05/09/2023
निवर्तयत्यन्यजनं प्रमादतः स्वयं च निष्पापपथे प्रवर्तते।
गुणाति तत्त्वं हितमिच्छुरंगिनाम् शिवार्थिनां यः स गुरु निर्गद्यते।।
अर्थात :
जो दूसरों को प्रमाद करने से रोकते हैं, स्वयं निष्पाप रास्ते से चलते हैं,कल्याण की कामना रखनेवाला को तत्त्वबोध करते हैं, उन्हें गुरु कहते हैं।