नई ज़बान मिली है सो ऐसा बोलते हैं
शुरूअ' में तो सभी उल्टा सीधा बोलते हैं
उसे कहा था कि लोगों से गुफ़्तुगू न करे
अब उस के शहर के सब लोग मीठा बोलते हैं
ख़ुदा करे कि कभी बात भी न कर पाएँ
ये जितने लोग तेरे आगे ऊँचा बोलते हैं
किसी से बोलना बा-क़ाएदा नहीं सीखा
बस एक रोज़ यूँही ख़ुद से सोचा बोलते हैं
निकल के शोर से आई थी इक दरख़्त तले
मगर यहाँ तो परिंदे भी कितना बोलते हैं
हम ऐसे लोग कोई बात दिल में रखते नहीं
किसी से कोई गिला हो तो सीधा बोलते हैं
अम्न शहज़ादी
सूनहरी कहानीयां
बदन के दोनों किनारों से जल रहा हूँ मैं
कि छू रहा हूँ तुझे और पिघल रहा हूँ मैं
इरफ़ान सिद्दीक़ी
आज हम दोंनों को फ़ुर्सत है चलो इश्क़ करें
इश्क दोंनों की जरूरत है चलो इश्क़ करें
इसमें नुकसान का ख़तरा ही नहीं रहता है
ये मुनाफ़े की तिजारत है चलो इश्क़ करें
आप हिन्दू मैं मुसलमान ये ईसाई वो सिख
यार छोड़ो ये सियासत है चलो इश्क़ करें
राहत इंदौरी
ख़िज़ाँ की ज़र्द सी रंगत बदल भी सकती है
बहार आने की सूरत निकल भी सकती है
जला के शम्अ अब उठ उठ के देखना छोड़ो
वो ज़िम्मेदारी से अज़-ख़ुद पिघल भी सकती है
है शर्त सुब्ह के रस्ते से हो के शाम आए
तो रात उस को सहर में बदल भी सकती है
ज़रा सँभल के जलाना अक़ीदतों के चराग़
भड़क न जाएँ कि मसनद ये जल भी सकती है
अभी तो चाक पे जारी है रक़्स मिट्टी का
अभी कुम्हार की निय्यत बदल भी सकती है
ये आफ़्ताब से कह दो कि फ़ासला रक्खे
तपिश से बर्फ़ की दीवार गल भी सकती है
तिरे न आने की तशरीह कुछ ज़रूरी नहीं
कि तेरे आते ही दुनिया बदल भी सकती है
कोई ज़रूरी नहीं वो ही दिल को शाद करे
'अलीना' आप तबीअत बहल भी सकती है
अलीना इतरत
बे-फ़ैज़ इक चराग़ बताया गया मुझे
सूरज बुझा तो ढूंढ के लाया गया मुझे
उभरा हर एक बार नया फूल बन के मैं
मिट्टी में जितनी बार मिलाया गया मुझे
काग़ज़ क़लम के बीच रहा क़ैद उम्र भर
लिखा गया मुझे न भुलाया गया मुझे
हैरान हूं मैं वक़्त की तक़सीम देखकर
किसके लिए था किसपे लुटाया गया मुझे
पहले कहा गया कि लब आज़ाद हैं तेरे
मैं बोलने लगा तो डराया गया मुझे
शामिल तो कर लिया गया अहबाब में मगर
महफ़िल में सबसे दूर बिठाया गया मुझे
इक़बाल अशहर
#सूरज #फूल #मिट्टी #कागज #कलम #वक्त #आजाद #शेर #महफिल
फ़क़ीर आइना है पर्दा-ए-ख़्याल नहीं,
मिरे बदन पे किसी मस्लहत की शाल नहीं.!!
ये लोग जीते हैं ख़ुश-फ़हमियों की क़ब्रों में,
वतन-परस्ती की इस से बड़ी मिसाल नहीं.!!
ज़मीन माँ भी है महबूब भी है बेटी भी,
ज़मीन छोड़ के जाऊँ कोई सवाल नहीं.!!
कहानियों का मुक़द्दर वही अधूरा-पन,
कहीं फ़िराक़ नहीं है कहीं विसाल नहीं.!!
बहुत उदास रही ज़िंदगी तुम्हारे बाद,
ख़याल था कि तुम्हें भूलना मुहाल नहीं.!!
