06/07/2021
R.Raj
जय भीम नमो बुद्धा
06/07/2021
Tribal rights activist Father Stan
Swamy dies in Mumbai hospital
Stan Swamy, 84, who was an
accused in the BhimaKore-
gaon caste violence case,
passed away on Monday af-
ternoon, the Bombay High
Court was told.
Dr. Ian D’souza, medical
director of the Holy Family
Hospital where Fr. Swamy
was admitted on May 29 af-
ter having contracted CO-
VID19 while in Taloja jail,
told a division Bench of Jus-
tices S.S. Shinde and N.J. Ja-
madar that he had pulmon-
ary infection, post COVID19
complications in the lungs
and pneumonia. Dr. D’Souza
said the Jesuit priest suff�ered
cardiac arrest at 4.30 a.m.
on July 4 and was put on ven-
tilator. He never regained
consciousness.
Senior advocate Mihir De-
sai, representing Fr. Swamy,
said, “We have no grievance
against the hospital. Howev-
er, we cannot say the same
thing about the National In-
vestigation Agency [NIA] and
State authorities. I am seek-
ing a judicial probe into this
as there was a delay of 10
days in taking him to the hos-
pital from jail.”
The Bench said, “...this is
shocking news. We passed
that order ... to take him to
the hospital of his choice. We
have no words to express
our condolences.”
Mr. Desai said the NIA did
not seek his custody even for
a day and he was sent to Ta-
loja jail as soon as he was ar-
rested from Ranchi on Oc-
tober 9, 2020. He requested
the court to pass an order to
hand over the social work-
er’s body to Father Frazer,
his friend and former princi-
pal of Xavier’s college.
Mr. Desai sought the sub-
mission of all medical re-
ports and the postmortem
report to the court.
Fr. Swamy was shifted to
the private hospital from Ta-
loja jail on May 29 after di-
rections from the High
Court. He tested positive for
COVID19 on May 30.
He also had lower back
pain and bilateral hearing
loss among other ailments,
and was suff�ering from Par-
kinson’s disease. His request
for a sipper to drink water
was turned down.
The Jesuit priest, through
videoconferencing, told the
court on May 21: “I am eating
less and less and my coac-
cused are worried about me.
I would prefer to suff�er and
die like this in Taloja jail than
be admitted to J.J. Hospital.
Only one thing that I would
request the judiciary is to
consider interim bail. That is
the only request.”
Tribal rights activist Father Stan
09/06/2021
*******All Articles of Indian Constitution*****
अनुच्छेद (Articles) नम्बर व नाम
अनुच्छेद (Article) 1 - संघ का नाम और राज्य क्षेत्र
अनुच्छेद (Article) 2 - नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना
अनुच्छेद (Article) 3 - राज्य का निर्माण तथा सीमाओं या नामों मे परिवर्तन
अनुच्छेद (Article) 4 - पहली अनुसूचित व चौथी अनुसूची के संशोधन तथा दो और तीन के अधीन बनाई गई विधियां
अनुच्छेद (Article) 5 - संविधान के प्रारंभ पर नागरिकता
अनुच्छेद (Article) 6 - पाकिस्तान से भारत आने वाले कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार
अनुच्छेद (Article) 7 - भारत से पाकिस्तान जाने वालों को कुछ व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार
अनुच्छेद (Article) 8 - भारत के बाहर रहने वाले व्यक्तियों के नागरिकता के अधिकार
