19/08/2026
कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः 🪻
मनुष्य को यहाँ कर्म करते हुए ही सौ वर्ष तक जीने की इच्छा करनी चाहिए।
One should desire to live a hundred years in this world by performing actions alone.
☝️ ईशोपनिषद् का यह उद्घोष कर्म और जीवन के संतुलन को रेखांकित करता है। उपनिषद् यह नहीं कहता कि जीवन का उद्देश्य केवल भोग या केवल संन्यास है, बल्कि यह कि मनुष्य को कर्म करते हुए, अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए, दीर्घ जीवन की आकांक्षा करनी चाहिए। ऐसा जीवन ही धर्मसंगत और सार्थक माना गया है।
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