19/06/2026
🔱 श्री दत्तात्रेय स्तोत्र – त्रिमूर्ति स्वरूप का साक्षात्कार
यह स्तोत्र अत्यंत दिव्य और दुर्लभ है, जिसे भगवान नारद ने स्वयं रचा है। इसके नियमित पाठ से जीवन की हर बाधा दूर होती है। शत्रु का नाश होता है, ज्ञान-विज्ञान की प्राप्ति होती है और मानसिक शांति का अनुभव होता है। जब ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की कृपा एक साथ चाहिए, तो यह स्तोत्र सबसे सशक्त माध्यम है।
अथ ध्यानम् –
जटाधरं पाण्डुरङ्गं शूलहस्तं कृपानिधिम्।
सर्वरोगहरं देवं दत्तात्रेयमहं भजे ॥
हिंदी अर्थ – जटा धारण करने वाले, श्वेत वर्ण वाले, शूल हाथ में लिए हुए, कृपा के भंडार, समस्त रोगों को हरने वाले दत्तात्रेय का मैं भजन करता हूँ।
जगदुत्पत्तिकर्त्रे च स्थिति - संहारहेतवे।
भवपाशविमुक्ताय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते ॥१॥
हिंदी अर्थ – जो जगत की उत्पत्ति, स्थिति और संहार के कारण हैं, भवबंधन से मुक्त कराने वाले दत्तात्रेय को नमस्कार।
जरा जन्म विनाशाय देहशुद्धिकराय च।
दिगम्बर दयामूर्ते दत्तात्रेयमहं भजे ॥२॥
हिंदी अर्थ – जरा (बुढ़ापा) और जन्म के विनाश के लिए, शरीर की शुद्धि करने वाले, दिगम्बर, दयामूर्ति दत्तात्रेय का मैं भजन करता हूँ।
कर्पूरकान्तिदेहाय ब्रह्ममूर्तिधराय च।
वेदशास्त्रपरिज्ञाय दत्तात्रेयमहं भजे ॥३॥
हिंदी अर्थ – कपूर के समान कांति वाले, ब्रह्मस्वरूप धारण करने वाले, वेद-शास्त्रों के ज्ञाता दत्तात्रेय का मैं भजन करता हूँ।
ह्रस्व दीर्घ कृश स्थूल नामगोत्र विवर्जित।
पञ्चभूतप्रदीप्ताय दत्तात्रेयमहं भजे ॥४॥
हिंदी अर्थ – छोटे-बड़े, पतले-स्थूल, नाम-गोत्र से रहित, पंचभूतों से प्रदीप्त दत्तात्रेय का मैं भजन करता हूँ।
यज्ञभोक्त्रे च यज्ञाय यज्ञरूपधराय च।
यज्ञप्रियाय सिद्धाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते ॥५॥
हिंदी अर्थ – यज्ञ को भोगने वाले, यज्ञ के देवता, यज्ञरूप धारण करने वाले, यज्ञप्रिय, सिद्ध दत्तात्रेय को नमस्कार।
आदौ ब्रह्मा मध्ये विष्णुरन्ते देवः सदाशिवः।
मूर्तित्रयस्वरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते ॥६॥
हिंदी अर्थ – आदि में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अंत में सदाशिव – तीनों मूर्तियों के स्वरूप दत्तात्रेय को नमस्कार।
भोगालयाय भोगाय योग्ययोग्याय धारिणे।
जितेन्द्रिय जितज्ञाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते॥७॥
हिंदी अर्थ – भोगों के आश्रय, भोग स्वरूप, योग्य-अयोग्य के ज्ञाता, जितेन्द्रिय, जितज्ञान दत्तात्रेय को नमस्कार।
दिगम्बराय दिव्याय दिव्यरूपधराय च।
सदोदितपरब्रह्म दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते ॥८॥
हिंदी अर्थ – दिगम्बर, दिव्य स्वरूप धारण करने वाले, सदा प्रकाशित परब्रह्म दत्तात्रेय को नमस्कार।
जम्बूद्वीप महाक्षेत्र मातापुरनिवासिने।
जयमान सतां देव दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते ॥९॥
हिंदी अर्थ – जम्बूद्वीप के महाक्षेत्र, मातापुर में निवास करने वाले, सज्जनों के द्वारा जय किए गए देव दत्तात्रेय को नमस्कार।
भिक्षाटनं गहे ग्रामे पात्रं हेममयं करे।
नानास्वादमयी भिक्षा दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते ॥१०॥
हिंदी अर्थ – घर-गाँव में भिक्षाटन करने वाले, हाथ में स्वर्ण पात्र लिए, नाना स्वादों से युक्त भिक्षा वाले दत्तात्रेय को नमस्कार।
ब्रह्मज्ञानमयी मुद्रा वस्त्रे आकाशभूतले।
