16/08/2026
उत्तराखंड सरकार (या किसी भी राज्य सरकार) का सबसे ज्यादा पैसा मुख्य रूप से दो श्रेणियों में खर्च होता है: पहला—'प्रतिबद्ध व्यय' (Committed Expenditure) यानी ऐसे जरूरी खर्चे जिन्हें टाला नहीं जा सकता, और दूसरा—'विकास और निर्माण कार्य' (Development & Infrastructure)।
इसे आसान बिंदुओं में समझें कि सरकार का पैसा कहाँ-कहाँ सबसे ज्यादा जाता है:
1. सबसे बड़े अनिवार्य खर्चे (Committed Expenditure)
सरकार की कमाई का लगभग आधा हिस्सा सीधे इन तीन जगहों पर चला जाता है:
• कर्मचारियों का वेतन और भत्ते (Salaries): सरकार के विभिन्न विभागों में काम करने वाले लाखों नियमित सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की सैलरी पर बजट का एक बहुत बड़ा हिस्सा खर्च होता है।
• पेंशन (Pensions): रिटायर्ड हो चुके सरकारी कर्मचारियों को हर महीने दी जाने वाली पेंशन पर सरकार का भारी-भरकम फंड खर्च होता है।
• पुराने कर्जों का ब्याज (Interest Payments): सरकार ने जो पहले से भारी-भरकम कर्ज ले रखे हैं, उस पर हर साल करोड़ों-अरबों रुपये सिर्फ ब्याज चुकाने में चले जाते हैं।
2. बुनियादी ढांचा और विकास कार्य (Infrastructure & Public Works)
सैलरी, पेंशन और ब्याज चुकाने के बाद जो पैसा बचता है, उसे सरकार विकास कार्यों में लगाती है, जिसमें सबसे ज्यादा खर्च इन पर होता है:
• सड़कें, पुल और भवन (PWD): पहाड़ी राज्य होने के कारण उत्तराखंड में सड़कों का निर्माण, चारधाम मार्ग, ऑल वेदर रोड प्रोजेक्ट और रखरखाव सबसे बड़े खर्चों में शामिल हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD) को हर साल सबसे बड़ा फंड मिलता है।
• पेयजल और सिंचाई: गांवों और शहरों में पीने का साफ पानी पहुंचाने (जैसे जल जीवन मिशन) और सिंचाई योजनाओं पर सरकार बहुत पैसा खर्च करती है।
• ऊर्जा और बिजली: पावर प्रोजेक्ट्स, बिजली आपूर्ति और ट्रांसमिशन लाइनों को मजबूत करने में बड़ा बजट खर्च होता है।
3. सामाजिक और जनकल्याणकारी क्षेत्र (Social Sectors)
जनता की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े विभागों में भी सरकार का बड़ा फंड खर्च होता है:
• शिक्षा और खेल: सरकारी स्कूल, कॉलेज, तकनीकी शिक्षा और युवाओं के लिए खेल सुविधाओं के संचालन पर सरकार मोटा बजट खर्च करती है।
• स्वास्थ्य और परिवार कल्याण: सरकारी अस्पताल, मेडिकल कॉलेज, स्वास्थ्य सेवाएं और दवाइयों के इंतजाम पर सरकार का अहम खर्च होता है।
• ग्रामीण और शहरी विकास: गांवों और शहरों के स्थानीय निकायों के विकास, आवास योजनाओं और गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों पर सरकार पैसे लगाती है।
सार रूप में कहें तो: सरकार के कुल खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और पुराने कर्जों के ब्याज में बंधा हुआ है, और बाकी बचे हुए बजट से सड़कें, पानी, बिजली, स्कूल और अस्पताल बनाए जाते हैं।