Vedant IAS Academy

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Vedant IAS Academy A premier coaching institute Ideal for Civil Services Aspirant ,UGC-NET/JRF,UGC CSIR-NET/JRF&All One Day Examinations.

प्रवक्ता इंटर कॉलेज 2024 की परीक्षा ,पुलिस उपनिरीक्षक परीक्षा एवं  राज्य सरकार की अन्य भर्तियों के लिए ऑनलाइन क्लास का ए...
15/12/2024

प्रवक्ता इंटर कॉलेज 2024 की परीक्षा ,पुलिस उपनिरीक्षक परीक्षा एवं राज्य सरकार की अन्य भर्तियों के लिए ऑनलाइन क्लास का एक टेलीग्राम ग्रुप( https://t.me/+f2ok-HYZSD8xMzM1 )हमारे द्वारा बहुत अनुभवी एवं सफल लोगों के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है, जिसमें क्लासेज शाम को 6:30 बजे से 8:30 बजे के बीच संचालित की जा रही हैं टीचर्स—दिल्ली, प्रयागराज (इलाहाबाद), देहरादून एवं हैदराबाद शहरों में 20 वर्षों से भी ज्यादा समय तक पढ़ाने का एक्सपीरियंस रखते हैं !
कृपया वही लोग जुड़ें जो लेक्चरर परीक्षा 2024 , इंटर कॉलेज प्रिंसिपल एग्जाम 2024 एवं उत्तराखंड पब्लिक सर्विस कमीशन एवं ग्रुप सी की परीक्षाओं की तैयारी कर रहा/ रही हों । रेगुलर पढ़ने का/की इच्छुक हों एवं ऑनलाइन पढ़ सके !
सबसे जरूरी –इस कोर्स हेतु रीजनेबल फीस ली जा रही है ( मासिक 500 रुपए मात्र)
फीस पे करने पर आपको रेगुलर क्लास एवं डिसक्शन वाले ग्रुप में एड किया जाएगा उसी ग्रुप में स्टडी मैटेरियल , डेली ऑनलाइन क्लास का लिंक शेयर, टेस्ट पेपर एवं डिस्कशन किया जाएगा!
(विजय सर 9030045377
डॉ अजय मोहन सेमवाल सर 9412948185
भारत सर एवं दीपक सर)
कृपया अपने ग्रुप में भी शेयर करें।
धन्यवाद।

दुखद समाचार :प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की मां हीराबेन अब इस दुनिया में नही रही...ईश्वर से प्रार्थना है उनकी पवित...
30/12/2022

दुखद समाचार :

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की मां हीराबेन अब इस दुनिया में नही रही...ईश्वर से प्रार्थना है उनकी पवित्र आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें।

ॐ शांति शांति शांति

23/12/2022
26/11/2022
19/11/2022

जिन छात्रों ने B.Ed 2022-2024 के लिए CUET का पेपर दिया है और विशेष सुविधाओं के साथ B.Ed करना चाहते हों तो कृपया सीघ्र ही मुझसे संपर्क करें। contect no- 9411545400

दीपावली दीपों का पर्व है....आपको एवं आपके परिवार को दीपावली के पावन पर्व पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! यह दीपावली आपके...
24/10/2022

दीपावली दीपों का पर्व है....

आपको एवं आपके परिवार को दीपावली के पावन पर्व पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं! यह दीपावली आपके जीवन में ढेर सारी खुशियां लाए !आप सभी निरंतर प्रगति के पथ पर चलते रहें!

सुख ,समृद्धि और सदभाव की कामना संग जीवन में उल्लास जलाने वाला यह पर्व हर्षोल्लास से मनाएं एवं साथ ही साथ पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाएं जिस से आने वाली पीढ़ियों के लिए हम एक बेहतर उदाहरण प्रस्तुत कर सके!