अनुच्छेद (Article) 9 - विदेशी राज्य की नागरिकता स्वेच्छा से लेने पर भारत का नागरिक ना होना
अनुच्छेद (Article) 10 - नागरिकता के अधिकारों का बना रहना
अनुच्छेद (Article) 11 - संसद द्वारा नागरिकता के लिए कानून का विनियमन किया जाना
अनुच्छेद (Article) 12 - राज्य की परिभाषा
अनुच्छेद (Article) 13 - मूल अधिकारों को असंगत या अल्पीकरण करने वाली विधियां
अनुच्छेद (Article) 14 - विधि के समक्ष समानता
अनुच्छेद (Article) 15 - धर्म जाति लिंग मूलवंश या जन्मस्थान के आधार पर भेद का प्रतिषेध
अनुच्छेद (Article) 16 - लोक नियोजन में अवसर की समानता
अनुच्छेद (Article) 17 - अस्पृश्यता का अंत
अनुच्छेद (Article) 18 - उपाधियों का अंत
अनुच्छेद (Article) 19 - वाक् की स्वतंत्रता
अनुच्छेद (Article) 20 - अपराधों के दोष सिद्धि के संबंध में संरक्षण
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अनुच्छेद (Article) 21 - प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण
अनुच्छेद (Article) 21 क - 6 से 14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा का अधिकार
अनुच्छेद (Article) 22 - कुछ दशाओं में गिरफ्तारी से सरंक्षण
अनुच्छेद (Article) 23 - मानव के दुर्व्यापार और बाल आश्रम
अनुच्छेद (Article) 24 - कारखानों में बालक का नियोजन का प्रतिषेध
अनुच्छेद (Article) 25 - अंतःकरण की और धर्म का आचरण और प्रचार की स्वतंत्रता
अनुच्छेद (Article) 26 - धार्मिक कार्यों के प्रबंध की स्वतंत्रता
अनुच्छेद (Article) 29 - अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण
अनुच्छेद (Article) 30 - शिक्षा संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार
अनुच्छेद (Article) 31 - सम्पत्ति के अधिकार (44वें संविधान संशोधन द्वारा हटा दिया गया।)
अनुच्छेद (Article) 32 - अधिकारों को प्रवर्तित कराने के लिए उपचार
अनुच्छेद (Article) 36 - राज्य की परिभाषा
अनुच्छेद (Article) 38 - राज्य लोक कल्याण की अभिवृद्धि के लिए सामाजिक व्यवस्था बनायेगा
अनुच्छेद (Article) 39 - पुरुष और स्त्री दोनों को समान कार्य के लिए समान वेतन
अनुच्छेद (Article) 39 क - समान न्याय और निशुल्क विधिक सहायता
अनुच्छेद (Article) 40 - ग्राम पंचायतों का संगठन
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अनुच्छेद (Article) 41 - काम शिक्षा और लोक सहायता पाने का अधिकार
अनुच्छेद (Article) 43 - कर्म कारों के लिए निर्वाह मजदूरी का प्रयास
अनुच्छेद (Article) 43 क - उद्योगों के प्रबंध में कर्मकारो का भाग लेना
अनुच्छेद (Article) 44 - नागरिकों के लिए एक समान सिविल संहिता
अनुच्छेद (Article) 45 - राज्य 6 वर्ष से कम आयु के बालकों के लिए प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख और शिक्षा का उपबंध
अनुच्छेद (Article) 48 - कृषि और पशुपालन संगठन
अनुच्छेद (Article) 48क - पर्यावरण वन तथा वन्य जीवों की रक्षा
अनुच्छेद (Article) 49- राष्ट्रीय स्मारक स्थानों और वस्तुओं का संरक्षण
अनुच्छेद (Article) 50 - कार्यपालिका से न्यायपालिका का प्रथक्करण
अनुच्छेद (Article) 51 - अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा
अनुच्छेद (Article) 51क - मूल कर्तव्य
अनुच्छेद (Article) 52 - भारत का राष्ट्रपति
अनुच्छेद (Article) 53 - संघ की कार्यपालिका शक्ति
अनुच्छेद (Article) 54 - राष्ट्रपति का निर्वाचन
अनुच्छेद (Article) 55 - राष्ट्रपति के निर्वाचन की रीती
अनुच्छेद (Article) 56 - राष्ट्रपति की पदावधि
अनुच्छेद (Article) 57 - पुनर्निर्वाचन के लिए पात्रता
अनुच्छेद (Article) 58 - राष्ट्रपति निर्वाचित होने के लिए आहर्ताए
अनुच्छेद (Article) 59 - राष्ट्रपति पद के लिए शर्ते
