09/04/2025
चैते गुड़ बैसाखे तेल, जेठे पन्थ असाढ़े बेल।
सावन साग न भादों दही, क्वार करेला न कातिक मही।।
अगहन जीरा पूसे धना, माघे मिश्री फागुन चना।
ई बारह जो देय बचाय, वहि घर बैद कबौं न जाय।।
शब्दार्थ- पन्थ-यात्रा, मही- माठा, धना-धनिया।
भावार्थ- यदि व्यक्ति चैत में गुड़, बैसाख में तेल, जेठ में यात्रा, आषाढ़ में बेल, सावन में साग, भादों में दही, क्वाँर में करेला, कार्तिक में मट्ठा, अगहन में जीरा, पूस में धनिया, माघ में मिश्री और फागुन में चना, ये वस्तुएँ स्वास्थ्य के लिए कष्टकारक होती हैं। जिस घर में इनसे बचा जाता है, उस घर में वैद्य कभी नहीं आता क्योंकि लोग स्वस्थ बने रहते हैं।
14/03/2025
मैं पुरुष हूँ ***
मर्दानगी की सूली पर चढ़ा हूँ
कठोर हूँ, निर्मम हूँ ,निर्भय हूँ
इस तरह ही गढ़ा हूँ
मैं पुरुष हूँ •••
मैं खारिज भी किया गया हूँ
कभी बेटा नालायक,
कभी पति निकम्मा
कभी पिता नाकाबिल बताया गया हूँ
मैं पुरुष हूँ ***
बस जिस्म तक सोचता हूँ
मैं हवस की दलदल में धंसा
हवस का पुजारी बताया गया हूँ
मैं पुरुष हूँ ***
दर्द से मेरा क्या रिश्ता
मैं पत्थर हूँ
आंसुओं से मेरा क्या वास्ता
मगर सच तो ये है
कि मैं भी रूलाया गया हूँ
जब भी किसी गलत को गलत कहता हूँ
अपने ही घर में जालिम करार दिया जाता हूँ
मैं पुरुष हूँ, ऐसे ही दबा दिया जाता हूँ
मुझमें भी हैं परतें
मुझमें भी पानी बहता है
खोल सकोगे जो परतें मेरी
तो देखोगे•••
मुझमें भी सैलाब रहता है
मैं पुरुष हूँ ***
07/12/2024
सबसे कम उम्र की भारतीय लड़की ने रचा इतिहास!
16 वर्षीय काम्या कार्तिकेयन नेपाल की ओर से माउंट एवरेस्ट (8,849 मीटर) पर चढ़ने वाली दुनिया की दूसरी सबसे कम उम्र की व्यक्ति बन गईं।
कार्तिकेयन मुंबई के नेवी चिल्ड्रन स्कूल की छात्रा हैं। वह अपने पिता कमांडर एस. कार्तिकेयन, जो नौसेना अधिकारी हैं, के साथ माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुँचीं!
07/12/2024
पुष्पा 2 की शुरुवात बता रही है कि यह इस साल की ही नही शायद 2025 में भी इससे बड़ी हिट न आये।
जबरदस्त मास एंटरटेनर है।
आज सुबह के शो में भी भयानक हलचल है कि सिनेमा हॉल भी खचा खच भरे हुए हैं।
लोकल शहरों में ट्रैफिक के डावर्जन हैं।
दर्शकों को सिनेमा हाल तो कैसे खींचा जाता है यह इस फ़िल्म से सीखना होगा।
पहला पार्ट से भी भयानक हाइप दूसरे पार्ट की है।
गजब का एंटरटेनमेंट ..
28/06/2024
इंजीनियर कहां मिलेगा मिलेगा पता हो तो बताओं ।
20/06/2024
चूल्हे की राख!
