Bhaurajpur

Bhaurajpur Bhaurajpur is a Village belongs to Chhibramau Mandal of Kannauj District in Uttar Pradesh State . It belongs to Kanpur Division. Nearby River :


Eshan River .

Bhaurajpur :

Bhaurajpur is a Village in Chhibramau Mandal in Kannauj District in Uttar Pradesh State . Bhaurajpur is 8 km far from its Mandal Main Town Chhibramau . Bhaurajpur is located 54 km distance from its District Main City Kannauj . It is located 176 km distance from its State Main City Lucknow . Nearby Villages :

Alhanapur ( 2 KM ) , Usmanpur ( 2 KM ) , Kairda ( 3 KM ) , Kharauli ( 3 KM

) , Asaltabad ( 3 KM )

Sub Villages in Bhaurajpur :

Saraiya,Barbari,Dalla,Banjaran Maraiya. Nearby Tehsil :

Chhibramau Tehsil towards North

Talgram Tehsil towards East

Kishni Tehsil towards west

Bewar Tehsil towards west . Nearby Cities :

Sikandarpur,Fatehgarh,Bharthana,Bishungarh

Nearby Districts :

Kannauj,Farrukhabad,Mainpuri

Nearby Roadways Bus Stand :

Chhibramau

Nearby Railway Station :

Gursahaiganj(34 km)

Nearby Thana :

Bishungarh

Nearby Post Office :

Bhaurajpur(self). Lanuages :

Hindi(Local language)

Education :

Primary School and Junior School

Ancient Temples :

Kali Devi Mandir , Bankhandeshwar Nath Mandir , Some other personal temple .

माँ दुर्गा के नवें स्वरूप के रूप में सिद्धिदात्री की पूजा व उपासना की जाती है। माता सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों को पूर्ण ...
17/04/2024

माँ दुर्गा के नवें स्वरूप के रूप में सिद्धिदात्री की पूजा व उपासना की जाती है। माता सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों को पूर्ण करने वाली है, कहा जाता है कि भगवान शिव ने भी इनकी उपसना कर परम सिद्धि को प्राप्त कीं। कमल आसन पर विराजमान माता सिद्धिदात्री के चारो भुजाओं में कमल के फुल, शंख, चक्र और गदा शोभित हैं। इस दिन मां के व्रत पूरे करके कन्या पूजन किया जाता है और कन्या खिलाईं जाती हैं। नवमी तिथि को भी हवन - कीर्तन का भी विधान है। नवमी तिथि को कन्या को भोजन कराया जाता है एवं वस्त्राभूषण दिये जाते हैं। गृहस्थ जीवन के सभी सुख एवं समृद्धि, विकास एवं स्वस्थ रहने के लिए सिद्धिदात्री की अराधना करनी चाहिए। लक्ष्मी स्वरूपा माता सुख-समृद्धि देने वाली तथा विघ्न-वाधा को दुर करने वाली हैं।

||जय माता दी||

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। मां महागौरी का...
16/04/2024

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। मां महागौरी का रंग अत्यंत गौरा है इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। मान्यता के अनुसार अपनी कठिन तपस्या से मां ने गौर वर्ण प्राप्त किया था। तभी से इन्हें उज्जवला स्वरूपा महागौरी, धन ऐश्वर्य प्रदायिनी, चैतन्यमयी त्रैलोक्य पूज्य मंगला, शारीरिक मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली माता महागौरी का नाम दिया गया।

।जय माता दी।

मां दुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सातवें ...
15/04/2024

मां दुर्गा का सप्तम रूप श्री कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं, इसलिए कालरात्रि कहलाती हैं। नवरात्रि के सातवें दिन इनकी पूजा और अर्चना की जाती है। इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए।मां कालरात्रि के पूरे शरीर का रंग एक अंधकार की तरह है, इसलिये शरीर काला रहता है। इनके सिर के बाल हमेशा खुले रहते हैं।

।जय माता दी।

नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम औ...
14/04/2024

नवरात्रि में छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। उसके रोग, शोक, संताप और भय नष्ट हो जाते हैं। जन्मों के समस्त पाप भी नष्ट हो जाते हैं।
इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन भी सिंह है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है।

।जय माता दी।

मां दुर्गा का पंचम रूप स्कंदमाता के रूप में जाना जाता है। भगवान स्कंद कुमार [कार्तिकेय] की माता होने के कारण दुर्गा जी क...
13/04/2024

