03/04/2025
उत्तराखंड के 52 गढ़ों में से सबसे बड़ा गढ़ #बंधाणगढ़ जहां की कुलदेवी मां भगवती #बंधाणगढी नाम से प्रसिद्ध है, बंधाणगढी मंदिर एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है,जो काली को समर्पित है,जिन्हें मां #दक्षिणेश्वर_काली या #भगवती के रूप में पूजा जाता है,गढ़वाल मंडल के चमोली जिले के थराली,नारायण बगड़ व देवाल ब्लॉक से लेकर कुमाऊं मंडल के बागेश्वर जिले के गरुड़,कपकोट ब्लॉक के रहने वाले लोगों की इस क्षेत्र की लोकप्रिय देवी #बंधाणगढी में गहरी आस्था है,,
यहां अभी भी बकरी की बलि प्रथा दी जाती है,और #बंधाणगढी माता के साथ #भैरव_नाथ का भी मंदिर है,,भैरव मंदिर के सामने एक पत्थर की ओखली है,जिसमें कई सौ बकरियों की बलि नवरात्रों के अष्टमी और नवमी को दी जाती है,,और एक बहुत बड़ा मेले का आयोजन भी होता है,,ओखली की खास बात ये है कि जब भी बकरी की बलि यहां दी जाती है तो उसका पूरा रक्त (खून) उस ओखली में डाला जाता है,कई सौ बकरियों की बलि करके भी वह ओखली रक्त से नहीं भरी जाती,,चाहे हजार बकरियों की भी बलि दे दो पर रक्त से पूरी ओखली नहीं भरेगी,,,पर दो लीटर पानी डालने से भर जाती है यह मुझे यहां की एक खास बात लगी,,दूसरी खास बात यहां राजा,,महाराजाओं के किलों के अवशेष अभी तक यहां दिखाई देते है,,,!
#मां_ बंधाणगढी पर गढ़वाल से कुमाऊं तक जो आस्था है यह उसी का कारण है कि मां अपने असहाय,,दुखियारों व निसंतान भक्तों की मनोकामना पूरी करती है,जो एक बार मां के दर्शन कर लेगा,,यहां के लोगों व पुजारियों द्वारा कहा गया,,जो भक्त एक बार यहां आ कर अपनी मनोकामना माता के पास रखता है और दुबारा तभी आने के वचन देता है जब उसकी मनोकामना पूरी होगी,,मुझे आज बहुत ऐसे भक्त मिले जिन्होंने कहा मेरी मनोकामना मेरी माता ने पूरी की आज मै अपने परिवार के साथ आया हूं,,मुझे भी बहुत अच्छा लगा,,आप भी जरूर आएं ,चमोली और बागेश्वर के बीच में ग्वालदम के ठीक पास तलवाडी से ताल से लगभग 5 किलोमीटर पैदल खड़ी चढ़ाई पर बस माता का मंदिर,🙏
#जोर_से_बोलो_जय_माता_दी🙏
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05/12/2024