16/11/2025
किड्स केयर सेंटर स्कूल ने बच्चों को संस्कारों की डोर से जोड़ा* —
बाल दिवस पर नन्हें कदमों ने किया भगवान कमतानाथ के चरणों की परिक्रमा*
दबोह — भौतिकवाद और 5G की चमक-दमक के बीच जहां बच्चे आधुनिकता की दौड़ में उलझते जा रहे हैं, वहीं कस्बा दबोह स्थित किड्स केयर सेंटर स्कूल ने बाल दिवस पर एक अद्भुत और प्रेरणादायी पहल की है। विद्यालय के डायरेक्टर आलोक श्रीवास्तव ने नन्हें-मुन्नों को चित्रकूट धाम की परिक्रमा कराकर न सिर्फ उन्हें आस्था से जोड़ा, बल्कि भारतीय संस्कारों की जीती-जागती पाठशाला भी दिखा दी।
चित्रकूट… जहां भगवान श्रीराम ने कठिन परिस्थितियों में जीवन जीने की शिक्षा दी,
उसी पावन धरा पर इन छोटे बच्चों के कदम पड़े तो मानो आस्था भी मुस्कुरा उठी।
बच्चों ने हनुमान धारा, लक्ष्मण घाट, माता सती अनुसुइया आश्रम, गुप्त गोदावरी, माता सीता रसोई सहित कई पवित्र स्थलों के दर्शन कर अपने जीवन की पहली आध्यात्मिक यात्रा को यादगार बनाया।
✨ बच्चों के भावनात्मक अनुभव
*क्लास 3 की मॉनिटर योगिता पाल भावुक होकर बोली*
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“बाल दिवस पर आलोक सर ने मुझे पहली बार 5 किमी परिक्रमा करने का मौका दिया। यह मेरे जीवन का पहला और सबसे सुंदर अवसर है*”
*वहीं विद्यालय की गंगा-जमुनी तहज़ीब का प्रतीक बनकर छात्र *कामिल खान पुत्र सलीम खान ने कहा*—
“हमारे स्कूल में हिंदू-मुस्लिम एकता और संस्कार सिखाए जाते हैं। मैं मुस्लिम परिवार से हूं, लेकिन मेरे पिता ने खुद मुझे भगवान कमतानाथ की परिक्रमा करने को कहा था। यहां आकर मन को अद्भुत शांति मिली।”
*संस्कारों की पाठशाला” बना किड्स केयर सेंटर*
आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि बच्चों को सिर्फ आधुनिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन के मूल्यों की समझ भी दी जानी चाहिए। चित्रकूट की यात्रा बच्चों के लिए न सिर्फ दर्शन का अवसर बनी, बल्कि संस्कार, अनुशासन और आस्था का गहरा अनुभव भी।
इस अनोखी पहल ने बाल दिवस को सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि जीवन-परिवर्तनकारी अनुभव बना दिया।
किड्स केयर सेंटर स्कूल की यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए एक अनुकरणीय संदेश है—
“जहां संस्कार हैं, वहीं उज्ज्वल भविष्य है।”
*दैनिक भास्कर से पत्रकार राजा भैया पाल की रिपोर्ट*