16/07/2021
राजस्थान जाट समाज व समाज के लिए जाट अग्रणी महानुभावों द्वारा तेजा फाउंडेशन के निर्माण व संचालन ने बेहतरीन मिसाल पेश की है।अभी तक 300 के आसपास RAS में सलेक्टेड जाटो में से मैंने 37 उत्तीर्ण जाट जाटणी के बारे में जानकारी जुटाई है।कई की कहानी तो मतलब आपको जोश और ऊर्जा से भर देगी। वो कहावत है न समाज का एक कोहिनूर तमाम लाखो हीरो को कोहिनूर बनने का रास्ता खोल देता है। 3 कहानी यहां है।राजस्थान जाट समाज शिक्षण व उच्च रोजगार में मिसाल पेश कर रहा है। ओबीसी से इतर भी इनकी कामयाबी राजस्थान में अव्वल है । बेटियां सिर्फ बाप का कल नही आप का कुल भी होती है। बेटियां सांझी होती है। और जो ऐतिहासिक काम दुनिया में बेटे कर सकते है। बेटियां ऐसे ऐतिहासिक मुकामो को बौना साबित कर सकती है। सबसे बड़ी बात यह है कि एक बड़ी संख्या शादीशुदा जाट ओर जाटणी की है जिन्होंने RAS जैसे मुकाम को परिवार के सपोर्ट से हासिल किया । 1-हनुमानगढ़ का एक छोटा सा गांव है भैरूसरी। यहाँ की तीन बहनों का RAS 2018 के परिणामो में चयन हुआ है।पहले ही 2 बहने RAS है। ठेठ ग्रामीण क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली पांचों बहनों(रोमा,मंजू,रीतू,सुमन,अंशु)की कहानी अलग ही है। पांचों ने कक्षा 5 वी तक पढ़ाई स्कूल जाकर पूरी की मगर 6वीं से 12वीं ग्रेजुएशन नेट जेआरएफ व पीएचडी तक की पढ़ाई प्राइवेट कर यह मुकाम हासिल किया है।बहनों ने इस सफलता का श्रेय पापा सहदेव सहारण,मां लक्ष्मी देवी सहारण को दिया है।रोमा सहारण ने बताया कि गांव के नजदीक स्कूल नहीं था। पापा पर पांच बहने एवं एक भाई की पढ़ाई का जिम्मा था, इसलिए वो नियमित पढ़ाई नहीं करवा पाए। सभी बहनों ने घर पर रहकर आपस में ही नोट्स तैयार कर यह मुकाम हासिल किया है।आप इस संघर्ष,सहयोग,भरोसे के एहसास को महसूस कीजिए।वाकई बेमिसाल परिवार इसी को कहते है। 2- पहले पति, फिर पिता की मौत के बाद बाड़मेर की लक्ष्मी चौधरीं मूंड ने RAS परीक्षा में जिद से रची सफलता की इबारत RAS के मंगलवार को आए परिणामों के बाद बाड़मेर की लक्ष्मी ने ये साबित कर दिया कि जज्बा और जुनून हो तो कोई भी मुश्किल लक्ष्य प्राप्त करने से नहीं रोक सकती है। 3- बाड़मेर जिले के बायतु क्षेत्र के कानोड़ गांव निवासी देराजराम डूगेर के पिता भी किसान हैं। गरीब परिवार के देराजराम स्कूल में पैदल पढने जाते। बचपन में भेड़-बकरियां चराते। परिवार चलाने में मदद करने के लिए हम्माली और हॉकर का काम तक किया लेकिन हौसले के धनी देराजराम सतत मेहनत करते रहे गाँव के पास धोरों के बीच कच्चे मकान में रहने वाले देराजराम बीएसटीसी कर 2011 में पटवारी बने थे। अब RAS में परचम लहराया। #वास्तविक_जट्ट