सुख समृद्धि और सद्भाव की कामना संग जीवन में उल्लास जगाने वाले सबसे बड़े त्यौहार दीपावली का आगमन एक ऐसा अवसर है जो चारों ओर घरों से लेकर बाजारों तक और शिक्षालय से लेकर कार्यालय उत्सव का आभास कराता है!
इसलिए उसकी आतुरता से प्रतीक्षा रहती है और उसके लिए हर कोई अपने स्तर पर विशेष तैयारी करता है !यह तैयारी ही समाज और देश में आशा एवं उत्साह का संचार करती हैं! शेष कार्य दीपावली के अवसर पर होने वाली खरीदारी, साफ-सफाई ,मेल -मिलाप और झिलमिलाता प्रकाश पूरा कर देता है! क्योंकि लोग जीवन में दीपावली के आगमन की आहट नवरात्र के आगमन और विजयदशमी संपन्न होते ही सुने जाने लगती है इसलिए यह भारत और दुनिया भर में निवास कर रहे भारतीयों का सबसे बड़ा त्यौहार होता है! यह लोक पर्व न केवल जीवन की एकरसता को तोड़ता है बल्कि उसमें उमंग के रंग भरता है और जीवन चर्या को एक अतिरिक्त उर्जा भी प्रदान करने का कार्य करता है! यह ऊर्जा ही व्यक्ति ,समाज और अंततः राष्ट्र को गति प्रदान करती है! वैसे तो सनातन धर्म के सारे त्यौहार यही करते हैं लेकिन दीपावली कहीं व्यापक रूप से करती है और इसीलिए उसकी आभा कहीं अधिक होती है और वह निरंतर बढ़ती जा रही है इसी कारण अब दीपावली की अंतरराष्ट्रीय महत्व भी रेखांकित होने लगी है! प्रकाश का पर्व दीपावली अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले और उसे पूरे विश्व में सबके सुख, सबकी समृद्धि और सबकी शांति की कामना संग मनाया जाए इसके लिए हर संभव प्रयास हम भारत के लोगों को करने चाहिए! इससे विश्व समुदाय न केवल भारतीय संस्कृति से परिचित होगा बल्कि इससे भी अवगत होगा कि ऐसे त्यौहार साझा रूप से मनाए जाने कितने आवश्यक हैं!
आज के आपाधापी वाले युग में अपनी परंपराओं से जुड़ने, प्रकृति के परिवर्तनकारी रूप से परिचित होने और मानव जीवन की जिजीविषा का महत्व समझने की जितनी आवश्यकता है उतनी पहले कभी नहीं थी! क्योंकि इस आवश्यकता की पूर्ति दीपावली कहीं अद्भुत तरीके से करती है इसलिए उसे अंतरराष्ट्रीय रूप प्रदान करने की कोशिश करनी चाहिए! यदि ऐसा किया जा सके तो इससे विश्व में अपनत्व भी बढ़ेगा लोकमंगल की भावना को बल मिलेगा और यह संदेश भी सर्वत्र पहुंचेगा की हर तरह के अंधकार पर विजय पाने के साथ इस मंत्र को समझने की आवश्यकता बढ़ गई है कि व्यक्ति विशेष की प्रशंसा अन्य की प्रसन्नता पर निर्भर है एवं मनुष्य मात्र के हित के साथ ही प्राणी मात्र के हित की भी और यहां तक की प्रकृति एवं पर्यावरण की भी चिंता करनी चाहिए! ध्यान रहे कि यही भारतीय संस्कृति का मूल आधार है जो कि दीपावली अंधेरे के बीच प्रकाश और आस की खोज का पर्व है इसलिए यह खोज देश नहीं दुनिया को भी करनी चाहिए और वह भी आपस में मिलकर करनी चाहिए!

