ICAR-Indian Institute of Soil and Water Conservation, Dehradun

ICAR-Indian Institute of Soil and Water Conservation, Dehradun

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www.cswcrtiweb.org These centres were initially established by the Govt. Subsequently two new Research Centres were added to the CSWCRTI, one at Datia in M.P.

The ICAR-Indian Institute of Soil and Water Conservation (formerly CSWCRTI) was established on 1st April,1974 with Headquarters at Dehradun by combining Soil and Water Conservation Research, Demonstration and Training Centres which were established in 1950’s at Dehradun, Kota, Bellary, Udhagamandalam, Vasad, Agra and Chandigarh. of India and transferred to the Indian Council of Agricultural Resea

Photos from ICAR-Indian Institute of Soil and Water Conservation, Dehradun's post 17/07/2026

भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहरादून द्वारा संस्थान परिसर में भाकृअनुप स्थापना दिवस और हरेला पर्व के उपलक्ष में पौधारोपण अभियान का दिनांक जुलाई 16, 2026 को आयोजन
ICAR-IISWC, Dehradun organized a plantation drive for the celebration of ICAR foundation day and Harela in office campus on July 16, 2026

Indian Council of Agricultural Research

Photos from ICAR-Indian Institute of Soil and Water Conservation, Dehradun's post 17/07/2026

भाकृअनुप-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान,अनुसंधान केंद्र, वासद द्वारा गुजरात के राजकोट जिले के बारवाला वाटरशेड के ग्राम जलागम समिति सदस्यों हेतु “जलागम प्रबंधन रणनीतियाँ” विषय पर दो-दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का दिनांक 09-10 जुलाई, 2026 को आयोजन
ICAR-Indian Institute of Soil and Water Conservation, Research Centre, Vasad organized a two-day training programme on “Watershed Management Strategies” for Village Watershed Committee (VWC) members from Barwala watershed, Rajkot district, Gujarat during 09–10 July 2026
Indian Council of Agricultural Research

16/07/2026
16/07/2026

आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि पिछले 98 वर्षों में आईसीएआर ने कृषि, मत्स्य पालन एवं पशुपालन क्षेत्रों में अनुसंधान और नवाचार के माध्यम से देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि आईसीएआर के वैज्ञानिकों के प्रयासों का ही परिणाम है कि आज भारत दुग्ध उत्पादन में विश्व में प्रथम तथा मत्स्य उत्पादन में द्वितीय स्थान पर है।

उन्होंने वैज्ञानिकों से अनुसंधान को कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के माध्यम से किसानों, पशुपालकों एवं मत्स्य पालकों तक पहुँचाने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रयोगशालाओं से खेत तक प्रौद्योगिकी का प्रभावी हस्तांतरण ही विकसित भारत के संकल्प को गति देगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग तथा आईसीएआर के बीच हुआ समझौता ज्ञापन (एमओयू) अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को नई दिशा देगा तथा किसानों की समृद्धि और कृषि क्षेत्र के सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

16/07/2026

श्री भागीरथ चौधरी, कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस पर कहा कि खाद्यान्न की कमी से आत्मनिर्भरता तक भारत की यात्रा कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, मृदा स्वास्थ्य, दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता तथा उत्पादकता वृद्धि कृषि क्षेत्र की प्रमुख चुनौतियाँ हैं, जिनका समाधान विज्ञान-आधारित अनुसंधान, गुणवत्तापूर्ण बीज, प्राकृतिक खेती और किसान-केंद्रित नवाचारों से संभव है।

उन्होंने किसानों से मृदा स्वास्थ्य कार्ड के व्यापक उपयोग का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ मिट्टी ही आत्मनिर्भर किसान और विकसित भारत की आधारशिला है। उन्होंने विकसित कृषि संकल्प अभियान और खेत बचाओ अभियान के माध्यम से वैज्ञानिकों द्वारा ‘लैब टू लैंड’ तकनीक हस्तांतरण की सराहना की तथा कहा कि किसान भी एक वैज्ञानिक है, जिसके अनुभव कृषि विकास की दिशा तय करते हैं।

श्री चौधरी ने प्राकृतिक एवं गौ-आधारित खेती, जल संरक्षण और जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान’ का मंत्र ही आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण का आधार है। उन्होंने कृषि अनुसंधान को और सशक्त बनाने तथा आईसीएआर को आवश्यक संसाधनों से मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

16/07/2026

आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि पिछले 25 महीनों में कृषि एवं डेयरी क्षेत्र में जिस प्रकार उल्लेखनीय प्रगति, विकास और परिवर्तन हुआ है, वह देश के किसानों और ग्रामीण भारत के लिए अत्यंत प्रेरणादायक है।

उन्होंने कहा कि किसानों की समृद्धि और भारतीय कृषि के सतत विकास के लिए सभी संबंधित संस्थाओं और हितधारकों को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) अपने वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और प्रौद्योगिकी विकास के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने तथा किसानों को समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ाने में निरंतर अग्रणी भूमिका निभाती रहेगी।

16/07/2026

प्रो. एस. पी. सिंह बघेल, माननीय राज्य मंत्री, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज ने आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस पर वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय कृषि को खाद्यान्न संकट से आत्मनिर्भरता तक पहुंचाने में आईसीएआर के वैज्ञानिकों की अनुसंधान एवं नवाचार आधारित भूमिका ऐतिहासिक रही है।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 का लक्ष्य विज्ञान-आधारित कृषि, उन्नत प्रौद्योगिकियों और नवाचार के माध्यम से ही प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने उन्नत पशु प्रजनन, सेक्स-सॉर्टेड सीमेन, कृत्रिम गर्भाधान, भ्रूण प्रत्यारोपण, मत्स्य पालन, प्राकृतिक खेती, सूक्ष्म सिंचाई तथा नैनो उर्वरकों जैसी तकनीकों को किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण बताया।

प्रो. बघेल ने कहा कि आईसीएआर ने अनुसंधान को सफलतापूर्वक ‘लैब टू लैंड’ पहुंचाकर किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैज्ञानिक नवाचारों के माध्यम से आईसीएआर समृद्ध किसान, आत्मनिर्भर कृषि और विकसित भारत के निर्माण में अपनी अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा।

Photos from Indian Council of Agricultural Research's post 16/07/2026
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ICAR-IISWC, 218 Kaulagarh Road
Dehra Dun
248195

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Tuesday 10am - 5pm
Wednesday 10am - 5pm
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