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया था।

इसी क्रम में सभी जनपद कार्यकारिणियों के साथ लगभग दस घंटे की विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में उपस्थित सभी जनपदों से शिक्षक समस्याओं को विस्तारपूर्वक रखने का आग्रह किया गया। प्रत्येक समस्या को गंभीरता से सुना गया, उसका संज्ञान लिया गया और यह विचार किया गया कि उसके समाधान के लिए किस स्तर पर, किस माध्यम से और किस रणनीति के अंतर्गत कार्य किया जा सकता है।

संगठन ने यह निर्णय लिया कि केवल निदेशालय स्तर तक सीमित रहने के बजाय समस्याओं को सीधे शासन के उच्चतम स्तर तक ले जाया जाए। इसी रणनीति के अंतर्गत माननीय मुख्यमंत्री महोदय के स्तर पर वार्ता एवं संपर्क का क्रम प्रारंभ किया गया। साथ ही माननीय शिक्षा मंत्री महोदय के साथ शिक्षक समस्याओं पर विस्तृत बैठक प्रस्तावित की गई थी, ताकि विभिन्न लंबित विषयों पर ठोस एवं परिणामपरक चर्चा हो सके।

वर्तमान में शिक्षक समाज के सामने पदोन्नति और स्थानांतरण दो अत्यंत गंभीर एवं महत्वपूर्ण विषय हैं। पदोन्नति के मामले में विभागीय स्तर पर चल रही तैयारियों एवं प्रक्रिया को लेकर जो भी असंतोष अथवा व्यावहारिक कठिनाइयाँ सामने आईं, उनका समाधान विभागीय स्तर पर टकराव के बजाय शासन एवं सरकार के स्तर पर संवाद और वार्ता के माध्यम से निकालना संगठन ने अधिक उचित समझा। सरकार के स्तर से भी इस दिशा में सकारात्मक सहयोग की संभावनाएँ बनी थीं, किंतु संगठन के निर्वाचन परिणाम पर लगे स्थगनादेश के कारण आगे की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

टीईटी के विषय में भी वरिष्ठ एलटी शिक्षक साथियों से संबंधित संभावित कठिनाइयों को गंभीरता से लिया गया। माननीय सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ताओं से भी संपर्क किया गया । इस विषय के समाधान के लिए सम्मानित अध्यक्ष महोदय द्वारा माननीय शिक्षा मंत्री महोदय से एक अलग बैठक का समय मांगा गया था, ताकि विषय को केवल चर्चा का मुद्दा न बनाकर उसके समाधान की दिशा में ठोस पहल की जा सके। पदोन्नति हेतु निदेशालय स्तर पर अध्यक्ष, महामंत्री मंत्री को सम्मिलित करते हुए एक समिति का गठन करने पर भी सहमति बनी ।

स्थानांतरण के विषय में संगठन की स्पष्ट सोच रही है कि सुगम-दुर्गम की व्यवस्था के साथ-साथ सभी पात्र शिक्षकों को स्थानांतरण का समान अवसर मिलना चाहिए और इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाने आवश्यक हैं। यदि विभागीय स्तर पर इस विषय की प्रभावी पैरवी में अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं होते हैं, तो संगठन आवश्यकता पड़ने पर माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेने से भी पीछे नहीं हटेगा।

इसी प्रकार, महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा के समक्ष विभाग द्वारा कार्ययोजित करने के विषय पर संगठन द्वारा अपनी आपत्ति एवं चिंताएँ स्पष्ट रूप से रखी गईं। इस पर महानिदेशक महोदया द्वारा अवगत कराया गया कि संबंधित निर्णय शासनादेशों के अनुरूप ही लिए जा रहे हैं।

17-18 जुलाई 2026 - शैक्षिक उन्नयन गोष्ठी
19 जुलाई - चुनाव परिणाम
29 जुलाई - शपथ ग्रहण
12 अगस्त - संगठन पर रोक

