भारतीय सेना का गौरवशाली इतिहास रहा है. अदम्य साहस, शौर्य और देश के प्रति प्राणों की आहुति देने के लिए सदैव तत्पर सैनिक वीरता की मिसाल हैं. देश की सुरक्षा में तैनात जांबाज़ सिपाही हमारी आन-बान और शान हैं. रणबांकुरों के समर्पण और साहस को हमारा नमन🙏
#सेना_दिवस की शुभकामनाएँ💐
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गहन अध्ययन - Deep Study = Success�
कफनी ग्लेशियर बागेश्वर उत्तराखंड
आईएनएसवी कौडिन्य (INSV Kaundinya) की ऐतिहासिक यात्रा
27/12/2025
She won gold 🥇, yet somewhere along the way we failed her as a nation 🇮🇳.
A few days ago, when Lionel Messi came to India, stadiums were packed to the brim. There was no football match, no competition—just presence. People showed up in thousands, cheering, recording, celebrating.
But when our own daughter, Jyothi Yarraji, created history for India, the stadium told a different story. Empty seats. Silent stands. A champion running alone, carrying the tricolour on her chest, without the roar she truly deserved.
This contrast hurts. It exposes a truth we often avoid—we celebrate global icons loudly, but forget to stand beside our own athletes, especially when the sport is not cricket. Our support fades when it matters the most.
So I make this a New Year pledge to myself: I will buy a ticket for at least one random sports event every month. Not for fame. Not for social media. But to be present—to let our athletes know that their efforts matter, and they are not alone.
I am sorry, Jyothi Yarraji.
You deserved a full stadium.
You deserved a nation that showed up.
Let’s promise to do better. Not someday—now.🇮🇳🇮🇳🇮🇳
Jai hind 🫡🇮🇳
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राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (NGHM)
National Green Hydrogen Mission
राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का मुख्य उद्देश्य भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है।
भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक हरित हाइड्रोजन की उत्पादन क्षमता 5 मिलियन मीट्रिक टन प्रति वर्ष तक पहुँच जाए।
#राष्ट्रीय_हरित_हाइड्रोजन_मिशन
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Mission success🇮🇳!
Congratulations to team on the successful liftoff of carrying the Block-2. This historical feat showcases the indomitable spirit & progress of Atmanirbhar Bharat
Mission success🇮🇳!Congratulations to team carrying the Block-2
भारतीय धरती से अब तक का सबसे भारी उपग्रह ब्लूवर्ड ब्लॉक-2 हुआ लॉन्च
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने LVM3-M6 मिशन के सफल प्रक्षेपण के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को बधाई दी।
यह मिशन अमेरिका के अगली पीढ़ी के संचार उपग्रह ब्लूवर्ड ब्लॉक-2 को पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में ले गया।
प्रधानमंत्री ने इस मिशन को भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम और गौरवशाली मील का पत्थर बताया।
LVM3-M6 रॉकेट ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से सुबह 8:55 बजे उड़ान भरी।
उड़ान के लगभग 15 मिनट बाद, उपग्रह रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग होकर अपनी निर्धारित कक्षा में स्थापित हो गया।
लगभग 6,100 किलोग्राम वजन वाला ब्लूवर्ड ब्लॉक-2, भारतीय धरती से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी उपग्रह है।
यह प्रक्षेपण इसरो की वाणिज्यिक शाखा 'न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड' (NSIL) और अमेरिकी कंपनी AST Space Mobile के बीच एक समझौता था।
यह भारत के भारी-भरकम रॉकेट LVM3 की छठी परिचालन उड़ान थी, जो इसकी विश्वसनीय प्रदर्शन क्षमता को दर्शाती है।
ब्लूवर्ड ब्लॉक-2 उपग्रह का उद्देश्य बिना किसी विशेष हार्डवेयर के सीधे स्मार्टफोन पर सेलुलर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करना है।
यह मिशन वैश्विक वाणिज्यिक लॉन्च बाजार में भारत की बढ़ती भूमिका और 'आत्मनिर्भर भारत' के प्रयासों को मजबूत करता है।
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Table-Top Red Marking 🔴
भारत में पहली बार राजमार्ग पर 'टेबल-टॉप रेड मार्किंग'
(TABLE-TOP RED MARKING)
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने वन्यजीवों और सड़क सुरक्षा के लिए यह अभिनव सुरक्षा पहल शुरु की है।