यह प्रकृति की सुषमा का ही प्रकटन है कि विजयदशमी से जिस मंगल यात्रा की शुरुआत होती है वह पूरे महीने भर चलती रहती है दीपावली के साथ उसकी आगे पीछे बहुत सारे उस सभी जुड़े होते हैं! इनमें शरद पूर्णिमा और करवा चौथ के बाद आती है धनतेरस ,जिस दिन धन्वंतरि जयंती भी होती है! इसी क्रम में छोटी दीपावली (नरक चतुर्दशी )काली पूजा (श्यामा पूजा या महानिशा पूजा) गोवर्धन पूजा, भैया दूज (यम द्वितीया )और चित्रगुप्त पूजा (वहीखाते और कलम की पूजा) और छठ की पूजा विशेष रूप से उल्लेखनीय है!
ध्यान रहे दीपावली की इस पावन पर्व पर हम अहंकार को त्यागे एवं पर्यावरण को प्रदूषित होने से भी बचाएं अन्यथा वह दिन अब दूर नहीं है जब हम अपने अस्तित्व पर्यावरण की रक्षा के लिए सड़कों पर आना होगा! भविष्य में आने वाले समय में भुखमरी ,रोजगार की लड़ाई नहीं होगी बल्कि पर्यावरण की लड़ाई होगी! इसलिए पर्यावरण को ध्यान में रखकर दीपावली के इस बेहतर त्यौहार को मनाएं! दीपावली दीपों का पर्व है !अपने अपने आंगन में मिट्टी के दिए जलाएं, जिससे हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी मजबूत हो एवं चीन द्वारा निर्मित आर्टिफिशियल वस्तुओं से भी दूर रहे!
संत रैदास के शब्दों में कहें तो हम प्रभु रूपी दीपक की बाती हैं !प्रभु जी तुम दीपक हम बाती जाकी ज्योत जऱै दिन राती!

अजय मोहन सेमवाल
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद
देहरादून, उत्तरांचल

Admission Open Session 2022-2023
30/09/2022

Admission Open Session 2022-2023

25/04/2021

कोरोना संकट: हमारी एकजुटता से ही हारेगी महामारी

कोरोना की दूसर लहर पिछली लहर से ज्यादा घातक साबित हो रही है। ऐसा इसलिए नहीं कि नया स्ट्रेन ज्यादा घातक है, बल्कि इसलिए कि हमने ही सारे तरह के नियम, परहेज और सतर्कता को दरकिनार कर दिया था। हमें इस महामारी के आर्थिक, मानसिक और शारीरिक पहलुओं को नजरंदाज नहीं करना चाहए था, और यह भी गंभीरता से समझना चाहिए था कि हमारे पास सिर्फ संसाधन ही सीमित नहीं, बल्कि रास्ते भी सीमित हैं। हमारी समझ की इसी भूल ने इसे महामारी बनाया है। देश की अर्थव्यवस्था पिछले एक साल से डगमगाई हुई है। पिछले साल लगाए गए लॉकडाउन जैसे कड़े कदम की उस समय बड़ी आवयकता इसलिए भी थी, क्योंकि तब किसी भी देश के पास कोई अनुभव नहीं था। अफरा-तफरी में सब कुछ किया गया था, क्योंकि माल से ज्यादा जान की चिंता थी। चूंकि आय के सारे साधन चुनौती बन चुके थे, ऐसे में, कई तरह की आर्थिक सहायताओं के कदम भी उठाने जरूरी थे। इस कारण सरकार का अर्थतंत्र डगमगा गया था। यही कारण है कि इस बार लॉकडाउन को प्राथमिकता में नहीं रखा गया, जो एक तरह से सही भी है, क्योंकि किसी भी देश की आर्थिकी हर मोर्चे पर लड़ने के लिए उसे सबल करती है। पहली लहर के समय दुनिया की तुलना में हम बेहतर साबित हुए थे। उस समय की सफलता के लिए मात्र सरकार को ही श्रेय नहीं गया था, बल्कि प्रधानमंत्री व देश ने समाज के हर वर्ग का आभार प्रकट किया था।

अब की बार जिस तरह इसकी व्यापक मार पड़ी है, उसके लिए सारा दोष तंत्र पर थोप देना हमारे दायित्व से कतराने का भी काम करता है। हम यह नहीं समझ पा रहे कि सरकार कोई अलग-थलग चीज नहीं है। न ही उसके पास जादू की छड़ी है, जिसे एक बार घुमा देने भर से कोरोना का अंत हो जायेगा। न तो ऐसी कोई छड़ी होती है, और होती, भी तो हमारे वर्तमान व्यवहार से वह भी मुंह मोड़ लेती और किसी भी काम की नहीं होती। हम शुरुआत से ही अगर एक बात समझ लेते कि कोरोना जैसी महामारी सही प्रबंधन के अभाव में ही ज्यादा पनपती है और यह कोई सरकारी प्रबंधन नहीं होता, बल्कि हर व्यक्ति व परिवार का अपना प्रबंधन होना चाहिए था, जिसे इस बार हमने जोर से नकारा। हम अति आत्मविश्वासी हो गए और सारे नियमों को दरकिनार कर गए। यह समझना चाहिए कि जब महामारी कहर का रूप ले लेती हैं, तो व्यवस्थाएं चाहे वह सरकारी हो या गैरसरकारी, सभी चरमरा जाती हैं।