अपने लगभग 14 दिनों के सूक्ष्म कार्यकाल में संगठन का प्रयास रहा कि शिक्षक हित से जुड़े प्रत्येक ऐसे विषय पर तथ्यात्मक एवं प्रभावी ढंग से अपनी बात संबंधित स्तर तक पहुँचाई जाए। इस दौरान माननीय मुख्यमंत्री जी से वार्ता, माननीय शिक्षा मंत्री जी से वार्ता, सचिव विद्यालयी शिक्षा से वार्ता, महानिदेशक विद्यालय शिक्षा से वार्ता और निदेशक माध्यमिक शिक्षक से वार्ता ।

आज संगठन के समक्ष तत्काल प्राथमिकता राजकीय शिक्षक संघ के निर्वाचन परिणाम पर लगे स्थगनादेश का विषय है। संगठन के अस्तित्व एवं कार्यप्रणाली से जुड़ा यह महत्वपूर्ण विषय न्यायालय में विचाराधीन है। शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न स्तरों पर व्यक्तिगत रूप से संवाद और प्रभावी पैरवी का क्रम पूरी तरह बंद नहीं हुआ।

यह भी समझना आवश्यक है कि संगठनात्मक कार्यों में अनेक ऐसे विषय और परिस्थितियाँ होती हैं जिन्हें तत्काल सार्वजनिक करना न तो रणनीतिक रूप से उचित होता है और न ही संगठन के हित में। प्रत्येक प्रयास की जानकारी उसी समय सार्वजनिक कर देना ही कार्य की सफलता का प्रमाण नहीं होता। कई बार परिणाम के लिए शांत रहकर, निरंतर और सही स्तर पर प्रयास करना अधिक आवश्यक होता है।

इसलिए सोशल मीडिया पर होने वाली चर्चाओं के आधार पर संगठन की कार्यप्रणाली अथवा उसके प्रयासों के संबंध में निष्कर्ष निकालने से पहले वास्तविक परिस्थितियों को समझना आवश्यक है। हमने आश्वासन देने के बजाय काम करने को प्राथमिकता दी है और आगे भी यही हमारा प्रयास रहेगा।

परिस्थितियाँ चाहे जितनी चुनौतीपूर्ण हों, शिक्षक हित सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है। संगठन को अपनी पूरी क्षमता, गंभीरता और ईमानदारी के साथ शिक्षक समस्याओं के समाधान के लिए कार्य करना है। जो प्रयास अब तक किए गए हैं, वे पूरी निष्ठा के साथ किए गए हैं और आगे भी शिक्षक हित में हर संभव संवैधानिक, लोकतांत्रिक एवं विधिसम्मत प्रयास जारी रहेगा।

सादर💐🙏

इस सम्मान और प्रोत्साहन के लिए NCERT के सामाजिक विज्ञान शिक्षा विभाग का हृदय से आभार। पुस्तक निर्माण की इस महत्त्वपूर्ण ...
21/08/2026

इस सम्मान और प्रोत्साहन के लिए NCERT के सामाजिक विज्ञान शिक्षा विभाग का हृदय से आभार। पुस्तक निर्माण की इस महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा बनना मेरे लिए न केवल सुखद अनुभव रहा, बल्कि सीखने के साथ- साथ एक सार्थक और गौरवपूर्ण अवसर भी रहा 💐🙏

समय का सबसे बड़ा न्याय यही है किवह किसी के पक्ष में नहीं होता—वह केवल परतें हटाता है।फिर चेहरों से मुखौटे,शब्दों से अर्थ...
19/08/2026

समय का सबसे बड़ा न्याय यही है कि
वह किसी के पक्ष में नहीं होता—
वह केवल परतें हटाता है।
फिर चेहरों से मुखौटे,
शब्दों से अर्थ और
कर्मों से चरित्र अलग दिखाई देने लगते हैं।

समय जवाब देगा…संयम, शांति और सम्मान को कमजोरी समझने का भ्रम न पालें।खामोशी विवशता नहीं, धैर्य और आत्मविश्वास की पहचान हो...
17/08/2026

