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19/07/2026
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21/06/2026
किशाऊ बांध: 85 साल, 7 राज्य, 15000 करोड़ लागत,
क्यों अटका 'नेशनल प्रोजेक्ट' ?
किशाऊ बांध परियोजनाः 85 साल का सपना,
7 राज्य को फायदा, कहां अटका है 15000 करोड़ लागत वाला
‘नेशनल प्रोजेक्ट’
उत्तराखंड और हिमाचल में यमुना की सहायक टोंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बांध परियोजना के निर्माण की राह आसान नहीं है l 660 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना के निर्माण की जद में उत्तराखंड के नौ गांव और हिमाचल के आठ गांव आएंगे l इस परियोजना से 1379 मिलियन यूनिट बिजली का सालाना उत्पादन होगा l करीब छह हजार लोगों को अपना गांव छोड़ना होगा l
85 साल पहले एक सपना देखा गया l हालांकि, अब भी यह सपना अधूरा है l कई बार दो राज्यों और केंद्र सरकार की ओर से इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए पहल हुई l लेकिन फिलहाल, अब भी यह परियोजना हकीकत से दूर है l हालांकि, मंगलवार को दिल्ली में उत्तराखंड और हिमाचल के सीएम की मीटिंग में बड़ा अहम फैसला हुआ है l हम बात कर रहे हैं किशाऊ डैम परियोजना की, जो कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में प्रस्तावित है l गौर रहे कि किशाऊ एशिया का दूसरा सबसे बड़ा बांध होगा और टिहरी डैम नंबर एक पर है, जिसकी उंचाई 260 मीटर है l
दरअसल, मंगलवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सीएम सुक्खू मुलाकात और किशाऊ बांध परियोजना को लेकर चर्चा हुई l उत्तराखंड के सीएम धामी भी मौके पर मौजूद थे l हिमाचल के हित्त में मीटिंग में बड़ा फैसला हुआ है l ऐसे में हम आपको इस पूरी किशाऊ बांध परियोजना के बारे में बताने जा रहे हैं l
दरअसल, हिमाचल प्रदेश के सिरमौर और उत्तराखंड के देहरादून जिले की सीमा पर साल 1940 में किशोऊ बांध परियोजना के बारे में पहली बार विचार आया था l पंजाब सरकार ने 1944-45 में प्रोजेक्ट साइट पर सर्वे शुरू किया l हालांकि, साल 1946 में सरकार ने कई कारणों से सर्वे को रोक दिया l फिर करीब 16 साल तक यह सर्वे ठंडे बस्ते में पड़ा रहा l उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 1962 में सर्वे दोबारा शुरू किया और 1965 में प्रोजेक्ट की शुरुआती प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई गई l इस प्रोजेक्ट रिपोर्ट में कहा गया कि डैम की ऊंचाई 235 होगी l सरकार ने रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी और 1965 में इस प्रोजेक्ट को पंचवर्षीय योजना में शामिल किया गया l
परियो ना की डीपीआर का अवलोकन करने के बाद जल कमीशन ने ऑबजर्व किया कि किशाउ गांव के पास परियोजना में गड़बड़ी है और सुझाया गया कि रॉकफिल डैम के बजाए आर्क डैम बनाया जाए l उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग की तरफ से 1970 में फिर दोबारा सर्वे शुरू किया गया l 1978 में डीपीआर बनाई गई और रॉकफिल डैम का प्रस्ताव केंद्रीय जल कमीशन को सौंपा गया l
हालांकि, कमीशन ने फिर डीपीआर को देखकर माना कि रॉकफील डैम के लिए यह साइट सही नहीं है l इसमें जियोग्राफिकल परेशानियां है और ऐसे में कमीशन ने किशाऊ गांव के पास इस परियोजना की साइट को खारिज कर दिया और कहा कि अटाल, संभरखेड़ा और मोराड़ के पास साइट का चयन किया जाए l इसके बाद संबरखेड़ा की साइट को 236 मीटर ऊंचा बांध बनाने के लिए सही पाया गया l
सरकार ने रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपी और 1965 में इस प्रोजेक्ट को पंचवर्षीय योजना में शामिल किया गया l
किशाऊ बांध परियोजना की वेबवसाइट के अनुसार, संबरखेडा स्थान के लिए 1988 में डीपीआर बनाई गई, जो कि दोबारा 1998 में उत्तर प्रदेश सरकार ने रिवाइज की और केंद्रीय जल आयोग को सौंपी गई l अब हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सरकार की तरफ से इस प्रोजेक्ट की देखरेख की जा रही है क्योंकि उत्तराखंड उत्तर प्रदेश से अलग राज्य बन चुका है. इसे लेकर 2017 में किशाऊ बांध कोर्पोरेशन लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई गई l फिलहाल, अब भी इस परियोजना की साइट को लेकर मंथन जारी है l
किशाऊ बांध परियोजना किस नदी पर बन रही है ?
किशाऊ बांध परियोजना टौंस नदी पर प्रस्तावित है l इस परियोजना से 660 मेगावाट बिजली उत्पादन होगा l इस परियोजना के बनने से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को फायदा होगा l
किशाऊ बांध परियोजना पर कितना खर्च आएगा ?