अनुच्छेद (Article) 60 - राष्ट्रपति की शपथ
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अनुच्छेद (Article) 61 - राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया
अनुच्छेद (Article) 62 - राष्ट्रपति पद पर व्यक्ति को भरने के लिए निर्वाचन का समय और रीतियां
अनुच्छेद (Article) 63 - भारत का उपराष्ट्रपति
अनुच्छेद (Article) 64 - उपराष्ट्रपति का राज्यसभा का पदेन सभापति होना
अनुच्छेद (Article) 65 - राष्ट्रपति के पद की रिक्त पर उप राष्ट्रपति के कार्य
अनुच्छेद (Article) 66 - उप-राष्ट्रपति का निर्वाचन
अनुच्छेद (Article) 67 - उपराष्ट्रपति की पदावधि
अनुच्छेद (Article) 68 - उप राष्ट्रपति के पद की रिक्त पद भरने के लिए निर्वाचन
अनुच्छेद (Article) 69 - उप राष्ट्रपति द्वारा शपथ
अनुच्छेद (Article) 70 - अन्य आकस्मिकता में राष्ट्रपति के कर्तव्यों का निर्वहन
अनुच्छेद (Article) 71. - राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के निर्वाचन संबंधित विषय
अनुच्छेद (Article) 72 - क्षमादान की शक्ति
अनुच्छेद (Article) 73 - संघ की कार्यपालिका शक्ति का विस्तार
अनुच्छेद (Article) 74 - राष्ट्रपति को सलाह देने के लिए मंत्रिपरिषद
अनुच्छेद (Article) 75 - मंत्रियों के बारे में उपबंध
अनुच्छेद (Article) 76 - भारत का महान्यायवादी
अनुच्छेद (Article) 77 - भारत सरकार के कार्य का संचालन
अनुच्छेद (Article) 78 - राष्ट्रपति को जानकारी देने के प्रधानमंत्री के कर्तव्य
अनुच्छेद (Article) 79 - संसद का गठन
अनुच्छेद (Article) 80 - राज्य सभा की सरंचना
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अनुच्छेद (Article) 81 - लोकसभा की संरचना
अनुच्छेद (Article) 83 - संसद के सदनो की अवधि
अनुच्छेद (Article) 84 - संसद के सदस्यों के लिए अहर्ता
अनुच्छेद (Article) 85 - संसद का सत्र सत्रावसान और विघटन
अनुच्छेद (Article) 87 - राष्ट्रपति का विशेष अभिभाषण
अनुच्छेद (Article) 88 - सदनों के बारे में मंत्रियों और महानयायवादी अधिकार
अनुच्छेद (Article) 89 - राज्यसभा का सभापति और उपसभापति
अनुच्छेद (Article) 90 - उपसभापति का पद रिक्त होना या पद हटाया जाना
अनुच्छेद (Article) 91 - सभापति के कर्तव्यों का पालन और शक्ति
अनुच्छेद (Article) 92 - सभापति या उपसभापति को पद से हटाने का संकल्प विचाराधीन हो तब उसका पीठासीन ना होना
अनुच्छेद (Article) 93 - लोकसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
अनुच्छेद (Article) 94 - अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना
अनुच्छेद (Article) 95 - अध्यक्ष में कर्तव्य एवं शक्तियां
अनुच्छेद (Article) 96 - अध्यक्ष उपाध्यक्ष को पद से हटाने का संकल्प हो तब उसका पीठासीन ना होना
अनुच्छेद (Article) 97 - सभापति उपसभापति तथा अध्यक्ष,उपाध्यक्ष के वेतन और भत्ते
अनुच्छेद (Article) 98 - संसद का सविचालय
अनुच्छेद (Article) 99 - सदस्य द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
अनुच्छेद (Article) 100 - संसाधनों में मतदान रिक्तियां के होते हुए भी सदनों के कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति
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अनुच्छेद (Article) 101 - स्थानों का रिक्त होना
अनुच्छेद (Article) 102 - सदस्यता के लिए निर्योग्यताएं
अनुच्छेद (Article) 106 - सदस्यों के वेतन भत्ते
अनुच्छेद (Article) 108 - कुछ दशाओं में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक
अनुच्छेद (Article) 109 - धन विधेयक के संबंध में विशेष प्रक्रिया
अनुच्छेद (Article) 110 - धन विधायक की परिभाषा
अनुच्छेद (Article) 111 - राष्ट्रपति की विधेयकों पर अनुमति