समय जवाब देगा…

संयम, शांति और सम्मान को कमजोरी समझने का भ्रम न पालें।
खामोशी विवशता नहीं, धैर्य और आत्मविश्वास की पहचान होती है।

प्रकृति के सामने नीयत का हिसाब दर्ज होता है।
षड्यंत्र कितने भी गहरे हों, दुर्भावना कितनी भी मुखर हो—समय हर नीयत को उसके परिणाम तक पहुँचाता है।

और जब समय करवट लेता है,
तो जवाब शब्दों से नहीं, परिस्थितियाँ स्वयं देती हैं।

उस दिन कुत्सित विचारों, षड्यंत्रों और दुर्भावना से खड़ी की गई हर दीवार अपने ही भार से ढहती दिखाई देगी।
फिर किसी को कुछ समझाने की आवश्यकता नहीं होगी—अनुभव स्वयं सब कुछ कह देगा।

कई बार कोई व्यक्ति इसलिए भी शांत रहता है, क्योंकि उसे अपनी नीयत, अपने कर्म और अपने सत्य पर विश्वास होता है।

ध्यान रहे—कोई देख रहा है।
सब कुछ देखा जा रहा है, सब कुछ दर्ज हो रहा है।

जब समय नव-निर्माण का होता है, तब नकारात्मकता का पूरी तरह सामने आ जाना भी आवश्यक होता है—ताकि जो कुछ भीतर छिपा है, वह स्वयं उजागर हो और समय उसे उसका उचित स्थान दे सके।

इसलिए ऐसे मौन को कमजोरी समझना उचित नहीं।

मौन भी एक प्रक्रिया है—और कभी-कभी सबसे प्रभावी उत्तर शब्दों में नहीं, परिणामों में दिखाई देता है।

समय जवाब ज़रूर देगा।
और यह मौन, षड्यंत्रकारियों की कल्पना से कहीं अधिक व्यापक, प्रभावी और निर्णायक परिणाम लेकर सामने आएगा।

जय राजकीय शिक्षक संघ ✊

12/08/2026

सम्मानित शिक्षक साथियों,
सादर अभिवादन 🙏

कल दिनांक 11/08/2026 को निदेशक, माध्यमिक शिक्षा से साथ आयोजित राजकीय शिक्षक संघ की बैठक के संबंध में अनेक शिक्षक साथियों द्वारा विस्तृत जानकारी साझा करने का अनुरोध किया गया है। साथियों की जिज्ञासा को ध्यान में रखते हुए बैठक में हुई चर्चा के प्रमुख बिंदुओं को क्रमवार साझा करना उचित समझता हूँ।

सर्वप्रथम यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि कल की बैठक उच्च स्तर से निर्धारित एजेंडे के अंतर्गत आयोजित हुई थी। बैठक में पदोन्नति का विषय प्रमुखता से रखा गया।

संगठन की ओर से विभाग के समक्ष यह जानने का प्रयास किया गया कि पदोन्नतियाँ लंबित क्यों हैं और वे कौन-कौन सी व्यावहारिक अथवा विधिक बाधाएँ हैं, जिनके कारण विभाग पदोन्नति की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ा पा रहा है। संगठन ने विभाग से अपेक्षा की कि पदोन्नति में आ रही सभी बाधाओं को स्पष्ट रूप से सामने रखा जाए, ताकि उनके समाधान की दिशा में सार्थक प्रयास किया जा सके।

सहायक अध्यापक एलटी से प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के संबंध में विभाग की ओर से टीईटी की अनिवार्यता को एक प्रमुख बाधक के रूप में बताया गया। इस पर संगठन ने अपने पक्ष एवं तर्क विभाग के समक्ष रखे। संगठन की ओर से यह तथ्य रखा गया कि सहायक अध्यापक एलटी की नियुक्ति माध्यमिक स्तर की कक्षाओं में अध्यापन के लिए होती है।

