27/05/2019
महाराजा धिराज दरभंगा!! जाति #हिन्दू #ब्राह्मण
जिन्होंने वाकई नेकी की और दरिया में बहा दी!
रियासत दरभंगा के महाराज रामेश्वर सिंह ने 9 जून, 1912 को जब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को बीस हजार रूपये दान दिया था (The Maharaja made a suitable reply and presented to Nawab Viqar-ul-Mulk a cheque for Rs. 20000/-, the highest contribution of a non-Muslim to the college so far.), तब हिंदुस्तान में 18 रूपये, 93 पैसे में एक तोला सोना मिलता था। इस हिसाब से उन्होंने करीब 1053 तोले सोने की कीमत के बराबर रूपये अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को दान दिया था। आज दस ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत है 32,185 रुपये। हालाँकि एक तोला (जिसे बिहार-बंगाल में भरी कहा जाता है) सोना करीब 11.66 ग्राम होता है, लेकिन चलिए फिर भी मान लेते हैं कि दोनों की मात्रा बराबर है, तो 1053 ग्राम सोने की क़ीमत आज तकरीबन 33,890,805 (तीन करोड़, अड़तीस लाख, नब्बे हजार आठ सौ पाँच रूपये) होती है।
सन् 1912 में अलीगढ़ शहर कितना अविकसित रहा होगा, इसका आज भी अनुमान लगाना कठिन नहीं है। तो उस वक्त अलीगढ़ के जी.टी. रोड पर ज़मीन की क्या क़ीमत रही होगी और सन् 1912 में अलीगढ़ के जी.टी. रोड पर बीस हजार रूपये में कितनी ज़मीन ख़रीदी जा सकती थी, यह आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है। दानदाताओं के दान का इतिहास ठीक से जाने बग़ैर आज कोई कहता है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का नाम बदलकर राजा महेंद्र प्रताप के नाम पर रखा जाए, तो कोई तथ्यों को जाने बिना कहता है कि उन्होंने हज़ारों एकड़ जमीन ए. एम.यू. को दान दी थी! ज़रा सोचिए कि अलीगढ़ के जी.टी. रोड पर महज़ तीन एकड़ ज़मीन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को लीज़ पर देने वाले राजा महेन्द्र प्रताप का दान बड़ा था या दरभंगा के राजा रामेश्वर सिंह का? क्या उनके वंशजों ने या दरभंगा के किसी राजनीतिज्ञ ने उनके नाम की तस्वीर ए.एम.यू. में लगाने की कभी माँग की? जबकि राजा महेन्द्र प्रताप के अवदान का उल्लेख करते हुए उनकी तस्वीर बाकायदा ए.एम.यू. में लगी हुई है। रियासत दरभंगा के महाराज रामेश्वर सिंह ने पाँच लाख से अधिक रुपये बी.एच.यू. को दान दिया था, मगर बनारस में भी उनके नाम का कहीं कोई उल्लेख नहीं है। साहिबो, यह समय अपने इतिहास को जानने-समझने और बहुत ग़ौर से पढ़ने का है और यदि हम इससे कुछ सीखना चाहें, तो शायद सीखने का भी!