माँ बस माँ होती है। जो किसी के बराबरी नहीं कर सकती।
मातृदिवस की सभी को शुभकामनाएँ।
Lakshy
Lakshy Infra A Vocational Education Center
असफल लोगों को ज़रा गौर से देखिएगा पता नहीं क्यों हमेशा वे मायूस नजर आते हैं। एक समय के बाद वे कोशिशें करना ही बंद कर देते हैं। लोगों से मिलना जुलना बंद कर देते हैं। जीवन को बोझ की तरह जीने लगते हैं। और नकारात्मक बातें बहुत करते हैं। ये वही लोग होते हैं जिन्होंने जीवन को बहुत शिद्दत से जीना चाहा था और अपना सब कुछ दांव पर लगा कर निकल पड़े थे सफलता की खोज में। बार-बार असफल होनें पर सफ़लता की चाह मृगमरीचिका लगने लगती है और बची खुची इच्छा तब खत्म हो जाती है जब सबकुछ अपने हाथ से निकल जाता है। अगर ऐसा है तो समुंदर का किनारा नहीं होना चाहिए था, रातें कभी खत्म नहीं होनी चाहिए थी और मानव को कभी कंदराओं के बाहर नहीं निकलना चाहिए था।
संघर्ष ही जीवन है। जिस दिन आप संघर्ष करना बंद कर देंगे उस दिन आपकी अपनी खुद की मृत कर लेते हैं।
सफलता पाने की चाह अपने मरते दम तक नहीं छोढ़ना चाहिए।
06/04/2024
एक बार कुछ scientists ने एक बड़ा ही interesting experiment किया..
उन्होंने 5 बंदरों को एक बड़े से cage में बंद कर दिया और बीचों -बीच एक सीढ़ी लगा दी जिसके ऊपर केले लटक रहे थे..
जैसा की expected था, जैसे ही एक बन्दर की नज़र केलों पर पड़ी वो उन्हें खाने के लिए दौड़ा..
पर जैसे ही उसने कुछ सीढ़ियां चढ़ीं उस पर ठण्डे पानी की तेज धार डाल दी गयी और उसे उतर कर भागना पड़ा..
पर experimenters यहीं नहीं रुके,
उन्होंने एक बन्दर के किये गए की सजा बाकी बंदरों को भी दे डाली और सभी को ठन्डे पानी से भिगो दिया..
बेचारे बन्दर हक्के-बक्के एक कोने में दुबक कर बैठ गए..
पर वे कब तक बैठे रहते,
कुछ समय बाद एक दूसरे बन्दर को केले खाने का मन किया..
और वो उछलता कूदता सीढ़ी की तरफ दौड़ा..
अभी उसने चढ़ना शुरू ही किया था कि पानी की तेज धार से उसे नीचे गिरा दिया गया..
और इस बार भी इस बन्दर के गुस्ताखी की सज़ा बाकी बंदरों को भी दी गयी..
एक बार फिर बेचारे बन्दर सहमे हुए एक जगह बैठ गए...
थोड़ी देर बाद जब तीसरा बन्दर केलों के लिए लपका तो एक अजीब वाक्य हुआ..
बाकी के बन्दर उस पर टूट पड़े और उसे केले खाने से रोक दिया,
ताकि एक बार फिर उन्हें ठन्डे पानी की सज़ा ना भुगतनी पड़े..
अब experimenters ने एक और interesting चीज़ की..
अंदर बंद बंदरों में से एक को बाहर निकाल दिया और एक नया बन्दर अंदर डाल दिया..
नया बन्दर वहां के rules क्या जाने..
वो तुरंत ही केलों की तरफ लपका..
पर बाकी बंदरों ने झट से उसकी पिटाई कर दी..
उसे समझ नहीं आया कि आख़िर क्यों ये बन्दर ख़ुद भी केले नहीं खा रहे और उसे भी नहीं खाने दे रहे..
ख़ैर उसे भी समझ आ गया कि केले सिर्फ देखने के लिए हैं खाने के लिए नहीं..
इसके बाद experimenters ने एक और पुराने बन्दर को निकाला और नया अंदर कर दिया..
