Dayanand Bal Mandir Colonelganj, Gonda

Dayanand Bal Mandir Colonelganj, Gonda

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This is a Great School in between 1990-2000. the school today provide the Modern education with the Ancient model of Education. Today this system is being follow

The Acharya and other Vadic Teacher came on Saturday for educate us the ethic of human value.

Photos from Dayanand Bal Mandir Colonelganj, Gonda's post 08/10/2019

रामलीला कमेटी करनैलगंज द्वारा दशहरा के कुछ तस्वीर

साभार बसंत कुमार

07/10/2019

हम और आप में से कितने लोगो को याद है वो हमारे करनैलगंज की रामलीला को नवरात्रि शुरू होने के 15 दिन पहले से शुरू होकर दशहरे के 5 दिन बाद तक चालू रहती थी।
सच में बचपन के वो दिन भी कितने शानदार थे जब शाम होते ही पहुंच जेट थे रामलीला मैदान में। हमारे शहर की ये रामलीला ना जाने कितने वर्षों से संस्कृति का बेजोड़ नमूना है। कुछ वीडियो आपको भेज रहा हूं, एंजॉय कीजिए।

21/03/2019

होली की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएँ आप सभी को

01/01/2019

नव वर्ष के पावन अवसर पर आप सभी को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं। यह वर्ष आपके जीवन में सफलता और समृद्धि लेकर आये ।

24/05/2018

10 Tips for Surviving A Heat Wave Without Air-Conditioning
Medical Author: Melissa Conrad Stöppler, MD Medical Editor: William C. Shiel Jr., MD, FACP, FACR

In summer, heat waves can strike areas of the country where cooler climates are the norm. In these areas, many homes do not have air conditioning, and surviving in the extreme temperatures becomes a challenge for everyone. The following steps can help you keep cool during a heat wave even if you have an air-conditioned home.

1. Use box fans and ceiling fans to promote air circulation throughout your home. Opening doors in the house and using box fans to push hot air outdoors can function as an "exhaust" system and draw cooler evening air into the house. In the cooler evenings, open all windows and promote as much air circulation as possible. When the sun rises, close all doors and windows, making sure to close curtains and blinds as well, to keep the indoors cool for as long as possible. When the outside air cools to a lower temperature than inside (usually in the evenings or at night), open up the windows and turn on the fans again.
2. Take advantage of the cooling power of water. Fill buckets or basins and soak your feet. Wet towels and bandannas can have a cooling effect when worn on the shoulders or head. Take cool showers or baths, and consider using a spray bottle filled with cold water for refreshing spritzes throughout the day.
3. Head downstairs. Since hot air rises, the upper stories of a home will be warmer than the ground floor. A basement can be a cool refuge from the midday heat.
4. Eliminate extra sources of heat. Incandescent light bulbs can generate unnecessary heat, as can computers or appliances left running. Eat fresh foods that do not require you to use the oven or stove to prepare.
5. Remember to maintain an adequate level of hydration, which means you'll need to consume more water than you usually do when it's hot. If you're sweating profusely, you will also need to replace electrolytes by eating a small amount of food with your water or by drinking specially-formulated electrolyte replacement drinks. Thirst is the first sign of dehydration; you should drink sufficient amounts of fluids before you feel thirsty in order to prevent dehydration.
6. Avoid alcoholic beverages and caffeine, as both of these substances can act as diuretics and promote dehydration.
7. For a homemade "air conditioning" system, sit in the path of a box fan that is aimed at an open cooler, or pan filled with ice.
8. Try to visit public buildings with air conditioning during the hottest hours of the day if the heat becomes unbearable. Libraries, shopping malls, and movie theaters can all be good places to cool down.
9. Don't eat large, protein-rich meals that can increase metabolic heat and warm the body.
10 Avoid to come out in open space: always avoid to come out in open space unnecessary in open space.

01/01/2018

नव वर्ष की पावन बेला पर आप सभी को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनायें, इस वर्ष में मी उस परमेश्वर/भगवान/अल्लाह/ईश्वर से कामना करता हून कि यह वर्ष आपके लिये मंगलमय हो, आप अपनी सफलता के सर्वोच्च शिखर को प्राप्त करे और आपकी जिंदगी में ढेर सारी खुशिया लाये.
शुभकामनाओ सहित