एक समय था जब ये इतनी उपयोग होती थी कि घर से टूथपेस्ट, विम बार, हैंड वास को दूर रखती थी।
बचपन में हम बच्चे राख से अपने दांत तब तक घिसते थे जब तक किचु किचू की आवाज न आने लगे।
घर के छोटे बर्तन हो या कड़ाही, तवा जैसे बड़े बर्तन हो सभी राख से ही रगड़ कर मांजे जाते थे और एकदम साफ़ हो कर चम चमाते थे।
तब चूल्हे पर भोजन बनता था और चूल्हे पर चढ़ने वाले कड़ाही, बटुली, बटूला पर राख की मोटी सी परत चढ़ाई जाती थी जिसे लेवारना( लेव लगाना) कहते थे। लेव लगाने से बर्तन जलता नही था और मांजने में मेहनत नही लगती थी जल्दी साफ हो जाता था।
सुबह नित्य क्रिया करने के बाद लोग हैंड वास या साबुन से हाथ नही धोते थे बल्कि राख से धुलते थे।
मैंने सुना है कि जिन जगहों पर पानी की दिक्कत होती है वहां के ढाबे इत्यादि पर प्लेटों को पानी से धोने के बजाय राख से मल कर साफ करके कपडे से पोंछ दिया जाता है।
कोई बच्चा शाम को ज्यादा रो रहा होता था तब घर की बड़ी बूढ़ी कहती थी कि दूधहाड़ी के नीचे से राख लेकर जाओ फलाने के यहां से नजर झरवा लाओ।
नजर झरवाने के बाद उस राख को बच्चे के पेट, तलवे, माथे पर लगाया जाता था और जरा सा मुंह में डाल दिया जाता था। न जाने झाड़ फूंक का कमाल होता था या राख में कुछ ऐसे तत्व होते थे कि जिसकी वजह से बच्चा सच में रोना बन्द कर देता था।
दुधहाड़ी के नीचे यानी अगेठा की राख शुद्ध मानी जाती थी और चूल्हे पर भोजन बनता था यानी अन्न पकता था इसलिए वो शुद्ध नही मानी जाती थी।
बात शुद्धता की थी या कोई वैज्ञानिक कारण था ये तो हमारे पुरखे जाने क्योंकि दोनों राख में फर्क तो होता था। अगेठा की राख गोबर से बने सिर्फ उपले की होती थी और चूल्हे में नाना प्रकार की लकड़ियों की राख होती थी चूंकि उस राख के कुछ अंश को खाना रहता था इसलिए संभवत उपले की राख सुरक्षित समझ कर उपयोग की जाती रही होगी।
चलिए राख गाथा बंद करते हैं।
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@अरुणिमा सिंह
12/06/2024
संयोग देखो मैं फिर से उसी सफर पर निकला हूँ,
एक और रेल निकाली जाएगी तुम्हारी नाम पर..🤣❤️
04/06/2024
पारिवारिक झगडे सुलझाने वाले सुत्र से सम्बंधित 10 सलाहें।
1. अपने बेटे और पुत्र वधु को विवाह उपरांत अपने साथ
रहने के लिए उत्साहित न करें, उत्तम है उन्हें अलग, यहां तक कि किराये के मकान में भी रहने को कहें, अलग घर ढूढना उनकी परेशानी है। आपका और बच्चों के घरों की अधिक दूरी आप के सम्बंधों को बेहतर बनायेगी।
2. अपनी पुत्र वधु से अपने पुत्र की पत्नी कि तरह व्यवहार करें, न की अपनी बेटी की तरह,आप मित्रवत् हो सकते हैं। आप का पुत्र सदैव आप से छोटा रहेगा,किन्तु उस की पत्नी नहीं, अगर एक बार भी उसे डांट देंगें तो वह सदैव याद रखेगी वास्तविकता में केवल उस की माँ ही उसे डाँटने या सुधारने का एकाधिकार रखती है आप नहीं।