इस बार भी वही हुआ नया बन्दर केलों की तरफ लपका पर बाकी के बंदरों ने उसकी धुनाई कर दी और मज़ेदार बात ये है कि पिछली बार आया नया बन्दर भी धुनाई करने में शामिल था..
जबकि उसके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला गया था!
experiment के अंत में सभी पुराने बन्दर बाहर जा चुके थे और नए बन्दर अंदर थे जिनके ऊपर एक बार भी ठंडा पानी नहीं डाला गया था..
पर उनका behaviour भी पुराने बंदरों की तरह ही था..
वे भी किसी नए बन्दर को केलों को नहीं छूने देते..
Friends, हमारी society में भी ये behaviour देखा जा सकता है..
जब भी कोई नया काम शुरू करने की कोशिश करता है,
चाहे वो पढ़ाई , खेल , एंटरटेनमेंट, business, राजनीती, समाजसेवा या किसी और field से related हो, उसके आस पास के लोग उसे ऐसा करने से रोकते हैं..
उसे failure का डर दिखाया जाता है..
और interesting बात ये है कि उसे रोकने वाले maximum log वो होते हैं जिन्होंने ख़ुद उस field में कभी हाथ भी नहीं आज़माया होता..
इसलिए यदि आप भी कुछ नया करने की सोच रहे हैं और आपको भी समाज या आस पास के लोगों का opposition face करना पड़ रहा है तो थोड़ा संभल कर रहिये..
अपने logic और guts की सुनिए..
ख़ुद पर और अपने लक्ष्य पर विश्वास क़ायम रखिये..
और बढ़ते रहिये..
कुछ बंदरों की ज़िद्द के आगे आप भी बन्दर मत बन जाइए..
Management- Leadership - Team building- Public perception
ये चार मिलकर एक ब्रांड बनाते हैं.. सफल या असफल
Leadership: ब्रांड लीडर वह है जो रास्ता जानता है, रास्ते पर चलता है, और रास्ता दिखाता है।
किसी भी ब्रांड को याद कीजिए, आपको एक लीडर नजर आएगा जो उस ब्रांड को लीड कर रहा होगा।
टीम बिल्डिंग: कोई भी बड़ा कार्य कभी भी एक व्यक्ति द्वारा नहीं किए जाते। वे लोगों की एक टीम द्वारा किए जाते हैं। एक व्यक्ति परिवर्तन ला सकता है, लेकिन एक टीम चमत्कार कर सकती है।
टीमवर्क से सपने साकार होते हैं, लेकिन जब leader का सपना बड़ा हो और टीम खराब हो तो सपना दुःस्वप्न बन जाता है।
Public perception: धारणा का सत्यता या झूठ से संबंध नहीं होता, बस धारणा होती है.. जो organic तरीके से बनती है, पैसा खर्च कर बनाई जाती है, कई बार गलत तरीके से, कई बार क्या छनकर खबर आती है उसको समय पर कंट्रोल नही कर पाने से या कई बार चुप रह जाने से..
