Saraswati VIDYA mandir kahalgaon

Saraswati VIDYA mandir kahalgaon विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्?

02/02/2022

सभी विद्यालय परिवार को #शुभ रात्रि

05/05/2021
08/10/2020

भारतीय शिक्षा पद्धति और संस्कृति को एक नया आयाम देता हमारा विद्यालय
संस्कृति और सभ्यता का रक्षक🙏🏻

: आज दिनांक 17 जून 2020 को सरस्वती विद्या मंदिर गौशाला के परिसर में पकड़ तल्ला विद्या मंदिर के प्रबंध समिति  के सह सचिव ...
17/06/2020

: आज दिनांक 17 जून 2020 को सरस्वती विद्या मंदिर गौशाला के परिसर में पकड़ तल्ला विद्या मंदिर के प्रबंध समिति के सह सचिव डॉक्टर संतोष कुमार सिन्हा,( दंत चिकित्सक) कहलगांव के द्वारा दोनों विद्यालयों के सभी आचार्य, कर्मचारियों के बीच मास्क एवं हेन्गलब का वितरण किया गया।

: डॉक्टर साहब विद्यालय के सभी गतिविधियों में सहभागी होकर सभी का मनोबल बढ़ाते रहते हैं।
🙏

15/06/2020

#विद्या_भारती, भारत में शिक्षा के क्षेत्र में सबसे बड़ी अशासकीय संस्थाहै। इसका पूरा नाम "विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान" है। विद्या भारती के द्वारा लगभग हजारों से ज्यादा शिक्षा संस्थान का कार्य कर रहे हैं विद्या भारती की स्थापना सन् 1977 में हुई थी। विद्या भारती, शिक्षा के सभी स्तरों - प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च पर कार्य कर रही है। इसके अलावा यह शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान करती है। विद्या भारती का अपना शोध विभाग है

#विद्या_भारती
सिद्धांत-सा विद्या या विमुक्तये
स्थापना-1977
वैधानिक स्थिति-सक्रिय
उद्देश्य-शैक्षिक संस्थाओं का संचालन

क्षेत्र-भारत

पैतृक संगठन-राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
सम्बन्धन-संघ परिवार
जालस्थल-vidyabharti.net

विद्या भारती के तहत, हजारों शिक्षण संस्थान संचालित होते है। विद्या भारती -शिशुवाटिका , सरस्वती शिशु मंदिर ,सरस्वती विद्या मंदिर , प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक, वरिष्ठ माध्यमिक, संस्कार केंद्र, एकल विद्यालय, पूर्ण एवं अर्द्ध आवासीय विद्यालय और महाविद्यालयों के छात्रों के लिए शिक्षा प्रदान करता है।

15/06/2020

#इतिहास_विद्या_भारती_का
=== प्रथम सरस्वती शिशु मंदिर ===
1952 में संघ प्रेरणा से शिक्षा क्षेत्र को जीवन-साधना समझकर कुछ निष्ठावान लोग इस पुनीत कार्य में जुट गए। उन्होने नवोदित पीढ़ी को सुयोग्य शिक्षा और शिक्षा के साथ संस्कार देने के लिए “सरस्वती शिशु मंदिर” की आधारशिला [[गोरखपुर]] में में पक्की बाग़ में पांच रुपये मासिक किराये के भवन में रखी।इससे पूर्व [[कुरुक्षेत्र]] में 'गीता विद्यालय' की स्थापना 1946 में हो चुकी थी। मन की आस्था, ह्रदय का विकास, निश्चय की अडिगता तथा कल्पित स्वप्न को मन में लेकर कार्यकर्ताओं के साधना, तपस्या, परिश्रम व संबल के परिणामस्वरुप स्थान-स्थान पर “सरस्वती शिशु मंदिर” स्थापित होने लगे।

[[उत्तर प्रदेश]] में शिशु मंदिरों के संख्या तीव्र गति से बढ़ने लगी। इनके मार्गदर्शन एवं समुचित विकास के लिए 1958 में 'शिशु शिक्षा प्रबंध समिति' नाम से प्रदेश समिति का गठन किया गया। सरस्वती शिशु मंदिरों को सुशिक्षा एवं सद्संस्कारों के केन्द्रों के रूप में समाज में प्रतिष्ठा एवं लोकप्रियता प्राप्त होने लगी। अन्य प्रदेशों में भी जब विद्यालयों की संख्या बढ़ने लगी तो उन प्रदेशों में भी प्रदेश समितियों का गठन हुआ। पंजाब एवं चंडीगढ़ में सर्वहितकारी शिक्षा समिति, हरियाणा में हिन्दू शिक्षा समिति बनी। इसी प्रयत्न ने 1977 में अखिल भारतीय स्वरुप लिया और [[विद्या भारती]] संस्था का प्रादुर्भाव दिल्ली में हुआ। सभी प्रदेश समितियां विद्या भारती से सम्बद्ध हो गईं।

13/06/2020

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के निर्देशन में संचालित विद्यालयों को सरस्वती शिशु मंदिर एवं ""सरस्वती विद्या मंदिर"" कहते हैं। विद्या भारती सरस्वती शिशु मंदिर की शिक्षा प्रणाली को अभिनव रूप में मानते हुए इनका प्रसार करता है। इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रसिध्दि मिली है। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए सरस्वती शिशु मंदिर अच्छा विकल्प स्वीकार किया जा सकता है।और साथ ही साथ सरस्वती शिशु मन्दिरों में हर वर्ष कई प्रकार के खेल व कार्यक्रम भी होते है । जो की अन्तर्राष्ट्रिय स्तर तक भी जाते है । और हां सरस्वती शिशु मन्दिरों में केवल भैया बहनो की पढाई ही नही बल्कि अनुशाशन पर भी ध्यान दिया जाता है

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