अनुच्छेद (Article) 112 - वार्षिक वित्तीय विवरण
अनुच्छेद (Article) 114 - विनियोग विधेयक
अनुच्छेद (Article) 115 - अनुपूरक अतिरिक्त या अधिक अनुदान
अनुच्छेद (Article) 116 - लेखानुदान प्रत्ययानुदान व अपवादानुदान
अनुच्छेद (Article) 117 - वित्त विधेयकों के बारे में विशेष उपबंध
अनुच्छेद (Article) 118 - प्रक्रिया के नियम
अनुच्छेद (Article) 120 - संसद में प्रयोग की जाने वाली भाषा
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अनुच्छेद (Article) 122 - न्यायालय द्वारा संसदीय कार्यवाही की जांच नहीं किया जाना
अनुच्छेद (Article) 123 - संसद विश्रांति काल में राष्ट्रपति की अध्यादेश शक्ति
अनुच्छेद (Article) 124 - उच्चतम न्यायालय की स्थापना और गठन
अनुच्छेद (Article) 124 (1) - भारत का एक उच्चतम न्यायालय होगा
अनुच्छेद (Article) 124 (2) - राष्ट्रपति उच्चतम न्यायालय के प्रत्येक न्यायाधीश की नियुक्ति करेगा
अनुच्छेद (Article) 124 (3) - न्यायाधीशों की योग्यताएं
अनुच्छेद (Article) 124 (6) - शपथ प्रतिज्ञान
अनुच्छेद (Article) 124 (क 1) - राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग
अनुच्छेद (Article) 125 - न्यायाधीशों का वेतन
अनुच्छेद (Article) 126 - कार्यकारी मुख्य न्याय मूर्ति की नियुक्ति
अनुच्छेद (Article) 127 - तदर्थ न्यायमूर्तियों की नियुक्ति
अनुच्छेद (Article) 128 - सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की उपस्थिति
अनुच्छेद (Article) 129 - उच्चतम न्यायालय का अभिलेख नयायालय होना
अनुच्छेद (Article) 130 - उच्चतम न्यायालय का स्थान
अनुच्छेद (Article) 131 - उच्चतम न्यायालय की आरंभिक अधिकारिता
अनुच्छेद (Article) 137 - निर्णय एवं आदेशों का पुनर्विलोकन
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अनुच्छेद (Article) 143 - उच्चतम न्यायालय से परामर्श करने की राष्ट्रपति की शक्ति
अनुच्छेद (Article)144 - सिविल एवं न्यायिक पदाधिकारियों द्वारा उच्चतम न्यायालय की सहायता
अनुच्छेद (Article) 148 - भारत का नियंत्रक महालेखा परीक्षक
अनुच्छेद (Article) 149 - नियंत्रक महालेखा परीक्षक के कर्तव्य शक्तिया
अनुच्छेद (Article) 150 - संघ के राज्यों के लेखन का प्रारूप
अनुच्छेद (Article) 153 - राज्यों के राज्यपाल
अनुच्छेद (Article) 154 - राज्य की कार्यपालिका शक्ति
अनुच्छेद (Article) 155 - राज्यपाल की नियुक्ति
अनुच्छेद (Article) 156 - राज्यपाल की पदावधि
अनुच्छेद (Article) 157 - राज्यपाल नियुक्त होने की अर्हताएँ
अनुच्छेद (Article) 158 - राज्यपाल के पद के लिए शर्तें
अनुच्छेद (Article) 159 - राज्यपाल द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
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अनुच्छेद (Article) 163 - राज्यपाल को सलाह देने के लिए मंत्री परिषद
अनुच्छेद (Article) 164 - मंत्रियों के बारे में अन्य उपबंध
अनुच्छेद (Article) 165 - राज्य का महाधिवक्ता
अनुच्छेद (Article) 166 - राज्य सरकार का संचालन
अनुच्छेद (Article) 167 - राज्यपाल को जानकारी देने के संबंध में मुख्यमंत्री के कर्तव्य
अनुच्छेद (Article) 168 - राज्य के विधान मंडल का गठन
अनुच्छेद (Article) 170 - विधानसभाओं की संरचना
अनुच्छेद (Article) 171 - विधान परिषद की संरचना
अनुच्छेद (Article) 172 - राज्यों के विधानमंडल की अवधि
अनुच्छेद (Article) 173 - राज्यों के विधानमंडल की सदस्यता के लिए योग्यताएं
अनुच्छेद (Article) 174 - राज्यों के विधानमंडल की सत्र सत्रावसान एवं विघटन
अनुच्छेद (Article) 176 - राज्यपाल का विशेष अभिभाषण
अनुच्छेद (Article) 177 - सदनों के बारे में मंत्रियों और महाधिवक्ता के अधिकार
