B.P.Memorial School

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English Medium co-ed school from Nursery
till VII equipped with highly qualified teachers focussing equally on academic and extra curricular activities

05/09/2023
05/09/2022

*शिक्षक दिवस पर समर्पित*

कथा उपनिषद् और तैतरीय उपनिषद्, जो कृष्ण यजुर्वेद से संलग्न हैं, उनका शांति पाठ है:
ॐ सह नाववतु।
सह नौ भुनक्तु।
सह वीर्यं करवावहै।
तेजस्विनावधीतमस्तु मा विद्विषावहै॥

अर्थात परमेश्वर हम शिष्य और आचार्य दोनों की साथ-साथ रक्षा करें। हम दोनों को साथ-साथ विद्या के फल का भोग कराए। हम दोनों एकसाथ मिलकर विद्या प्राप्ति का सामर्थ्य प्राप्त करें। हम दोनों तेजस्वी हो। हम दोनों परस्पर द्वेष न करें। उक्त तरह की भावना रखने वाले का मन निर्मल रहता है। निर्मल मन से निर्मल भविष्य का उदय होता है।

18/03/2022

आयुर्धनं शुभ्रयशोवितानं
निरामयं जीवनसंविधानम्।
समागतो होलिकोत्सवोऽयं
ददातु ते मांगलिकं विधानम्॥

इस होली के त्योहार पर आपको लंबी आयु, धन-वैभव, निर्मल यश, निरोगी जीवन और सम्मान मिले। यह होली आपको मंगलमय अधिष्ठान प्रदान करे।

होली पर आप सभी को सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएँ 💦💧💦🤩💧💦🥳

14/09/2021

14 सितम्बर 2021
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हिन्दी दिवस की बधाइयाँ!
सदैव शुभ हो, मंगल हो सर्वदा !
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भाषा से संरक्षित होती है संस्कृति, संस्कृति से पोषित होता राष्ट्र! अपनी भाषा की प्रतिष्ठा हो तो मिले अपनी संस्कृति को संरक्षण! भाषा की उपेक्षा से व्यक्ति होता विच्छिन्नमूल !

जन के स्वाभिमान और आत्म-बल का एक प्रबल आधार है, अपनी संस्कृति से उसका लगाव!

पूर्वजों की विरासत को सहेजना, सामुदायिक ज्ञान का संचयन, पारम्परिक विवेक का भण्डारण अपनी भाषा में ही संभव! बोलियाँ और भाषाएँ मरती हैं। इनकी मौत से एक संस्कृति की मौत हो जाती है। भाषा की निधि संस्कृति को सम्पन्न करती है।

राष्ट्रवाद की दृढता केलिए भाषा की विशिष्ट भूमिका होती है। इससे "बिलगाव" अपनी जड़ों से जुड़ाव कमजोर करता है।

यह सच जेम्स मिल जानता था, मेकाले भी जानता था। तभी, उन्होंने दीर्घ काल तक भारत की सच्ची गुलामी की साजिश रची। वे जानते थे अंग्रेजी पढ़ाई करने पर यह देश "भूरे अंग्रेज " पैदा करने लगेगा। तभी, भविष्य के भारत पर इण्डिया की हुकूमत का सरंजाम कर दिया गया। योजना थी, भाषा के माध्यम से, समुदाय को अपनी संस्कृति से दूर, विमुख और परहेजी बना देना।

ऐसी ही साजिश कोल्हान में रची गयी । विलकिनसन के प्रस्ताव को मान कर चाइबासा में प्राथमिक विद्यालय खोले गये। एबीसीडी सीख जाएँगे तो अंग्रेजों के काम आएँगे। अपनी जमीन और जमात को छोड़ पाएँगे । विलकिनसन जानता था, अपनी संस्कृति से अटूट सम्बंध रखनेवाले "हो", कल खुद अपनी पहचान से अलग हो जाएँगे - बस इन्हें अंगरेजी सिखा देनी होगी । उसने सही सोचा था। उसकी "फरेब" में कोल्हान आ गया। इसी फरेब में हिन्दुस्तान आ गया।

भाषा संस्कृति से रिश्ता जोड़ती है तभी, चालाक हुकूमत सोच-समझ कर भाषा-नीति बनाती है।

गाँधी ने सोचा था आजादी के बाद अंग्रेजी के खिलाफ बनेगा देश का आम माहौल । गांधी गलत सोचते थे। वे अपने नुमाइंदे को सही पहचान नहीं सके। मेकाले सही सोचता था।