मां दुर्गा का पंचम रूप स्कंदमाता के रूप में जाना जाता है। भगवान स्कंद कुमार [कार्तिकेय] की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंद माता नाम प्राप्त हुआ है। भगवान स्कंद जी बालरूप में माता की गोद में बैठे होते हैं इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होता है। स्कंद मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजाएं हैं, ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हैं और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल पकडा हुआ है। मां का वर्ण पूर्णत: शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इसी से इन्हें पद्मासना की देवी और विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है।माँ का वाहन भी सिंह है।

।जय माता दी।

आज नवरात्र का चौथा द‍िन है। यह द‍िन मां श्रीदुर्गा के चतुर्थ रूप देवी कूष्मांडा को समर्पित है। अपनी मंद मुस्‍कुराहट और अ...
12/04/2024

आज नवरात्र का चौथा द‍िन है। यह द‍िन मां श्रीदुर्गा के चतुर्थ रूप देवी कूष्मांडा को समर्पित है। अपनी मंद मुस्‍कुराहट और अपने उदर से ब्रह्मांड को उत्पन्न करने के कारंण इन्हें कूष्‍मांडा देवी के नाम से जाना जाता है। संस्कृत भाषा में कूष्मांड कूम्हडे को कहा जाता है, कूम्हडे की बलि इन्हें प्रिय है, इस कारण से भी इन्हें कूष्‍मांडा के नाम से जाना जाता है।
देवी कूष्‍मांडा के इस दिन का रंग हरा है। मां के सात हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्‍प, अमृतपूर्ण कलश, चक्र और गदा है। वहीं आठवें हाथ में जपमाला है, जिसे सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली माना गया है। मां का वाहन सिंह है।

।जय माता दी।

आज नवरात्रि का तीसरा दिन है। आज के दिन दुर्गा मां के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन मां की उपासना...
11/04/2024

आज नवरात्रि का तीसरा दिन है। आज के दिन दुर्गा मां के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। इस दिन मां की उपासना की जाती है। मान्यता है कि अगर मां चंद्रघंटा की पूजा की जाए तो उनकी कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं। साथ ही दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है। दुर्गा मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र मौजूद है। यही कारण है कि मां के इस स्वरूप को चंद्रघंटा कहा जात है। मां के 10 हाथ हैं। मां का वाहन सिंह है।

।जय माता दी।

मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्त...
10/04/2024

मां दुर्गा की नवशक्ति का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है। यहां ब्रह्म का अर्थ तपस्या से है। मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों और सिद्धों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है।

।जय माता दी।

मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकर...
09/04/2024

मां दुर्गा को सर्वप्रथम शैलपुत्री के रूप में पूजा जाता है। हिमालय के वहां पुत्री के रूप में जन्म लेने के कारण उनका नामकरण हुआ शैलपुत्री। इनका वाहन वृषभ है, इसलिए यह देवी वृषारूढ़ा के नाम से भी जानी जाती हैं। इस देवी ने दाएं हाथ में त्रिशूल धारण कर रखा है और बाएं हाथ में कमल सुशोभित है। यही देवी प्रथम दुर्गा हैं। ये ही सती के नाम से भी जानी जाती हैं।
जय माता दी।

नवमी तिथि मधुमास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।मध्य दिवस अति सीत न घामा, पावन काल लोक बिश्रामा.।भगवान श्रीराम के प्...
10/04/2022

नवमी तिथि मधुमास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।
मध्य दिवस अति सीत न घामा, पावन काल लोक बिश्रामा.।

भगवान श्रीराम के प्राकट्य दिवस की हार्दिक शुभकामनाये.

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। मां महागौरी का...
09/04/2022

नवरात्रि के आठवें दिन मां महागौरी की पूजा की जाती है। आदिशक्ति श्री दुर्गा का अष्टम रूप श्री महागौरी हैं। मां महागौरी का रंग अत्यंत गौरा है इसलिए इन्हें महागौरी के नाम से जाना जाता है। मान्यता के अनुसार अपनी कठिन तपस्या से मां ने गौर वर्ण प्राप्त किया था। तभी से इन्हें उज्जवला स्वरूपा महागौरी, धन ऐश्वर्य प्रदायिनी, चैतन्यमयी त्रैलोक्य पूज्य मंगला, शारीरिक मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली माता महागौरी का नाम दिया गया।
।जय माता दी।

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