मैनेजमेंट: मैनेजमेंट का काम है पॉलिसी बनाना और लीडरशिप टीम को स्पेस देना ताकि वो अपना बेस्ट दे सकें ना कि टॉक्सिक माहौल बनाना।
आजकल क्रिकेट चल रहा है और लोग कनेक्ट करेंगे, तो क्रिकेट के माध्यम से समझते हैं:
धोनी: एक अच्छा लीडर जो टीम बिल्ड करना जानता है, अपनी टीम के साधारण खिलाड़ी से भी असाधारण परफॉर्मेंस लेता है और टीम को जीत दिलाता है। 5 ट्रॉफी जीती।
रोहित शर्मा: रोहित लीडर है और टीम बिल्डिंग उसका स्ट्रॉन्ग प्वाइंट है, तभी MI 5 ट्रॉफी जीती।
लेकिन इस IPL सीजन में मैनेजमेंट ने एक सफल टीम के ऊपर एक ऐसे लीडर को जिस तरीके से थोपा, उसका पब्लिक परसेप्शन अच्छा नहीं बना, टीम बिखर गई, प्लेयर्स का morale down है, ना तो individual परफॉर्मेंस अच्छा है ना as a team परफॉर्मेंस।
कारण: मैनेजमेंट का फैसला, टॉप लीडरशिप को चेंज करना बगैर टीम को कॉन्फिडेंस में लिए हुए और इसका नतीजा गलत पब्लिक परसेप्शन।
तो अगर मैनेजमेंट अच्छा हो जिसको सेंसिबल लीडर लीड कर रहा हो, जो टीम बिल्डिंग जानता हो.. उसका पब्लिक परसेप्शन अच्छा ही बनेगा जैसा टाटा (टाटा में भी साइरस मिस्त्री के CEO tenure में गलत लीडरशिप की वजह पब्लिक परसेप्शन गलत बनने लगा था, फिर मिस्त्री को हटा दिया गया था)
CSK betting में सस्पेंड भी हुआ लेकिन पब्लिक की धारणा धोनी के प्रति इतनी अच्छी थी/है कि नेगेटिव perception CSK/धोनी के लिए नही बन पाया।
किसी भी सफल ब्रांड को ये चार मिलकर क्षितिज पर ले जा सकते हैं।
#मिथिला
14/02/2024
बसंत पंचमी के पावन पर्व की हार्दिक बधाई
75वाँ गणतंत्र दिवस की सभी देश वासियों का हार्दिक बधाई।
14/01/2024
एक बिंदु जहाँ भूत और भविष्य दोनों मिलते हैं उसे वर्तमान कहते हैं। इस बिंदु से एक समय आपके लिए भूत हो जाता है और वही समय आपके लिए भविष्य भी हो जाता है। वर्तमान में आंकिए की भूत अगर दुःख भरा रहा है तो कैसे भविष्य को सुखद बनाएँ। 2022 के साल में आने वाला समय सबके लिए सुखद हो यही कामना करता हूँ।
From
Amit Kumar Kashyap
Lakshy
TISS-SVE
Darbhanga
आइए जानते हैं के बारे में
स्टॉक मार्केट में आप निवेश करके आप किस तरह से पैसा कमना चाहते हैं ये आपके रिस्क पर निर्भर करता है। कहने का मतलब ये कि कोई भी जो 18 के ऊपर के उम्र वाले कोई भी स्टॉक मार्केट में आ सकता है।
जो भी निवेश करना चाहता है उसको सबसे पहले ये जानना चाहिए
किस तरह से करना चाहते है स्टॉक मार्केट कैसे काम करता है। और किस तरह की जानकारी की जरूरत है।
जैसा की हम सब जानते हैं कि बाजार वह जगह होता है जहाँ पर पैसे के बदले समान की ख़रीद बिक्री की जाती है। जैसे की हम स्टॉक मार्केट की बात कर रहें हैं तो इस बाजार में कम्पनी अपने वैल्यू करके अपने कम्पनी का हिस्सा बाजार के तय नियम का अनुपालन कर के बेचता है इसे कंपनी में मालिक और निवेशक की हिस्सेदारी भी कह सकते है।
जैसे अगर किसी कंपनी में मालिक ने अपने 60 लाख रुपए लगाए है, और कंपनी की कुल कीमत 1 करोड़ रुपए है।
और बाकि की राशि के लिए क़र्ज़ लिया गया है, तो उस कंपनी में मालिक की हिस्से दारी 60 % है, जिसे Equity कहेंगे।
अब अगर मालिक 40 लाख के क़र्ज़ के बजाए किसी रिश्ते दार से Partnership कर के उससे 40 लाख रुपए ले तो कंपनी की Equity 100 % होगी।
जिसमे Promoter यानी मालिक की हिस्सेदारी 60 % और दूसरे Partner की हिस्सेदारी 40 % होगी।
