01/12/2025
30 नवंबर को ज्ञानोत्सव अधिवेशन के दूसरे दिन की शुरुआत भारतीय ज्ञान परंपरा की विवेचना से शुरू हुई जिसमें प्रो देवेंद्र चौबे, प्रो अखलाक अहमद, प्रो मनिंद्र ठाकुर एवं युवा शोधकर्ता मुशर्रफ रजा ने गंभीर चर्चा की।
इसके बाद वाला सत्र भाषा, साहित्य एवं शिक्षा से संबंधित था जिसमें प्रो श्रीश चौधरी, डॉ पूजा कुमारी, डॉ प्रियेशी कुमारी, डॉ अनुभा अनुश्री, एवं डॉ सुशांत कुमार ने अपने आलेख प्रस्तुत किए।
आखिरी सत्र लोक विरासत से संबंधित था जिसमें डॉ चित्रा झा, श्री राजनाथ पंडित, और श्री संजय जायसवाल ने अपने विचार रखे।
दूसरे दिन के प्रथम सत्र की अध्यक्षता प्रो अमरनाथ, दूसरे सत्र की प्रो अमलेंदु शेखर पाठक एवं तीसरे की डॉ सुदीप्तो चौधरी ने की। हाइब्रिड मोड में आयोजित इस अधिवेशन में ज्यादातर प्रस्तुतियां उच्च गुणवत्ता की रही। बिहार पर शोध करने वाले विद्वानों का उत्साह इससे काफी बढ़ा है।
इस अधिवेशन के आयोजन में दरभंगा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्राचार्य डॉ संदीप तिवारी एवं उनके सहयोगियों की भूमिका की भूरि भूरि प्रशंसा की गई। अगले वर्ष फिर अधिवेशन आयोजित करने के संकल्प के साथ संध्या 6 बजे इसका समापन हो गया।