अनुच्छेद (Article) 178 - विधानसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष
अनुच्छेद (Article) 179 - अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद रिक्त होना या पद से हटाया जाना
अनुच्छेद (Article) 180 - अध्यक्ष के पदों के कार्य व शक्ति
md-smart-classes
अनुच्छेद (Article) 181 - अध्यक्ष उपाध्यक्ष को पद से हटाने का कोई संकल्प पारित होने पर उसका पिठासिन ना होना
अनुच्छेद (Article) 182 - विधान परिषद का सभापति और उपसभापति
अनुच्छेद (Article) 183 - सभापति और उपासभापति का पद रिक्त होना पद त्याग या पद से हटाया जाना
अनुच्छेद (Article) 184 - सभापति के पद के कर्तव्यों का पालन व शक्ति
अनुच्छेद (Article) 185 - संभापति उपसभापति को पद से हटाए जाने का संकल्प विचाराधीन होने पर उसका पीठासीन ना होना
अनुच्छेद (Article) 186 - अध्यक्ष उपाध्यक्ष सभापति और उपसभापति के वेतन और भत्ते
अनुच्छेद (Article) 187 - राज्य के विधान मंडल का सचिवालय
अनुच्छेद (Article) 188 - सदस्यों द्वारा शपथ या प्रतिज्ञान
अनुच्छेद (Article) 189 - सदनों में मतदान रिक्तियां होते हुए भी साधनों का कार्य करने की शक्ति और गणपूर्ति
अनुच्छेद (Article) 199 - धन विदेश की परिभाषा
अनुच्छेद (Article) 200 - विधायकों पर अनुमति
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अनुच्छेद (Article) 202 - वार्षिक वित्तीय विवरण
अनुच्छेद (Article) 213 - विधानमंडल में अध्यादेश सत्यापित करने के राज्यपाल की शक्ति
अनुच्छेद (Article) 214 - राज्यों के लिए उच्च न्यायालय
अनुच्छेद (Article) 215 - उच्च न्यायालयों का अभिलेख न्यायालय होना
अनुच्छेद (Article) 216 - उच्च न्यायालय का गठन
अनुच्छेद (Article) 217 - उच्च न्यायालय न्यायाधीश की नियुक्ति पद्धति शर्तें
अनुच्छेद (Article) 219 - शपथ व प्रतिज्ञान
अनुच्छेद (Article) 221 - न्यायाधीशों का वेतन
अनुच्छेद (Article) 222 - एक न्यायालय से दूसरे न्यायालय में न्यायाधीशों का अंतरण
अनुच्छेद (Article) 223 - कार्यकारी मुख्य न्याय मूर्ति के नियुक्ति
अनुच्छेद (Article) 224 - अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति
अनुच्छेद (Article) 226 - कुछ रिट निकालने के लिए उच्च न्यायालय की शक्ति
अनुच्छेद (Article) 231 - दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना
अनुच्छेद (Article) 233 - जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति
अनुच्छेद (Article) 241 - संघ राज्य क्षेत्र के लिए उच्च-न्यायालय
md-smart-classes
अनुच्छेद (Article) 243 - पंचायत नगर पालिकाएं एवं सहकारी समितियां
अनुच्छेद (Article) 244 - अनुसूचित क्षेत्रो व जनजाति क्षेत्रों का प्रशासन
अनुच्छेद (Article) 248 - अवशिष्ट विधाई शक्तियां
अनुच्छेद (Article) 249 - राज्य सूची के विषय के संबंध में राष्ट्रीय हित में विधि बनाने की संसद की शक्ति
अनुच्छेद (Article) 252 - दो या अधिक राज्य के लिए सहमति से विधि बनाने की संसद की शक्ति
अनुच्छेद (Article) 254 - संसद द्वारा बनाई गई विधियों और राज्यों के विधान मंडल द्वारा बनाए गए विधियों में असंगति
अनुच्छेद (Article) 256 - राज्यों की और संघ की बाध्यता
अनुच्छेद (Article) 257 - कुछ दशाओं में राज्यों पर संघ का नियंत्रण
अनुच्छेद (Article) 262 - अंतर्राज्यीय नदियों या नदी दूनों के जल संबंधी विवादों का न्याय निर्णय
अनुच्छेद (Article) 263 - अंतर्राज्यीय विकास परिषद का गठन
अनुच्छेद (Article) 266 - संचित निधि
अनुच्छेद (Article) 267 - आकस्मिकता निधि
अनुच्छेद (Article) 269 - संघ द्वारा उद्ग्रहित और संग्रहित किंतु राज्यों को सौपे जाने वाले कर
अनुच्छेद (Article) 270 - संघ द्वारा इकट्ठे किए कर संघ और राज्यों के बीच वितरित किए जाने वाले कर