शिक्षण से बनता है मनोभाव; मनोभावों से व्यक्ति की इच्छाएं ठोस होती हैं और एक खास मानसिकता तैयार होती है। अंग्रेजी साम्राज्यवाद का शिकार हुए इस देश की अलग ही करुण गाथा है।
***
आज की तारीख सिर में सवालों की झड़ी लगी है :-
-है दुनिया में और भी कोई देश जहाँ शिशु अपनी भाषा को छोड़ ,पहले सीखता है, एबीसीडी!
- है कोई देश जहाँ अपनी भाषा में बात करना अपमानजनक और अंग्रेजी में बोलना-लिखना शान और रुआब की बात हो !
- हमसे मेरा अग्रज-अनुज क्यों बतियाने लगता है हमसे अंग्रेजी में!
- हमारे सेमिनार, कौनफरेन्स, गोष्ठियों में अंग्रेजी के रुआब की क्यों पडती है जरूरत !
- बताइए आला अदालतें हिन्दी में क्यों नहीं सुनती !
- दवा के पुर्जे, जांच रिपोर्ट आदि क्यों हैं, अंग्रेजी में !
- हमारी सड़कों पर हिदायतें अंग्रेजी में क्यों!
- बताइए,इण्डिया और भारत के बीच की दूरी किसके हित में है! मेकाले का जहर जाएगा या नहीं, देश के बदन से !
- हिन्दी के सम्बंध में संविधान सभा ने जो मूल प्रस्ताव लिए वे क्यों लागू नहीं हुए !
- अभिजन की भाषा और आमजन की भाषा अलग-अलग , यह किसकी आजादी का सबूत है !
- किस वजह से हमारे आचार-व्यवहार में , पारिवारिक अनुष्ठानों में, सालाना उत्सवों में "विदेशी" हावी हो गया! हमारे सम्बोधन तक बदल गये !
- भाषा से लगाव जब छूटने लगा क्या तभी बदल गये हमारे नाच-गान, खान-पान, रीति-रिवाज, हाव-भाव, कपड़े-लत्ते, बोल-चाल, रहन-सहन, गति-मति, पूजा-पाठ तक !
- क्या भाषा की उपेक्षा ने परम्परा और रिवाजों पर मारक आघात किया तभी, दुष्प्रभावित हो गयी हमारी संस्कृति !

आज का हाल बुरा है। परायी भाषा का साम्राज्यवाद संस्कृति को लील रहा है।
अचरज है कि,जिस भाषा में लड़ा गया स्वतंत्रता संग्राम वह दोयम दर्जे की बनी रही । जिस भाषा के सहारे आजादी के बाद के सारे "प्रतिरोध" हुए वह उपेक्षित रही। बहुत बुरा हुआ । अपनी संस्कृति केलिए विख्यात राष्ट्र आज "नकलची" बना है।

सवाल 'भारतीयता' के बचने का है। भाषा मरती है तो एक संस्कृति मर जाती है !
अंग्रेज गये, अंग्रेज़ियत राज करती रही शासन में, शिक्षा में, चिकित्सा में, विधान में, राजनीति में, बौद्धिकता में, जीवन शैली में, मानसिकता में !
तभी, आजादी अधूरी रह गयी ।

आज के दिन विचारिए, समग्रता से।
हिन्दी का मसला राष्ट्रीय जीवन से जुड़ा है !
75 वर्षो में अनिर्णय के रोग ने खासा नुकसान किया है। यह सर्वथा चिंताजनक है।

हम चिंतित हैं! हमें निश्चय करने का बल मिले ! सोचिए कब आधिपत्य हटेगा इंडिया का !

शुभमस्तु!

15/08/2021

स्वतंत्रता दिवस की 75वीं वर्षगाँठ की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई...

29/03/2021

करें जब पाँव खुद नर्तन
समझ लेना कि होली है!

हिलोरें ले रहा हो मन
समझ लेना कि होली है!

किसी को याद करते ही अगर बजते सुनाई दें कहीं घुँघरू कहीं कंगन
समझ लेना कि होली है !

कभी खोलो अचानक आप अपने घर का दरवाजा,खड़े देहरी पे हों साजन
समझ लेना कि होली है !

तरसती जिसके हों दीदार तक को आपकी आंखें उसे छूने का आये क्षण
समझ लेना कि होली है !

हमारी ज़िन्दगी यूँ तो है इक काँटों भरा जंगल अगर लगने लगे मधुबन
समझ लेना कि होली है !

बुलाये जब तुझे वो गीत गा कर ताल पर ढफ की जिसे माना किये दुश्मन
समझ लेना कि होली है !

अगर महसूस हो तुमको, कभी जब सांस लो 'नीरज' हवाओं में घुला चन्दन
समझ लेना कि होली है !!

होली की हार्दिक शुभकामना...💐🎊🎉

16/02/2021

*सरस्वती पूजा और वसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं और मंगल कामना*

"या कुन्देन्दुतुषारहारधवला
या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा
या श्वेतपद्मासना
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवै: सदा वन्दिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती नि:शेषजाड्यापहा"

_जो परमेश्वरी भगवती शारदा कुंदपुष्प, चंद्र और बर्फ के हार के समान श्वेत है और श्वेत वस्त्रों से सुशोभित हो रही है जिसके हाथों में वीणा का श्रेष्ठ दंड सुशोभित है, जो श्वेत कमल पर विराजमान है, जिसकी स्तुति सदा ब्रह्मा विष्णु और महेश द्वारा की जाती है, वह परमेश्वरी समस्त दुर्मति को दूर करने वाली माँ सरस्वती मेरी रक्षा करे।_

*महाकवि निराला की अद्भुत सरस्वती वंदना..*

वीणावादिनि वर दे!
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
भारत में भर दे!

काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
जगमग जग कर दे!

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
नव पर, नव स्वर दे!

वर दे, वीणावादिनि वर दे।
... निराला

26/01/2021

हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती
स्वयं प्रभा समुज्ज्वला स्वतंत्रता पुकारती
'अमर्त्य वीर पुत्र हो, दृढ़- प्रतिज्ञ सोच लो,
प्रशस्त पुण्य पंथ है, बढ़े चलो, बढ़े चलो!'

असंख्य कीर्ति-रश्मियाँ विकीर्ण दिव्य दाह-सी
सपूत मातृभूमि के- रुको न शूर साहसी!
अराति सैन्य सिंधु में, सुवाडवाग्नि से जलो,
प्रवीर हो जयी बनो - बढ़े चलो, बढ़े चलो!
.. जयशंकर प्रसाद

जिस तिरंगे को हम गर्ब से फहराते हैं और जो संविधान हमारे देश का आधार स्तंभ है, उसके लिये असंख्य लोगों ने अपना सब कुछ न्योछावर किया, अपने जान की बाजी लगा दी। सभी जाने अनजाने स्वतंत्रता सेनानियों को नमन।

आज के पावन पुनीत अवसर पर सबो को बधाइयाँ और शुभकामनाएं।

14/09/2020

हिन्दी दिवस

हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है
और कोई भी अक्षर वैसा क्यूँ है
उसके पीछे कुछ कारण हैं :
______________________
*क, ख, ग, घ, ङ* -
कंठव्य कहे गए,
क्योंकि इनके उच्चारण के समय ध्वनि कंठ से निकलती है ।
(एक बार बोल कर देखिये)
-------------------------
*च, छ, ज, झ,ञ* -
तालव्य कहे गए,
क्योंकि इनके उच्चारण के
समय जीभ तालू से लगती है ।
(एक बार बोल कर देखिये)
-------------------------
*ट, ठ, ड, ढ ,ण* -
मूर्धन्य कहे गए,
क्योंकि इनका उच्चारण
जीभ के मूर्धा से लगने पर ही सम्भव है ।
( बोल कर देखिये )
----------------------
*त, थ, द, ध, न* -
दंतीय कहे गए,
क्योंकि इनके उच्चारण के समय जीभ दांतों से लगती है ।
(बोल कर देखिये)
-------------------------
*प, फ, ब, भ, म* -
ओष्ठ्य कहे गए,
क्योंकि इनका उच्चारण ओठों के मिलने पर ही होता है।
(बोल कर देखिये)
_______________________

हम अपनी भाषा पर गर्व करते हैं, ये सही है परन्तु लोगो को इसका कारण भी बताईये ।
इतनी वैज्ञानिकता दुनिया की किसी भाषा में नही है ।

*"हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ"*...

05/09/2020

शिक्षक की कद्र

मशहूर पाकिस्तानी लेखक मरहूम अशफ़ाक़ अहमद लिखते हैं, " रोम (इटली) में मेरा चालान हुआ, बिज़ी होने की वजह से फीस वक़्त पर जमा नहीं करवा सका जिसकी वजह से कोर्ट जाना पड़ा ! जज के सामने पेश हुआ तो उस ने वजह पूछी। मैंनें कहा:--"प्रोफ़ेसर हूँ, मसरूफ ऐसा रहा कि वक़्त ही नहीं मिला ।

इस से पहले कि मैं बात पूरी करता, जज ने कहा :--
" A TEACHER IS IN THE COURT !"
और सब लोग खड़े हो गए और मुझ से माफ़ी मांग कर चालान कैंसिल कर दिया ! उस रोज़ मैं उस मुल्क की
कामयाबी का राज़ जान गया !

बी पी मेमोरीयल स्कूल के सभी शिक्षकवृन्द को ससम्मान समर्पित 💐

अति विशिष्ट व्यक्ति / VIP कौन है ?
क्या आप को जानकारी है कि,

1.अमेरिका में सिर्फ दो तरह के लोगों को VIP मानते हैं : वैज्ञानिक और शिक्षक !
2. फ्रांस के न्यायालय में सिर्फ शिक्षकों को ही कुर्सी पर बैठने का अधिकार है।
3. जापान में पुलिस सरकार से अनुमति लेने के बाद ही किसी शिक्षक को गिरफ्तार कर सकती है !
4. कोरिया में हर शिक्षक को वे सारे अधिकार प्राप्त हैं,जो भारत के मंत्री को प्राप्त हैं,सिर्फ अपना आई कार्ड दिखा कर !

एक ऐसा समाज,जहाँ शिक्षकों का अपमान होता रहेगा,वहाँ सिर्फ चोर, डाकू, लुटेरे और भ्रष्टाचारी लोग ही पनपते है !

शिक्षकों का सम्मान करो, देश को सम्मान मिलेगा !

शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 💐

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