17/06/2018
बारिश भाग १
दोस्तों, यदि आप Navodayan है तो बहुत बढिया पर यदि नहीं, तो आपको ये चार दोस्तों की कहानी जरूर पढ़नी चाहिए। दोस्ती से शुरू कर सगे भाइयों से भी ज्यादा बनने की ये कहानी आपको जरूर पसंद आएगी। ये कहानी उन बच्चों की है जिनके माता पिता उनकी उच्च स्तरीय शिक्षा के लिए उन्हें बचपन मे ही त्याग चुके थे।
सरकारी CBSE बोर्डिंग स्कूल Navodaya... एक स्वर्ग था.. है.. और रहेगा।
Dedicated to all त्यागी पैरेंट्स and real brothers from another mother's.
जुलाई का महीना चल रहा है। स्कूल एक जुलाई से ही खुल चुके थे। अधिकांश बच्चे स्कूल पहुँच चुके थे। हर क्लास के कुछ महारथी एक हफ्ते ज्यादा गर्मियों की छुट्टियां मना आये थे सबके पास मेडिकल सर्टिफिकेट था और लगभग सभी मे वायरल फीवर कारण बताया गया था। कुछ बच्चों का कुछ दिनो बाद स्कूल आने का एक और कारण हुआ करता था दादा, दादी, नाना, नानी मे से किसी एक की मृत्यु हो जाना भले ही ये हादसा अप्रेल या मई मे हुआ हो या ना भी हुआ हो या कई साल पहले हो चुका हो पर स्कूल मे कोई डेथ सर्टिफिकेट थोड़ी मांगने वाला था। पैरेंट्स भी एप्लीकेशन लिखने मे माहिर हो चुके थे उन्हें अपने बच्चों को निर्धारित छुट्टियों के समय से ज्यादा घर पे रोकने मे बहुत आनंद आता था । 15 जुलाई तक सारे क्लास के बच्चे आ चुके थे।
दोपहर की थकी हुई remedial क्लास मंद मंद चल रही है। क्लास कि सारी जगह खचाखच भरी हुई है, कुछ देर पहले ही सोशल साईंस वाली मैडम ने हाजरी ली है। सभी लोग आपनी आपनी कॉपी में आंख गड़ा के पढ़ाई करने का झूठा नाटक कर तो रहे हैं पर उनका हाव भाव बयान कर रहा है कि वो पढ़ नही रहे हैं। मैडम भी कुर्सी पर बैठ कर ऊँघ रही है । दोपहर के खाने के बाद पढ़ाई करना या करवाना बहुत ही हिम्मत का काम होता है और बेशक सभी टीचर्स को इसका एहसास है। तभी मौसम के बदलने का आभास हुआ, गर्मी के उस मौसम के विपरीत हवाएं तेज चलने लगी व बादल गड़गड़ाने लगे। आखिरी बेंच पे बैठे रवि ने धीरे से प्रखर को कहा "भाई आज तो मजा आ जाएगा मस्त छत पे चलके नहाऐंगे" । रवि दुबला और थोड़ा लंबा भी था, रँग गोरा था उसके नरम मुलायम बाल आँखों के सामने बार बार आ जाते थे । प्रखर डील डौल से एकदम फिट था, प्रखर फ़ुटबॉल का बहुत ही अच्छा खिलाड़ी था वो सड़क पे पड़ी गिट्टी भी पैरों से फुटबॉल की भांति उछाल देता था। प्रखर ने रवि की ओर देखा और नहाने के लिए हामी भर दी। राजू भी आपने मोटे चहरे को हिलाता हुआ बोला "हां भाई सही मे नहाने में मज़ा आ जाएगा" । राजू सामान्य लोगों से काफी मोटा था साथ ही ठिगना भी उससे सभी लोग 'मोटा' ही बुलाया करते थे। इन तीनों की बात विमल को पसंद नही आ रही थी विमल बिल्कुल विमल गुटखे की तरह ही था उसे भी लगता था कि भगवान् ने उसे सबसे आखिरी में बनाया होगा जब भगवान के पास कुछ ही सामान बचा हुआ होगा। विमल को नहाना कताई पसंद नहीं था आखिरी ठंड के दिनों में उसने 21 दिन लगातार नहीं नहाने का रिकॉर्ड बनाया था उसका नहीं नहाने का उपवास एक जूनियर लड़की की वजह से टूटा था। जूनियर लड़की ने असेंबली मे खड़े होते समय विमल के गले पर मैल की परत को देखकर बहुत बुरा मुँह बनाया था जिससे