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अनुच्छेद (Article) 280 - वित्त आयोग
अनुच्छेद (Article) 281 - वित्त आयोग की सिफारिशे
अनुच्छेद (Article) 292 - भारत सरकार द्वारा उधार लेना
अनुच्छेद (Article) 293 - राज्य द्वारा उधार लेना
अनुच्छेद (Article) 300 क - संपत्ति का अधिकार
अनुच्छेद (Article) 301 - व्यापार वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता
अनुच्छेद (Article) 309 - राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की भर्ती और सेवा की शर्तों
अनुच्छेद (Article) 310 - संघ या राज्य की सेवा करने वाले व्यक्तियों की पदावधि
अनुच्छेद (Article) 312 - अखिल भारतीय सेवाएं
अनुच्छेद (Article) 313 - संक्रमण कालीन उपबंध
अनुच्छेद (Article) 315 - संघ राज्य के लिए लोक सेवा आयोग
अनुच्छेद (Article) 316 - सदस्यों की नियुक्ति एवं पदावधि
अनुच्छेद (Article) 317 - लोक सेवा आयोग के किसी सदस्य को हटाया जाना या निलंबित किया जाना
अनुच्छेद (Article) 320 - लोकसेवा आयोग के कृत्य
अनुच्छेद (Article) 323 क - प्रशासनिक अधिकरण
अनुच्छेद (Article) 323 ख - अन्य विषयों के लिए अधिकरण
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अनुच्छेद (Article) 324 - निर्वाचनो के अधिक्षण निर्देशन और नियंत्रण का निर्वाचन आयोग में निहित होना
अनुच्छेद (Article) 329 - निर्वाचन संबंधी मामलों में न्यायालय के हस्तक्षेप का वर्णन
अनुच्छेद (Article) 330 - लोक सभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिये स्थानो का आरणण
अनुच्छेद (Article) 331 - लोक सभा में आंग्ल भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व
अनुच्छेद (Article) 332 - राज्य के विधान सभा में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के लिए स्थानों का आरक्षण
अनुच्छेद (Article) 333 - राज्य की विधानसभा में आंग्ल भारतीय समुदाय का प्रतिनिधित्व
अनुच्छेद (Article) 338 - राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग
अनुच्छेद (Article) 338 (क) - राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग
अनुच्छेद (Article) 343 - संघ की परिभाषा
अनुच्छेद (Article) 344 - राजभाषा के संबंध में आयोग और संसद की समिति
अनुच्छेद (Article) 350 क - प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की सुविधाएं
अनुच्छेद (Article) 351 - हिंदी भाषा के विकास के लिए निर्देश
अनुच्छेद (Article) 352 - आपात की उदघोषणा का प्रभाव
अनुच्छेद (Article) 356 - राज्य में संवैधानिक तंत्र के विफल हो जाने की दशा में उपबंध
अनुच्छेद (Article) 360 - वित्तीय आपात के बारे में उपबंध
अनुच्छेद (Article) 368 - सविधान का संशोधन करने की संसद की शक्ति और उसकी प्रक्रिया
अनुच्छेद (Article) 377 - भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक के बारे में उपबंध
अनुच्छेद (Article) 378 - लोक सेवा आयोग के बार संकलन
लेखक **राज कुमार राज**
08/06/2021
****-*-चरित्र निर्माण****
सद्भावना के लिए आवश्यक है- चरित्र। सद्विचारों और सत्कर्मो की एकरूपता ही चरित्र है। जो अपनी इच्छाओं क
सद्भावना के लिए आवश्यक है- चरित्र। सद्विचारों और सत्कर्मो की एकरूपता ही चरित्र है। जो अपनी इच्छाओं को नियंत्रित रखते हैं और उन्हें सत्कर्मो का रूप देते हैं उन्हीं को चरित्रवान कहा जा सकता है। संयत इच्छाशक्ति से प्रेरित सदाचार का नाम ही चरित्र है। चरित्र मानव जीवन की स्थाई निधि है। जीवन की स्थाई सफलता का आधार मनुष्य का चरित्र ही है। चरित्र मानव जीवन की स्थाई निधि है। सेवा, दया, परोपकार, उदारता, त्याग, शिष्टाचार और सद्व्यवहार आदि चरित्र के बाह्य अंग हैं, तो सद्भाव, उत्कृष्ट चिंतन, नियमित-व्यवस्थित जीवन, शांत-गंभीर मनोदशा चरित्र के परोक्ष अंग हैं। किसी व्यक्ति के विचार इच्छाएं, आकांक्षाएं और आचरण जैसा होगा, उन्हीं के अनुरूप चरित्र का निर्माण होता है।
