01/05/2026
माँ का ममत्व – जीवन से भी बड़ा प्रेम
नर्मदा के शांत जल में हुआ वह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि मानव भावनाओं की गहराई को झकझोर देने वाली घटना बन गया। उस भयावह पल में, जब हर कोई अपनी जान बचाने की जद्दोजहद में था, एक माँ ने अपनी आखिरी सांसों तक अपने बच्चे को सीने से लगाए रखा। यह दृश्य केवल एक तस्वीर नहीं, बल्कि ममत्व की सबसे गहरी परिभाषा है।
माँ… यह शब्द अपने आप में ही त्याग, प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक है। जब जीवन और मृत्यु के बीच की दूरी बस कुछ सांसों की रह जाती है, तब इंसान सबसे पहले खुद को बचाने की कोशिश करता है। लेकिन एक माँ ऐसी होती है, जो उस क्षण में भी खुद से पहले अपने बच्चे को चुनती है। वह जानती है कि लहरें तेज हैं, हालात बेकाबू हैं, फिर भी उसका दिल यही कहता है – “मेरे बच्चे को कुछ न हो।”
इस तस्वीर में वह माँ सिर्फ एक इंसान नहीं, बल्कि ममता की जीवित मूर्ति बन जाती है। उसने अपने बच्चे को लाइफ जैकेट पहनाकर सीने से इस तरह चिपका लिया, मानो पूरी दुनिया से उसे बचा लेना चाहती हो। शायद उसे यह अहसास था कि वह खुद बच पाए या नहीं, लेकिन उसकी बाहों में उसका बच्चा सुरक्षित रहे – यही उसकी अंतिम इच्छा रही होगी।
माँ का प्रेम कभी शर्तों में नहीं बंधता। वह न तो समय देखता है, न परिस्थिति। वह हर हाल में अपने बच्चे के लिए ढाल बन जाता है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह सच्चाई सामने ला दी कि माँ का दिल सबसे मजबूत होता है – इतना मजबूत कि वह अपने डर, अपनी पीड़ा और अपने अस्तित्व को भी भुला देती है।
यह तस्वीर हमें रुलाती है, भीतर तक तोड़ देती है, लेकिन साथ ही यह भी सिखाती है कि इस दुनिया में अगर सबसे पवित्र और निस्वार्थ प्रेम है, तो वह माँ का ही है।
नर्मदा की लहरें भले ही उस माँ को अपने साथ ले गई हों, लेकिन उसका ममत्व, उसका त्याग और उसका प्रेम हमेशा के लिए अमर हो गया।
सच ही कहा गया है –
“माँ सिर्फ जन्म नहीं देती, वह हर पल अपने बच्चे को जीवन देती है।”
13/02/2025
*साधना की शक्ति*
वर्षों पुरानी बात है। *एक राज्य में महान योद्धा रहता था। कभी किसी से नहीं हारा था। बूढ़ा हो चला था, लेकिन तब भी किसी को भी हराने का माद्दा रखता था।* चारों दिशाओं में उसकी ख्याति थी। उससे देश-विदेश के कई युवा युद्ध कौशल का प्रशिक्षण लेने आते थे।
*एक दिन एक कुख्यात युवा लड़ाका उसके गांव आया। वह उस महान योद्धा को हराने का संकल्प लेकर आया था,* ताकि ऐसा करने वाला पहला व्यक्ति बन सके। बेमिसाल ताकतवर होने के साथ ही उसकी खूबी दुश्मन की कमजोरी पहचानने और उसका फायदा उठाने में महारत थी। *वह दुश्मन के पहले वार का इंतजार करता। इससे वह उसकी कमजोरी का पता लगाता। फिर पूरी निर्ममता, शेर की ताकत और बिजली की गति से उस पर पलटवार करता।* यानी, पहला वार तो उसका दुश्मन करता लेकिन आखिरी वार इस युवा लड़ाके का ही होता था।
अपने शुभचिंतकों और शिष्यों की चिंता और सलाह को नजरअंदाज करते हुए बूढ़े योद्धा ने युवा लड़ाके की चुनौती कबूल की। *जब दोनों आमने-सामने आए तो युवा लड़ाके ने महान योद्धा को अपमानित करना शुरू किया। उसने बूढ़े योद्धा के ऊपर रेत-मिट्टी फेंकी। चेहरे पर थूका भी।* देर तक बूढ़े योद्धा को गालियां देता रहा। जितने तरीके से संभव था, उतने तरीके से उसे अपमानित किया। *लेकिन बूढ़ा योद्धा शांतचित्त, एकाग्र और अडिग रहा और उसके प्रत्येक क्रियाकलाप को पैनी नज़रों से देखता रहा। युवा लड़ाका थकने लगा।* अंतत: अपनी हार सामने देखकर वह शर्मिंदगी के मारे भाग खड़ा हुआ।
बूढ़े योद्धा के कुछ शिष्य इस बात से नाराज और निराश हुए कि उनके गुरु ने गुस्ताख युवा लड़ाके से युद्ध नहीं किया। *उसे सबक नहीं सिखाया। इन शिष्यों ने गुरु को घेर लिया और सवाल किया, 'आप इतना अपमान कैसे बर्दाश्त कर सकते हैं?* आपने उसे भाग जाने का मौका कैसे दे दिया?’