विभाग की ओर से यह तर्क रखा गया कि वर्तमान में सहायक अध्यापक एलटी की नियुक्ति में टीईटी की अनिवार्यता है, इसलिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का प्रभाव माध्यमिक शिक्षकों पर भी पड़ेगा।

इसके प्रत्युत्तर में संगठन की ओर से यह विषय रखा गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का संबंधित आदेश सितंबर 2025 में आया था, लेकिन उसके बाद से अब तक विभाग की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट निर्देश अथवा स्थिति स्पष्ट करने वाला आदेश जारी नहीं किया गया है। यदि इस आधार पर पदोन्नति प्रभावित होनी थी, तो विभाग की ओर से समय रहते स्थिति स्पष्ट की जानी अपेक्षित थी।

संगठन की ओर से यह बिंदु भी रखा गया कि सहायक अध्यापक एलटी माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था का शिक्षक है, वह जूनियर विद्यालयों में स्थानांतरित नहीं होता तथा माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के अधीन कार्य करता है। अतः इस विषय के विभिन्न विधिक एवं प्रशासनिक पक्षों पर समग्र रूप से विचार किया जाना आवश्यक है।

प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नति के संबंध में भी विभाग की ओर से टीईटी की अनिवार्यता का विषय सामने रखा गया। विभाग की ओर से यह संभावना व्यक्त की गई कि यदि संबंधित वादों में पदोन्नति के लिए कोई विकल्प उपलब्ध हो तो एलटी संवर्ग को छोड़कर अन्य पात्र शिक्षकों के संबंध में प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।

इस बिंदु पर संगठन ने स्पष्ट रूप से अपनी असहमति व्यक्त की। संगठन का मत रहा कि यदि प्रधानाध्यापक पद पर पदोन्नति की सूची तैयार की जाती है तो उसमें एलटी एवं प्रवक्ता दोनों संवर्गों के पात्र शिक्षक सम्मिलित होंगे। किसी एक संवर्ग को प्रक्रिया से अलग करके पदोन्नति किया जाना उचित नहीं होगा।

संगठन का मूल उद्देश्य किसी विषय पर विवाद खड़ा करना नहीं, बल्कि पदोन्नति में आ रही वास्तविक बाधाओं को स्पष्ट रूप से समझना और उनके समाधान का रास्ता तलाशना है। इसी दृष्टि से बैठक में विभाग के समक्ष सभी बिंदुओं पर गंभीरता से चर्चा की गई।

यह भी स्पष्ट करना आवश्यक है कि संगठन ने टीईटी की अनिवार्यता के विषय पर कोई सहमति नहीं दी है। विषय पर संगठन ने अपने तर्क एवं पक्ष स्पष्ट रूप से रखा है। साथ ही, यदि विभाग की ओर से वर्तमान स्थिति को पदोन्नति में बाधक माना जाता है, तो संगठन सहायक अध्यापक एलटी सेवा नियमावली में आवश्यक संशोधन के माध्यम से समाधान निकालने के पक्ष में है, ताकि पात्र शिक्षकों की पदोन्नति का मार्ग प्रशस्त हो सके।

वर्तमान में इस विषय पर शीर्ष स्तर पर संगठन की कुछ महत्वपूर्ण बैठकें अभी लंबित हैं। हमें उम्मीद है कि आगामी बैठकों में विषय के सभी पहलुओं पर सकारात्मक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से विचार होगा और ऐसा रास्ता निकलेगा, जिससे लंबे समय से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।

अंततः हमारा प्रयास यही है कि पदोन्नति से जुड़े सभी संवर्गों के हितों को ध्यान में रखते हुए विधिसम्मत, व्यावहारिक और सर्वमान्य समाधान निकले तथा पात्र शिक्षकों के लिए पदोन्नति की राह खुले।

सादर 💐🙏
डॉ. अंकित जोशी
प्रांतीय महामंत्री
राजकीय शिक्षक संघ, उत्तराखण्ड।

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Dehradun
Dehra Dun
248001

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