किशाऊ बांध परियोजना के लिए करीब 11500 करोड़ रुपय़े की लागत आएगी हालांकि, इसमें अलग से भी काफी खर्चें होंगे l 2018 में केंद्रीय जल आयोग ने इसकी 11500 करोड़ लागत का अनुमान लगाया था l हालांकि, अब 2026 में यह लागत करीब 15000 करोड़ पहुंच गई है, करीब 236 मीटर ऊंचा यह बांध प्रस्तावित है l
किशाऊ बांध परियोजना से क्या फायदा होगा ?
किशाऊ बांध परियोजना से 97076 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था होगी l साथ ही पीने के लिए 617 MCM पानी उपलब्ध होगा l गौर रहे इस परियोजना में उत्तराखंड की 1452 हेक्टेयर और 1498 हेक्टेयर जमीन हिमाचल प्रदेश की इस्तेमाल होगी l योजना के चलते उत्तराखंड के नौ गांव और हिमाचल के 8 गांव पानी में डूब जाएंगे, और दोनों राज्यों के कुल 5484 लोग प्रभावित होंगे l
किशाऊ बांध परियोजना क्यों अटकी थी ?
हिमाचल प्रदेश में बीती भाजपा सरकार ने योजना में 800 करोड़ खर्च करने की हामी भरी थी l लेकिन अब अमित शाह के साथ मीटिंग में सीएम सुक्खू अपनी शर्तें मनवाने में कामयाब हुए हैं और आठ साल से चल रहा वित्तीय विवाद सुलझ गया है l ऐसे में अब हिमाचल प्रदेश परियोजना में पैसा खर्च नहीं करेगा.दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा हिमाचल की 2,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को वहन करेगा l वहीं, हिमाचल को करीब 600 करोड़ की सालाना आय होगी और 100 करोड़ बिजली यूनिट भी मिलेंगी l इसी मुद्दे पर बीते 8 साल से बात अटकी थी l
कब तक बन पाएगा बांध ?
इस परियोजना के लिए फिलहाल 8.10 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं और परियोजना का आगाज होने के बाद 96 महीने में इसे पूरा करने की डेडलाइन है l जून 2015 में हिमाचल और उत्तराखंड सरकार के बीच अनुबंध हुआ था l इस परियोजना में करीब 32 किमी लंबी झील बनेगी l गौर रहे कि इस परियोजना का विरोध भी लोग कर रहे हैं l
उधर, फरवरी 2026 में हिमाचल सरकार ने इस परियोजना में आगे बढ़ने से इंकार कर दिया था और सीएम सुक्खू ने कहा था कि हिमाचल प्रदेश को भाखड़ा बांध का लंबित एरियर नहीं मिला है और ऐसे में वह इस परियोजना में आगे नहीं बढ़ेंगे l हालांकि, गौर रहे कि 2008 में इस प्रोजेक्ट को नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा दिया गया था l लेकिन अब भी यह लंबित है।
साभार: अमित तोमर जी
22/12/2025
अद्भुत....गणित में कोई भी संख्या 1 से 10 तक के सभी अंकों से नहीं कट सकती, लेकिन इस विचित्र संख्या को देखिये...
दरअसल, सदियों तक यह माना जाता रहा था कि ऐसी कोई भी संख्या नहीं है जिसे 1 से 10 तक के सभी अंको से विभाजित किया जा सके। लेकिन रामानुजन ने इन अंकों के साथ माथापच्ची करके इस मिथ को भी तोड़ दिया था। उन्होंने एक ऐसी संख्या खोजी थी जिसे 1 से 10 तक के सभी अंकों से विभाजित किया जा सकता है। यानी भाग दिया जा सकता है। यह संख्या है 2520 संख्या 2520 अन्य संख्याओं की तरह वास्तव में एक सामान्य संख्या नही है, यह वो संख्या है जिसने विश्व के गणितज्ञों को अभी भी आश्चर्य में किया हुआ है। यह विचित्र संख्या 1 से 10 तक प्रत्येक अंक से भाज्य है। ऐसी संख्या जिसे इकाई तक के किसी भी अंक से भाग देने के उपरांत शेष शून्य रहे, बहुत ही असम्भव/ दुर्लभ है - ऐसा प्रतीत होता है।
अब निम्न सत्य को देखें :-
2520 ÷ 1 = 2520
2520 ÷ 2 = 1260
2520 ÷ 3 = 840
2520 ÷ 4 = 630
2520 ÷ 5 = 504
2520 ÷ 6 = 420
2520 ÷ 7 = 360
2520 ÷ 8 = 315
2520 ÷ 9 = 280
2520 ÷ 10 = 252
महान गणितज्ञ अभी भी आश्चर्यचकित है : 2520 वास्तव में एक गुणनफल है《7 x 30 x 12》का। उन्हे और भी आश्चर्य हुआ जब प्रमुख गणितज्ञ द्वारा यह संज्ञान में लाया गया कि संख्या 2520 हिन्दू संवत्सर के अनुसार एकमात्र यही संख्या है जो वास्तव में उचित बैठ रही है, जो इस गुणनफल से प्राप्त हैः- सप्ताह के दिन (7) x माह के दिन (30) x वर्ष के माह (12) = 2520 यही है भारतीय गणना की श्रेष्ठता...
जय सनातन धर्म, जय श्रीराम, जय गोविंदा ✨🙏💖🕉️
19/12/2025
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