15/11/2017

आप में से बहुत से लोग अपने गाँव, अपने शहर से दूर किसी और जगह पर काम कर रहे होंगे। बरसों तक दूसरे शहर या राज्य में रहने के बाद जब आप अपने घर वापस जाते हैं, तो कैसा लगता है? यक़ीनन अपना ही शहर या गाँव पहचान में नहीं आता होगा। वो जगह जहां आप ने बचपन गुज़ारा, वो बेगानी सी लगने लगती है। बहुत से अनजान चेहरे दिखाई देते हैं। रहन-सहन और बोलचाल का फ़र्क़ मालूम होता है।

हम सब के साथ यही होता है। रोज़गार के लिए दूसरे शहर, राज्य या देश में जाकर वक़्त गुज़ारने के बाद जब घर लौटते हैं, तो कई बार पुराना लगाव नहीं महसूस होता। हम अपने ही घर में बेगाने हो जाते हैं। ग्लोबलाइज़ेशन के इस दौर में बहुत से लोगों के साथ ऐसा हो रहा है। कई बरस दूसरे देश या राज्य में गुज़ारने के बाद वापस घर लौट कर आने वालों को अपने ही क़स्बे या शहर में पहले जैसा अपनापन नहीं मिलता।

लोग इसका सामना कैसे करते हैं?

अमरीका की वेंडी स्क्रॉच ने फ़ेसबुक पर अपना तजुर्बा लिखा। वो कहती हैं कि जैसे दूसरे देश में जाने पर आप को कल्चर शॉक लगता है। ठीक उसी तरह कई साल बाद अपने वतन वापस आने पर एहसास होता है कि आप किस तरह अपनी जड़ों से ही कट गए हैं। ऐसा लगता है कि आप घर नहीं, बल्कि किसी दूसरी दुनिया में लौटे हैं। ब्रिटेन के रहने वाले पीट जोंस ने क़रीब पंद्रह साल डेनमार्क, हॉलैंड और स्विटज़रलैंड में बिताए। इसके बाद जब वो अपने शहर ब्लाइटी लौटे, तो कुछ दिन बाद ही उन्हें लगा कि उन्हें वापस जाना चाहिए। ये वो शहर नहीं जो उनका अपना घर था।
अमरीका के ब्रूस फेलिक्स क़रीब 26 साल ऑस्ट्रेलिया में रहे थे। जब वो अपने घर वापस आए, तो लोग और उनका बर्ताव एकदम बदला हुआ था। ब्रूस को यूं लगा जैसे वो अपने घर नहीं लौटे, बल्कि किसी और नए शहर में आ गए हैं, जहां न उन्हें कोई पहचानने वाला है और न ही समझने वाला। उनका बातचीत का लहज़ा भी बाक़ी लोगों से बदला हुआ था। वो साफ़ तौर से खुद को बाहरी महसूस कर रहे थे। इसी तरह मैरी सू कॉनेली जब बीस साल अमरीका में रहकर अपने देश आयरलैंड लौटीं, तो उन्होंने ख़ुद को अपने ही शहर में बेगाना पाया। वास्तव में वो खुद ही बदल गई थीं। स्थानीय लोगों ने कहा कि तुम तो बाहरी हो। उन्हें बहुत बुरा लगा। उन्हें वापस अपने शहर आना भूल करने जैसा एहसास लगा।

पुराने दिन न करें याद

ऐसे ही एक शख़्स हैं डेनिस ग्रावेल। वो सलाह देते हैं कि जब आप कई साल बाद घर वापसी करें, तो बेहतर है कि गुज़रे हुए दिनों को याद न करें। ये सोचें कि आप एक नई जगह, एक नई ज़िंदगी शुरू करने जा रहे हैं। इससे आप को अपने पुराने शहर से तालमेल बिठाने में मदद मिलेगी। ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली एलिसन ली भी डेनिस की बात से इत्तेफ़ाक़ रखती हैं। जब वो कई बरस विदेशों में गुज़ारकर ऑस्ट्रेलिया लौटीं, तो इसी नुस्खे की मदद से अपने शहर से तालमेल बैठाया। ब्रिटेन के जॉन सिम्पसन सलाह देते हैं कि जब आप अपने पुराने शहर वापस जाएं तो उसी जगह न रहें, जहां पहले रहते थे। न ही आप वो काम शुरू कर दें, जो पहले किया करते थे। इससे आप को भी अज़नबीपन और नयापन नहीं लगेगा।

ऑस्ट्रेलिया की रहने वाली वेस्ना थॉमस 16 साल बाद अमरीका से लौटीं तो उन्हें दोस्त बनाने में काफ़ी दिक़्क़त हुई। फिर उन्होंने एक बुक क्लब शुरू किया। पार्ट टाइम काम शुरू किया। वो एक स्कूल में मुफ़्त में पढ़ाने लगीं। इससे उन्हें लोगों से ताल्लुक़ बनाने में मदद मिली। वहीं, ब्रिटेन की कैटरीना गॉनरमैन ने कहा कि जब वो ब्रिटेन वापस आईं तो उन्होंने इसे भी विदेश में नई नौकरी की तरह लिया। इससे उन्हें वहाँ फिर से एडजस्ट करने में ज़्यादा दिक़्क़त नहीं हुई। यही काम अमरीका के मार्क सेबास्टियन ने किया।



क्या आप अपने पुराने शहर से दुबारा जुड़ पाते हैं?