*महान योद्धा ने जवाब दिया, ‘यदि कोई व्यक्ति आपके लिए कुछ उपहार लाए, लेकिन आप लेने से इनकार कर दें। तब यह उपहार किसके पास रह गया?’ देने वाले के पास ही न।*
*इसी प्रकार साधना में भी कई प्रकार की बाधाएं आएँगी उनसे लड़ने में अपनी शक्ति न गवाएं बल्कि कुछ समय मौन रहें साधना में निरन्तरता रखें सहज होने की कोशिश रखें। थोड़े ही समय बाद आप उन परिस्तिथियों से आगे निकल जायेंगे। और हमेशा विजयी ही रहेंगे। *साधना से जो बड़ी बात अंदर पैदा होती है वो है असीम शांति जिसके सम्पर्क में आते ही बड़ी से बड़ी आसुरी शक्ति भी अपनी कोशिशें कर के थक जाती हैं और भाग जाती हैं या साधक के शरणागत हो जाती है बस जरूरत है धैर्य की और असीम शांति की।* अगर परिस्तिथिवश कभी लड़ना भी पड़े तो अंदर शांत रहते हुए पूरी परिस्तिथियों को देखते हुए लड़ो बिना क्रोध किये कोई भी शक्ति होगी आपके ऊपर प्रभाव न डाल सकेगी।*
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*जो प्राप्त है-पर्याप्त है*
*जिसका मन मस्त है*
*उसके पास समस्त है!!*
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04/12/2023
किसी की अंतिम इच्छा को पूरा करना भी पुण्य का काम होता हैं।
छिंदवाड़ा जिला
20/09/2023
*भाजपा युवा मोर्चा का रक्त दान शिविर हुआ संपन्न*
बिछुआ -बुधवार को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे सेवा पखवाड़े के अंतर्गत भाजपा युवा मोर्चा द्वारा विधानसभा स्तरीय रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
जिसमे भारतीय जनता युवा मोर्चा के तत्वाधान में चाँद के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया
जिसमे 43 यूनिट रक्तदान किया गया।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री श्री चौधरी चंद्रभान सिंह,नगर पालिका चांद के अध्यक्ष श्री ठाकुर दान सिंह पटेल,पूर्व मंडल अध्यक्ष डॉ विजेंद्र सिंह ठाकुर,शिवराम चौरसिया, रामसिंह पटेल चाँद मंडल अध्यक्ष डॉ कामेन्द्र ठाकुर,पूर्व महामंत्री अरुण कुमार जैन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में युवा मोर्चा चांद मंडल अध्यक्ष आदित्य ठाकुर,युवा मोर्चा चौरई ग्रामीण अध्यक्ष प्रदीप रघुवंशी ,युवा मोर्चा बिछुआ मंडल अध्यक्ष घनश्याम,महामंत्री प्रमोद श्रीवास,उपाध्यक्ष मुकुल ठाकुर,मोनू पवार,कुंडा मंडल अध्यक्ष प्रीतेश दुबे,सौरभ मालवीय कार्यक्रम में महामंत्री बनबारी माहोरे,अमित चौधरी, मंडल के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रानू पटेल,नगर परिषद चांद के सभापति राजकुमार वर्मा शेर चौरसिया वरिष्ठ नौखे श्रीवास एवं अन्य ज्येष्ठ एवं श्रेष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित रहे वहीं स्वास्थ्य विभाग का भी सहयोग प्राप्त हुआ।