17/04/2024
माँ दुर्गा के नवें स्वरूप के रूप में सिद्धिदात्री की पूजा व उपासना की जाती है। माता सिद्धिदात्री सभी सिद्धियों को पूर्ण करने वाली है, कहा जाता है कि भगवान शिव ने भी इनकी उपसना कर परम सिद्धि को प्राप्त कीं। कमल आसन पर विराजमान माता सिद्धिदात्री के चारो भुजाओं में कमल के फुल, शंख, चक्र और गदा शोभित हैं। इस दिन मां के व्रत पूरे करके कन्या पूजन किया जाता है और कन्या खिलाईं जाती हैं। नवमी तिथि को भी हवन - कीर्तन का भी विधान है। नवमी तिथि को कन्या को भोजन कराया जाता है एवं वस्त्राभूषण दिये जाते हैं। गृहस्थ जीवन के सभी सुख एवं समृद्धि, विकास एवं स्वस्थ रहने के लिए सिद्धिदात्री की अराधना करनी चाहिए। लक्ष्मी स्वरूपा माता सुख-समृद्धि देने वाली तथा विघ्न-वाधा को दुर करने वाली हैं।
||जय माता दी||