पहाड़ का बेटा - करन माहरा

पहाड़ का बेटा - करन माहरा

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पहाड़ का बेटा - करन माहरा

18/01/2026

Boss 💪






16/01/2026

ऐसी कौनसी मजबूरी है कि प्रधानमंत्री जब उत्तराखंड आते हैं तब भी हमारी बहन अंकिता भंडारी का नाम तक नहीं लेते ?

15/01/2026

उत्तराखंड कांग्रेस जब सत्ता में आएगी, तो पहाड़ों में शिक्षा केवल नाम मात्र की व्यवस्था नहीं रहेगी। जर्जर भवनों में पढ़ने को मजबूर बच्चों को अब आधुनिक स्कूल, प्रशिक्षित शिक्षक और तकनीक से सुसज्जित कक्षाएं मिलेंगी। करन माहरा का संकल्प है कि हर बच्चे को अपने गांव में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले ताकि उसके सपनों को पंख लग सकें और उसे बेहतर जीवन की तलाश में घर छोड़ना न पड़े।
इसी तरह पहाड़ों की सबसे बड़ी पीड़ा..टूटी व्यवस्था वाला स्वास्थ्य तंत्र-सिर्फ वादों में नहीं रहेगा। कांग्रेस सरकार ग्रामीण अस्पतालों को दुरुस्त करेगी, डॉक्टरों की नियुक्ति सुनिश्चित करेगी और दवाइयों व आपात सेवाओं की उपलब्धता तय करेगी। करन माहरा मानते हैं कि पहाड़ों के बीमार लोगों को इलाज के लिए शहरों की खाक नहीं छाननी चाहिए, इलाज उनके दरवाजे तक पहुँचना चाहिए।
और सबसे जरूरी-पलायन पर रोक। आज पूरा पहाड़ खाली हो रहा है क्योंकि न रोजगार है, न सुविधा। कांग्रेस की सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था, छोटे उद्योग, पर्यटन और स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार पैदा करेगी, ताकि लोग मजबूरी में अपना घर न छोड़ें बल्कि गर्व से वहीं रहकर अपने गांव को मजबूत करें। करन माहरा एक ऐसे वास्तविक जनता के नायक के रूप में खड़े हैं जो पहाड़ का दर्द समझते हैं और उसके भविष्य की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।

14/01/2026

इस बंदे में कुछ तो अलग है !






13/01/2026
13/01/2026

हमारी बहन अंकिता भंडारी के हत्याकांड में लिप्त 'वीआईपी' को भाजपा सरकार चाहे जितना भी बचा ले, सच को दबाया नहीं जा सकता। उत्तराखंड के लोग सब देख रहे हैं। न्याय की आवाज़ को कुचला नहीं जा सकता।
2027 में कांग्रेस की सरकार बनेगी और उस ‘वीआईपी’ को सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
अंकिता के लिए न्याय सिर्फ वादा नहीं, संकल्प है।

12/01/2026

ये सिर्फ एक चेहरा नहीं, एक उम्मीद है।
उत्तराखंड को नई दिशा देने का संकल्प - करन माहरा





11/01/2026

नारी सम्मान पर जो वार करे,
सत्ता उसकी जवाबदेह बने







11/01/2026

पहाड़ की पीड़ा आसमान में हेलीकॉप्टर से घूमने से नहीं समझी जा सकती थी। धराली में जब आपदा आई थी, घर बह रहे थे और लोग मदद को पुकार रहे थे, कुछ लोग सिर्फ आसमान से चक्कर काटकर लौट गए।
लेकिन वहीं एक नेता ऐसा भी था जिसने न रस्सी से लटकने से डर महसूस किया, न कीचड़ और मलबे से कदम पीछे खींचे।
🧗‍♂️ करन माहरा पैदल चला…
⛰️ करन माहरा रस्सी से पहाड़ उतरा…
🌧️ करन माहरा ने बरसात और खतरे को नज़रअंदाज़ किया…
और सीधे पहुँचा वहां, जहाँ पीड़ा थी, जहां ज़रूरत थी।
धराली के घाव आज भी ताज़ा हैं, और पहाड़ याद रखेगा कि कौन सिर्फ कैमरा और हेलीकॉप्टर के सहारे आया
और कौन सच में धरती पर उतरकर लोगों के साथ खड़ा रहा। यही फर्क है राजनीति करने वालों और जनता का दर्द समझने वालों में। पहाड़ देख रहा है। याद भी रखेगा।

Karan Mahara

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