निकोल जोंस के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं और वे पाँच देशों में रह चुकी हैं। वे कहती हैं कि मुझे अब किसी जगह के लिए कोई पूर्वाग्रह नहीं रहा है कि किसी खास जगह पर सब अच्छा ही होगा और किसी दूसरी जगह पर सब खराब। मुझे ऐसा लगता है कि हर जगह की कुछ अच्छाइयाँ और कुछ ख़ामियाँ होती हैं। वे अपने को विश्व-नागरिक समझती हैं और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की धारणा को आगे बढ़ाती हैं। यहीं कुछ लोगों ने ये भी कहा कि दुबारा अपने शहर में जाकर बसना कोई ज़रूरी नहीं, क्योंकि आप फिर से अपनी जड़ों से जुड़ नहीं पाते हैं। वक़्त के साथ बहुत कुछ बदल जाता है। आप ख़ुद भी बहुत बदल जाते हैं। इसलिए पुराने दौर में लौटना आसान नहीं होता। बेहतर होता है कि आप अपने पुराने घर वापस जाएं भी तो इसे ज़िंदगी में एक नई शुरुआत की तरह देखें। अपने पुराने दिनों की यादों में खोने के बजाय ज़िंदगी के पन्नों पर नई कहानी लिखने की कोशिश करें। ऐसा करने से आपके लिए दोबारा अपने शहर या राज्य में बसना आसान होगा।

12/11/2017

अपने शहर के है अदम गोण्डवी

ख़ुद की लाश अपने कंधे पे उठाये हैं
ऐ शहर के बाशिंदों हम गाँव से आये हैं।

आप अदम गोंडवी हैं। कल के लिए पत्रिका 2012 से रखी है कि कभी फुर्सत से पढ़ेंगे। पाँच साल गुज़र गए। आज एक किताब के गुम हो जाने के आतंक में जब तलाश पर निकला तो पत्रिका फिर से सामने थी। हमने अदम गोंडवी को बहुत देर से जाना। ज़िंदगी के शुरू के पचीस साल बग़ैर जाने निकल गए। दो चार का ही नाम सुना था।बाकी बहुत कम को गहराई से जाना। देर से जानने का एक सुख होता है। जब सब जान चुके होते हैं, स्थिर हो चुके होते हैं, उनके बीच आप पहली बार जानने के बाद जीवन के उत्साह में नाचते हुए लगते हैं। कोई ताली नहीं बजाता मगर आप जानकर उससे भी ज़्यादा ख़ुश होते हैं। जानना कभी आख़िरी बार नहीं होता। पहली बार ही होता है। अदम गोंडवी पर एक अच्छे संकलन के लिए ' कल के लिए' का आभार।

जो डलहौज़ी न कर पाया वो ये हुक्काम कर देंगे
कमीशन दो तो हिन्दुस्तान को नीलाम कर देंगे
ये वन्दे मातरम का गीत गाते हैं सुबह उठ कर
मगर बाज़ार में चीज़ों का दुगना दाम कर देंगे
सदन में घूस देकर बच गयी कुर्सी तो देखोगे
वो अगली योजना में घूसखोरी आम कर देंगे

एक और अर्ज़ किया है-

आँख पर पट्टी रहे और अक़्ल पर ताला रहे
अपने शाहे-वक्त का यूँ मरतबा आला रहे
देखने को दे उन्हें अल्लाह कंप्यूटर की आँख
सोचने को कोई बाबा बाल्टीवाला रहे।
एक जनसेवक को दुनिया में 'अदम' क्या चाहिए
चार छह चमचे रहें, माइक रहे, माला रहे।

नोट: चंचल भू जी की तरह बाग़ी कवि गिरफ़्तार नहीं किए जा सकते हैं क्योंकि अदम गोंडवी इस दुनिया में नहीं हैं। एक आख़िरी....

जब सियासत हो गयी है पूँजीपतियों की रखैल
आम जनता को बग़ावत का खुला अधिकार है।

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