~बशीर बद्र साहब ✍️✍️
दौराने हिज्र ऐसे भी कुछ मोजिज़े हुए
बेहद हसीन चेहरों से फिर राब्ते हुए
मंज़र बता रहे है तबाही की दास्तान
हर दर पे हैं चराग़, मगर हैं बुझे हुए
तुम भी असीरे इश्क़ हो, हम भी वफ़ा परस्त
बतलाओ राहे शौक़ में क्या तजर्बे हुए
थी वस्ल की शब और महकते थे दो बदन
मत पूछिए अंधेरों में क्या हाफ़िज़े हुए
जाने बहार हम तेरे अहसानमंद हैं
तेरे तुफ़ैल ज़ख़्म दोबारा हरे हुए
हम्ज़ा बिलाल उसका शहर छोड़ तो दिया
लेकिन हमारी ज़ात पे जो तब्सिरे हुए
जीना मुश्किल है कि आसान ज़रा देख तो लो
लोग लगते हैं परेशान ज़रा देख तो लो
फिर मुक़र्रिर कोई सरगर्म सर-ए-मिंबर है
किस के है क़त्ल का सामान ज़रा देख तो लो
ये नया शहर तो है ख़ूब बसाया तुम ने
क्यूँ पुराना हुआ वीरान ज़रा देख तो लो
इन चराग़ों के तले ऐसे अँधेरे क्यूँ है
तुम भी रह जाओगे हैरान ज़रा देख तो लो
तुम ये कहते हो कि मैं ग़ैर हूँ फिर भी शायद
निकल आए कोई पहचान ज़रा देख तो लो
ये सताइश की तमन्ना ये सिले की परवाह
कहाँ लाए हैं ये अरमान ज़रा देख तो लो
जावेद अख़्तर
मुक़र्रिर......भाषण करने वाला, वक्ता
सरगर्म...... सक्रिय
सर-ए-मिम्बर....मंच पर
सताइश...... प्रसंशा
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#शायरी #कत्ल #शहर #गजल
मैं तो फ़िराक़ में रहता हूँ,
तेरा हर एक अंदाज़ चुराने को,
वरना इन निगाहों में,
तूफान के सिवा कुछ और नहीं।
©Saurabh M Pandey
12/12/2022
यह तस्वीर पूर्णिया, बिहार के डीएसए ग्राउंड की है। साल था 2013 और 15 वर्षीय ईशान किशन तब लेदर बॉल मैच खेलने आए थे। मुझे आज भी याद है, छोटे से ईशान ने उस मुकाबले में भी बड़ा कारनामा करके दिखाया था। अपने से बड़ी उम्र के तेज गेंदबाजों को मारकर धागा खोल दिया था। छक्के इतनी दूर-दूर जाकर गिरे थे कि आसपास के घरों से लोग मैदान की तरफ भागे चले आए थे। हर कोई तहे दिल से ईशान की बल्लेबाजी की तारीफ कर रहा था लेकिन सबको डर था कि शायद इस बल्लेबाज का टैलेंट बिहार में दम तोड़ देगा। ऐसा इसलिए क्योंकि उस समय बिहार को बीसीसीआई की तरफ से मान्यता नहीं दी गई थी। मैच के बाद हर कोई ईशान से हाथ मिलाने को आतुर था। लोग यकीन नहीं कर पा रहे थे कि इस छोटे से बच्चे ने इतना बड़ा कारनामा किया है।
18 जुलाई 1998 को पटना (बिहार) में जन्मे ईशान छोटी उम्र से क्रिकेट खेलने लगे थे। वर्ष 2014 में मात्र 16 साल की उम्र में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने कदम रख दिया था। इसी साल उन्होंने झारखंड की तरफ से टी-20 मुकाबले में खेलना शुरू किया। वो टीम इंडिया की अंडर-19 वर्ल्ड कप टीम के कप्तान भी रहे। ईशान को बिहार छोड़ने का अफसोस तो था लेकिन वह जानते थे कि अगर उड़ान ऊंची भरनी है, तो उन्हें आसमान फतह करना होगा। ईशान के पिता प्रणव पांडे को कोच संतोष ने भरोसा दिलाया कि ईशान में वह एक्स फैक्टर मौजूद है, जो उन्हें हिंदुस्तान का नामी-गिरामी बल्लेबाज बना सकता है।
