05/09/2018
#शिक्षक_दिवस पर हमारे आपके जीवन के सभी शिक्षकों को असंख्य शुभकामनाएं।
अगर आप किसी को रोटी खिलाते है तो
उसका पेट एक दिन के लिए भरेगा।
लेकिन अगर आप किसी को रोटी कमाने
का तरीका सिखा देते है।
तो वो जीवन भर अपना पेट भर सकता है।
#अब्दुल_कलाम
शिक्षक-शिष्य परंपरा भारत की संस्कृति का एक अहम और पवित्र हिस्सा है। जीवन में माता-पिता का स्थान कभी कोई नहीं ले सकता, क्योंकि वे ही हमें इस रंगीन खूबसूरत दुनिया में लाते हैं। कहा जाता है कि जीवन के सबसे पहले शिक्षक हमारे माता-पिता होते हैं। भारत में प्राचीन समय से ही गुरु व शिक्षक परंपरा चली आ रही है, लेकिन जीने का असली सलीका हमें शिक्षक ही सिखाते हैं। सही मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। ये स्वयं को छोड़कर संसार के जीवन को प्रकाशित करते है
जो हमारे ज्ञान(संस्कार,अनुभव,विज्ञानं के मेल से उत्पन्न निष्कर्ष) को सही मार्ग पर प्रयुक्त करते है। गुरु के ही निर्देशानुसार व्यक्ति अपने कर्तव्यों के मार्ग पर बढ़ता है ,गुरु ही हमें हमारे कर्तव्यों से परिचित करवाता है ,और हमे हमारे शक्तियों से हमारा साक्षात्कार करवाता है। #सामाजिक_जीवन हो या #साहित्यिक_जीवन शिक्षक ये हमारे समाज के प्रतिनिधि नहीं, #प्रतिबिम्ब होते हैं.. चूँकि हम इनके #प्रतिबिम्ब को देखकर ही बिम्ब को देख, या समझ पाते हैं.. इस नाते इनका प्रतिबिम्ब केवल #दर्शन_ही_नहीं_हमारा_मार्गदर्शन भी करता है
शिक्षक हमारे जीवन में देश के दुश्मनो के प्रति क्रांति और जीवन में आई #भ्रांति यानी #अज्ञानता से दूर ले जाते है । #क्रांति का जनक ‘आक्रोश’ होता है तो #भ्रांति का जनक ‘अज्ञान’। क्रांति विचार की पक्षधर होती है तो भ्रांति #व्यक्ति की। क्रांति #परिष्कार की प्रक्रिया है तो भ्रांति #तिरस्कार का कारण। गुरुवो के ज्ञान ने ही मुझे बताया कि हमारा देश #मानचित्र से नहीं उसमें रहने वाले नागरिकों के " #मनचित्र" से पहचाना जाता है।हमारा देश हमें कितना #सम्मान देता है इससे महत्वपूर्ण ये है की हम अपने देश का कितना सम्मान करते हैं।
भारतीय संस्कृति में जननी ही व्यक्ति की पहली शिक्षक है। शब्द का अर्थ है अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला। सरल शब्दों में शिक्षक को ज्ञान का पुंज कहा जाता है। ये जरूरी नहीं जिससे हम #गुरुदीक्षा लें सिर्फ वो एक ही हमारा गुरु हो। गुरु वो ्यक्ति हो सकता है जो जीवन में आपको कुछ न कुछ #सिखाता है। वो एक बच्चे से लेकर किसी भी आयुवर्ग का व्यक्ति हो सकता है। इस तरह हमारे जीवन में मिलने वाला हर एक #अनुभव ,हमे हमारे शिक्षक से मिलता है ,हमारे जीवन में पथ दिखाने वाला वो हर व्यक्ति शिक्षक हैं।मां-बाप के बाद अगर जीवन में किसी का विशेष स्थान होना चाहिए तो वह हैं हमारे गुरु. जिस बच्चे को एक माता-पिता जन्म देता है, उसे जीवन की कठिन राह पर मजबूती से खड़े रहने की हिम्मत एक शिक्षक ही देता है,किसी भी तरह का ज्ञान देने वाला गुरु ही होते है, लेकिन #तंत्र_मंत्र_अध्यात्म का #ज्ञान देने वाले #सद्गुरु होते हैं । #शिक्षा_और_दीक्षा शिक्षा जहाँ अज्ञानता से दूर ले जाती है वही दीक्षा प्राप्त जीवन की आधारशिला है। इससे मनुष्य को दिव्यता तथा चैतन्यता प्राप्त होती है तथा वह अपने जीवन के सर्वोच्च शिखर पर पहुंच सकता है। दीक्षा आत्मसंस्कार कराती है। दीक्षा प्राप्ति से शिष्य #सर्वदोषों से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।
अपने जीवन के #अंदर_के_शिक्षक को आप भी जगाइए और अपने ज्ञान को लोगो तक पहुचाइए।
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