3. आपकी पुत्रवधु की कोई भी आदत या उस का चरित्र
किसी भी अवस्था मैं आप की नहीं, आप के पुत्र की परेशानी है, क्योंकि पुत्र व्यस्क है।
4. ईकट्ठे रहते हुए भी अपनी अपनी जिम्मेदारियाँ स्पष्ट रखें, उनके कपड़े न धोयें, खाना न पकायें या आया का काम न करें, जब तक पुत्रवधू उसके लिए आप से प्रार्थना न करे, और अगर आप ये करने में सक्षम हैं, एवम् प्रति उपकार भी नहीं चाहते तो। बिशेषतः अपने पुत्र की परेशानियों को अपनी परेशानियां न बनाए, उसे स्वयं हल करने दें।
5. जब वह लड़ रहे हों, गूंगे एवम् बहरे बने रहें।यह स्वाभाविक है कि छोटी उमर के पति पत्नी अपने झगड़े में अविभावकों का हस्तक्षेप नहीं चाहते।
6. आपके पोती पोते केवल आप के पुत्र एवम् पुत्रवधू के हैं, वह उन्हें जैसा बनाना चाहते हैं बनाने दें, अच्छाई या बुराई के लिए वह स्वयं जिम्मेदार होंगे।
7. आप की पुत्रवधु को आपका सम्मान या सेवा करना जरुरी नहीं है, यह आप के बेटे का दायित्व है। आप को अपने बेटे को ऐसी शिक्षा देनी चाहिए कि वह एक अच्छा ईन्सान बने जिस से आपके और आप की पुत्रवधु के सम्बंध अच्छे रहें।
8. अपनी रिटायरमेंट को सूनियोजित करें, अपने बच्चों से उस में ज्यादा सहयोग की उम्मीद न करें। आप बहुत से पडाव अपनी जीवन यात्रा में तय कर चुके हैं पर उनको अभी भी जीवन यात्रा में बहुत कुछ सीखना है।
9. यह आप के हित में है आप अपने रिटायरमेंट जिंदगी का आनन्द लें, बेहतर है अगर आप अपनी मृत्यु से पूर्व उसका भरपूर आनन्द लें जो आप ने जीवन पर्यंत मेहनत करके बचाया है।अपनी कमाई को अपने लिए महत्त्वहीन न होने दें।
10. आपके नाती पोते आपके परिवार का हिस्सा नहीं हैं, वह अपने अभिभावकों के धरोहर हैं।
कृपया ध्यान् दें... 👇
यह संदेश सिर्फ़ आप के लिए नहीं है,इसे मित्रों, अभिभावकों, ससुरालियों, चाचा चाची एवम् ताऊ ताई पति एवम् पत्नी सभी, शान्ति एवम् समर्द्धी के लिए शेयर करें क्योंकि.यह उच्चतम् न्यायालय के न्यायाधीश, जो परिवारिक झगडे सुलझाते रहे हैं, उनके तजुर्बे पर आधारित है। 🙏
11/04/2024
शादी से पहले लिव-इन मे रहने की नसीहत दे रही हैं जीनत अमान
क्या आप सहमत है??
09/04/2024
"स्त्री
दुख क्या होता है उस स्त्री से पूछो जिसका पति रोज नशा करके आता हो..!!
दुख क्या होता है उस स्त्री से पूछो जिसका पति बीमारी से मर रहा हो, और उसके पास दवाई के लिए पैसे ना हो..!!
दुख क्या होता है उस स्त्री से पूछो जिसका पति उसे छोड़कर किसी गैर स्त्री से इश्क़ लड़ाता हो, और अपनी सारी कमाई उस पर लुटा देता हो..!!
दुख क्या होता है उस स्त्री से पूछो जिसका पति मर गया हो, वह कैसे दो-दो रुपये बचाकर खुद आधे पेट खाकर बच्चों का पालन पोषण कर रही है..!!
दोस्तों स्त्री के ऊपर टिप्पणी करना बहुत आसान है, मुश्किल तो है उनका दुख समझना, और उनका साथ देना...❤️🌻