और ऐसा ही हो रहा है। हमारे व्यक्तिगत व पारवारिक प्रबंधन लगभग शून्य हो चुके थे। हमने खुद को व परिवार को अनावयक रूप से सुरक्षित मान लिया था। भीड़ से हमारा भय खत्म हो चुका था। हमारे हर तरह के परहेज ही हमें इस महामारी की चपेट में आने से बचा सकते थे। अगर हम पहले ही चरण में पूरी तरह विफल हो गए हैं, तो फिर व्यवथा पर कैसे उंगली उठा सकते हैं? पहली लहर से हमें समझ जाना चाहिए था कि हम दो गज की दूर व मास्क जैसे कदम से बच सकते हैं। पर हमने कुछ नहीं सीखा। हमारी नासमझी ने आज देश को बड़े संकट में डाल दिया है।

ऑक्सीजन और जरूरी दवाएं अगर आज बाजार से गायब हो रही हैं, तो कारण भी हम खुद हैं। अपने हित में हमने जमाखोरी व कालाबाजारी को जन्म दिया। सरकार की इस ओर की गई कोशिशें भी तब तक असरदार नहीं होंगी, जब तक हम सरकार के तंत्र को नहीं मानेंगे। असल में कोरोना जैसी महामारी व्यवस्थाओं से ज्यादा प्रबंधन से संबंधित होती हैं, बेहतर प्रबंधन जो हर व्यक्ति व परिवार के परहेज से जुड़ा हुआ है। कुप्रबंधन महामारी को बढ़ावा ही देगा और कोई भी व्यवस्था इस तरह के ज्यादा बोझ को नहीं झेल पाएगी। यह सरकार की सीमाओं और वर्तमान व्यवस्थाओं को समझने का समय है। सरकार किसी पार्टी की नहीं होती, वह सबकी होती है, जो हम सबके लिए है। और अंततः हमारा भला तभी संभव है, जब सरकारी तंत्र को मजबूती देने में हम आगे बढ़ें।

यह समय आलोचना करने और तंज कसने का नहीं, बल्कि इस महामारी के खिलाफ सामूहिक रूप से कमर कसने का है। इस समय अपने अधिकार के लिए ज्यादा परेशान न हों, बल्कि यह सोचें कि हम चरमराती व्यवस्था को कैसे सुधारें। अब देखिए, जब वैक्सीन आई, हमने उस पर सवाल खड़े किए। जिस दिन 50 प्रतिशत लोगों का टीकाकरण हो जाएगा, महामारी 90 प्रतिशत गायब हो जाएगी। हमें इस समय सरकार को किसी भी दल से जोड़कर अपनी विवेचना नहीं देनी चाहिए। कोरोना ने किसी दल विशेष को अपने कहर से मुक्त नहीं किया। जब शेर गांव में आता हो, तब गांव एकजुट होकर ही उसे भगा पाएगा। हमें इस समय किसी वाद-विवाद का हिस्सा नहीं बनना चाहिए। हम परहेज से चलेंगे, तो कम ही लोग इसकी चपेट में आएंगे और सीमित मेडिकल व्यवस्था का भी पूरा लाभ उठा पाएंगे। हमें किसी को दोष देने से आज बचना है और देश को कोरोना के दोष से मुक्त करने के लिए जुटना है। हम एकजुट होकर ही यह लड़ाई जीत सकते हैं। हमारा जीवन आज संकट में है। जान बचानी है, तो नए सिरे से एकजुट होकर सरकार के प्रयत्नों को छोटा न करें, क्योंकि इसी से हमारी जान बच सकती है। यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि कई राज्य सरकारें हताश और असहाय हो चुकी हैं। ऐसे में हमारा कर्तव्य है कि हम सरकार के साथ जुटें और इस महामारी को पछाड़ें।

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