ईशान ने अपना पहला इंटरनेशनल मैच इंग्लैंड के खिलाफ 14 मार्च 2021 को खेला था। इस टी-20 मैच में उन्होंने 32 गेंदों पर 56 रन बना डाले थे। टी-20 इंटरनेशनल के अब तक 21 मैच खेलकर ईशान ने 589 रन बनाए हैं। जल्द ही ईशान को इंटरनेशनल वनडे में भी खेलने का मौका मिला। 18 जुलाई 2021 को श्रीलंका के खिलाफ अपने पहले वनडे मैच में ही ईशान ने 42 गेंदों पर 59 रन बना डाले थे। अब बांग्लादेश के खिलाफ 210 रन की पारी को मिलाकर 10 वनडे मैचों में वह अब तक 477 रन बना चुके हैं। इससे पहले उनका अधिकतम स्कोर 93 रन था, जो उन्होंने अक्टूबर 2022 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ बनाया था। ईशान हमेशा से बेहतरीन प्रदर्शन करते रहे हैं लेकिन उन्हें नियमित तौर पर अवसर नहीं दिए गए।
लगता है भारत को एक और महेंद्र सिंह धोनी 'माही' मिल गया है। धोनी की तरह ही जन्मभूमि बिहार और कर्मभूमि झारखंड में अपने खेल से इंडियन टीम का सफर तय करने वाले विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन ने बांग्लादेश की धरती पर एक ऐसा रिकॉर्ड बना दिया है, जो संभवतः दशकों तक तोड़ा नहीं जा सकेगा। ईशान ने बांग्लादेश के खिलाफ वनडे में मात्र 126 गेंदों पर डबल सेंचुरी लगाई और वेस्टइंडीज के दिग्गज खिलाड़ी क्रिस गेल का 138 गेंदों पर डबल सेंचुरी लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया। यह डबल सेंचुरी ईशान के क्रिकेट करियर में एक नया मोड़ साबित होगी।
ठीक इसी तरह विशाखापत्तनम में पाकिस्तान के खिलाफ 148 रनों की पारी खेलकर महेंद्र सिंह धोनी के करियर में नया मोड़ आ गया था। वह धोनी के वनडे करियर का पांचवां मैच ही था और उम्र 24 वर्ष ही थी। कुछ-कुछ ऐसा ही ईशान किशन ने 24 साल की उम्र में अपने करियर के 10वें वनडे में भी कर दिखाया है। बस फर्क इतना सा है कि धोनी पाकिस्तान के खिलाफ 150 रन लगाने से चूक गए थे और ईशान ने अपने वनडे करियर के दसवें मैच में ही 200 रन का जादुई आंकड़ा छू लिया है। Lekhanbaji को यकीन है कि पूरा हर ख्वाब होगा। ईशान किशन भारतीय क्रिकेट का अगला नवाब होगा।
जरूर पूरा होगा 2023 वर्ल्ड कप जीत का मिशन
अगर टीम इंडिया में खेलेगा शेरदिल ईशान किशन ❤️
03/12/2022
#कबीर, सिर्फ़ 11 साल के हैं, दिल्ली के DPS स्कूल में पढ़ते हैं।
स्कूल के पास झुग्गी में रहने वाले ग़रीब बच्चों को भी उनकी तरह अच्छी तालीम मिल सके इसलिये स्कूल के बाद हर रोज 1 घन्टा उनके साथ कुछ यूँ बिताते हैं ।
उन्हें #अंग्रेजी बोलना-लिखना-पढ़ना सिखाते हैं।
दिल से सलाम है इस नन्हें फ़रिश्ते और इनके माँ बाप को,
जो काम बड़ो को करना चाहिए वो एक मासूम कर रहा है,
बेशक अल्लाह चाहे जिससे काम ले ले...❤️❤️❤️
01/12/2022
रवीश कुमार ने एनडीटीवी से इस्तीफा दिया..
रवीश की चिंता मत करिए... वो तो भारतीय जर्नलिज्म की आत्मा हैं... वो अगर सड़क पर खड़े होकर भी न्यूज पढ़ेंगे तो भी आधा भारत खड़ा हो जायेगा उन्हें सुनने के लिए...अपना यूट्यूब चैनल बनाकर वो एनडीटीवी से मिलने वाली सैलरी से कमा भी ज्यादा लेंगे... चिंता तो एनडीटीवी को अपनी होनी चाहिए... एनडीटीवी बिना रवीश के शून्य है और सदैव शून्य ही रहेगी... ये शून्य कभी नही भरेगा...एक पत्रकार से निपटने के लिए पूरा चैनल ख़रीद डाला.. सलाम है रवीश आपको...,जब इतिहास लिखा जायेगा तो साथ ये भी लिखा जायेगा की जिस दौर में कौड़ियों के भाव पत्रकार बिक रहे थे तो वहां एक रवीश नाम का अनमोल हीरा भी था जिसे खरीदा नही जा सका..
हाय रे फूटी किस्मत एनडीटीवी की...
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