यह पहल मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व से गुजरने वाले एक राष्ट्रीय राजमार्ग खंड पर लागू की गई है।
यह मार्किंग 5 मिमी मोटी, गर्म थर्मोप्लास्टिक की लाल सतह की परत है, जो सड़क के ऊपर बिछाई जाती है।
यह चमकीला लाल रंग ड्राइवरों को तुरंत सचेत करता है कि वे वन्यजीव-संवेदनशील क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं।
इसकी थोड़ी उभरी हुई सतह गाड़ी चलाने वाले को हल्का स्पर्श और श्रव्य संकेत देती है।
इससे ड्राइवर बिना अचानक ब्रेक लगाए स्वाभाविक रूप से गति कम करने के लिए प्रेरित होते हैं।
यह तकनीक मानव सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाने में मदद करती है।
इस खंड में गति प्रबंधन के अलावा, वन्यजीवों के लिए 25 समर्पित पशु अंडरपास और चेन-लिंक बाड़ भी लगाई गई है।
यह पहल पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार राजमार्ग विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मॉडल स्थापित करती है।
एनएचएआई ने दुबई के शेख जायद रोड से प्रेरणा लेकर यह तकनीक अपनाई।
DHRUV64
भारत का पहला 1.0 GHz, 64-बिट ड्यूल-कोर माइक्रोप्रोसेसर
भारत ने अर्धचालक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए DHRUV64 नामक देश का पहला स्वदेशी 1.0 GHz, 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर विकसित किया है। यह उपलब्धि सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (C-DAC) द्वारा माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत हासिल की गई है, जो विदेशी चिपनिर्माताओं पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
डिजाइन और तकनीकी विशेषताएं
DHRUV64 एक आधुनिक 64-बिट डुअल-कोर आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिसे उच्च कंप्यूटिंग दक्षता, बहु-कार्य क्षमताओं और सिस्टम की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी क्लॉक स्पीड 1.0 GHz है, जो इसे ऊर्जा कुशल रहते हुए भी भारी प्रोसेसिंग कार्यों के लिए उपयुक्त बनाती है। यह प्रोसेसर विभिन्न बाह्य हार्डवेयर प्रणालियों के साथ सहज एकीकरण में सक्षम है, जिससे यह कई तकनीकी क्षेत्रों में प्रयोग के लिए अनुकूल बनता है।
रणनीतिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में उपयोग
DHRUV64 को 5G ढांचे, ऑटोमोटिव इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक स्वचालन, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) जैसे क्षेत्रों में उपयोग के लिए तैयार किया गया है। माइक्रोप्रोसेसर स्मार्टफोन, कंप्यूटर, उपग्रहों और रक्षा प्रणालियों जैसे उपकरणों का मूल भाग होते हैं। ऐसे में DHRUV64 भारत को संवेदनशील और उच्च प्रभाव वाले क्षेत्रों में एक भरोसेमंद स्वदेशी विकल्प प्रदान करता है।
अर्धचालक आत्मनिर्भरता को बल
भारत वैश्विक माइक्रोप्रोसेसर खपत का लगभग 20% उपभोग करता है, जिसमें अब तक आयात पर भारी निर्भरता रही है। DHRUV64 का सफल विकास देश में चिप डिजाइन क्षमताओं को मजबूत करता है और तकनीकी संप्रभुता के राष्ट्रीय लक्ष्यों को समर्थन प्रदान करता है। यह महत्वपूर्ण डिजिटल बुनियादी ढांचे और रणनीतिक उपयोगों के लिए आपूर्ति श्रृंखला की लचीलापन को भी बढ़ाता है।
खबर से जुड़े जीके तथ्य
DHRUV64 भारत का पहला स्वदेशी 1.0 GHz, 64-बिट डुअल-कोर माइक्रोप्रोसेसर है।
इसे C-DAC ने माइक्रोप्रोसेसर डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत विकसित किया है।
इसका उपयोग 5G, ऑटोमोटिव, रक्षा और IoT जैसे क्षेत्रों में किया जाएगा।
भारत विश्व के कुल माइक्रोप्रोसेसर उपभोग का लगभग 20% हिस्सा रखता है।
DHRUV64 के बाद की दिशा
DHRUV64 भारत में विकसित माइक्रोप्रोसेसरों की बढ़ती श्रृंखला में एक और नाम जुड़ गया है, जिसमें पहले से ही IIT मद्रास द्वारा विकसित SHAKTI, IIT बॉम्बे का AJIT, अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए विकसित VIKRAM और औद्योगिक स्वचालन के लिए THEJAS64 शामिल हैं। इस सफलता के आधार पर C-DAC अब RISC-V आधारित अगली पीढ़ी के सिस्टम-ऑन-चिप्स — धनुष और धनुष+ — पर कार्य कर रहा है, जो रणनीतिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में भारत को और अधिक स्वदेशी विकल्प प्रदान करेंगे।
DHRUV64 न केवल भारत की तकनीकी क्षमताओं का परिचायक है, बल्कि यह देश के डिजिटल आत्मनिर्भरता के मार्ग को भी प्रशस्त करता है।
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प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की पहली महिला अध्यक्ष #संगीता_बरुआ Er Hayat Karki Online Study Uk™
17/02/2025
जनकताल उत्तरकाशी
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