प्रज्ञानधनबोधाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते ॥११॥
हिंदी अर्थ – ब्रह्मज्ञानमयी मुद्रा, आकाश और भूतल ही जिनके वस्त्र हैं, प्रज्ञा रूपी धन के ज्ञान के लिए दत्तात्रेय को नमस्कार।
अवधूत सदानन्द - परब्रह्मस्वरूपिणे।
विदेहदेहरूपाय दत्तात्रेय नमोऽस्तु ते ॥१२॥
हिंदी अर्थ – अवधूत, सदानंद, परब्रह्मस्वरूपी, विदेह और देह दोनों रूपों वाले दत्तात्रेय को नमस्कार।
सत्यरूप सदाचार सत्यधर्मपरायण।
सत्याश्रय परोक्षाय दत्तात्रेयमहं भजे ॥१३॥
हिंदी अर्थ – सत्यरूपी, सदाचारी, सत्यधर्म में तत्पर, सत्य के आश्रय, परोक्ष दत्तात्रेय का मैं भजन करता हूँ।
शूलहस्तगदापाणे वनमालासकन्धर।
यज्ञसूत्रधर ब्रह्मन् दत्तात्रेयमहं भजे ॥१४॥
हिंदी अर्थ – शूल और गदा धारण करने वाले, वनमाला धारण किए कंधों वाले, यज्ञसूत्र धारण करने वाले ब्रह्मन् दत्तात्रेय का मैं भजन करता हूँ।
क्षराक्षरस्वरूपाय परात्परतराय च।
दत्त मुक्तिपरस्तोत्र दत्तात्रेयमहं भजे ॥१५॥
हिंदी अर्थ – क्षर और अक्षर दोनों के स्वरूप, परात्पर से भी परे, मुक्ति देने वाले दत्तात्रेय का मैं भजन करता हूँ।
दत्तविद्याढ्य लक्ष्मीश दत्तास्वात्मस्वरूपिणे।
गुणनिर्गुणरूपाय दत्तात्रेयमहं भजे ॥१६॥
हिंदी अर्थ – दत्तविद्या से सम्पन्न, लक्ष्मीपति, दत्ता (दान) के स्वरूप, गुण और निर्गुण दोनों रूपों वाले दत्तात्रेय का मैं भजन करता हूँ।
शत्रुनाशकरं स्तोत्र ज्ञान - विज्ञान - दायकम्।
सर्वपापं शमं याति दत्तात्रेय नमो नमः ॥१७॥
हिंदी अर्थ – यह स्तोत्र शत्रुओं का नाश करने वाला, ज्ञान-विज्ञान देने वाला है। इसके पाठ से सभी पाप शान्त हो जाते हैं। हे दत्तात्रेय, आपको बार-बार नमस्कार।
इदं स्तोत्रं महद्दिव्यं दत्तप्रत्यक्षकारकम्।
दत्तात्रेयप्रसादाय नारदेन प्रकीर्तितम् ॥१८॥
हिंदी अर्थ – यह स्तोत्र महान और दिव्य है, जो दत्तात्रेय को प्रत्यक्ष करने वाला है। नारद जी ने दत्तात्रेय की प्रसन्नता के लिए इसका प्रकाशन किया है।
इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में आ रही हर बाधा दूर होती है और शत्रु अपने आप नष्ट हो जाते हैं। यह ज्ञान और विज्ञान दोनों को बढ़ाने वाला है, साथ ही समस्त पापों का नाश करता है। इसके नियमित पाठ से आत्मविश्वास बढ़ता है, आर्थिक संकट दूर होते हैं और मानसिक अशांति शांत होती है। पारिवारिक जीवन में सुख-समृद्धि आती है और संकट के समय अप्रत्याशित सहायता मिलती है। जो साधक इसे श्रद्धा से पढ़ता है, उसे दत्तात्रेय की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के अंतिम पड़ाव में मोक्ष का मार्ग भी सहज हो जाता है।
गुरुवार या शनिवार के दिन प्रातः स्नान कर पीले या भगवा वस्त्र पहनें। पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके लकड़ी या कुश का आसन बिछाएं। दत्तात्रेय का चित्र या मूर्ति सामने रखें और गुग्गल या धूप जलाएं। सर्वप्रथम गणेश जी और अपने कुलदेवता का स्मरण करें। फिर ध्यान मंत्र का उच्चारण करते हुए दत्तात्रेय का ध्यान करें। इसके बाद इस स्तोत्र का 3, 7 या 11 बार पाठ करें। पाठ के बाद दत्तात्रेय मंत्र ॐ श्री दत्तात्रेयाय नमः का 108 बार जाप करें। अंत में प्रार्थना करें कि हे प्रभु, मुझे सद्बुद्धि, सुख और शांति प्रदान करें। यह साधना 21 दिनों तक निरंतर करने से विशेष परिणाम मिलते हैं।
🙏 ॐ नमः शिवाय 👇 कमेंट में लिखें – ॐ श्री दत्तात्रेयाय नमः
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