उत्तम चरित्र जीवन को सही दिशा में प्रेरित करता है। चरित्र निर्माण में साहित्य का बहुत महत्व है। विचारों को दृढ़ता व शक्ति प्रदान करने वाला साहित्य आत्म निर्माण में बहुत योगदान करता है। इससे आंतरिक विशेषताएं जाग्रत होती हैं। यही जीवन की सही दिशा का ज्ञान है।
लेखक,राज कुमार
Date 8/6/2021
07/06/2021
Jai bhim
*-------------------*
*वि चा र सा र*
*------------------------------------------------------*
*काजल की कोठरी में कितनी ही सावधानी के साथ रहिए,पर कहीं न कहीं दाग लग ही जाएगा।इसी प्रकार दुष्ट स्वभाव के मनुष्यों के साथ कनेक्ट रहने से तन-मन में कुछ न कुछ दुर्भाव पैदा हो ही जाते हैं।*
*////////////////जो किसी से भी द्वेष नहीं करता, जिसमें अहंकार की मात्रा नहीं और जो विषयों से निवृत्त हो चुका है, वही सच्चा विवेक पुरुष है।*
*++++++++++++स्वार्थ साधन और ईश्वर-प्राप्ति दोनों एक साथ नहीं हो सकते।*
*+++++++++++अपने आपको जान लेना ही सच्चा अन्तर्ज्ञान है। अपने आपको जान लेने के बाद हमें मालूम हो जाता है कि हम क्या हैं और हमें क्या होना चाहिए?*
*______________हमें उत्तम अवसरों का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि साधारण समय को ही उत्तम अवसर में बदल देना चाहिए।*
*_______________दोष स्वीकार कर लेने से साहस प्रकट होता है और अस्वीकार करने से डरपोकपन बढ़ता है।*
*______________परसेवा असल में अपनी ही सेवा है,क्योंकि समाज के हित में व्यक्ति का हित भी समाया ही रहता है।*
*_____________न्याय, ईमानदारी,सच्चाई और कृपा ये चार नैतिक सत्य जीवन बनाने के लिए उसी प्रकार आवश्यक है,जिस प्रकार घर बनाने के लिए दीवाल।*
*++++++++++सफलता की सबसे बड़ी योग्यता यही है कि जो कुछ आप अच्छी तरह कर सकते हो उसे करो, किंतु प्रसिद्धि की तनिक भी चिंता न करो।*
*+++++++++++यदि किसी मनुष्य को सफल, बलशाली और आदर्श जीवन बनाना है___ऐसा जीवन जो प्रलोभन और आफत की आंधी का दृढ़ता से मुकाबला करेगा,तो उसे थोड़े-से सरल और अटल नैतिक सिद्धांतों को जानना चाहिए। इनमें से चार ये हैं,न्याय, ईमानदारी,सच्चाई और कृपा।ये चार नैतिक सत्य-जीवन बनाने के लिए आवश्यक हैं।*
*_______________किसी सुसंस्कृत व्यक्ति को पहचानने के लक्षण स्पष्ट हैं, वह अपने को भुलाकर दूसरों का ख्याल रखता है,वह यथाशक्ति दूसरों की मदद करता है और हर तरह के संग-साथ में अपने शिष्टाचार से पहचान लिया जाता है।*
*___________________________________*
*______नमस्कार______*
*🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿🙏🏿*
मानव जीवन
****************06 जून 2021
मानव जीवन बड़ा मूल्यवान होता है। इसे समझना और सहेजकर रखना हमारा परम कर्तव्य है। शास्त्र कहते हैं-जब अनेक जन्मों के पुण्य उदय होते हैं तब कहीं जाकर मनुष्य की प्राप्त होती है। यह जीवन दुर्लभ है। ईश्वर ने हमें अन्य सभी जीवों से श्रेष्ठ बनाया है। बुद्धि और विवेक दिया है। इसका हमें सदुपयोग करते हुए मानव जीवन के मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए। नैतिकता, प्रेम, सद्भावना, सहिष्णुता, त्याग और परोपकार तथा सेवा भाव आदि मनुष्य के आभूषण हैं। इन्हें कोई चुरा न ले इसका सदैव ध्यान रखना हमारा परम कर्तव्य है। सांसारिक वस्तुओं की रक्षा तो हम बड़े यत्न से करते हैं, पर क्या हम अपने नैतिक, सामाजिक और धार्मिक मूल्यों की रक्षा भी उतने ही यत्न से करते हैं?