विमल का आत्मसम्मान हिल गया था। विमल ने बहाना बनाते हुए कहा "भाई आज ही नहाया हूँ, अंडरवियर गीली होगी ओर जो अभी पहनी हे वो भी गीली हो जाएगी तो कल क्या पहनेंगे" । तीनों साथी विमल के बहाने पे हँस दिये। तभी सोशल साईंस वाली मैडम की आवाज आई "आऊं क्या तुम लोग के लिये।" इतना बोलते ही स्पोर्ट्स वाले सर और मैडम का क्लास मे आना हुआ। उन्होंने कहा मैडम बच्चों कि छुट्टी कर देते हे मौसम बिगड रहा हे। यह सुनते ही सोशल साईंस वाली मैडम ज्यादा खुश नजर आई। अब हवा बहुत तेज हो चली थी। क्लास मे लगा हुआ DNA का पोस्टर फड़फड़ा रहा था सारे बच्चे उठे ओर लाइन बनाने लगे। रवि राजू की ओर देखते हुए बोला ''भाई आज जो सोच वही हो गया अब तो नहाना है चलके।"
जैसे ही मैडम क्लास से निकली सभी लोग एक दूसरे से बतियाने लगे। विमल ने कहा" भाई कहाँ लाइन के चक्कर मे पडे हो चलो भागते हे नही तो भीग जाएँगे"। चारों दोस्तों ने एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा दिया। राजू ऊपर बादलों के एक गुच्छे की तरफ इशारा करते हुए बोला" भाई ये बादल हॉस्टल कि तरफ भागे जा रहे हैं हमे इनसे पहले हॉस्टल पहुंचना होगा।" अब चारों लोग हॉस्टल की तरफ भाग रहे थे कॉपी किताबों को टी शर्ट के अंदर छुपा लिया गया था। हॉस्टल पहुचते तक टी शर्ट कवच का काम करने वाली थी। प्रखर दौड़ते दौड़ते बीच बीच मे सड़क पे पडी गिट्टियों को पैरों से उछाल रहा था। विमल को थोड़ा पीछे पाके रवि ने प्रखर और मोटे से कहा "भाई विमल की पेटी मे बहुत सारी लक्स साबुन रखी हुई हे आज नहाने का जुगाड़ वहीं से होगा" तीनों ने फिर शातिर भरी मुस्कान से एक दूसरे को देखा "हम्म..."।
हॉस्टल पहुचते ही चारों अपने अपने हाऊस में भागते हुए पहुचे। अभी तक बारिश अपना प्रचंड रूप नही ले पाई थी। जल्दी मिलो विमल के बेड पे राजू ये बोलके नीलगिरी हाउस की तरफ भाग गया। प्रखर और रवि अरावली हाउस मे रहते थे। विमल का हॉउस उदयगिरि था। सभी को उदयगिरि पहुंचना था। तीनों ने फुर्ती दिखाई और टी शर्ट हाफ पैंट बनियान जूते सब उतार के बाहर आ गये। रवि ओर राजू VIP की फ्रेंची पहने हुए थे प्रखर का अंडरवियर हाफ पैंट जैसा था। तीनो के अंडरवियर काफी गहरे रंग के थे अच्छे से न धोए जाने की वजह से उनका रंग ओर गहरा हो चुका था। तीनों उदयगिरि हाउस मे निर्धारित स्थान पे पहुँच चुके थे। राजू ने विमल को चिल्लाते हुए कहा "साले पलीत कभी तो नहा लिया कर।" अभी तक विमल कपड़े नई उतारा था। रवि ने विमल को पीछे से पकडा और राजू और प्रखर ने विमल के कपडे निकाल दिये। बेचारे की अंडरवियर की इलास्टिक ढीली पड़ चुकी थी विमल अपनी इज्जत कमर में बंधे काले धागे से इलास्टिक को लपेटे बचाया करता था। मौका देखते ही रवि ने विमल की पेटी से लक्स साबुन बाहर निकाल ली। ये विमल को कतई पसंद नही आ रहा था पर वो कुछ कर भी नहीं सकता था।
सारे हॉस्टल के लड़के अपनी अपनी गहरे रंगों की अंडरवियर मे नजर आ रहे थे। प्रखर रवि राजू और विमल छत पे पहुँच चुके थे।
जारी है ..........
भाग - २... Coming soon
Writen By :- Akash Singh Chouhan
Editor :- Mohit Thakkar and Yamak Malviya
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