स्टॉक मार्केट में आप निवेश करके आप किस तरह से पैसा कमना चाहते हैं ये आपके रिस्क पर भी निर्भर करता है। कम्पनी किस सेक्टर में काम करती है इसकी भी जानकारी होनी चाहिए।
बाजार को मूलतः फ़ंडामेंटल और टेक्निकल के आधार पर आकलन किया जाता है।
फ़ंडामेंटल और टेक्निकल आकलन के कुछ अपने तय नियम है।
स्टॉक मार्केट में निवेस के लिए लोगों को fandamental analysis की जानकारी रखना बहुत ही जरूरी होता है। उसी तरह से technical analysis की भी जरूरी होता है।
निवेश से पहले fandamental analysis करना जरूरी होता है उसके बाद ही technical analysis करना चाहिए। techanical analysis में बहुत से ऐसे टूल होते हैं जिसके आधार पर आप स्टॉक के fandamental analysis करने के बाद उपयोग किया जाना चाहिए।
इन दोनों आकलन में अंतर होता है।
टेक्निकल आकलन से आपको प्राइस रेंज के बारे में जानकारी मिलती है जबकि फ़ंडामेंटल आकलन में आपको स्टॉक के भाव के बारे पता चलता है कि कम्पनी के वैल्यू के अनुसार स्टॉक का भाव ये at par price है, over priced है, या under priced है।
यही fundamental और टेक्निकल analysis में बेसिक अंतर है।
स्टॉक मार्केट में निवेश करने से पहले आपको ये पता होना चाहिए की स्टॉक मार्केट बेसिक्ली कितने सेक्टर में बँटा है। स्टॉक मार्केट कुल 6 सेक्टर में बँटा हुआ है।
1. Manufacturing Sector
2. FMCG Sector
3. Banking Sector
4. Service Sector
5. IT sector
6. Pharma Sector
fandamental analysis के लिए कुछ बिंदु जिस पर आपको analysis करना चाहिए वो ये है।
उसके पहले
सबसे पहले स्टॉक मार्केट में सेक्टर को चयन करना होता है उसके बाद उस सेक्टर की कम्पनी के वैल्यू के आधार पर यह जानकारी जुटाएँ की कौन सी कम्पनी ब्लू चिप कम्पनी है, large cap की कम्पनी है, mid cap और small cap कम्पनीयाँ हैं।
सरकार उस सेक्टर के लिए कौन सी पॉलिसी पर काम कर रही है, अभी कौन सी पॉलिसी चल रही है और आगामी समय में सरकार इस पर किस तरह की पॉलिसी बनाने की सोच रही है और वर्तमान में सरकार का उस सेक्टर के लिए कैसा रवैया है। साथ में उस सेक्टर के प्रोडक्ट का प्रीवीयस performance कैसा रहा है, अगर अच्छा रहा है तो क्यूँ रहा है उस समय सरकार ने उस सेक्टर के लिए क्या क्या किया है। वर्तमान में उस सेक्टर के प्रोडक्ट का क्या डिमांड और सप्लाई रहा है और बदलते समय के अनुसार उस प्रोडक्ट की डिमांड रहेगी की नहीं।
इसके बाद सेक्टर में काम कर रहे कम्पनी के बारे में जानकारी जुटाइए। जैसे की कम्पनी की वैल्यू, कम्पनी के प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई कैसी है, कम्पनी की production कितनी है। अगर उसके प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ रही है तो उसके अनुसार वो production कर पा रहा है या नहीं। मतलब उस कम्पनी के प्रोडक्ट की sales कितना है, खास कर के उसके इन्वंटॉरी पर भी ध्यान दीजिए। कम्पनी के ऊपर उधार कितना है, कम्पनी की क्रेडिट और डेबिट ageing कितनी है। और वो कम्पनी और कौन सी सेक्टर में काम कर रही है।
30/08/2021
विश्व को मोहमई महिमा के असंख्य स्वरूप दिखा गया कान्हा,
सारथी तो कभी प्रेमी बना, तो कभी गुरू-धर्म निभा गया कान्हा,
रूप विराट धरा तो, धरा तो धरा हर लोक पे छा गया कान्हा,
रूप किया लघु तो इतना के यशोदा की गोद में आ गया कान्हा।
#कृष्ण_जन्माष्टमी की सभी को शुभकामनाएं
#जयश्रीकृष्ण
#राधा_के_नाम
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