राज कुमार राज
05/06/2021
जल, जंगल और जमीन, इन तीन तत्वों के बिना प्रकृति अधूरी है। विश्व में सबसे समृद्ध देश वही हुए हैं, जहां यह तीनों तत्व प्रचुर मात्रा में हों। हमारा देश जंगल, वन्य जीवों के लिए प्रसिद्ध है।सम्पूर्ण विश्व में बड़े ही विचित्र तथा आकर्षक वन्य जीव पाए जाते हैं। हमारे देश में भी वन्य जीवों की विभिन्न और विचित्र प्रजातियां पाई जाती हैं। इन सभी वन्य जीवों के विषय में ज्ञान प्राप्त करना केवल कौतूहल की दृष्टि से ही आवश्यक नहीं है, वरन यह काफी मनोरंजक भी है। भूमंडल पर सृष्टि की रचना कैसे हुई, सृष्टि का विकास कैसे हुआ और उस रचना में मनुष्य का क्या स्थान है? प्राचीन युग के अनेक भीमकाय जीवों का लोप क्यों हो गया और उस दृष्टि से क्या अनेक वर्तमान वन्य जीवों के लोप होने की कोई आशंका है? मानव समाज और वन्य जीवों का पारस्परिक संबंध क्या है? यदि वन्य जीव भूमंडल पर न रहें, तो पर्यावरण पर तथा मनुष्य के आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा? तेजी से बढ़ती हुई आबादी की प्रतिक्रिया वन्य जीवों पर क्या हो सकती है आदि प्रश्न गहन चिंतन और अध्ययन के हैंमानव समाज और वन्य जीवों का पारस्परिक संबंध क्या है? यदि वन्य जीव भूमंडल पर न रहें, तो पर्यावरण पर तथा मनुष्य के आर्थिक विकास पर क्या प्रभाव पड़ेगा? तेजी से बढ़ती हुई आबादी की प्रतिक्रिया वन्य जीवों पर क्या हो सकती है आदि प्रश्न गहन चिंतन और अध्ययन के हैं
03/06/2021
Jay bhim namo buddhay
02/06/2021
*एकाग्रता*
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*श्रेष्ठ जनों ने जीवन में सफलता के लिए सबसे अनिवार्य जरूरत मन की एकाग्रता की सलाह दी है।जब व्यक्ति मन, बुद्धि, चित्त को एक बिंदु पर केंद्रित करता है तो शरीर में जो रासायनिक परिवर्तन होता है, उससे आत्मबल में वृद्धि होती है।*
*++++++++प्राय: लोग अर्जुन के मछली की आंख पर ही दृष्टि गड़ाए रखने का उदाहरण देते हैं।अन्य धनुर्धरों को पेड़, मछली, पेड़ के पत्ते दिखाई पड़ रहे थे, जबकि अर्जुन को सिर्फ मछली की आंख दिखी।*
*________इसी काल में एकलव्य की एकाग्रता की चर्चा होती है। गुरु द्रोणाचार्य ने धनुर्विद्या देने से इन्कार किया तो द्रोणाचार्य की मिट्टी की मूर्ति बनाकर एकलव्य ने साधना की। यहां भी एकाग्रता ही थी।*
*___________श्रीमदभगवत गीता में श्री कृष्ण ने कर्म पर ध्यान देने और फल की चाहत में ध्यान न भटकाने का उपदेश दिया है।आज भागमभाग के जमाने में मनुष्य की एकाग्रता गुम हो गई है।*
*__________यहां तक घर में जब वह भोजन करने बैठता है तो उस समय अनेकानेक स्थानों पर उसका ध्यान भटकता है। नतीजा भोजन जो हमारे प्राण को शक्ति देता है,उसका पूरा रस शरीर को नहीं मिल पाता है।ऐसे ही दैनिक जीवन में पूजा-पाठ करते समय भी मन भटकाव के जंगल में विचरण करता है। लिहाजा सब कुछ रहते व्यक्ति जीवन का लाभ नहीं उठा पाता है और देश,काल, परिस्थितियों को दोष देता है।*
*__________ऋषियों ने प्रकृति के साथ जुड़ने की जो सलाह दी, वह एक प्रकार से जीवन का मैनेजमेंट है जिसकी उपेक्षा धड़ल्ले से की जा रही है और तनाव मोल लिया जा रहा है।*
*_________ध्यान रहे तनावग्रस्त व्यक्ति से किसी उपलब्धि की आशा नहीं की जा सकती है।मन के भटकाव को जरूर रोकना चाहिए।*
*___________भटकता मन उस हिरण की तरह है, जो मर्यादापुरुषोत्तम भगवान श्री राम को जंगल में बहुत दूर लेते गया और माता सीता का हरण रावण ने कर लिया।*
*_____________इसलिए निजी जीवन से लेकर सामाजिक जीवन तक में एकाग्र भाव से काम करने से निश्चित ही सफलता मिलती है।*
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